35 साल से दोस्त अब सियासत में आमने-सामने: दो पूर्व IPS बने चुनावी रण के बड़े चेहरे

एक तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा पहुंचा, दूसरा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर मैदान में, पश्चिम बंगाल चुनाव में दिलचस्प हुआ मुकाबला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच इस बार सियासत में एक अनोखी कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है. करीब 35 साल तक एक साथ सेवा देने वाले दो पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार और राजेश कुमार अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ चुनावी मैदान में नजर आ रहे हैं. दोनों अधिकारी 1989-90 बैच के हैं और पश्चिम बंगाल कैडर में लंबे समय तक साथ काम कर चुके हैं. खास बात यह है कि दोनों ने एक साथ ही जनवरी 2026 में सेवानिवृत्ति ली, लेकिन इसके तुरंत बाद उनकी राहें राजनीति में अलग-अलग हो गईं.

राजीव कुमार: इंजीनियर से डीजीपी तक

1989 बैच के IPS अधिकारी राजीव कुमार मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश के रहने वाले हैं. उन्होंने B.Tech की डिग्री हासिल की है.राजीव कुमार का करियर काफी चर्चित रहा है. वे पश्चिम बंगाल पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे जिसमें कोलकाता पुलिस कमिश्नर और राज्य पुलिस के डीजीपी शामिल हैं. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें कोलकाता पुलिस कमिश्नर बनाया था जहां उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई, लेकिन वोटिंग खत्म होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें हटा दिया था.

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दिसंबर 2023 में उन्हें फिर से बंगाल का DGP बनाया गया. वह जनवरी 2026 में रिटायर हुए. रिटायरमेंट के कुछ ही दिनों बाद तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया और वे बिना मुकाबले जीतकर सांसद बन गए. जब वे बिधाननगर पुलिस कमिश्नर थे उस समय शारदा चिट फंड घोटाले की जांच में उनका नाम भी आया था जहां CBI ने उन पर सबूत दबाने का आरोप लगाया था. बीजेपी ने भी उनकी नियुक्तियों पर कई बार सवाल उठाए थे, लेकिन ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले राजीव अब TMC के साथ राजनीति में हैं. राजीव कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है.

राजेश कुमार: अब बने बीजेपी उम्मीदवार

राजेश कुमार, जिनकी गिनती एक बेहद शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी के रूप में होती है, को भारतीय जनता पार्टी ने जगतदल विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. उनकी एंट्री को बीजेपी का रणनीतिक दांव माना जा रहा है. राजेश कुमार 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं और मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं.

उन्होंने PhD की है और फाइनेंस में विशेषज्ञता रखते हैं. वे इंस्‍टीटयूट ऑफ चार्टेड अकाउंटस ऑफ इंडिया (ICAI) और इंस्‍टीटयूट ऑफ कॉस्‍ट अकाउंटस ऑफ इंडिया (ICAI) के फेलो मेंबर हैं.इसके अलावा AICWA और MIIA की डिग्री भी रखते हैं. फाइनेंस और ह्यूमन रिसोर्स में MBA भी किया है.

करियर में उन्होंने पुलिस के कई महत्वपूर्ण पद संभाले. उन्हें राष्ट्रपति पदक और मुख्यमंत्री पदक मिल चुका है. DGP पद के लिए उनका नाम विचार में नहीं आने पर उन्होंने CAT में केस भी किया था. जनवरी 2026 में वे रिटायर हुए और उसके बाद बीजेपी ने उन्हें जगतदल विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. उनकी एंट्री को राजनीतिक हलकों में बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है.

दोनों की एंट्री दिलचस्प

राजनीतिक गलियारों में इस मुकाबले को दिलचस्प इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ जहां टीएमसी ने पूर्व डीजीपी को राज्यसभा भेजकर बड़ा संदेश दिया, तो दूसरी ओर बीजेपी ने उनके ही बैचमेट को मैदान में उतारकर सीधी चुनौती पेश कर दी.

पश्चिम बंगाल चुनाव में ये दो पूर्व IPS अधिकारी अब सिर्फ नाम नहीं, बल्कि राजनीतिक कहानी का हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि सियासत की इस नई जंग के बावजूद दोनों के बीच निजी रिश्ते अब भी कायम हैं. लेकिन चुनावी रण में ये दोस्त अब अलग-अलग विचारधाराओं के साथ आमने-सामने खड़े हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति और भी रोचक हो गई है.

अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं कि क्या राजेश कुमार विधानसभा तक पहुंच पाते हैं या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इन दोनों पूर्व अधिकारियों की एंट्री ने चुनावी मुकाबले में नया रोमांच जरूर जोड़ दिया है.