अशोक तंवर (Ashok Tanwar) हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) के 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे. उनकी जगह कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. इसके बाद से ही अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने Congress के खिलाफ बगावती रूख अख्तियार कर लिया था. बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुडा (Bhupinder Singh Hooda) और शैलजा पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया.
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राजस्थान: खींवसर व मंडावा उपचुनाव में 12 उम्मीदवार मैदान में, 100 से ज्यादा स्टार प्रचारक करेंगे वोट अपील
राजस्थान की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए मंच सज चुका है और उम्मीदवार तय हो गए हैं. खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटों पर 21 तारीख को होने वाले उपचुनाव में 12 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में इन 12 उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने के लिए 100 से अधिक स्टार प्रचारक राजस्थान की धरती पर उतरेंगे. इनमें से 80 स्टार प्रचार कांग्रेस और भाजपा के हैं. एक ओर कांग्रेस ने जहां प्रचार के लिए स्थानीय नेताओं पर ज्यादा भरोसा दिखाया है, वहीं भाजपा ने बाहर के नेताओं को इसके लिए काबिल समझा. भाजपा की स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पार्टी … Read more
गुड़गांव विधायक उमेश अग्रवाल भाजपा से बगावत पर उतारू
हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) से पहले जहां कई लोगों के अपनी पार्टियां छोड़कर भाजपा में जाने की खबरें आ रही हैं, वहीं एक खबर यह भी है गुड़गांव के भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल (Umesh Agarwal) ने पार्टी से बगावत कर दी है. इस बार उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिल रहा है, जिससे वह असंतुष्ट हैं. भाजपा ने इस बार गुड़गांव से सुधीर सिंगला (Sudhir Singla) को टिकट दे दिया है. उमेश अग्रवाल के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के संबंध पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहे हैं. संभवतः इसी लिए अग्रवाल का टिकट कट गया. इस बार उमेश अग्रवाल की पत्नी अनीता … Read more
विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में बगावत चरम पर, तंवर की बगावत पड़ेगी भारी
विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा कांग्रेस में राजनीतिक गुटबाजी अपने चरम है. हरियाणा (Haryana) में टिकट वितरण में अपने समर्थकों की अनदेखी से नाराज कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए बनी एवं कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया. लेकिन तंवर की इस्तीफ़ा पॉलिटिक्स का पार्टी पर कोई विशेष असर नहीं हुआ. अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद जारी हुई कांग्रेस की दूसरी और अंतिम सूची में भी तंवर के समर्थकों की छोड़ो खुद तंवर का नाम ही नहीं था. यहां तक कि टिकट देना तो दूर कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने तंवर से मिलने या बात करना तक उचित नहीं समझा.
अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस के 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे. हाल ही में उनकी जगह कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके बाद से ही अशोक तंवर ने पार्टी के खिलाफ बगावती रूख अख्तियार कर लिया था. बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कांग्रेस में हुडा और शैलजा पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया था. इसके बाद अशोक तंवर ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हुड्डा गुट पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान तंवर ने बताया कि उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है.
बड़ी खबर: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम
प्रेस-कॉन्फ्रेंस में अशोक तंवर ने आरोप लगाया कि हरियाणा कांग्रेस अब ‘हुड्डा कांग्रेस’ बनती जा रही है और बताया की उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें समितियों से मुक्त किया जाए और वह सामान्य कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. वह चुनाव के लिए बनी प्रदेश चुनाव समिति सहित कई समितियों में शामिल थे. तंवर ने संवाददाताओं से कहा, ‘आप सभी जानते हैं कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव है. पिछले पांच साल का घटनाक्रम सबके सामने है. पार्टी के अंदर ऐसी ताकतें हैं जिन्होंने पार्टी को लगातार कमजोर किया. जमीन से जुड़े नेताओं को काम करने से रोका.’
इस दौरान तंवर ने सीधे-सीधे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा (Bhupinder Singh Hodda) पर तंज कसते हुए कहा, ‘देश में लोकतंत्र है, लेकिन हरियाणा में बड़े-बड़े राजघराने हैं. कुछ हमारी पार्टी में हैं और कुछ लोग दूसरी पार्टी में हैं. मेरे खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाया, लेकिन लोकसभा चुनाव में छह फीसदी वोट बढ़ा.’ तंवर ने टिकट वितरण में मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बताया जाए कि किन मापदंडों के आधार पर टिकट दिए गए हैं. उन्होंने पार्टी पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सोहना विधानसभा सीट का टिकट 5 करोड़ में बेचा गया है.
अशोक तंवर ने कहा कि मैंने पार्टी के लिए खून और पसीना दोनों दिया है. मैं पांच साल तक प्रदेश का अध्यक्ष रहा. मैंने पूरे समर्पण के साथ पार्टी की सेवा की. मैं साधारण परिवार से राजनीति में आया हूं. पांच साल मैंने विपक्ष की भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि पार्टी में पुराने लोगों को टिकट नहीं दिया गया. उन लोगों को टिकट दिया गया है जिन्होंने हाल ही में पार्टी ज्वाइन की है, ये वही लोग हैं जो पहले कांग्रेस की आलोचना करते थे. उन्होंने कहा कुछ लोगों को नई लीडरशिप बर्दाश्त नहीं. उन्होंने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिन लोगों ने कांग्रेस को कमजोर किया उनको टिकट क्यों? उन्होंने पार्टी को आह्वान करते हुए कहा कि मैं मानव बम हूं. अब चुप नहीं बैठूंगा.
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लेकिन अशोक तंवर की इन सारी कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं हो पाया और कांग्रेस ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी, और लिस्ट में अशोक तंवर और कुमारी शैलजा का दोनों नाम नहीं था. अशोक तंवर को इस चुनाव में टिकट नहीं दिया गया, इससे साफ पता चलता है कि टिकट वितरण में सिर्फ और सिर्फ भूपेन्द्र हुड्डा की चली है. अशोक तंवर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नजदीकी माने जाते हैं और राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है उसके बाद से उनके नजदीकी माने जाने वाले सभी कांग्रेसी नेताओं का कमोबेश यही हश्र हो रहा है. बहराल, हरियाणा में 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में अशोक तंवर की बगावत पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाती, इसका पता 24 अक्टूबर को आने वाले नतीजों में सामने आएगा.
आशा खेदर के विधानसभा प्रत्याशी बनने से गांव की पर्दा प्रथा टूटी
हरियाणा के हिसार जिले के सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र उकलाना से भाजपा उम्मीदवार आशा खेदर (Asha Khedar BJP) को उस समय आश्यर्य हुआ, जब वह अपने पति विनय खेदर के गांव खेदर पहुंची. उन्होंने गांव की परंपरा के अनुसार अपना चेहरा पूरी तरह घूंघट में छिपा लिया था. खेदर गांव में पर्दा प्रथा अभी भी सख्ती से लागू थी. आशा खेदर उम्मीदवार बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची थी. बाद में उन्होंने घूंघट हटाना पड़ा. इस तरह गांव में सख्ती से चली आ रही पर्दा प्रथा टूटी.
आशा खेदर प्रतिभाशाली दलित महिला है. संस्कृत और अंग्रेजी में एमए कर चुकी है. पुलित्जर और बुकर जैसे पुलस्कारों की विजेता झुंपा लाहिड़ी पर पीएचडी कर रही हैं. उन्होंने एक जाट व्यापारी से विवाह किया है, जो खेदर के निवासी हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट दे दिया है. चुनाव प्रचार के विवाह के 13 साल बाद पहली बार उन्होंने खेदर में घूंघट हटाया.
आशा खेदर के खेदर पहुंचने पर गांव के लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े. वह गांव की बहू थी. बहू होने के नाते उन्हें घूंघट करना जरूरी था. उन्होंने परंपरा का पालन किया. उन्हें देखने के लिए करीब दो हजार लोगों की भीड़ जुटी थी. लोगों ने उनसे घूंघट हटाकर बात करने का अनुरोध किया, जिसे मानने के अलावा आशा के सामने और कोई उपाय नहीं था. इसके बाद उन्होंने घूंघट हटाकर चुनाव प्रचार किया. इसके साथ ही वह गांव की अन्य बहू-बेटियों से भी घूंघट हटाने की अपील करने लगी.
इस प्रकार हरियाणा के रूढ़िवादी गांव खेदर की एक बहू के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन जाने से गांव की कई महिलाओं को पर्दा प्रथा से मुक्ति मिली. आजकल के जमाने हमेशा घूंघट में चेहरा छुपाए रहना महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल होता है. आशा के उम्मीदवार बनने से अकस्मात एक क्रांति हो गई. हालांकि वह क्रांति करने नहीं गई थी. वह चुनाव प्रचार करने गई थी. जब स्थानीय लोगों ने खुद ही उनसे घूंघट हटाने के लिए कह दिया तो वे अन्य महिलाओं को कैसे मना करेंगे?
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जिला परिषद सदस्य राजबीर खेदर ने कहा राजनीति कर रही महिला घूंघट में रहे, यह अच्छा नहीं लगता. अगर वह चुनाव जीत गईं तो मंत्री भी बन सकती है. तब बड़े कार्यक्रमों के मंच पर उनका घूंघट पहनकर पहुंचना किसको अच्छा लगेगा? सरपंच शमशेर सिंह ने कहा की गांव की बहू होने से उसे पर्दा करना पड़ता है, लेकिन लोगों से वोट मांगने के लिए पर्दा कैसे कर सकती है? हम सभी ने उनसे पर्दा हटाकर जनसंपर्क करने के लिए कहा है.
आशा चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत में डिग्री ली और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में डिग्री हासिल की. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ही उन्होंने बीएड और एमफिल किया. रोहतक बीएमयू से उनकी पीएचडी पूरी होने के करीब है. झुंपा लाहिड़ी के उपन्यासों में पात्रों की पहचान पीएचडी का विषय है. उनके पिता हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी थे. वह चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. अब वह उकलाना कस्बे में अपने पति विनय और 11 वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं. पास ही बरवाला में विनय का पेट्रोल पंप है. उनके पति के परिवार के अन्य सदस्य खेदर गांव में रहते हैं. आशा ने बताया कि वह नियमित तौर पर ससुराल जाती थी, लेकिन वहां कभी भी घूंघट नहीं हटाया.
आशा 2007 में भाजपा में शामिल हुई थी और फिलहाल भाजपा की हिसार इकाई की महासचिव हैं. लोग बताते हैं कि वह कार्यक्रमों के संचालन में कुशल है और जिले में जब भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दौरा करते हैं, उनके कार्यक्रमों का संचालन आशा ही करती हैं. उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता होगी. उकलामा में कॉलेज पहले ही खुल चुका है, जिसकी मांग यहां के लोग लंबे समय से कर रहे थे. अब जल्दी ही यहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खुलने वाला है. आगे इस क्षेत्र का और भी विकास होगा.
राजस्थान: 2 सीटों पर उपचुनाव के लिए भाजपा ने बनाई 40 स्टार प्रचारकों की सूची
राजस्थान की दो विधानसभा सीटों पर हो रहे उप चुनाव में प्रचार करने के लिए राजनाथ सिंह, भाजपा सांसद सनी देओल सहित 40 स्टार प्रचारकों की सूची बनाई है. ये नेता झुंझुनूं जिले के मंडावा और नागौर जिले के खींवसर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रचार करेंगे. दोनों सीटों पर 21 अक्टूबर को उप चुनाव होने वाला है. चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र में केंद्रीय मंत्रियों मुख्तार अब्बास नकली, प्रकाश जावड़ेकर, अर्जुन राम मेघवाल के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियां होंगी. मंडावा सीट पर भाजपा ने संतोष सीगड़ा को टिकट दिया है, जबकि खींवसर में गठबंधन के तहत हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय … Read more
हरियाणा: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम
हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक तंवर का पत्ता कट गया है, विधानसभा चुनाव के लिए जारी हुई कांग्रेस की दूसरी और अंतिम सूची में भी अशोक तंवर का नाम नहीं आया है. हाल ही में उन्हें हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. ऐसे में अशोक तवंर को हरियाणा में किसी भी सीट से टिकट नहीं दिए जाने कब बाद उनके बागी होने की सम्भावना भी प्रबल हो गई है. अस्तित्व बचाने में लगी कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) अकेले लड़ने का फैसला किया है. यही वजह है कि हरियाणा की सभी सीटों पर कांग्रेसी … Read more
दिग्विजय सिंह का बयान- इस्लाम की तरह हिंदुओं की कट्टरता भी खतरनाक, बीजेपी ने बताया देशद्रोह
कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) का विवादित बयानों से पुराना नाता चला आ रहा है. आए दिन वे किसी ना किसी सभा में विवादित बयान दे ही देते हैं. इस बार दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहकर संबोधित किया. इसके साथ ही दिग्विजय ने भाजपा पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से मुस्लिमों की कट्टरता खतरनाक है, उसी तरह हिंदुओं की भी कट्टरता खतरनाक है. बीजेपी ने कहा दिग्विजय सिंह का यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है, इनको पाकिस्तान में ही बस जाना चाहिए, बिना वीजा के रख लेगा पाकिस्तान.
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बुधवार को इंदौर में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इमरान खान का अतिवादी (रेडिकल) इस्लाम जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक उग्र हिंदुत्व भी है. इस दौरान उन्होंने इमरान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जी कहकर संबोधित किया. हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहना दिग्विजय के लिए कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं है. क्योंकि इससे पहले भी वे ओसामा बिन लादेन और हाफिज सईद को ‘जी’ कहकर संबोधित कर चुके हैं.
लोगों को सम्बोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि पं. नेहरू ने कहा था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता कहीं ज्यादा खतरनाक होती है. आज हम जो हालात पाकिस्तान में देख रहे हैं वो इसलिए है क्योंकि वहां बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए हैं. भारत में यदि बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए तो देश को बचाना मुश्किल होगा. भारत एक धार्मिक देश है, गांधीजी ने भारत की सनातनी परंपरा और संस्कृति को समझा था. सनातन धर्म में सत्य अहिंसा की बात होती है. आज अहिंसा ही संकट में है, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की परंपरा के साथ हमारा धर्म भी संकट में है.
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वहीं अनुच्छेद-370 पर सरकार के रुख का उल्लेख करते हुए दिग्विजय ने कहा कि आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो घोषणा कर देते कि मैं लाल किले से लाल चौक तक यात्रा करूंगा. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि कश्मीर समस्या का हल जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत से हो सकता है. सिंह ने वाट्सएप को समाज का दुश्मन करार देते हुए कहा कि झूठ को प्रचारित किया जा रहा है. आज युवा इसी में उलझे हुए हैं, बहस न करना कांग्रेसियों की सबसे बड़ी कमी है.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई और बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने (Vishwas Sarang BJP) कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान बहुत आपत्तिजनक है. सारंग ने कहा, ‘दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह बयान दिया है जिस भाषण को यूएन में इमरान खान ने जहां छोड़ा था उसी का एक्सटेंशन दिग्विजय सिंह का यह बयान है.’ सारंग ने आगे कहा, ‘दिग्विजय ने आतंकवाद और हिंदू को जोड़ने का प्रयास किया है और यह उनकी नई बात नहीं है. वह हर समय भगवा को लेकर, हिंदू को लेकर और हिंदुस्तान को लेकर विवादित बयान देते हैं. वह हर समय पाकिस्तानपरस्ती की बात करते हैं. मेरा मानना है उनका यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है.’
बीजेपी नेता विश्वास सारंग यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री को तो आप गाली देते हो जिसे 130 करोड़ जनता ने चुना है और जो पाकिस्तान का प्रधानमंत्री हिंदुस्तान में लगातार हमारे सैनिकों को मारने की बात करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है आप उसको ‘जी’ बोलते हो. संत समाज के कार्यक्रम में आप भगवा आतंकवाद की बात करते हो और जाकिर नायक के कार्यक्रम में जाकर उसको शांतिदूत बोलते हो. जिस चाल से दिग्विजय सिंह चल रहे हैं, मुझे ऐसा लगता है कि वह आने वाले दिनों में पाकिस्तान जाकर ही ना बस जाएं क्योंकि वहां उन्हें बिना वीजा के भी रख लिया जाएगा.’
वीडियो खबर: नारायण बेनीवाल के समर्थन में क्या बोले रूपाराम
बीजेपी विधायक रूपाराम (Ruparam) ने खींवसर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज कल नेता लोग जीतने के बाद अपने क्षेत्र को भूल जाते हैं. घूसखोरी में लिप्त हो जाते हैं. ऐसे लोग न खुद सुखी रहते हैं और न उनके क्षेत्र की जनता. हनुमान बेनीवाल ने हमें अपना प्रतिनिधि दिया है जो नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) है. उनके बारे में यहां का बच्चा बच्चा जानता है. वे सरल हैं और आसानी से मिल जाते हैं. विश्वास है कि वे क्षेत्र की जनता का पूरा ध्यान रखेंगे.
अगर कांग्रेस खींवसर-मंडावा हारी तो जोधपुर जैसी होगी गहलोत की विदाई: बेनीवाल
नागौर सांसद और RLP चीफ हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने खींवसर (Khivnsar) में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए जमकर गहलोत सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि राजस्थान के खींवसर और मंडावा में होने वाले उपचुनाव असल में एक सेमीफाइनल मैच है. अगर कांग्रेस इन दोनों विधानसभा सीटों पर चुनाव हारती है तो गहलोत की विदाई ठीक वैसी ही होगी, जैसी जोधपुर से हुई थी. उन्होंने कहा कि गहलोत अपने सुपुत्र वैभव को लोकसभा चुनाव के सहारे सदन में पहुुंचाना चाहते थे लेकिन गजेंद्र सिंह शेखावत ने उनकी इस मंशा को खत्म कर दिया. अब खींवसर-मंडावा में जीत के साथ गहलोत के दांत खट्टे करने हैं. हनुमान अपने भाई नारायण बेनीवाल के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे. नारायण बेनीवाल उपचुनाव में खींवसर विधानसभा सीट से RLP के उम्मीदवार हैं.
उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि हनुमान के अलावा एक और किसान का बेटा बीजेपी का अध्यक्ष बना है. खींवसर और मंडावा में जीत की गूंज न केवल सतीश पूनिया का कद दिल्ली में और बढ़ाएंगी बल्कि प्रधानमंत्री मोदीजी तक भी पहुंचेगी. बेनीवाल ने कहा कि आपका भाई हनुमान चाहे सांसद बन गया है लेकिन आपको हकों की लड़ाई हमेशा लड़ता रहेगा.
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि खींवसर की जनता पर मुझे पूरा भरोसा है. पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनावों में मैंने यहां दो या चार सभाएं ही की थी लेकिन आपने मुझे जिताया. इस बार मुझे मंडावा भी जाना है और गहलोत के दांत खट्टे करने हैं.
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उन्होंने जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह का यहां आने पर धन्यवाद करते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय से ही नागौर और जोधपुर की धरती अकालग्रस्त का दंश छेल रही है लेकिन वो दिन दूर नहीं जब आपका भाई हनुमान मंत्रीजी और प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर मारवाड़ की धरती पर सिंचाई का पानी लाकर देगा.
सांसद बेनीवाल ने कहा कि मोदीजी ने जिस तरह धारा 370 हटाई, विकास के कार्यों को गति दी, उसे देखते हुए हनुमान खींवसर-मंडावा तो क्या, जरूरत पड़ी तो हरियाणा और महाराष्ट्र भी बीजेपी के प्रचार के लिए जाएगा. नागौर सांसद ने खींवसर की जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि शरीर में जब तक खून का आखिरी कतरा रहने तक हनुमान अपने छोटे भाईयों के लिए जयपुर और दिल्ली की सड़कों पर हूंकार भरता रहेगा.
इस मौके पर नारायण बेनीवाल, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, अरूण चतुर्वेदी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, गजेंद्र सिंह खींवसर, राम नारायण डूडी, जसवंत सिंह विश्नोई, विधायक मोहन, विधायक रूपाराम, इंद्रा बावरी और पुखराज गर्ग सहित कई नेता और गणमान्य लोग मौजूद रहे.