उत्तर प्रदेश: सातवें चरण की 13 सीटों में से किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा

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यूपी में लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण के योद्धा तय हो गए हैं. आखिरी चरण की जिन 13 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें पीएम नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी और सीएम योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र की गोरखपुर सीट भी शामिल है. इस चरण की सभी सीटें जातीय गणित पर सधने वाले पूर्वांचल में हैं. ऐसे में मोदी मैजिक व गठबंधन की अर्थमैटिक दोनों ही कसौटी पर है. इन सभी 13 सीटों पर किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, यह तो 23 मई को पता चल ही जाएगा. इससे पहले 7वें चरण के इन सीटों पर डालते हैं एक नजर … वाराणसी : मोदी को विपक्ष का … Read more

कांग्रेसी मुझे मारने के सपने देख रहे हैं: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के इटारसी में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेसी मुझसे नफरत करने लगे है और वो मुझे मारने के के सपने देख रहे है. प्रधानमंत्री मोदी ने भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार दिग्विजय सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि जो व्यक्ति (जाकिर नाईक) देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त है, कांग्रेस के दिग्गी राजा उनकी तारीफ में खुलेआम कसीदे पढ़ते हैं. एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि आतंक के आकाओं को हमने ऐसा घाव दिया है, जो उनसे न बताते बन रहा है न छिपाते बन रहा है. कांग्रेस उनके साथ खड़ी है जो … Read more

उत्तरप्रदेश: मैदान में नहीं, फिर भी इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी

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यूपी के लोकसभा चुनाव में कई सियासी धुरंधर ऐसे हैं जो खुद तो चुनावी दंगल में नहीं उतरे लेकिन उनके परिवार के सदस्य या नजदीकी के मैदान में होने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. हालात कुछ ऐसे हैं कि खुद चुनाव लड़ने पर वह जितनी मेहनत करते, उससे कहीं ज्यादा मेहनत उन्हें अपने ‘प्रियजन’ की कामयाबी के लिए करनी पड़ रही है. ऐसे ही कुछ नेताओं के बारे में यहां बताया जा रहा है.

राम गोपाल यादव – समाजवादी पार्टी
राम गोपाल यादव को समाजवादी पार्टी का थिंक टैंक माना जाता है. राम गोपाल यादव वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं. मुलायम सिंह की तरह चुनाव के दौरान पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी उनके कंघों पर भी होगी लेकिन फिरोजाबाद सीट उनके लिए भी अहम बन गई है. यहां से उनके पुत्र अक्षय यादव सपा के टिकट पर मैदान में हैं. हालांकि, अक्षय इस सीट से मौजूदा सांसद भी हैं लेकिन इस बार उनकी टक्कर किसी और से नहीं बल्कि अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से है.

कल्याण सिंह – बीजेपी
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह भले ही संवैधानिक पद पर हों, लेकिन यूपी की एटा सीट उनकी प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखी जा रही है. दो बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के बेटे राजवीर एटा संसदीय सीट से एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं. 2014 का लोकसभा चुनाव राजवीर अपने पिता कल्याण सिंह की सीट एटा से जीत चुके हैं. वर्तमान में राजवीर इसी सीट से सांसद हैं. मैदान में भले ही राजवीर सिंह हों लेकिन दांव पर इज्जत कल्याण सिंह की लगी हुई है.

स्वामी प्रसाद मौर्य – बीजेपी
बसपा छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में आए स्वामी प्रसाद मौर्य योगी सरकार में मंत्री हैं. उनके ऊपर भी लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी है. फिलहाल उनका पूरा ध्यान बदायूं सीट पर केंद्रित है. दरअसल इस सीट से बीजेपी ने मौर्य की बेटी संघमित्रा को उतारा है. उसके साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बदायूं सीट समाजवादियों का गढ़ है और अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव इस सीट से लगातार चुनाव जीतते आए हैं. ऐसे में संघमित्रा की सफर बदायूं सीट पर आसान नहीं होगा.

पीएल पुनिया – कांग्रेस
रिटायर्ड आईएएस पीएल पुनिया सपा और बसपा के करीबी संबंध होने के बावजूद कांग्रेस से राजनीति कर रहे हैं. वर्तमान में राज्यसभा सदस्य होने के साथ वह छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमिटी के प्रभारी भी हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में पीएल पुनिया राजधानी से सटी बाराबंकी सीट से सांसद रहे लेकिन पिछली बार मोदी लहर में हार गए. इस बार बाराबंकी से उनके पुत्र तनुज पुनिया कांग्रेस के टिकट से मैदान में हैं. अब यह सीट पुनिया के लिए नाक का सवाल बनी हुई है.

राम लाल राही – कांग्रेस
1991 में कांग्रेस की नरसिंम्हा राव सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे रामलाल राही मिश्रिख संसदीय सीट से दो बार सांसद रहे. उनके पुत्र बीजेपी में हैं और वर्तमान में हरगांव सीट से विधायक हैं. रामलाल राही ने पिछले दिनों फिर कांग्रेस में वापसी की. कांग्रेस ने राही की पुत्रवधु मंजरी राही को उनकी लोकसभा सीट मिश्रिख से मैदान में उतारा है. चुनाव भले ही बहू लड़ रही है लेकिन प्रतिष्ठा तो रामलाल राही की ही दांव पर है.

अमर सिंह – बीजेपी
भारतीय राजनीति में अमर सिंह कोई अनजाना नाम नहीं है. यूपी से अपना सियासी सफर शुरू करने वाले अमर सिंह कभी मुलायम सिंह के दाहिने हाथ माने जाते थे अब उनका हाथ बीजेपी के साथ है. अमर सिंह की खास मानी जाने वाली अभिनेत्री जया प्रदा ने भी हाल ही में सपा का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामा है और पार्टी के टिकट पर रामपुर से मैदान में हैं. हालांकि वह पूर्व में भी इसी सीट से सपा सांसद रह चुकी हैं. सीधी टक्कर सपा के आजम खान से है. अगर जया प्रभा यहां से चुनाव हारती हैं तो किरकिरी तो अमर सिंह की ही होगी न.

पीएम मोदी को वाराणसी में टक्कर देंगे कांग्रेस के अजय राय

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कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर दो उम्मीदवारों की सूची जारी की है. वाराणसी से कांग्रेस ने अजय राय और गोरखपुर से मधुसूदन तिवारी को प्रत्याशी बनाया है. वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. यहां से प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव लड़ने की संभावना थी लेकिन पार्टी ने अब यहां से अजय राय को उम्मीदवार बनाया है. अजय राय 2014 में भी वाराणसी से कांग्रेस के प्रत्याशी थे. अजय राय पिंडरा विधानसभा से पांच बार विधायक रह चुके है. यहां सपा- बसपा गठबंधन ने शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया है. Congress Central Election Committee announces the next list of candidates for the ensuing elections to the … Read more

सुप्रीम कोर्ट का अतीक अहमद को गुजरात जेल में ट्रांसफर करने का आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद को यूपी की नैनी जेल से गुजरात जेल में ट्रांसफर करने के आदेश दिए है. साथ ही इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए है. यह आदेश रियल एस्टेट डीलर मोहित जायसवाल के कथित अपहरण और अत्याचार के मामले दिया गया है. अतीक को कुछ दिन पूर्व ही नैनी जेल ट्रांसफर किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के खिलाफ लंबित सभी मामलों का जल्द निपटारा करने के साथ ही इससे जुड़े मामलों में सभी गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश भी दिए हैं. अतीक अहमद के खिलाफ़ 1979 से 2019 तक धारा 302, गैंगस्टर, आर्म्स और … Read more

साध्वी प्रज्ञा के बचाव में उतरे मोदी-योगी, कहा- विरोधी नेताओं से कभी सवाल नहीं किए

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मुंबई हमले में शहीद और अशोक चक्र से सम्मानित हेमंत करकरे पर विवादास्पद बयान देने वाली साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का चहुंओर विरोध हो रहा है. यहां तक की बीजेपी ने खुद अधिकारिक तौर पर यह कहा है कि इस बयान से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. यह उनका निजी बयान हैं. खुद साध्वी प्रज्ञा ने भी अपना बयान वापिस लेने की बात कही थी. ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बचाव में आगे आए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा कि ज्ञा सिंह की उम्मीदवारी को लेकर इतना हल्ला क्यों है, जबकि गंभीर आरोपों का … Read more

‘मैंने हेमंत करकरे को कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा’

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लोकसभा चुनावों में सियासी बयान या यूं कहें विवादित बयान देना कोई नई बात नहीं है. आज बीजेपी की भोपाल संसदीय प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान चर्चा में छाया रहा. उन्होंने मुंबई हमले में शहीद एटीसी चीफ हेमंत करकरे के खिलाफ विवादित बयान देकर सभी राजनेताओं के निशाने पर आ गई. यहां तक की उन्हें अपना बयान वापस तक लेना पड़ा. वहीं यूपी के मैनपुरी में मायावती का सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पक्ष और पीएम मोदी के विरोध में कहा गया बयान भी चर्चा में बना रहा. ‘मैंने हेमंत करकरे को कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा’ – साध्वी प्रज्ञा, भोपाल बीजेपी प्रत्याशी आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस … Read more

24 साल बाद चुनावी मंच पर एक साथ दिखे माया-मुलायम

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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में आज सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन की चौथी संयुक्त सभा है. इस सभा की खासियत यह है कि यहां मुलायम सिंह यादव और बसपा चीफ मायवती 24 साल बाद मंच सांझा करते हुए नजर आएंगे. मुलायम सिंह यादव खुद मैनपुरी संसदीय सीट से प्रत्याशी हैं. कभी मुलायम सिंह के खिलाफ वोट करने की अपील करने वाली मायावती आज फिर मुलायम सिंह के लिए वोट मांगती नजर आएगी. मुलायम सिंह ने 2014 में आजमगढ़ और मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह उन्हें विजयश्री मिली. बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दी जहां से तेजप्रताप यादव सांसद चुने गए.

गेस्ट हाउस कांड के बाद जुदा हो गई थी राह
मुलायम सिंह ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया था. 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई. मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने लेकिन बसपा संस्थापक काशीराम के साथ हुए उनके विवादों के कारण बसपा ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया. इससे मुलायम सिंह काफी नाराज थे. इसके बाद जब मायावती अपने कार्यकर्ताओं और विधायकों के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में आगामी रणनीति पर विचार कर रही थी, तभी समाजवादी पार्टी समर्थकों ने वहां हमला बोल दिया. मायावती ने किसी तरह छुपकर अपनी जान बचाई. इस कांड ने दोनों पार्टियों के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी. आगामी चुनावी में बीजेपी के सर्मथन से मायावती ने सरकार बनाई और प्रदेश का पहली दलित मुख्यमंत्री बनी.

अखिलेश-मायावती में बना बुआ-भतीजे का रिश्ता
उत्तर प्रदेश में विधानसभा और बाद में लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद सपा और बसपा दोनों को ही यह आभास हो गया था कि बीजेपी को अकेले हराया नहीं जा सकता. उसके बाद सपा चीफ अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती ने मिलकर गोरखपुर व फुलपुर लोकसभा उपचुनाव में गठबंधन की नींव रखी और परिणाम सकारात्मक मिला. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मोर्य के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई इन दोनों सीटों पर बसपा ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे बल्कि सपा उम्मीदवारों को समर्थन दिया. नतीजा-दोनों सीटें सपा के खाते में आ गिरी. वर्तमान लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में चुनाव लड रहे है. जिनमें बसपा 38 सपा 37 और रालोद 3 सीट पर चुनाव लड़ रही है. अमेठी और रायबरेली सीट पर गठबंधन ने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है. यहां से राहुल गांधी और सोनिया गांधी मैदान में हैं.