सिंधिया ने इंदौर में दिखाया राजनीतिक कौशल, कार्यकर्ताओं में दिखा जबरदस्त क्रेज

कहते हैं सत्ता के लिए जो बन पड़े वो कम है, अपने एक दिन के दौरे पर इंदौर (Indore) पहुंचे कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपने राजनीतिक कौशल की सियासी चाल से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति को फिर से गरमा दिया. रविवार को इंदौर में सिंधिया ने उनके प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले सुरेश पचौरी (Suresh Pachouri), दिग्विजयसिंह (Digvijay Singh) और कमलनाथ (Kamalnath) गुट के नेताओं से अलग-अलग उनके घर जाकर मुलाकात की और साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वन टू वन मुलाकात कर एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया. जिसके बाद से मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी हलचलें तेज हो गई.

मध्यप्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिक्स में इन दिनों राजनीतिक रस्साकस्सी का दौर लगातार जारी है. इसी बीच इंदौर में रविवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का मालवा की सियासत में एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. एक दिन के दौरे पर इंदौर पहुंचे कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी अलग राजनीतिक चाल से सभी को चौंका दिया. कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया का इंदौर पहुंचने पर कार्यकताओं ने जमकर स्वागत किया. सिंधिया ने इंदौर में पार्टी के तमाम खेमों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंदौर पहुंचते ही अलग-अलग गुटों के नेताओं के घर पर जाकर मुलाकात की. एयरपोर्ट से सबसे पहले सिंधिया सीधे सुरेश पचौरी के गुट से आने वाले विधायक संजय शुक्ला के घर पहुंचे और करीब एक घंटे तक सिंधिया ने संजय शुक्ला के साथ चर्चा की. ना सिर्फ चर्चा की बल्कि इस दौरान सिंधिया ने नाश्ता भी किया. इसके बाद सिंधिया इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत शशिन्द्र जलधारी के घर वालों से मिलने उनके घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया.

इसके बाद सिंधिया यहां से सीधे एमएलए विशाल पटेल से मिलने उनके घर पहुंचे. विशाल पटेल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के काफी करीबी माने जाते हैं, ऐेसे में सिंधिया और विशाल पटेल की मुलाकात भी जमकर चर्चाओं में रही. मुलाकात का दौर यहीं खत्म नहीं हुआ बल्कि सिंधिया ने इसके बाद इंदौर से सांसद का चुनाव लड़ चुके पंकज संघवी और मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी कहे जाने वाले इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल से भी घर जाकर मुलाकात की.

इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इंदौर मेरा घर है और मालवा से मेरा खास लगाव है. मध्य प्रदेश और देश में कांग्रेस संगठन को पुनर्जीवित करना बहुत जरूरी है. हांलाकि अलग-अलग गुटों के नेताओं से मिलने के पीछे की वजह क्या थी, इसका सिंधिया ने जवाब नहीं दिया. सिंधिया ने कहा कि इंदौर से उनका अलग लगाव है ऐसे में वे कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए पहुंचे हैं. लोगों की परेशानी और उनकी आवाज़ को शासन, प्रशासन और सरकार तक हम पहुंचाएंगे.

इसके बाद बारी आई सिंधिया के शक्ति प्रदर्शन की, इंदौर के रंगून गार्डन में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब दो घंटे तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सिलसिलेवार मुलाकात की. इसके लिये बनाए गए विशाल पंडाल में सिंधिया की तस्वीरों के अलावा, उनके दिवंगत पिता माधवराव सिंधिया और सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पोस्टर प्रमुखता से लगाये गये थे. सिंधिया से मुलाकात के लिए समर्थकों और नेताओं का जमावड़ा लगा. खास बात तो यह थी कि इंदौर ही नहीं मालवा और निमाड़ के कई सिंधिया समर्थक भी इस कार्यक्रम में मुलाकात के लिए बेताब नजर आए.

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इस दौरान सिंधिया ने मंच पर ही एक-एक कार्यकर्ता से वन टू वन मुलाकात शुरू की. सिंधिया जब मंच पर मौजूद थे तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी स्टेज पर चढ़ने की होड़ लग गई, मंच पर चढ़ने के लिए कार्यकर्ता बेकाबू हो गए और हंगामा शुरू कर दिया. देखते ही देखते बात कुर्सियां उछालने तक जा पहुंची. कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां उछालनी शुरू कर दीं. ज्योतिरादित्य सिंधिया कार्यकर्ताओं की इस हरकत से नाराज हो कर मंच से उतर गए और कार्यक्रम से चले गए.

बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं से ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस मुलाकात को राजनीतिक के जानकार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल सिंधिया के शक्ति प्रदर्शन के तौर देख रहे हैं. कार्यक्रम के बाद सिंधिया ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने करीब 3,000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आज सीधी मुलाकात की, अपना खून-पसीना बहाकर सूबे में कांग्रेस की सरकार बनवाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की आन-बान-शान कायम रखना मेरा फर्ज है. केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कांग्रेस संगठन को फिर से जीवित करना अति महत्वपूर्ण है. इस काम के लिये सभी कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया है.” वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर दावेदारी के सवाल पर सिंधिया ने कहा,‘‘पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वह उन्हें स्वीकार होगा.’’

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की आहट के बीच अपने-अपने नेता को अध्यक्ष बनवाने के लिए गुटबाजी तेज हो गई है. राजधानी भोपाल से लेकर दिल्ली तक रस्साकस्सी चल रही है. ऐसे में मध्यप्रदेश कांग्रेस के दिग्गज सुरेश पचौरी, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ गुट से जुड़े नेताओं से उनके घर जाकर अलग-अलग मुलाकात करने का सिंधिया का ये खास अंदाज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा. पचौरी गुट से ताल्लुक रखने वाले विधायक संजय शुक्ला के घर सिंधिया पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत किया गया. हालांकि बाद में संजय शुक्ला सफाई देते नजर आए और कहा कि उनको (सिंधिया) को बुलाया नहीं था वो उनकी मां की तबीयत पूछने घर पहुंचे थे. सिंधिया पार्टी के बड़े लीडर हैं ऐसे में वो घर आए तो उनका स्वागत किया गया.

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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की इंदौर में हुई इस लंच डिप्लोमेसी को लेकर बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया है. बीजेपी के सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि सिंधिया ये सब पीसीसी चीफ की कुर्सी पाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी और प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के आगे कांग्रेस में किसी की नहीं चलती, ये बात सिंधिया को भी समझनी चाहिए.

गौरतलब है कि कमलनाथ को राज्य विधानसभा चुनाव से करीब सात महीने पहले अप्रैल 2018 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. अभी हाल ही में कमलनाथ ने दिल्ली में अपने एक बयान में कहा था कि मुख्यमंत्री बनने के ठीक बाद उन्होंने पार्टी आलाकमान के समक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी. बहरहाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस में सत्ता और संगठन के बीच जो खींचतान चल रही है उसके बाद सिंधिया की इस लंच डिप्लोमेसी के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं. अब आने वाले दिनों में सिंधिया का ये खास अंदाज कौन से राजनीतिक समीकरणों को जन्म देता है यह देखना दिलचस्प होगा.

वीडियो खबर: हिन्दी दिवस पर सीएम गहलोत का मोदी पर पंच

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का विदेशों में सम्मान कांग्रेस की देन है. उन्होंने कहा कि मोदी राज में जो बोलता है, उसको देशद्रोही कहा जाता है… अगर बोलना गलत है तो मैं देशद्रोही हूं.

वीडियो खबर: हिन्दी दिवस पर अमित शाह का दमदार भाषण

हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) के मौके पर देशवासियों को बधाई देते हुए देश के गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने एक राष्ट्र-एक भाषा के फॉर्मूले को अपनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि ‘देश की एक भाषा हो’ इसी को याद रखते हुए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने राजभाषा की कल्पना की थी और इसके लिए हिंदी को स्वीकार किया. मौजूदा समय में जरूरत है कि देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले.

‘मोदी का विदेशों में सम्मान कांग्रेस की देन’, हिन्दी दिवस पर बोले गहलोत

आज हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) है. हिन्दी दिवस और राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी (Rajasthan Hindi Granth Academy) के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रदेश की राजधानी जयपुर के बिड़ला सभागार में शनिवार को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी का स्वर्ण जयंती समारोह (Golden Jubilee Celebrations) मनाया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शिरकत की. विशेष गणमान्य अतिथियों में उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, मंत्री सुभाष गर्ग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस अवसर पर राज्य के विभिन्न हिंदी ग्रंथ लेखकों और साहित्यकारों का सम्मान किया गया.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती वर्ष के बैनर तले मनाए जाने वाले इस अति विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समय है. एक ओर गांधीजी की 150वी जयंती मनाई जा रही है वहीं दूसरी तरफ राजीव गांधी की 75वी जयंती मना रहे हैं जिन्होंने देश में कंप्यूटर और मोबाइल की नीव रखी. यह भी एक खुशी का अवसर है कि हिन्दी ग्रंथ अकादमी इस साल स्वर्ण जयंती मना रही है. उन्होंने कहा कि राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी लेखकों को प्रोत्साहित करने और सम्मान स्वरूप ऑनलाइन पेमेंट करने का काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी.

हिन्दी दिवस पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि हमारे देश मे विभिन्न भाषाएं है. ये हमारी ताकत है. हिन्दी राष्ट्रभाषा के रूप में और अधिक विकसित होनी चाहिए, ऐसा मेरा मानना है. हिन्दी का देश की आजादी में भी अहम योगदान रहा जिसे महात्मा गांधी ने भी माना था. गहलोत ने आगे कहा कि जब मैं 20 साल पहले मुख्यमंत्री बना तो मैंने पत्रकार और साहित्यकार कोष शुरू किया. मेरी सोच थी कि लेखकों और कलाकारों को सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है जितना काम हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए होने चाहिए, वे अभी तक हुए नहीं है जबकि इस भाषा के लिए अलग से विभाग भी बने हुए है. उन्होंने लेखकों से अपील की कि हिन्दी को आगे बढ़ाने में मदद कीजिए, सरकार आपके साथ है.

बड़ी खबर: मोदीजी ने ऐसा माहौल बनाया कि जैसे चार महीनों में ही हम मंगल पर पहुंच गए

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने हिन्दी के लिए एक आयोजन करने की कोशिश की जैसी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में होती है. अगर इस तरह का कार्यक्रम हिन्दी के लिए प्रदेश में हो तो मैं उसमें जरूर सहयोग करूंगा. साथ ही प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाते हुए कहा है आपने मुझे तीसरी बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, इसके लिए मैं आभारी हूं. मेरी कोशिश रहेगी जितना काम हो सके, मैं आपके लिए कर सकूं.

मोदी का विदेशों में सम्मान कांग्रेस की देन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज मोदीजी का विदेशों में सम्मान होता है तो इसके पीछे हमारी 70 साल की मेहनत है. आज देश का जो मान सम्मान बढ़ा है, उसके पीछे 70 साल की मेहनत है. पाकिस्तान के खिलाफ हम सरकार के साथ है.

वहीं अनुच्छेद 370 और अर्थव्यवस्था पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना आजाद जैसे अनेक लोगों की देन है जिन्होंने 70 साल तक लोकतंत्र को मजबूत किया. आज मोदीजी प्रधानमंत्री बने उसके पीछे केवल लोकतंत्र है. मोदीजी इसरो में गए जिसकी स्थापना नेहरू जी ने की थी. आज जहां से उपग्रह छोड़े जा रहे है. ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री बनने के 4 महीने के अंदर ये उपग्रह छोड़े जा रहे हैं. इसके पीछे कई लोगों की मेहनत लगी हुई है.

अर्थव्यवस्था पर पलटवार करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि मोदी राज में अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. नौकरी मिलना दूर की कोड़ी बनता जा रहा है. जम्मू कश्मीर में 40 दिन से लोग घरों में बंद है जो गलत है. जो बोलता है उसको देशद्रोही कहा जाता है. अगर बोलना गलत है तो मैं देशद्रोही हूं. केंद्र सरकार का धर्म के नाम पर राजनीति करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है.

पॉलिटॉक्स की खबर पर लगी मुहर, 21 जून को ही बता दिया था- ‘सतीश पूनिया संभालेंगे राजस्थान में बीजेपी की कमान’

पॉलिटॉक्स की खबर पर एक बार फिर लगी मुहर. आज से लगभग 2.5 महीने पहले 21 जून 2019 को ही पोलिटॉक्स ने अपने दर्शकों को बता दिया था कि “आमेर विधायक सतीश पूनिया संभालेंगे राजस्थान में बीजेपी की कमान” और आज पॉलिटॉक्स की इस बड़ी खबर पर बीजेपी आलाकमान ने मुहर लगा दी.

आमेर से भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया (Satish Poonia) को राजस्थान बीजेपी (Rajasthan BJP) की कमान सौंपी गयी है. उन्हें तत्काल प्रभाव से राजस्थान में भाजपा का नया अध्यक्ष नियु​क्त किया गया है. इस बाबत भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक अधिकारिक पत्र जारी किया जिसके मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा विधायक सतीश पूनिया को राजस्थान प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी. मदनलाल सैनी के निधन के बाद से राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली चल रहा था.

भाजपा के लगातार चार बार प्रदेश महामंत्री रह चुके सतीश पूनिया बतौर संघ पृष्ठभूमि से आते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी गुट के माने जाते हैं. पूनिया लगातार 14 साल तक भाजपा के प्रदेश महामंत्री रह चुके हैं. पूनिया लो प्रोफाइल जाट नेताओं में गिने जाते हैं.

महाराजा कॉलेज से बीएससी और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी धारक सतीश पूनिया ने भूगोल में पीएचडी की डिग्री भी ग्रहण की है. वे 1982 से 1992 तक एबीवीपी के प्रदेश पदों पर रहे. पूनिया 1992 से 1998 तक भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री और 1998-99 तक प्रदेश अध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा पद का दायित्व संभाला. वे 2000 से 2003 तक बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और पंजाब प्रभारी के अलावा 2004 से 2016 तक प्रदेश बीजेपी के महामंत्री रहे. सतीश पूनिया तीन बार विधायक रहे हैं. उन्होंने 2018 में हुए प्रदेश विधानसभा चुनावों में आमेर सीट से कांग्रेस के प्रशांत शर्मा को भारी मतों से हराया था.

वीडियो खबर: इतना आसान नहीं है पायलट को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाना

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan PCC President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस (Congress) हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा. सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं.

वीडियो-खबर: तंवर को मनाना हुड्डा के लिए चुनौती से कम नहीं

हरियाणा (Haryana) के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने में आएगी. हुड्डा और तंवर के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है. अशोक तंवर राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व संभाले हुए थे.

देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.

आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.

बड़ी खबर: वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.

जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.

वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम पड़ी ठंडी

राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Congress President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. पिछले दिनों सचिन पायलट के जन्मदिन से ठीक पहले गहलोत समर्थक मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने मीडिया में एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम लागू होना जरूरी है. हालांकि वह खुद गहलोत सरकार में मंत्री होने के साथ ही एआईसीसी सचिव होने के नाते पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी बने हुए हैं. पायलट समर्थकों का कहना था कि जो व्यक्ति यह मुद्दा उठाता है, सबसे पहले उसे एक पद छोड़ना चाहिए.

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एक अखबार में एक कांग्रेस पदाधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा गहलोत ने उठवाया था, क्योंकि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पहले राजीव गांधी की जयंती पर और हाल ही सचिन पायलट के जन्मदिन समारोह में भी पायलट और गहलोत में दूरियां स्पष्ट हो चुकी हैं. गहलोत सोनिया गांधी के नजदीक माने जाते हैं, जबकि सचिन पायलट की राहुल गांधी से मित्रता है. राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो और सोनिया ने बागडोर संभाल ली हो, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दखल बना हुआ है, इसलिए पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मुश्किल प्रतीत होता है.

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का महत्व बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. न तो राजस्थान में सचिन पायलट का कद कम हो रहा है और न ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों के बगावती तेवरों में कमी आई है. राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो रही है, ऊपर से गहलोत और पायलट की खींचतान से पार्टी संगठन भी लड़खड़ा रहा है. यह स्थिति कांग्रेस के लिए विकट है.

हाल ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) दिल्ली गए थे, तब सोनिया गांधी ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया. गहलोत राजस्थान में 13 सितंबर को कांग्रेस (Congress) की एक वेबसाइट लांच होने के मौके पर सोनिया गांधी को आमंत्रित करना चाहते थे. वह सोनिया गांधी से समय मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर जयपुर लौटना पड़ा. बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान की यात्रा करने से इनकार कर दिया.

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समझा जाता है कि राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गहलोत ने सोनिया के पास तीन नामों का पैनल भेजा है, जिनमें हरीश चौधरी (Harish Choudhary) का नाम भी शामिल है, जो खुद चुनाव हार गए थे. पार्टी पर भी उनकी मजबूत पकड़ नहीं है. हरीश चौधरी के अलावा लालचंद कटारिया और महेश जोशी के नाम भी पैनल में शामिल हैं. गहलोत के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है की गहलोत प्रदेश में पार्टी पर भी अपना नियंत्रण चाहते हैं, जो पायलट के कारण संभव नहीं हो पा रहा है. पंचायत चुनाव नजदीक हैं और उम्मीदवार तय करने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है.

गौरतलब है कि सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार चलाने की प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं. सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में पायलट की कोई भूमिका नहीं रहती है. इसके अलावा गहलोत की तरफ से जारी होने वाले विज्ञापनों में सचिन पायलट का जिक्र नहीं होता है. इस परिस्थिति में गहलोत और पायलट की खींचतान कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.