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विशेष रिपोर्ट

बंगाल में TMC के भीतर 'शिवसेना मॉडल' की आहट! क्या ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे ममता के 'शिंदे'?

03 जून 2026
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बंगाल में TMC के भीतर 'शिवसेना मॉडल' की आहट! क्या ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे ममता के 'शिंदे'?

TMC में दरार या नई रणनीति: बंगाल में TMC के भीतर 'शिवसेना मॉडल' की आहट, बगावत के मिल रहे संकेत, ऋतब्रत बनर्जी के इर्द-गिर्द बन रहा नया समीकरण

Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तुरंत बाद राज्य में 'महाराष्ट्र की दर्ज पर' राजनीतिक 'खेला' होने की सुगबुगाहट सामने आयी है। दरअसल हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी में बड़ी बगावत की आहट सुनाई देने लगी है। अब पार्टी में दो दो खेमे बनते नजर आ रहे हैं। पहला खेमा तृणमूल से निष्कासित एवं उलुबेरिया सीट से विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला है तो दूसरा खेमा ममता के साथ है। अब असल खेल ये है कि ऋतव्रत के पाले में 50 विधायक बताए जा रहे हैं। पार्टी से निलंबित ऋजु दत्ता ने दावा किया है कि 50 नवनिर्वाचित विधायक ममता के नेतृत्व से अलग होकर 'असली तृणमूल कांग्रेस पार्टी' और उसके प्रतिष्ठित चुनाव चिह्न 'जोड़ा-फूल' पर दावा ठोकने की तैयारी में हैं। 

एक तरफ राज्य की पूर्व सीएम ममता बनर्जी भतीजे एवं सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले, चुनाव के बाद हिंसा और फेरीवालों को हटाने के विरोध प्रदर्शन में व्यस्त हैं। वहीं उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा खेला होने जा रहा है। हालांकि तृणमूल नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि कुछ लोग दबाव में आ सकते हैं, लेकिन बड़ी बगावत नहीं होगी और ज्यादातर विधायक ममता के साथ रहेंगे। 

इसके दूसरी तरफ, टीएमसी की ओर से रविवार को टीएमसी विधायकों की पीशी-भाईपो बैठक में 80 में से केवल 20 विधायकों की उपस्थिति ने इस बात के संकेत पहले ही दे दिए थे। यहां तक कि पार्टी के धरने प्रदर्शन में केवल 5 विधायक पहुंचे थे, जिसके चलते यह स्पष्ट हो चुका है कि अब पार्टी में टूट होना तय है।

क्या है पर्दे के पीछे की कहानी

दरअसल पार्टी के कुछ नेता ऋतब्रत को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के पक्ष में थे। वहीं स्पीकर को दिए पत्र में यह हुआ नहीं। इसके बाद ऋतब्रत और संदीपान साहा ने विरोध किया और पत्र में हुए हस्ताक्षर को फर्जी करार दिया। हालांकि स्पीकर के शहर में न होने के चलते पत्र फिलहाल स्वीकार नहीं हुआ। इधर, अनैतिक पार्टी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप के चलते ऋतब्रत और संदीपान साहा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। उसके बाद दोनों ने कोलकाता के विधायक छात्रावास में 'सीक्रेट मीटिंग' भी की थी, जिसमें 60 विधायकों के साथ होने का दावा किया गया, जिसके बाद पश्चिम बंगाल से 'महाराष्ट्र मॉडल' का लाइव रिपीट टेलिकास्ट देखने को मिलने की संभावना है।

क्या है 'महाराष्ट्र मॉडल' का सच

दरअसल साल 2022 का महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर उद्धव ठाकरे के हाथों से सरकार और सियासत दोनों ही छीन ली थी. अब ठीक वैसी ही सियासी स्क्रिप्ट अब पश्चिम बंगाल में लिखे जाने की सुगबुगाहट है. इस बाद 'बंगाल के शिंदे' का किरदार टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी निभा रहे हैं, जिसके नेतृत्व में कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की. विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों के इस्तीफे ने भी ये स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल में कोई तो सियासी खिचड़ी पक रही है। 

ठीक ऐसा ही मामला एनसीपी का भी है, जिसके चलते शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने दशकों ​पुरानी पार्टी से विधायकों को तोड़ पार्टी के साथ उसके चुनाव चिन्ह पर भी कब्जा कर लिया और बाद में सत्ता में भागीदार बन गए। 

बढ़ने वाला है ममता का सिरदर्द

टीएमसी के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (लगभग 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) ममता बनर्जी से अलग होकर 'दो घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न के के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करने की तैयारी में हैं। पार्टी दल बदल कानून लागू होने के लिए कम से कम टीएमसी के 52 विधायकों का साथ होना जरूरी है। ऐसे में ममता के हाथों से टीएमसी और चुनाव चिन्ह के साथ पार्टी पॉपर्टी एवं फंड भी फिसलने की संभावना जताई जा रही है,जैसा कि महाराष्ट्र में देखने को मिला। 

अब ममता बनर्जी, जिन्हें कभी जमीनी संघर्ष का चेहरा माना जाता था, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही धीरे-धीरे अपना नियंत्रण खोती जा रही हैं. टीएमसी के तौर पर और संगठन पर, दोनों पर ही उन्होंने अपना नियंत्रण लगभग खो दिया है. ऐसे में पार्टी के भीतर की उथल-पुथल से ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन खड़ी कर दी है, पार्टी में जिस तरह से विरोध के सुर उठ रहे हैं, उससे साफ है कि महाराष्ट्र की तरह सियासी खेला होने जा रहा है. अब देखना ये होगा कि ऋतव्रत बनर्जी किस तरह से पश्चिम बंगाल की राजनीति के 'शिंदे' बनकर ममता बनर्जी को अर्श से फर्श का रास्ता तय कराते हैं।

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