दो भाईयों की लड़ाई में कहीं शरद पवार के हाथ न लग जाए छीका

महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव की तारीख तय हो चुकी है. यहां विधानसभा की 288 सीटों पर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 अक्टूबर को हो जाएगा. मतदान 21 अक्टूबर को होगा. पिछली बार की तरह इस बार भी यहां दो भाई आपस में सीटों की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बार लड़ाई पहले से गहरी है. यहां सत्ता का बंटवारा भी हो रहा है जिसके लिए बड़ा भाई तैयार तो छोटा भाई नाखुश है. महाराष्ट्र के ये दोनों भाई हैं शिवसेना और भाजपा. वि.स. चुनावों को अब कुछ ही दिन शेष हैं लेकिन दोनों के बीच सीट बंटवारे को लेकिन सहमति नहीं बन पायी. साथ ही शिवसेना सत्ता में … Read more

खींवसर सीट पर बेनीवाल से तालमेल वसुंधरा राजे के लिए एक और झटका

खींवसर सीट (Khivansar Assembly) पर होने वाले विधानसभा उप चुनाव में भाजपा ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से तालमेल करते हुए रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) को समर्थन देने की घोषणा कर दी. यह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के लिए निराशाजनक है. विधानसभा उपचुनाव में भाजपा-रालोपा में तालमेल की घोषणा से एक दिन पहले बुधवार को हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी का भाजपा से तालमेल हो गया तो पूर्व मुख्यमंत्री राजे अप्रासंगिक हो जाएंगी.हनुमान बेनीवाल के बयान के अगले ही दिन जयपुर में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बेनीवाल के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करते हुए खींवसर सीट पर भाजपा-रालोपा में तालमेल की घोषणा की थी.

बड़ी खबर: मंडावा विधानसभा से बीजेपी ने सुशीला सिंगड़ा को प्रत्याशी बना सबको चौंकाया

खींवसर सीट हनुमान बेनीवाल के 2019 में नागौर से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी. पत्रकारों ने इस मौके पर उनसे एक दिन पहले दिए गए बयान का खुलासा करने के लिए कहा तो बेनीवाल ने तो इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि आप समझे नहीं कि कल मैंने क्या कहा था. उन्होंने यह कह कर कि पिछले दस साल से उनकी राजे के साथ कोई बात नहीं हुई है, बयान की जैसे पुष्टि कर दी.

बेनीवाल ने कहा कि मेरे बयान को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि राजे और यूनुस खान सहित उनके समर्थकों ने मेरी उम्मीदवारी का विरोध किया था. लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ मेरा तालमेल हुआ था. इसमें राजे की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने दावा किया कि मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए काम कर रहा हूं. मेरा लक्ष्य है कि प्रशासन का जो मॉडल मोदी ने लागू किया है, उसे पूरे देश में लागू होना चाहिए.

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में भाजपा नेताओं, जिनमें राजे के समर्थक भी शामिल हैं, की चुप्पी को बेनीवाल के बयान का समर्थन माना जा रहा है. खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल का समर्थन भी भाजपा में वसुंधरा राजे का महत्व कम होने का संकेत है.

राजे के समर्थक एक भाजपा नेता ने पूरे घटनाक्रम को निराशाजनक बताया है. उन्होंने कहा कि बेनीवाल के बयान को लेकर शुरू हुए विवाद में कोई भी उलझना नहीं चाहता है. जब तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया की प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक कोई कुछ नहीं बोलेगा.वसुंधरा राजे ने अधिकृत तौर पर इस मामले में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

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हनुमान बेनीवाल ने 2009 में वसुंधरा राजे के साथ मतभेद होने के बाद भाजपा छोड़ दी थी. उन्होंने 2013 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 2018 के विधानसभा चुनाव से दो माह पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) नाम से अपनी नई पार्टी बना ली थी. भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने बेनीवाल के साथ तालमेल की घोषणा से पहले राजे के साथ कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था.

महाराष्ट्र में ईडी के जरिए शरद पवार को घेरने का दाव पड़ा उल्टा

आखिर राकांपा (NCP) अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) को प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में नहीं जाने का फैसला करना पड़ा. महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में मनी लांड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जैसे ही राकांपा प्रमुख शरद पवार से पूछताछ करने के संकेत दिए, वैसे ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव (Maharastra Assembly Election) से ठीक पहले राकांपा ने शरद पवार के खिलाफ केंद्र की मोदी सरकार के विरोध की जमीन तैयार कर ली. मंगलवार को पवार से ED की पूछताछ की संभावना की खबर मीडिया में आई थी, उसके बाद से महाराष्ट्र की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. बैंक … Read more

महाराष्ट्र: बीजेपी और शिवसेना के बीच नहीं बनी सीटों पर सहमति

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly election 2019) में बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) के बीच सीटों के बंटवारे का पेंच अभी भी फंसा हुआ है. सूत्रों की मानें तो सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना और बीजेपी सहमत नहीं हए हैं और दोनों की अलग-अलग मांगें हैं. शिवसेना जहां कम से कम 126 सीटों की मांग कर रही है, वहीं बीजेपी 120 से अधिक सीटें नहीं देना चाह रही है. कहा तो यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर भी शिवसेना संतुष्ट नहीं है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेक गुरुवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने महाराष्ट्र (Maharastra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र … Read more

वीडियो खबर: हनुमान बेनीवाल ने दिलाया मंडावा में जीत का भरोसा

RLP चीफ और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने मंडावा विधानसभा सीट (Mandawa Assembly) पर उपचुनाव जीतने का दावा किया. मंडावा (Mandawa) के साथ खींवसर सीट पर भी उप चुनाव होने हैं. 21 अक्टूबर को मतदान होगा जबकि नतीजें 24 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे.

राजस्थान: खींवसर में RLP और मंडावा में BJP लड़ेगी उपचुनाव

राजस्थान विधानसभा उपचुनाव (Rajasthan Assembly By-Election-2019) में BJP ने खींवसर सीट हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के लिए छोड़ने का एलान कर दिया है. तो वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने भी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का धन्यवाद देते हुए भरोसा दिलाया कि मंडावा में BJP को 40 से 50 हजार वोटों जीत दिलाएंगे. साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि गहलोत अपने बेटे का वैभव बचाने के लिए RCA का अध्यक्ष बनाने में जुटे हैं. राजस्थान में खींवसर व मंडावा सीट पर विधानसभा उपचुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है. यहां 21 … Read more

शरद पवार के खिलाफ ईडी की जांच से महाराष्ट्र में राजनीतिक तूफान

महाराष्ट्र (Maharastra) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में मनी लांड्रिंग की जांच शुरू कर दी है, जिसमें NCP प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar), उनके भतीजे अजित पवार, राकांपा नेता ईश्वरलाल जैन, शिवाजीराव नलावडे, कांग्रेस नेता मदन पाटिल, दिलीपराव देशमुख, शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल सहित 75 लोगों के नाम हैं. मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की थी. उसी के आधार पर ईडी ने सोमवार को इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करते हुए प्रारंभिक जांच शुरू की है. यह मामला 2007 से 2011 के दौरान महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव (एमएससी) बैंक में हुए करीब 1000 करोड़ रुपए के घोटाले से … Read more

वीडियो खबर: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में खींवसर बनी हॉट सीट

राजस्थान (Rajasthan) की खींवसर (Khivansar) और मंडावा (Mandawa) सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव (Assembly By Election) की तारीख का ऐलान हो चुका है. अब सभी की नजरें उम्मीदवारों के नामों की घोषणा पर टिक गई हैं. टिकट के दावेदार उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं के पास लॉबिंग शुरू कर दी है. इसी कड़ी में खींवसर सीट के लिए रालोपा से सम्भावित उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के छोटे भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) भी क्षेत्र में बहुत सक्रिय हो गए हैं.

वीडियो खबर: खींवसर में जीत की हैट्रिक लगा चुके बेनीवाल से कैसे पार पाएगी कांग्रेस

राजस्थान (Rajasthan) की खींवसर और मंडावा (Mandawa) सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तारीख का ऐलान हो चुका है. सभी की नजरें उम्मीदवारों के नामों की घोषणा पर टिक गई हैं. उपचुनाव में खींवसर सीट को हॉट सीट माना जा रहा है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक लगा चुके हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के नागौर से लोकसभा सांसद चुने जाने से खींवसर सीट खाली हुई है. यहां बेनीवाल से पार पाना BJP और Congress दोनों के लिए ही टेड़ी खीर साबित होने वाला है.

महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के हालात अलग-अलग

महाराष्ट्र (Maharastra) और हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनावों की तारीख तय हो गयी है. महाराष्ट्र की 288 और हरियाणा की 90 सीटों पर 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं. नतीजें 24 अक्टूबर को आएंगे. दोनों राज्यों में भाजपा की स्थिति तो पिछले बार की तरह काफी मजबूत है लेकिन कांग्रेस की दोनों प्रदेशों में स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क है. हरियाणा में एक तरफ कांग्रेस के सभी दिग्गज, पूर्व विधायक और स्थानीय कार्यकर्ता तक चुनाव टिकट पाने की लाइन में लगे हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में कांग्रेस के पास एक इकलौती सीट को छोड़ 287 सीटों पर खड़े करने के लिए उम्मीदवार तक नहीं है.

सबसे पहले बात करें हरियाणा की तो यहां 90 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनावों की पूरी जिम्मेदारी प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथों में है. यहां हुड्डा अपने करियर की अंतिम पारी खेलने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते इसलिए एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं. चर्चा है पार्टी आलाकमान ऐसे तमाम नेताओं को चुनाव में उतारेगी जो जीत सकते हैं. इनमें लोकसभा का चुनाव लड़ चुके करीब-करीब सारे नेता विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं. कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस बार सोनीपत से लोकसभा चुनाव हारे थे लेकिन विधानसभा चुनाव में उनका टिकट पक्का है. हालांकि वे वर्तमान विधायक हैं. उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक लोकसभा सीट से मामूली अंतर से हारे थे. उनका भी टिकट फाइनल ही है.

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कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला कैथल सीट से चुनावी जंग में ताल ठोकेंगे. कांग्रेस विधायक दल की नेता रही किरण चौधरी भी चुनाव में उतरने को तैयार है. हरियाणा जनहित कांग्रेस का विलय कर कांग्रेस में शामिल हुए कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई सहित चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के.अजय यादव का विधानसभा चुनाव में उतरना करीब-करीब पक्का है. कुल मिलाकर कहा जाए तो राज्यसभा सांसद और कांग्रेस की हरियाणा ईकाई की अध्यक्ष कुमारी शैलजा को छोड़ सारे बड़े पार्टी नेता विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं.

अब आते हैं महाराष्ट्र पर जहां कांग्रेस के पास उम्मीदवारों का टोटा ही पूर्ण संकट है. यहां पार्टी का कोई भी बड़ा नेता विधानसभा चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं है. इसकी वजह है कि यहां पार्टी के अधिकतर नेता दो बार से ज्यादा लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. शरद पवार की पार्टी एनसीपी से गठजोड़ होने के बाद भी इनके जीतने की संभावना लगभग क्षीण है. गौर करने वाली बात ये है कि यहां चुनावों से पहले ही सोशल मीडिया पर भाजपा-शिवसेना एलायंस की जीत का माहौल है. ऐसे में कांग्रेस नेता चुनावी मैदान में उतरने से घबरा रहे हैं. कांग्रेस और एनसीपी के बड़े नेताओं का भाजपा या शिवसेना में शामिल होने से स्थिति और भी बदतर हो चली है.

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बहरहाल, कांग्रेस के पास जो बड़े नेता बचे हैं, उनमें से अशोक चव्हाण को छोड़ कोई भी चुनाव लड़ने को राजी नहीं. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण तक चुनाव नहीं लड़ना चाहते. दिग्गज़ नेता सुशील शिंदे, पूर्व सांसद राजीव सातव भी इस दंगल से बचते फिर रहे हैं. आलाकमान पूर्व सांसद रह चुके रजनी पाटिल, मिलिंद देवड़ा, संजय निरूपम और प्रिया दत्त को महाराष्ट्र चुनाव में उतारना चाहता है लेकिन इनमें से कोई भी आगे नहीं आना चाहता. कांग्रेस की इस फटे हाल हालत को देखते हुए सियासी गलियारों में ये मैसेज पहले से ही पहुंच गया है कि प्रदेश में कांग्रेस ने जंग से पहले ही हथियार डाल हार मान ली. ये स्थिति कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए संकट की घड़ी साबित हो रही है.