महाराष्ट्र घमासान पर आया सर्वोच्च अदालत का ‘सुप्रीम’ फैसला, कल शाम 5 बजे होगा बहुमत परीक्षण

Supreme court verdict

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के सियासी घमासान पर देश की सर्वोच्च अदालत ने सुप्रीम फैसला (Supreme court verdict) देते हुए 27 नवम्बर बुधवार शाम 5 बजे तक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने का फैसला सुनाया है. विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फ्लोर टेस्ट में गुप्त मतदान नहीं कराने बल्कि पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलिकास्ट कराने के निर्देश भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए. बहुमत परीक्षण की यह प्रक्रिया प्रोटेम स्पीकर द्वारा करवाई जाएगी साथ ही अन्य संवैधानिक मुद्दों पर सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट 6 हफ्तों के बाद शुरू करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया का स्पष्टीकरण (Supreme court verdict) करते हुए कहा कि बुधवार सुबह 11 बजे … Read more

इलेक्ट्रॉल बॉन्ड को लेकर गहलोत ने मोदी सरकार पर साधा जमकर निशाना, कहा- समय पर नहीं चेते तो पता नहीं देश किस दिशा में जाएगा

Gehlot on Electoral Bond

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. चुनावी चंदे के लिए शुरू किए गए इलेक्ट्रॉल बॉन्ड (Electoral Bond)  को लेकर केन्द्र की मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है. इसी बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस मुददे पर केंद्र सरकार पर जमकर धावा बोल रहे है. मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के पुत्र के शादी समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, मैं कह चुका हूं कि यह एक बहुत बड़ा स्कैंडल है, 5000 करोड़ से ज्यादा के बॉन्ड जमा हुए हैं, 90% बीजेपी के पास में जमा हुए हैं, सरकार को चाहिए वह बताएं सच्चाई क्या है? जो आंकड़े आए हैं यह सही है क्या? और इस प्रकार से आप 90% एक तरफा ले आओगे आप, तो डेमोक्रेसी के अंदर तमाम पार्टियों की फंडिंग को आप ब्लॉक कर रहे हो, धमकी दे रहे हो कि आप हमें चंदा दो या नहीं तो कोई बात नहीं है पर आपने विपक्षी पार्टियों को चंदा क्यों दिया?

सीएम गहलोत ने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी द्वारा पूरे देश में खेल खेला जा रहा है. चुनाव लड़वा रहे है, जमकर पैसा खर्च कर रहे हैं, हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं, सभी जिलों में जमीन लेके ऑफिस बनवा रहे हैं, पैसा कहां से आ रहा है? साथ ही गहलोत ने कहा कि भाजपा के अलावा बाकी पार्टियों को ब्लॉक कर दिया तो फिर डेमोक्रेसी कैसे रहेगी, आप सभी पार्टियों के फंडिंग को ब्लॉक कर दो देश के अंदर खाली बीजेपी के पास में बॉन्ड (Electoral Bond) आएंगे.

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आगे गहलोत ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) का विरोध किया था. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी इसको लागू करते वक्त इसका विरोध किया था. तो केन्द्र सरकार ने इसको मनी बिल के रूप में पेश किया गया ताकि राज्यसभा में बहस नहीं हो. मनी बिल की बहस केवल लोकसभा में होती है. इसलिए इसको मनी बिल के रूप में कन्वर्ट किया गया और सिर्फ लोकसभा में पास करवा कर लागू करवा दिया गया. इस प्रकार से यह लोग शासन करेंगे, आपको मालूम है दबाव में ईडी भी, सीबीआई भी सब दबाव में है ही जुडिशरी भी, तो देश किस दिशा में जाएगा जवाब देना चाहिए इन लोगों को. इसलिए बहुत ही हालात खराब है गंभीर स्थिति से देश गुजर रहा है.

युवाओं से अपील करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि आम जनता, छात्रों और नौजवानों से मैं अपील करना चाहूंगा कि समय रहते हुए संभल जाओ, सोशल मीडिया की जो टीमें है बीजेपी के उस चक्कर में मत आओ, खुद देखो गूगल में क्या है, दुनिया एवं देश में क्या हो रहा है, अर्थशास्त्री क्या कह रहे हैं, अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है. उस पर हमें चिंतन मनन करना चाहिए उसके बाद में अपनी सोच बनानी चाहिए. मेरी नौजवानों से अपील है, क्योकि आने वाला कल उनका है यह मेरा निवेदन है कि वह समय पर नहीं चेते पता नहीं देश किस दिशा में जाएगा.

क्या है चुनावी बॉन्‍ड (Electoral Bond)?

केंद्र सरकार ने देश के राजनीतिक दलों के चुनावी चंदे को पारदर्शी बनाने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में चुनावी बॉन्‍ड (Electoral Bond) शुरू करने का एलान किया था. चुनावी बॉन्‍ड का इस्तेमाल व्यक्तियों, संस्थाओं, भारतीय और विदेशी कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए किया जाता है. नकद चंदे के रूप में दो हजार से बड़ी रकम नहीं ली जा सकती है. सरकार की दलील है कि चूंकि बॉन्‍ड पर दानदाता का नाम नहीं होता है, और पार्टी को भी दानदाता का नाम नहीं पता होता है. सिर्फ बैंक जानता है कि किसने किसको यह चंदा दिया है. इसका मूल मंतव्य है कि पार्टी अपनी बैलेंसशीट में चंदे की रकम को बिना दानदाता के नाम के जाहिर कर सके.

‘तुम लोग महाराष्ट्र-महाराष्ट्र खेलते रह गए उधर अमित शाह मध्यप्रदेश में सरकार बनाने जा रहे हैं’

Jyotiraditya M.Scindia

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में चल रहा राजनीतिक घमासान अभी तो थमा भी नहीं उससे पहले ही मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया. इस भूचाल को पैदा करने का श्रेय जाता है कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya M.Scindia) को, जिन्होंने टविटर और फेसबुक बायो से पूर्व कांग्रेस मंत्री व सांसद हटाकर ‘पब्लिक सर्वेंट और क्रिकेट प्रेमी’ लिख सबको चौंका दिया. राजनीति के जानकारों के साथ साथ अन्य लोग भी यही मान रहे हैं कि उन्होंने आखिरकार कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया. हालांकि खबर लिखे जाने तक अधिकारिक तौर पर उन्होंने कोई घोषणा नहीं की. लेकिन इस खबर के आउट होते ही ये सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंडिंग … Read more

राजस्थान के 49 निकायों में अध्यक्ष का चुनाव मंगलवार को, कांग्रेस के दो, BJP का एक अध्यक्ष हो चुका है निर्विरोध निर्वाचित

(Local Body President)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान की 49 निकायों के 2105 वार्ड पार्षदों में (Local Body President) पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन), महापौर (मेयर) और सभापति का चुनाव मंगलवार को होना है. ये चुनाव संबंधित निकायों में सुबह दस से अपरान्ह दो बजे तक होंगे. निकायों में निर्वाचित पार्षद इनके लिए मतदान करेंगे. अध्यक्ष पद के लिए 104 उम्मीदवार मैदान में है. प्रदेश की रूपवास, मकराना और निंबाहेड़ा में अध्यक्ष का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका है. रूपवास में भाजपा की बबीता देवी, निंबाहेड़ा में कांग्रेस के सुभाषचंद्र और मकराना में कांग्रेस की ही समरीन निर्विरोध अध्यक्ष बने हैं. शनिवार को अध्यक्ष पद (Local Body President) के चुनाव के लिए नाम वापसी का अंतिम … Read more

ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने पकड़ा जोर, पहले मुख्यमंत्री बाद में प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाए जाने से बढ़ी नाराजगी

(Scindia Jyotiraditya)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के सियासी घमासान के बीच मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Scindia Jyotiraditya) के कांग्रेस पार्टी छोड़ने और बीजेपी में जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. दरअसल, सिंधिया ने अपने ट्वीटर हैंडल पर अपना स्टेटस बदलते हुए कांग्रेस सहित अपने सभी पूर्व पदों का नाम हटाकर खुद को एक लोकसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया है.

विधानसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए सिंधिया (Scindia Jyotiraditya) और कमलनाथ के बीच चली लम्बी खींचतान के बीच तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कमलनाथ को मुख्यमंत्री घोषित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसके ठीक बाद सिंधिया की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात ने चर्चाओं का बाजार गरमा दिया था. हाल ही में हुई ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद सिंधिया के अपने ट्विटर हैंडल से कांग्रेस का नाम हटाने से एक बार फिर उनके बीजेपी में जाने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है. हालांकि सिंधिया ने ऐसी किसी सम्भावना को साफ नकार दिया है.

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अपने ट्विटर हैंडल स्टेटस में कांग्रेस का नाम नहीं होने पर सिंधिया (Scindia Jyotiraditya) ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “मैंने एक महीने पहले यह बदलाव किया था, लोगों की सलाह पर मैंने अपना बायो छोटा कर दिया. इसे लेकर उड़ रहीं अफवाहें आधारहीन हैं.” सिंधिया ने भले ही स्पष्टीकरण दे दिया हो लेकिन पिछले कुछ महीनों से चल रहे तमाम घटनाक्रमों के चलते कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस से नाराज सिंधिया बीजेपी जॉइन कर सकते हैं.

बता दें, महाराज के नाम से प्रसिद्ध ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश का कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाए पर उनके समर्थक, कार्यकर्ता और यहां तक कि कुछ मंत्री भी अपनी गहरी नाराजगी जता चुके हैं. मध्य प्रदेश में भारी बारिश के दौरान चंबल इलाके में आई बाढ़ के बाद वे लगातार गांव-गांव जाकर लोगों से मिले थे और प्रदेश सरकार से उन्हें जल्द राहत देने की बात कही थी. अक्टूबर में सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 4 पत्र लिखे थे, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद और प्रदेश की सड़कों की हालिया हालत पर काम करने की बात कही थी. वहीं नवंबर महीने में भी सिंधिया ने कमलनाथ को पत्र लिखते हुए दतिया के लोगों की समस्याओं के बारे में बताया था, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री द्वारा इन पत्रों का कोई जबाव नहीं दिया गया. बताया जा रहा है कि कमलनाथ सरकार द्वारा सिंधिया के पत्रों को तवज्जो नहीं देने से सिंधिया में जबरदस्त नाराजगी है, जिससे उन्होंने आलाकमान को भी अवगत करवाया है.

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में सिंधिया की मुख्यमंत्री के लिए प्रबल दावेदारी के बावजूद कमलनाथ को सीएम बनाए जाने के ठीक बाद शिवराज सिंह से सिंधिया की मुलाकात की खबर सामने आई थी. हाल ही में कुछ दिनों पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी. हालांकि मुलाकात के बाद सिंधिया की तरफ से कहा गया कि मध्यप्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों के सन्दर्भ में बातचीत करने गए थे. बता दें, केन्द्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के मसले पर भी सिंधिया खुल कर वह केन्‍द्र सरकार के साथ नजर आये थे.

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जानकारों की मानें तो मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया (Scindia Jyotiraditya) नाराज चल रहे हैं. मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया को सामने रख चुनाव लड़ा गया था. लेकिन चुनाव में जैसे ही कांग्रेस को बहुमत मिला, कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनवा दिया. यहां तक कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कमलनाथ को ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया हुआ है. अगस्त-सिंतबर में एक बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के अध्यक्ष बनने की अटकलें भी चलीं, दिल्ली में उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोेनिया गांधी से मुलाकात भी हई. उस समय चर्चा थी कि सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की ओर एक बार फिर से प्रदेश कांग्रेस का फैसला टाल दिया गया.

ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि सिंधिया और कांग्रेस पार्टी के बीच कुछ तो ऐसा है जो गलत है वरना ऐसे ही कोई पार्टी का नाम अपने स्टेटस से नहीं हटाता है. और वैसे भी आजकल देश में रातों-रात बड़े-बड़े तख्त बदल जाते हैं, महाराष्ट्र की घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, तो ऐसे में प्रदेश में बहुमत के किनारे पर खड़ी कांग्रेस के साथ भी ऐसा हो जाए कि रातों-रात ज्योतिरादित्य सिंधिया (Scindia Jyotiraditya) बीजेपी से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएं तो शायद कोई बड़े आश्चर्य वाली बात नहीं होगी.

वीडियो खबर: बीजेपी की ‘रातनीति’ पर भारी पड़ी शरद पवार की राजनीति

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में रातोरात सियासी तख्ता ऐसा पलटा कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की बनती बनती सरकार किनारे आकर भी न बन सकी और दूसरे किनारे पर खड़ी भाजपा ने सरकार बना ली. फडणवीस मुख्यमंत्री और अजित पवार डिप्टी सीएम बन बैठे लेकिन शाम होते होते शरद पवार ने अपने राजनीति अनुभव को ऐसा भुनाया कि अजित पवार के खेमे में गए सभी 42 के 42 विधायक वापिस शरद पवार के झंडे के नीचे आ खड़े हुए.

महाराष्ट्र के सियासी घमासान के बीच मध्यप्रदेश में गर्माई राजनीति, सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल से हटाया ‘कांग्रेस और पूर्व मंत्री व सांसद’ का स्टेटस

Jyotriaditya Scindia

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में चल रहा राजनीतिक घमासान अभी थमा भी नहीं है कि उधर मध्यप्रदेश में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotriaditya Scindia) ने अपने टविटर प्रोफाइल से पूर्व मंत्री व सांसद हटाकर केवल ‘क्रिकेट प्रेमी और पब्लिक सर्वेंट’ लिख मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है. जानकारों की मानें तो इसका सबसे बड़ा कारण सिंधिया की कमलनाथ सरकार के प्रति बढ़ती नाराजगी है. दरअसल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को कई बार पत्र लिखकर सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर कर चुके है. साथ ही सरकार की कार्यशैली की शिकायत आलाकमान तक कर चुके … Read more

महाराष्ट्र: फिर अटका फ्लोर टेस्ट पर फैसला, अब कल 10.30 बजे आएगा ‘सुप्रीम’ फैसला

Floor Test in Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. पिछले एक महीने से महाराष्ट्र में चल रहा सियासी ड्राम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. आज फिर एक बार देवेंद्र फडणवीस सरकार के भविष्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट में अटक गया. सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बैंच ने विधानसभा में फ्लौर टेस्ट (Floor Test) पर फैसला सुरक्षित रख लिया. अदालत मंगलवार सुबह 10:30 बजे फ्लोर टेस्ट पर अपना निर्णय सुनाएगी. इस तरह फडणवीस सरकार को अपनी तैयारियों के लिए 24 घंटे का समय और मिल गया है. महाराष्ट्र में चोरी छिपे शनिवार सुबह को जिस तरह देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली, उसके … Read more

मोदी जी ने की महाराष्ट्र में फर्जीकल स्ट्राइक, अब बीजेपी की हो गई है उल्टी गिनती शुरू: अशोक गहलोत

Ashok Gehlot on Modi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में चल रहे सियासी घमासान के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Gehlot on Modi) ने एक बार फिर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा है कि राज्यपाल महाराष्ट्र को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए उनकी भूमिका जो रही है वह बीजेपी से मिलीभगत करके रही है जो अनफॉर्चूनेट है. राज्यपाल की भूमिका जो होती है वह इस प्रकार होती है कि आप कन्वींस हो जाओ उसके बाद में आप रिकमंड करो कैबिनेट को, लेकिन कब तो रिकमेंड किया, कब सुनवाई हुई, कब फैसला हुआ, कब राष्ट्रपति महोदय ने साइन किए और सुबह … Read more

वीडियो खबर: राजस्थान में एक बार फिर बढ़ने वाले हैं बिजली के दाम-बेनीवाल

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. श्रीगंगानगर के डीएवी कॉलेज में हुए एक समारोह में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी शिरकत की. यहां उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपका भाई हनुमान केवल किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहा है. हमारी संघर्ष के कारण ही पिछली सरकार में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किसानों के लिए बिजली और उन्हें राहत देने के लिए राज्य स्तरीय टोल हटाया था लेकिन वर्तमान गहलोत सरकार ने न केवल बिजली के दाम बढ़ाए बल्कि टोल शुल्क को भी ​​लागू कर दिया. ऐसा ही चलता रहा तो एक ​बार फिर बिजली के दाम बढ़ाए जाएंगे.

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