फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना क्या सच में था ड्रामा

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन वाली ‘शिराकां’ सरकार बनने के 10 दिनों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनंत कुमार हेगड़े (Ananth Kumar Hegde) ने इस राज़ से पर्दा उठाते हुए एक बार फिर राजनीतिक हकचल तेज कर दी कि आख्रिर क्यों फडणवीस 4 दिन दिनों के लिए सीएम बने. हेगड़े ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस केंद्र को 40 हजार करोड़ रुपए लौटाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि फडणवीस ने इसे झूठ बताया.

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने संजय राउत के तीखे तेवरों ने बनाई शिवसेना की सरकार

(Sanjay Raut)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में ठाकरे राज कायम हो गया और उद्वव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए. महाविकास अघाड़ी गठबंधन वाली इस सरकार के शिल्पकार शरद पवार रहे जिन्होंने अपने कुटिल चाणक्य दिमाग से बीजेपी के धुरंधर अमित शाह तक को मात दे दी, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में एक महीने चले इस सियासी मैच में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने बाला साहब की सेना के सच्चे सिपाही संजय राउत (Sanjay Raut) की उनके सपने को पूरा करने की निष्ठा और तटस्थता को किसी तरह से कम नहीं आकां जा सकता. विधानसभा चुनाव के बाद से ही संजय राउत एक ही बात पर अडिग रहे कि चाहे कुछ भी हो मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा. संजय राउत ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र की जनता की भावना है और लाखों शिवसैनिकों की भी भावना है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही हो, ताकत के बल पर कोई महाराष्ट्र की कुंडली नहीं बदल सकता, ये बालासाहेब की सेना है और शतरंज खेलने में माहिर संजय राउत ने महाराष्ट्र की सियासत में इस तरह मोहरे फिट किए कि वे हारी हुई बाजी जीतने वाले ‘बाजीगर’ बन गए.

संजय राउत शिवसेना की ओर से राज्यसभा सांसद के साथ पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव संपादक भी हैं. एक लेखक, एक रिपोर्टर के तौर पर जाने जाने वाले संजय अपने तीखे बोल की वजह से खासतौर पर पहचाने जाते हैं. महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आने के बाद बीजेपी के साथ सत्ता के बंटवारे के तहत सरकार में बराबर की भागीदारी की मांग सबसे पहले संजय राउत (Sanjay Raut) ने ही उठाई. गौर करने वाली बात ये रही कि पार्टी प्रमुख उद्दव ठाकरे तक ने इस बारे में कोई टीका टिप्पणी नहीं की और एक तरह से राउत को ही फ्री हैंड दे दिया.

वे संजय राउत ही थे जो चुनावी नतीजों से पहले और बाद में भी लगातार शरद पवार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं से संपर्क साध रहे थे. उन्हीं के कहने पर उद्दव ठाकरे ने एनसीपी की शर्त के अनुसार, मोदी सरकार में एक मात्र शिवसेना मंत्री अरविंद सावंत को मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाया.

वे संजय राउत ही थे जिन्होंने एक तरफ तीनों पार्टियों का आपस में सम्पर्क बनाए रखा और दूसरी तरफ सामना के माध्यम से देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते रहे. उन्होंने किसानों सहित ऐसे मुद्दे प्रमुखता से उठाये जो फडणवीस और बीजेपी सरकार की कमजोर कड़ी थे. इसके अलावा, उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल को भी देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधने का प्रमुख अस्त्र बनाया और वहां से तीखे प्रहार जारी रखे. संजय राउत (Sanjay Raut) शिवसेना के ऐसे नेता रहे जो न केवल इन चुनावों में प्रमुखता से हाईलाइट हुए, बल्कि अपनी बात पर अडिग रहते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसकी आस बीजेपी तो क्या, खुद शिवसेना और उद्दव ठाकरे तक को नहीं थी.

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संजय राउत ने उद्दव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए राजी किया जो इस रेस में कभी थे ही नहीं. भाजपा से बातचीत में भी हमेशा उद्दव के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे को ही सीएम पद का दावेदार बताया गया. लेकिन गठबंधन की दोनों पार्टियों के वीटो के बाद किसी अनुभवी को ही मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी, यहां एक बार तो खुद संजय राउत (Sanjay Raut) का नाम भी शरद पवार ने मुख्यमंत्री के लिए उठाया और संकेत एकनाथ शिंदे के भी आने लगे. लेकिन राउत के प्रयासों के बाद आखिर में महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेता बनकर उद्दव बाला साहेब ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. गौर करने वाली बात ये भी रही कि न तो उद्दव ने चुनाव लड़ा और न ही सक्रिय तौर पर राजनीति की. हां, पर्दे के पीछे रहकर सत्ता को नियंत्रित जरूर किया.

महाविकास अघाड़ी सरकार के शिल्पकार रहे शरद पवार ने सबसे बड़ा जो काम किया वो यह कि कट्टर हिंदूवादी शिवसेना और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस यानि दो विपरीत विचारधारा वाली कट्टर विरोधी पार्टियों को एक लाइन में लाकर खड़ा कर दिया. इस खासे मुश्किल काम में उनकी सहायता की संजय राउत ने जिनके बिना शायद ये सम्भव नहीं हो पाता. शरद पवार भी संजय राउत (Sanjay Raut) की भूमिका से अनभिज्ञ नहीं हैं. यही वजह रही कि तीनों पार्टियों की जब एक साथ परेड कराई गई तब उद्दव ठाकरे और शरद पवार ने संयुक्त तौर पर उन्हें महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति का ‘मैन ऑफ द मैच‘ कहकर पुकारा.

महाराष्ट्र की राजनीति के पल पल बदलते घटनाक्रम में एक दौर वो भी आया जब वे बीमारी के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती हुए. इस दौरान राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया था लेकिन शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में आपसी संपर्क कमजोर पड़ने से सियासी गतिविधियां अचानक से बदल गई और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. लेकिन संजय राउत ने जल्दी ही अस्पताल की चार दिवारी से निकलते हुए फिर से मोर्चा संभाला और तीनों पार्टियों के बीच टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ते हुए बतौर एक सूत्रधार काम किया.

संजय राउत की मेहनत रंग लाई. इसके साथ ही कथित तौर पर शरद पवार की बेहद उच्च कोटि की सियासी रणनीति में पूरा महाराष्ट्र ऐसा उलझा कि बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह तक उलझ कर रह गये. शरद पवार ने ऐसी तिहरी चाल खेली कि एक ही झटके में राष्ट्रपति शासन भी हट गया, प्रदेश की सत्ता की कुर्सी पर गठबंधन का मुख्यमंत्री भी विराजमान हो गया और बीजेपी की छवि भी धूमिल कर दी.

खैर…जो भी हुआ, अंत भला तो सब भला. जो भी हुआ हो और जिसने भी किया हो, संजय राउत (Sanjay Raut) की ईमानदारी और पार्टी के प्रति निष्ठाभाव कम न हुआ. हालांकि इस पूरे सियासी नाटक से पर्दा गिरने से उठने तक संजय राउत को किसी बड़े पद के तौर पर कोई ईनाम भले ही न मिला हो लेकिन शिवसेना को एक वरिष्ठ नेता, प्रखर वाचक और एक रणनीतिकार जरूर मिल गया है जिसकी जरूरत उन्हें फिर से भविष्य में पड़ने वाली है.

राहुल बजाज ने अमित शाह से कहा ‘लोग आपसे डरते हैं’

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश के मशहूर उद्योगपति राहुल बजाज (Rahul Bajaj) ने मुंंबई में इकोनॉमिक टाइम्स अवॉर्ड में शिरकत की. इस कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) भी मौजूद थे. अमित शाह के सामने ही राहुल बजाज ने मंच को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में इस वक्त खौफ का माहौल है. लोग आपकी सरकार की आलोचना करने से डर रहे हैं क्योंकि लोगों में ये यकीन नहीं है कि उनकी आलोचना को सरकार में सराहा जाएगा.

‘पवार जी सिर्फ मेरे पिता नहीं हैं वह मेरे बॉस भी हैं and Boss is always right’- सुप्रिया सुले

Supriya Sule with Sharad Pawar

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. सोमवार को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता शरद पवार ने एबीपी के मराठी न्यूज़ चैनल एबीपी माझा के एक साक्षात्कार में दावा किया था कि पीएम मोदी ने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया था. मंगलवार को पवार के इस बयान पर नेशनल न्यूज़ चैनल एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत करते हुए शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा कि, “यह पीएम मोदी की ‘उदारता’ थी लेकिन मेरे पिता ने ‘विनम्रतापूर्वक’ मना कर दिया था.” सुप्रिया (Supriya Sule) ने कहा, “मैं इस मीटिंग में नहीं थी, यह दो वरिष्ठों के बीच थी. यह पीएम मोदी की उदारता था कि उन्होंने ऐसा प्रस्ताव दिया. महाराष्ट्र … Read more

शरद पवार का बड़ा खुलासा- “मोदी ने दी थी साथ काम करने की ऑफर, मैंने कहा मुमकिन नहीं”, सुप्रिया के लिए था मंत्री पद का प्रस्ताव

(Sharad Pawar's Big Disclosure)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने बड़ा खुलासा (Sharad Pawar’s Big Disclosure) करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘साथ मिलकर’ काम करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया. वहीं शरद पवार ने उन खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया था. पवार ने बताया, “हां लेकिन, मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था.”

बता दें, सुप्रिया सुले एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं. पवार ने कहा (Sharad Pawar’s Big Disclosure) कि उन्होंने मोदी को साफ तौर पर कह दिया कि उनके लिए प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है. पवार ने नेशनल चैनल एबीपी के मराठी चैनल एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा, “मोदी ने मुझे साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था. मैंने उनसे कहा कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे लेकिन मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है.”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच शरद पवार ने पिछले महीने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी (Sharad Pawar’s Big Disclosure). मोदी कई मौके पर पवार की तारीफ कर चुके हैं. हाल ही में पिछले महीने राज्यसभा के 250वें सत्र को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से सीखना चाहिए .

पवार ने आगे कहा कि 28 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला ‘सोच समझकर’ लिया गया. पवार ने कहा, “जब मुझे अजित के देवेंद्र फडणवीस को दिए गए समर्थन के बारे में पता चला तो सबसे पहले मैंने ठाकरे से संपर्क किया. मैंने उन्हें बताया (Sharad Pawar’s Big Disclosure) कि जो हुआ वह ठीक नहीं है और उन्हें भरोसा दिया कि मैं इस बगावत को दबा दूंगा.”

बड़ी खबर: महाराष्ट्र में बीजेपी का गेम ओवर हो गया ‘पवार’ गेम के आगे लेकिन चुनौतियां अभी बाकी

पवार ने बताया (Sharad Pawar’s Big Disclosure), “जब एनसीपी में सबको पता चला कि अजित के कदम को मेरा समर्थन नहीं है, तो जो पांच-दस विधायक अजित के साथ गए थे, उनपर दबाव बढ़ गया और वो वापस लौट आए.” एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि परिवार में क्या किसी ने अजित से फडणवीस को समर्थन देने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए बात की थी, लेकिन परिवार के सभी सदस्यों का मानना था कि अजित ने गलत किया. उन्होंने कहा, “बाद में मैंने उनसे कहा कि जो कुछ भी उन्होंने किया वह क्षम्य नहीं है. जो कोई भी ऐसा करेगा उसे परिणाम भुगतान होगा और आप अपवाद नहीं हैं.” पवार ने यह भी बताया कि, “उनके साथ एनसीपी में एक बड़ा हिस्सा है, जिसकी उनमें आस्था है.”

आखिर फडणवीस क्यों बने 80 घंटे के मुख्यमंत्री, क्या सच में था ये ड्रामा? हेगड़े ने किया बड़ा खुलासा

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में 23 नवंबर को चोरी छिपे रातों-रात सरकार बनाकर सुबह 8.05 पर मुख्यमंत्री की शपथ लेकर देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष सहित पूरे देश की जनता तक को चौंका दिया था, लेकिन 80 घंटे बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस्तीफा भी दे दिया. इसके बाद राज्य में महाविकास अघाड़ी गठबंधन वाली ‘शिराकां’ सरकार बन गई. अब इस घटना के 10 दिनों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनंत कुमार हेगड़े (Ananth Hegde) ने इस राज़ से पर्दा उठाते हुए एक बार फिर राजनीतिक हकचल तेज कर दी कि आख्रिर क्यों फडणवीस 4 दिन दिनों के लिए सीएम बने. हेगड़े ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस केंद्र … Read more

महाराष्ट्र में उद्दव ठाकरे के ‘हाथ’ में आई ‘घड़ी’, 169 विधायकों का समर्थन मिला बहुमत परीक्षण में

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्दव ठाकरे के ‘हाथ’ में आखिर ‘घड़ी’ आ ही गई. उद्दव सरकार ने आज विधानसभा में बहुमत साबित करते हुए 288 में से 169 विधायकों के समर्थन से फ्लोर टेस्ट (Uddhav Floor Test) पास कर लिया है. उद्दव ठाकरे के भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे और सीपीएम के एक- एक एवं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के दो विधायकों सहित कुल चार विधायकों ने किसी के पक्ष में वोटिंग नहीं करते हुए तटस्थ रहे. वहीं विपक्ष की पार्टी बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सदन का वॉकआउट कर दिया और सदन के बाहर जमकर नारेबाजी की. बता दें, सुप्रीम कोर्ट के … Read more