वीडियो खबर: भुखमरी सरकार जनता को लूट कर करेगी भरपाई: किरोड़ी

Kirodi Lal Meena

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. पॉलिटॉक्स को दिए एक एक्सक्यूसिव इंटरव्यू में भाजपा राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने गहलोत सरकार के स्टेट हाईवे टोल को फिर से शुरू करने के सवाल पर कहा कि पहली बार सरकार भुखमरी की कगार पर खड़ी है और जनता को लूट कर अपनी भरपाई करेगी. उन्होंने कहा कि हर 40 या 50 किमी. पर लगे जो टोल आमजन को परेशान करते थे, भाजपा सरकार ने उन सभी को टोल मुक्त किया लेकिन कांग्रेस ने दुबारा शुरू करके जनता को आर्थिक दंड दिया है. इसे समाप्त करना चाहिए. भाजपा प्रदेशभर में इसके लिए आंदोलन कर रही है और मैं इसमें साथ हूं. साथ ही उन्होंने निकाय चुनावों में भाजपा की जीत का दावा भी ठोका.

पी.चिदम्बरम को षडयंत्र के तहत जेल में बंद किया गया, टोल टैक्स का फैसला मैंने अपने अनुभव के आधार पर लिया: गहलोत

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बुधवार से दिल्ली प्रवास पर रह रहे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार सुबह तिहाड जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से मुकालात की. मुलाकात के बाद गहलोत ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि चिदंबरम को षडयंत्र के तहत जेल में बंद किया गया है. 25 साल पहले जब में टेक्सटाइल मंत्री था तब से देख रहा हूँ, चिदम्बरम ने ने 45 साल तक विभिन्न पदो पर रहते हुए देश की सेवा की. 45 साल देश की सेवा करने के बाद उन्हें यह इनाम मिला कि बिना कोई मुकदमे, बिना किसी आरोप के उन्हें जेल में बंद कर दिया गया.

वहीं अर्थव्यवस्था की बात करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि देश में मंदी का दौर चल रहा है. सभी व्यापारों में निर्यात कम हो गया है. देश में कृषि और उद्योगों के बुरे हालात है. किसानों का क्या होगा चिदंबरम जेल में बैठे-बैठे देश के हालातों की चिंता कर रहे हैं. आप सोच सकते हैं जो देश भक्त होता है वही देश के भविष्य की चिंता करता है. साथ ही गहलोत ने कहा कि पीएमओ मॉनिटरिंग करता है और एजेंसीज कार्रवाई शुरू कर देती है. देश में भय का माहौल है उद्योगपति हो या व्यापारी सभी भय से ग्रसित है. वहीं चिदंबरम को जल्द जमानत की उम्मीद भी गहलोत ने जताई.

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गहलोत ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इंद्राणी मुखर्जी, जो खुद बेटी की हत्या के केस में जेल में बंद है, उसकी गवाही को आधार बनाकर चिंदबरम को जेल में बंद कर दिया गया. इस तरह से देश में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. पूरा देश देख रहा है इसके नतीजे एनडीए सरकार ने भुगतने शुरू कर दिए है. प्रधानमंत्री मोदी जिस प्रकार से धारा 370 की बात करते हैं, कभी सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं, चुनाव से पहले सर्जिकल स्ट्राइक हो रही है, तो यह देश मूर्ख नहीं है. इसके साथ ही गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद को खत्म करने पर कहा कि पूरा देश पूरी कांग्रेस आतंकवाद के खिलाफ पीएम मोदी के साथ खड़ी है.

वहीं सीएम गहलोत ने पहलू खान को ब्रांड एंबेसेडर बनाने के सवाल पर कहा कि अगर पहलू खां ब्रांड एंबेसडर बनता है तो अच्छी बात है. उससे मॉब लिंचिंग रूकती है तो मुझे खुशी होगी, पहलू खान को मैं नहीं पूरा देश, पूरा मीडिया उसको एंबेसेडर बनाकर ही चले उसमें तकलीफ क्या है. मॉब लिंचिंग के नाम पर बिना किसी कारण जिसकी हत्या कर दी गई हो, मरने के बाद उस व्यक्ति का नाम ब्रांड एंबेसेडर के रूप में लिया जाए तो बुरा नहीं है. जिस पहलू खान को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया हो तो इससे बड़ा तमाचा पिछली वसुंधरा सरकार पर ओर क्या होगा. पहलू खान पूरे देश में हर मॉब लिंचिंग के समय याद आएगा. बता दें, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत पर तंज कसते हुए कहा था कि सरकार द्वारा पहलू खान को ब्रांड एंबेसडर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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वहीं पिछले दो दिन से प्रदेश के सबसे गरम मुद्दे स्टेट हाइवे पर निजि वाहनों के टोल शुरू करने के सवाल पर सीएम गहलोत ने कहा कि टोल शुरू करने का फैसला अच्छा और जनहित का फैसला है. टोल शुरू करने का फैसला किसी अकेले का नहीं है यह पूरी कैबिनेट और सरकार का फैसला है. जनहित में कोई फैसला होता है तो उसका सभी को स्वागत करना चाहिए सभी समझदार व्यक्ति इस फैसले का स्वागत करेंगे. साथ हि गहलोत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बिना सोचे समझे चुनाव जीतने के लिए टोल फ्री कर दिए थे. अब ठेकेदार कोर्ट के चक्कर लगा रहे है सरकार के खिलाफ मुकदमें कर रहें है.

प्रदेश में निकाय चुनाव से ठीक पहले टोल वापसी के सवाल पर गहलोत ने कहा कि मै जनता के आशीर्वाद से तीसरी बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बना और चुनाव सामने है. प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तब यह फैसला किया है तो सोच समझ कर के ही किया है. चुनाव में हार जीत होती रहती है लेकिन जनहित पहले है. स्टेट हाइवे पर टोल फिर से शुरू करने का मेरा फैसला है मैंने सोच समझ कर ये फैसला किया है और अपने अनुभव के आधार पर किया है.

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वीडियो खबर: टोल के सवाल को टाल गए पायलट

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने आगामी निकाय चुनावों में जीत का दावा करते हुए कहा कि सभी जगह कांग्रेस के बोर्ड बनेंगे. वहीं जब उनसे प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए स्टेट हाईवे टोल के बारे में पूछा गया तो वो साफ तौर पर इस सवाल को टाल गए.

वीडियो खबर: कांग्रेस ने टोल टैक्स लगा जनता को दिया दिवाली का तोहफा-पूनिया

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के स्टेट हाईवे टोल टैक्स पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे प्रदेश को जनता को दिया गया दिवाली गिफ्ट बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा इस बार चुप नहीं बैठेगी और इस पर आंदोलन करेगी.

वीडियो खबर: गहलोत सरकार ने वसुंधरा राजे के इस फैसले को बदला

Gehlot-Vasundhara on State Highway

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव से ठीक पहले गहलोत सरकार ने निजी चौपहिया वाहन मालिकों को बड़ा झटका देते हुए स्टेट हाईवे (State Highway) पर फिर से टोल देना अनिवार्य कर दिया है. पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने अपने अंतिम बजट के बाद वित्त विधेयक पेश करते समय अप्रैल 2018 से स्टेट हाईवे को निजी वाहनों के लिए टोल फ्री कर दिया था.

वीडियो खबर: उपचुनाव के बाद कांग्रेस की गोद में जा बैठी भाजपा-बेनीवाल

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. RLP के चीफ हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने निकाय चुनाव (Nikay Chunav) में भाजपा के गठबंधन तोड़ने पर करारा तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी ने धोखा दिया है. खींवसर चुनावों के बाद कांग्रेस की गोद में जा बैठी है भाजपा. साथ ही उन्होंने गरजते हुए कहा कि 2023 में एक किसान का बेटा ही राजस्थान का मुख्यमंत्री बनेगा.

वीडियो खबर: दिल्ली में क्या बोले सीएम अशोक गहलोत

Gehlot

राजधानी दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने मीडिया से वार्ता करते हुए कश्मीर में विदेशी डेलिगेस्ट के दौरे को संविधान और जनतंत्र की हत्या बताया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को सबक सिखाया है.

वीडियो खबर: पूनिया ने कांग्रेस पर लगाए सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करने के आरोप

निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर आयोजित हुई इस बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कांग्रेस पर सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करने के आरोप लगाये. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस इन निकाय चुनावों (Municipal Elections) में तिगडम बैठाने में लगी हुई है. चुनाव परिणाम आने के 7 दिन बाद अध्यक्ष पद का चुनाव होगा इससे जाहिर है कि सरकार इस दौरान अपने सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करके तिगडम बैठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

राजस्थान सीएम अशोक गहलोत की नजर में गाड़ी रखने वाला हर आदमी मालामाल

State highway Toll-Rajasthan

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश में चारों ओर आर्थिक मंदी का माहौल है. उद्योग खत्म हो रहे हैं और देशभर के नौजवान अपनी नौकरियों से हाथ धोकर घर बैठने को मजबूर हैं. एक सर्वे के अनुसार, साल 2020 तक देश के करीब 10 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे. राजस्थान जैसे राज्य की हालात तो और ज्यादा खराब है. इस दम घोटती महंगाई वाले माहौल में प्रदेश की गहलोत सरकार द्वारा स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों पर टोल (State highway Toll) फिर से लागू कर दिया गया है. हद तो तब हो गयी जब राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे जन विरोधी नहीं बल्कि जनहित का फैसला बताते हुए सरकार के इस निर्णय को स्वागत योग्य बताया.

अपने दिल्ली प्रवास के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जो लोग कार रखते हैं वो पूरी तरह से टोल चुकाने में सक्षम हैं. ऐसे में इसे मुद्दा न बनाएं. राजधानी दिल्ली में बयान देते हुए सीएम गहलोत ने कहा, ‘सड़कें 20-25 साल के ठेके पर हैं. इसमें निजी कारों का टोल शामिल है. सरकार पर तीन साल बाद एक हजार करोड़ तक का भार आएगा, इसे कैसे चुकाएंगे. कार चलाने वाले लोग टोल चुकाने में सक्षम हैं. उन्हें इसका मुद्दा न बनाकर जनहित के फैसला का स्वागत करना चाहिए’.

अब 1 नवम्बर रात 12 बजे बाद से हर नाके पर सभी प्राइवेट वाहनों को भी 30 से 55 रुपये तक टोल देना होगा. कहने को तो 30 से 55 रुपए एक छोटी रकम लगती है, अगर ये रकम एक साल या एक महीने में एक बार देनी हो तो बात अलग है लेकिन अगर यह छोटी रकम एक दिन में 200 से 300 किलोमीटर के सफर में 3 से 4 बार देनी पड़े और साथ में नेशनल हाइवे के भारी भरकम टोल को भी झेलना पड़े तब इस छोटी रकम की कीमत अगर कोई समझ सकता है तो वह है एक छोटी गाड़ी और सामान्य नौकरी पेशे वाला आम आदमी.

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इस बेरोजगारी और मंदी वाली परिस्थितियों के बीच गहलोत जी को आमजन की जेबें हलकी करने वाला ये तुगलकी फरमान भी जनहित का फैसला लग रहा है. वहीं लोकसभा चुनाव में केवल सत्ता के समीकरण साधने के लिए पेश हुए सरकार के पहले बजट में गहलोत ने कहा था, ‘पिछली सरकार में राजस्थान की जनता पर बेदर्दी के साथ टैक्स की मार पड़ी थी. विधानसभा चुनाव का भार भी जनता के माथे पड़ा है. ऐसे में जनता के साथ हमदर्दी रखते हुए कांग्रेस सरकार कोई नया टैक्स न लगाते हुए जनता के साथ न्याय कर रही है’. लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई, अब टोल टैक्स का भार भी जनता के सिर डाला गया है.

सीएम गहलोत की नजरों में जिन घरों में कार या निजी वाहन हैं, वे सभी पैसों में खेल रहे हैं और उन्हें 50 रुपये देने में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन अगर कोई छोटी कार व सामान्य नौकरी पेशे वाला आदमी दिन में दो या चार बार टोल पार करता है तब भी शायद गहलोत ये ही कहेंगे. अगर सच में सरकार को ईएमआई पर कार और घर खरीदने वाले प्रदेश के सामान्य नौकरी पेशा आदमी का 50 या 100 रुपये के हिसाब से महीने का तीन हजार रुपये का खर्च कोई भार नहीं लगता तो हाल में गहलोत सरकार ने डीए के नाम पर विधायकों के वेतन में 15 फीसदी की बढ़ोतरी क्यों की, जबकि सभी जानते हैं कि विधायकों को घर, कार, पेट्रोल, फोन सहित अन्य प्रकार के सभी खर्चे सरकार द्वारा ही वहन किए जाते हैं. ऐसे में उनके वेतन बढ़ाने की जरूरत क्यों हुई. वो भी तब जब जनता मंदी और कर्ज के भार के नीचे दबी जा रही है. ये भी याद दिला दें कि 18 महीने पहले ही पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने सभी विधायकों के वेतन में 12 फीसदी की बढ़ोतरी पहले ही कर दी थी.

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इसके दूसरी ओर, राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां दिल्ली, बिहार, बंगाल, नेपाल, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लोग भी यहां नौकरी और मजदूरी की तलाश में आते हैं. ये लोग कम दरों पर भी काम करने को तैयार हैं जिससे श्रम की न्यूनतम आय भी दिनोंदिन घटती जा रही है. सरकारी आंकड़ों पर नजर डाले तो राजस्थान का न्यूनतम वेतन केवल 5850 रुपये है. इनके एक दिन की सैलेरी 225 रुपये मात्र है. यह नोटिफिकेशन दिनांक 6 मार्च, 2019 को सी.बी.एस. राठौड़, अति श्रमआयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव, राजस्थान जयपुर ने जारी किया है जो 1 मई, 2019 से लागू है.

हालांकि इस बात में कोई संशय नहीं है कि अशोक गहलोत ने पिछले साल प्राइवेट वाहनों को स्टेट हाईवे टोल मुक्त कराने का फैसले को वसुंधरा सरकार का चुनावी हडकंडा बताया था, जो एकदम सच है. विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कुछ महीनों पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्टेट हाईवे टोल (State highway Toll) हटाया था. सरकार के इस फैसले से प्रदेश की जनता को थोड़ी ही सही लेकिन राहत मिली थी जिसे गहलोत सरकार अब छीन रही है. खुद सरकार में कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि एक बार छूट देने के बाद अगर टोल वापस लगेगा तो विरोध होगा. आंजना ने इस संबंध में मुख्यमंत्री गहलोत से बात करने को भी कहा है.

उधर विपक्ष इस बात को जोर शोर से हवा दे रहा है, ऐसे में विपक्ष के विरोध में आमजन के साथ सत्तापक्ष के कुछ नेताओं का साथ अगर मिल जाता है तो सरकार को अपने इस तुगलकी फरमान से पीछे हटना पड़ सकता है. सरकार को अपने इस हितकारी फैसले (State highway Toll) से सालाना 300 करोड़ रुपये की आय की चिंता है लेकिन दम तोड़ती महंगाई में इस तरह का फैसला कहां तक सही है. इस फैसले से निश्चित तौर पर प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह को हवा मिलेगी, ये भी तय है. दरअसल, स्टेट हाईवे मंत्रालय उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अधीन आता है लेकिन टोल वसूली का फैसला वित्त मंत्रालय से जुड़ा है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन है. ऐसे में वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के जरिए यह काम हो रहा है.

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पॉलिटॉक्स के नजरिये से गहलोत सरकार का यह कदम (State highway Toll) न केवल आत्मघाती सिद्ध होगा, साथ ही निकाय चुनावों में सत्ता पक्ष का पलड़ा उलटने वाला साबित हो सकता है. इस मामले में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि हर निर्णय को चुनाव के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जनभावना का ध्यान रखा जाना चाहिए. पायलट खुद पार्टी अध्यक्ष हैं और उन्हें टोल लगाने का फैसला उचित ही लगेगा. ऐसा कहकर जोशी ने वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव से वसूले जाने वाले टोल का मामला पायलट के पाले में डाल दिया है. लेकिन अगर इस फैसले का असर निकाय चुनावों पर पड़ता है तो निश्चित तौर पर प्रदेश सरकार का ये फैसला आमजन के लिए नहीं वरन् गहलोत सरकार के लिए आत्मघाती होगा.