Social Media, Smart Phone बच्चों के लिए खतरा ! भारत के इस राज्य में लगेगा बैन

सोशल मीडिया से बच्चों का मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित, पूरी दुनिया में चिंता, आस्ट्रेलिया, फिनलैंड में बच्चों के लिए पूरी तरह बैन, फ्रांस में भी जल्द बनेगा कानून, चीन और मलेशिया में भी सख्ती, फ्रांस के राष्ट्रपति ने पूछा- क्या भारत भी इस दिशा में उठाएगा कदम ?

बच्चों में सोशल मीडिया की लत के चलते उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर पूरी दुनिया में चिंता है और अब ये समस्या खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है. पिछले महीने उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh)के गाजियाबाद से आई एक खबर ने पूरे देश को चौंका दिया था. मोबाइल फोन की लत का शिकार 3 सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर सामूहिक खुदकुशी कर ली थी. तीनों बालिकाओं की उम्र 12, 14 और 16 वर्ष थी. गाजियाबाद में तीनों सगी बहनें मोबाइल फोन की लत के चलते इस कदर डिजिटल दुनिया में डूब चुकी थी कि उन्होंने वास्तविक दुनिया से ही नाता तोड़ लिया था. इस घटना ने देशभर में ये बहस शुरू हुई कि बच्चों को स्मार्ट फोन देना और सोशल मीडिया उनके लिए कितना खतरनाक और कितना सुरक्षित है ?

सोशल मीडिया पर बच्चों को लेकर देश-दुनिया में चल रही बहस के बीच कर्नाटक (Karnatak) सरकार ने बड़ी घोषणा की। कर्नाटक सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने की घोषणा की है. कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने अपना 17वां बजट पेश किया है. इस मौके पर सिद्धारमैया ने कहा मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है. इसे रोकने के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन किया जाएगा. बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर चर्चाओं के बीच कर्नाटक सरकार ने ये घोषणा कर देश में भी इस मुद्दे पर बहस को और तेज कर दिया है.

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सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी. चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी और अब बच्चों के लिए सोशल मीडिया ये घोषणा भी कर दी है.

इससे पहले गोवा (GOA) के आईटी मंत्री रोहन खुंटे भी बयान दिया था कि राज्य सरकार 16 वर्ष से छोटे बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा था इससे बच्चों और किशोरों मोबाइल फोन की लत लग रही है, बच्चों का मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है और साइबर क्राइम बढ़ रहा है.

आस्ट्रेलिया, फिनलैंड पहले ही लगा चुके बैन
सोशल मीडिया को लेकर कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और गोवा सरकार की चिंता कई मायनों में वाजिब है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्लेषक ये मुद्दा उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया (Australia) और फिनलैंड ( Finland) जैसे देशों में पहले ही सोशल मीडिया को बच्चों के लिए बैन कर दिया गया है. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) भी इसी तरह की कार्रवाई पर विचार कर रहा है. फ्रांस और स्पेन समेत यूरोप के कुछ और देशों में भी स्कूलों ने स्मार्ट फोन के उपयोग पर को लेकर सख्त नियम बनाए हैं, ताकि बच्चों का ध्यान ना भटके. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है, जो सितंबर 2026 तक लागू हो सकता है. इस कदम का उद्देश्य बच्चों को मानसिक तनाव, साइबर बुलिंग और असुरक्षित सामग्री से बचाना है.

AI Impact Summit में भी मैक्रों ने उठाया मुद्दा
फ्रांस (France) के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने फरवरी 2026 में भारत दौरे के दौरान AI इम्पैक्ट समिट में भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगाने का प्रस्ताव रखा. मैक्रों ने पूछा क्या भारत इसके लिए तैयार है ? फ्रांस जून 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक बिल को पहले ही मंजूरी दे चुका है. मैक्रों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई नियम-कानून नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से सभ्यता की सुरक्षा है. उन्होंने पूछा, “क्या भारत बच्चों और टीनएजर्स की सुरक्षा के लिए इसी दिशा में कदम उठाएगा ?

स्मार्ट फोन के बच्चों में बढ़ते दुष्प्रभाव से पूरी दुनिया चिंतित है और कई अपने-अपने तरीके से इसे नियंत्रित करने की कवायद कर रहे हैं. चीन में माइनर मोड के तहत 18 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए स्क्रीन टाइम और कंटेंट पर कड़ा नियंत्रण है. मलेशिया ने भी इस साल के आखिर तक 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की है. डेनमार्क में भी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की योजना है. नॉर्वे, स्पेन, जर्मनी और ग्रीस भी 13-15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं.