वीरेन्द्र सिंह मस्त की जीवनी (Virendra Singh Mast Biography in Hindi)
Virendra Singh Mast Latest News - वीरेंद्र सिंह मस्त उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, जिनका कार्यक्षेत्र मुख्यतः राज्य का पूर्वांचल का इलाका रहा है. वे पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले मस्त जमीनी राजनीति से पहचाने जाते रहे है. वे भाजपा के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. करीब चार दशक से अधिक लंबे राजनीतिक सफर में वे चार बार लोकसभा के सदस्य रहे और मिर्जापुर से लेकर भदोही तथा बलिया तक का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 1991 और 1998 में उन्होंने मिर्जापुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की, जबकि वर्ष 2014 में भदोही और फिर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बलिया से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इस लेख में हम आपको वीरेन्द्र सिंह मस्त के जीवन परिचय (Virendra Singh Mast Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
वीरेन्द्र सिंह मस्त जन्म और परिवार (Virendra Singh Mast Birth & Family)
वीरेंद्र सिंह मस्त (Virendra Singh Mast) का जन्म 21 अक्टूबर 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के डोकाटी गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम रामनाथ सिंह (Ramnath Singh) और माता का नाम द्रौपदी सिंह (Draupadi Singh) था.
उनका विवाह 19 जून 1981 को रेनू सिंह (Smt. Renu Singh) से हुआ था. उन्हें तीन संतान हैं. उन्हें एक बेटा और दो बेटियां हैं.
वे धर्म से हिन्दू हैं, और जाति से राजपूत हैं.
वीरेन्द्र सिंह मस्त की शिक्षा (Virendra Singh Mast Education)
वीरेंद्र सिंह मस्त ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज से कला में स्नातक किया.
वीरेन्द्र सिंह मस्त राजनीतिक करियर (Virendra Singh Mast Political Career)
वीरेंद्र सिंह मस्त ने भारतीय जनता पार्टी के संगठन से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. वर्ष 1988 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बने और 1989 से 1992 तक भाजपा के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद वर्ष 1991 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और मिर्जापुर लोकसभा सीट से 10वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. इस जीत के साथ वे पहली बार संसद पहुंचे. वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर सीट पर उन्हें समाजवादी पार्टी की फूलन देवी से हार मिली. हालांकि, वर्ष 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की और दूसरी बार लोकसभा पहुंचे. इसके बाद वर्ष 2000 से 2004 तक वे स्वदेशी जागरण मंच में राज्य समन्वयक की भूमिका में रहे.
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने वीरेंद्र सिंह मस्त को भदोही लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. इस चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राकेशधर त्रिपाठी को 1,58,039 वोटों के अंतर से हराकर तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीता. मस्त को 4,03,695 वोट मिले, जबकि राकेशधर त्रिपाठी को 2,45,554 मत प्राप्त हुए. इस जीत के साथ उन्होंने करीब डेढ़ दशक के अंतराल के बाद दोबारा संसद में वापसी की और 16वीं लोकसभा के सदस्य बने. सांसद बनने के बाद भाजपा संगठन में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली.
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भदोही के तत्कालीन सांसद वीरेंद्र सिंह को भाजपा ने उत्तर प्रदेश की बलिया लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. पार्टी ने यहां मौजूदा सांसद भरत सिंह का टिकट काटकर सिंह को मैदान में उतारा. इस चुनाव में उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के सनातन पांडेय से हुआ. कड़े मुकाबले में सिंह को 4,69,114 वोट मिले, जबकि सनातन पांडेय को 4,53,595 मत प्राप्त हुए. इस तरह सिंह 15,519 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर चौथी बार लोकसभा सदस्य बने. 17वीं लोकसभा चुनाव के दौरान वीरेंद्र सिंह कृषि और किसान से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. वे इस दौरान भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बलिया सीट से उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया और उनकी जगह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को टिकट दिया. इस बार के लोकसभा चुनाव में वीरेंद्र सिंह को टिकट नहीं देने के पीछे उनकी बढ़ती आयु के कारण के तौर पर देखा गया.
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