1900 करोड़ के फंड पर संकट! BJP की चुप्पी क्यों? टीकाराम जूली ने उठाया सवाल

टीकाराम जूली ने सरकार पर दागे सवाल, क्या BJP सरकार चुनाव से डरकर ग्रामीण विकास को लगा रही दांव पर ?, केन्द्र फंड नहीं मिला तो सरकार कैसे करेगी भरपाई ?

Rajasthan Politics । Jaipur। पंचायत चुनाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tika Ram Jully ) ने BJP सरकार पर जोरदार हमला किया है. टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा को न संविधान की परवाह है, ना कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करती है और ना प्रदेश में ग्रामीण विकास को लेकर कोई चिंता है.टीकाराम जूली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिये हैं. समय सीमा नजदीक आ रही है, एक महीने से भी कम समय शेष रह गया है. इसके बावजूद सरकार की ओर से पंचायत चुनाव को लेकर कोई ठोस तैयारी या सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है.

चुनाव में देरी हुई तो अटक जाएंगे 1900 करोड़
टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार की इस लापरवाही का नतीजा प्रदेश की ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने की स्थिति में केंद्र के वित्त आयोग से मिलने वाले लगभग 1900 करोड़ रुपये के फंड के अटकने का खतरा पैदा हो गया है.

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राजस्थान को यह 1900 करोड़ रुपये का फंड नहीं मिला तो स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, मनरेगा सहित कई महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित होंगी. जिसका खामियाजा प्रदेश की आम जनता को भुगतना पड़ेगा. यह प्रदेश की पहले से ही डावांडोल हो रही वित्तीय स्थिति के लिए कोढ़ में खाज जैसी स्थिति होगी. टीकाराम जूली ने सीएम और वित्त मंत्री से पूछा है कि क्या BJP सरकार चुनाव से डरकर ग्रामीण विकास को दांव पर लगा रही है ? यदि केंद्र से मिलने वाला यह फंड नहीं मिला तो राज्य सरकार इसकी भरपाई कैसे करेगी? पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे प्रदेश को क्या और अधिक कर्ज में झोंकने की तैयारी की जा रही है ?

टीकाराम जूली ने कहा कि यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि जिस राजस्थान की धरती से पंचायतीराज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी, आज उसी राज्य में इस लोकतांत्रिक संस्थान का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि 2 अक्टूबर 1959 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नागौर से पंचायतीराज की स्थापना की थी. नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की है कि तुरंत पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करें और ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावित होने से बचाए.