प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जयपुर के बिड़ला सभागार में जन सूचना पोर्टल (Jan Soochna Portal) को लॉन्च करने के बाद लोकार्पण समारोह को संबोधित किया. इस पोर्टल पर सरकार के 13 विभागों की 23 योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी. इसके लिए राष्ट्रीय कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने वीडियो मैसेज के जरिए राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) और सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) को बधाई दी.
Sonia Gandhi
Sonia Gandhi news and updates, Sonia Gandhi Photos and Images, Sonia Gandhi videos, Sonia Gandhi stories, Sonia Gandhi News Headlines, Sonia Gandhi news related to Politics in India, Sonia Gandhi in Indian Politics | Politalks
मोदीजी ने ऐसा माहौल बनाया कि जैसे चार महीनों में ही हम मंगल पर पहुंच गए: CM गहलोत
‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी (PM Narendra Modi) ने देश में कुछ ऐसा माहौल खड़ा कर दिया है जैसे चार महीनों में ही हम मंगल पर पहुंच गए. जबकि सच्चाई ये है कि इसके लिए 40 साल से ज्यादा की मेहनत लगी है. इसरो ऐसे ही नहीं खड़ा हुआ.’ यह बात कही है राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने, जो जयपुर (Jaipur) के बिड़ला सभागार में शुक्रवार को राजस्थान इनोवेशन कार्यक्रम (Rajasthan Innovation Vision) के तहत जन सूचना पोर्टल (Jan Soochna Portal) के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस पोर्टल पर 13 विभागों की 23 योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी. इस मौके पर डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot), जस्टिस ए.पी. शाह और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय के साथ अन्य गणमान्य भी मंच पर उपस्थित रहे.
मंच को संबोधित करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि यह प्रोग्राम मेरे लिए भावात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. जब 20 साल पहले मैं पीसीसी चीफ था, तब मेरे सामने यह बात आई कि कुछ लोग आरटीआई के लिए धरना दे रहे हैं. जब मुख्यमंत्री बना तो मैंने ये बात समझी और कानून पास किया. 2005 में यूपीए सरकार ने आरटीआई नियम को देशभर मे लागू किया. वर्तमान मोदी सरकार ने आरटीआई में जो छेड़छाड़ और फेरबदल किए, भारत सरकार को इसका कोई अधिकार नहीं था. आरटीआई कानून में पहले से ही राज्य सरकार जनता को खुद सूचनाएं दे. इसकी शुरुआत आज राजस्थान से हुई है. जन सूचना पोर्टल के जरिए आज हमने पारदर्शिता के लिए बड़ी क्रांति की है जिसकी मुझे खुशी है.
सोनियाजी ने कल कहा कि लोकतंत्र खतरे में है: गहलोत
सीएम गहलोत ने सोनिया गांधी को एक्टिविस्ट बताते हुए कहा कि सोनियाजी ने कल मुझे कहा कि देश मे लोकतंत्र खतरे में है. देश में माहौल ठीक नहीं है. आजकल ज्यूडिशियली,CBI, ED को प्रभावित किया जा रहा है. CJI तमिलनाडु और 2 IAS अपनी सर्विस छोड़ चुके है. अब हमें अपनी बातों को कहने के लिए सड़कों पर आना पड़ेगा. मैं अपेक्षा करता हूं कि अभी शुरुआत है. इस पोर्टल को और अच्छा करेंगे. अब जन सूचना पोर्टल से देश को एक मॉडल मिलेगा. उन्होंने कहा कि ये पोर्टल गरीब और ग्रामीणों की सेवा के लिए है. इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गरीबों को मिलेगा. जन सूचना पोर्टल सरकार की पारदर्शिता को जनता के सामने रखेगा.
I would like to thank the members of civil society, with whose support this portal has got its present form. I would also request the civil society, RTI activists and people of the state to work together to protect and strengthen RTI.#Rajasthan pic.twitter.com/dFn1kjVhsS
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) September 13, 2019
डिजिटल क्रांति (Digital Revolution) के बारे में बात करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को 21 वी शताब्दी में ले जाने का पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) का सपना था. वे ही आईटी की क्रांति को देश में लेकर आए थे. तंज मारते हुए गहलोत ने कहा कि आज जो सरकार में बैठे है, इन्होंने कंप्यूटर का विरोध किया था. आज वही लोग लोग सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर रहे है. गहलोत ने शहर के टेक्नो हब की तारीफ करते हुए कहा कि वसुंधराजी ने पिछली सरकार में टेकनोलॉजी पर अच्छा काम किया. वे बधाई की पात्र हैं.
जन सूचना पोर्टल जनता को समर्पित: पायलट
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रदेशवासियों को जन सूचना पोर्टल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये पोर्टल जनता को समर्पित है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार अच्छा काम करना चाहे तो सब कुछ संभव है. राजस्थान एक मात्र राज्य जहां दर्जनभर विभागों की जानकारी सीधी जनता के सामने है. ऐसे काम के लिए इच्छा शक्ति होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और राजीव गांधी की 75वीं सालभर मना रहे हैं जिन्होंने देश मे डिजिटल क्रांति की नींव रखी. डिजिटल इंडिया का 80 फीसदी काम मनमोहन सरकार में हुआ.
आज बिड़ला सभागार मे आयोजित Rajasthan Innovation Vision (RAJIV) के तहत जन सूचना पोर्टल-2019 के लोकार्पण कार्यक्रम मे शिरकत कर लोकार्पण किया एवं कार्यक्रम को संबोधित किया|
इस पोर्टल के माध्यम से 13 विभागो की 23 योजनाओ की जानकारी मिलेगी एवं सरकार से जुड़ी सूचनाएं स्वतः उपलब्ध होगी| pic.twitter.com/hlc2aMEB7r— Sachin Pilot (@SachinPilot) September 13, 2019
पायलट ने कहा कि हमने भारत की भाषाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता के लिए संघर्ष किया. जन सूचना पोर्टल एक अच्छी और नेक शुरूआत है. मैं जनता से कहता चाहता हूं कि सरकार की नियत साफ है और प्रदेश की कांग्रेस सरकार जनहित के लिए काम करना चाहती है. इसके क्रियान्वन में जनता का सहयोग जरूरी है.
सोनिया ने दी गहलोत को बधाई
राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने वीडियो मैसेज के जरिए जन सूचना पोर्टल के लिए राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बधाई देते हुए कहा कि इस पोर्टल से सरकार की पारदर्शिता दिखाई देगी और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होगी. यह पोर्टल देश की अन्य सरकारों के लिए मिसाल बनेगा. राजस्थान की सरकार को बधाई. मेरी शुभकामनाएं है कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ऐसे ही जनहित के कार्य करते रहें.
I thank CP Smt. #SoniaGandhi ji for her good wishes on the occasion of launch of Jan Soochna Portal. It was Sonia ji’s inspiration that had led to the passing of RTI in parliament during UPA.She has always been a great supporter of empowering ppl by giving them more n more rights pic.twitter.com/ScyCaz5p9p
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) September 13, 2019
वीडियो खबर: इतना आसान नहीं है पायलट को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाना
राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Rajasthan PCC President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस (Congress) हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा. सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं.
वीडियो-खबर: तंवर को मनाना हुड्डा के लिए चुनौती से कम नहीं
हरियाणा (Haryana) के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने में आएगी. हुड्डा और तंवर के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है. अशोक तंवर राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व संभाले हुए थे.
‘खट्टर साहेब को ग़ुस्सा क्यों आता है?’
हरियाणा (Haryana) में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) होने हैं और यहां के बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) धुंआधार चुनावी प्रचार में लगे हुए हैं. उन्हें सत्ता में वापिस लौटने का भरोसा है. वे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं. बुधवार को जब खट्टर साहब की जन आशीर्वाद हिसार जिले के बरवाला हलके से निकली, तब कुछ ऐसा वाक्या हुआ जिससे खट्टरजी सोशल मीडिया की हलचल में टॉप पॉजिशन पर आ गए. दरअसल हुआ कुछ यूं कि यात्रा में स्वागत के दौरान BJP के एक नेता ने उनके हाथ में ‘फरसा’ थमा दिया. इस फरसे को जब … Read more
देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास
राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.
आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.
बड़ी खबर: वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष
गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.
जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.
वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम पड़ी ठंडी
राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Congress President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा.
सचिन पायलट (Sachin Pilot) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. पिछले दिनों सचिन पायलट के जन्मदिन से ठीक पहले गहलोत समर्थक मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने मीडिया में एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम लागू होना जरूरी है. हालांकि वह खुद गहलोत सरकार में मंत्री होने के साथ ही एआईसीसी सचिव होने के नाते पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी बने हुए हैं. पायलट समर्थकों का कहना था कि जो व्यक्ति यह मुद्दा उठाता है, सबसे पहले उसे एक पद छोड़ना चाहिए.
बड़ी खबर: वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष
एक अखबार में एक कांग्रेस पदाधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा गहलोत ने उठवाया था, क्योंकि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पहले राजीव गांधी की जयंती पर और हाल ही सचिन पायलट के जन्मदिन समारोह में भी पायलट और गहलोत में दूरियां स्पष्ट हो चुकी हैं. गहलोत सोनिया गांधी के नजदीक माने जाते हैं, जबकि सचिन पायलट की राहुल गांधी से मित्रता है. राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो और सोनिया ने बागडोर संभाल ली हो, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दखल बना हुआ है, इसलिए पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मुश्किल प्रतीत होता है.
सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का महत्व बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. न तो राजस्थान में सचिन पायलट का कद कम हो रहा है और न ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों के बगावती तेवरों में कमी आई है. राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो रही है, ऊपर से गहलोत और पायलट की खींचतान से पार्टी संगठन भी लड़खड़ा रहा है. यह स्थिति कांग्रेस के लिए विकट है.
हाल ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) दिल्ली गए थे, तब सोनिया गांधी ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया. गहलोत राजस्थान में 13 सितंबर को कांग्रेस (Congress) की एक वेबसाइट लांच होने के मौके पर सोनिया गांधी को आमंत्रित करना चाहते थे. वह सोनिया गांधी से समय मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर जयपुर लौटना पड़ा. बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान की यात्रा करने से इनकार कर दिया.
यह भी पढ़ें: जन तंत्र पर भारी गन तंत्र, उधर गहलोत और पायलट उलझे राजनीतिक रस्साकस्सी में
समझा जाता है कि राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गहलोत ने सोनिया के पास तीन नामों का पैनल भेजा है, जिनमें हरीश चौधरी (Harish Choudhary) का नाम भी शामिल है, जो खुद चुनाव हार गए थे. पार्टी पर भी उनकी मजबूत पकड़ नहीं है. हरीश चौधरी के अलावा लालचंद कटारिया और महेश जोशी के नाम भी पैनल में शामिल हैं. गहलोत के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है की गहलोत प्रदेश में पार्टी पर भी अपना नियंत्रण चाहते हैं, जो पायलट के कारण संभव नहीं हो पा रहा है. पंचायत चुनाव नजदीक हैं और उम्मीदवार तय करने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है.
गौरतलब है कि सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार चलाने की प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं. सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में पायलट की कोई भूमिका नहीं रहती है. इसके अलावा गहलोत की तरफ से जारी होने वाले विज्ञापनों में सचिन पायलट का जिक्र नहीं होता है. इस परिस्थिति में गहलोत और पायलट की खींचतान कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.
चुनाव के जरिए होनी चाहिए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्तिः शशि थरूर
केरल (Kerala) के कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा है कि चुनाव के जरिए नए कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) की नियुक्ति होनी चाहिए. लोकतंत्र में पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है लोकतांत्रिक तरीकों का पालन किया जाए. पिछले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) सर्वसम्मति से चुने गए थे. उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद इस्तीफा दे दिया है. फिलहाल सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं.
शशि थरूर (Shashi Tharoor) अपनी नई किताब ‘द हिंदू’ के विमोचन समारोह के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे. कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सामने चुनाव ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए कई नेता कतार में हैं, लेकिन जब तक संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी, कोई आगे नहीं आएगा. उनके सामने कुछ नेताओं ने अध्यक्ष पद संभालने की मंशा जाहिर की है. लेकिन वे फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बच रहे हैं, क्योंकि अगर उन्होंने अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की तो पार्टी के कई लोग उनका विरोध करने लगेंगे.
थरूर ने कहा, फिलहाल पार्टी के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं, जिससे कई तरह की गलतफहमियां पैदा हो रही हैं. इसके मद्देनजर वह सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बोल रहे हैं. अगर कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से संगठन में चुनाव नहीं करवाए तो यह पार्टी के लिए आत्मघाती होगा. अभी हालत यह है कि कौन किसका समर्थन कर रहा है, किसका विरोध कर रहा है, समझ में नहीं आता. धारा 370 को लेकर पार्टी में मतभेद हैं. कई लोग मानते हैं कि यह धारा अस्थायी तौर पर लागू थी. जवाहरलाल नेहरू ने भी इस व्यवस्था को अस्थायी बताया था.
बड़ी खबर: ‘कांग्रेस ने ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह नहीं बदली तो पार्टी जीरो हो जाएगी’
थरूर ने कहा कि धारा 370 (Article 370) हटाने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन इस फैसले को लागू करने का तरीका गलत और गैर लोकतांत्रिक था. इससे पहले राज्य के लोगों विश्वास में लिया जाना था. वहां के स्थानीय नेताओं को गिरफ्तार करके सरकार ने लोकतंत्र को ही ताले में बंद कर दिया है. पाबंदियां हटने के बाद जब लोगों का विरोध सामने आएगा, तब सरकार पर परिस्थितियों को काबू में करने की चुनौती रहेगी.
थरूर ने कहा कि 1972 के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में नहीं पहुंचा था. धारा 370 हटने के बाद पहली बार ऐसा हुआ, जब इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई. हालांकि यह बैठक बंद कमरे में हुई थी, लेकिन फिर भी इस तरह की बैठक रोकने के प्रयास किए जा सकते थे. पहले भी इस तरह की बैठक बुलाने के प्रयास होते रहे हैं, लेकिन भारत की कूटनीति के कारण इस तरह की बैठक कभी नहीं हुई. इस तरह की बैठक एक हद तक भारत की कूटनीतिक विफलता ही मानी जाएगी.
थरूर ने इस बात के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर की प्रशंसा की कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष मजबूती से रखा और विवाद को आगे बढ़ने से रोक दिया. लेकिन इसका ज्यादा मतलब नहीं है, क्योंकि जो नुकसान होना था, वह हो चुका है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विवाद खत्म नहीं होने वाला है. जैसे ही कर्फ्यू और अन्य पाबंदियां हटेंगी, लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे. हिंसा भी हो सकती है. इस परिस्थिति से निबटना सरकार के लिए मुश्किल होगा.
बगावत व भितरघात के बीच बागियों को मनाने रणक्षेत्र में उतरे हुड्डा
लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर अपनी नींव गहरी करना चाह रही है. यही वजह है कि सत्ता की चाह में लगातार उक्त तीनों राज्यों में नेतृत्व में परिवर्तन हो रहे हैं. हरियाणा (Haryana) में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को कमान सौंपी गयी है. उन्हें पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है. वहीं कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये हुड्डा के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके.
बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला है. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे. तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव से बेहद नाराज चल रहे हैं. अब इन सभी नेताओं की नाराजगी दूर करना हुड्डा के जिम्मे है.
हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर करने का सिलसिला किरण चौधरी से शुरू किया. हुड्डा रविवार को दिल्ली स्थित किरण चौधरी (Kiran Choudhary) के घर पहुंचे. यहां उन्होंने किरण चौधरी और वहां मौजूद उनकी सुपुत्री एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Chaudhary) से मुलाकात की. माना जा रहा है कि ये आपसी मुलाकात रंग लाई है और किरण चौधरी अब हुड्डा के समर्थन में आ खड़ी हुई है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अगला टार्गेट कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) होंगे जिनसे जल्दी मुलाकात की जा सकती है.
बड़ी खबर: आखिर पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं बन पाये प्रदेश अध्यक्ष?
बता दें, बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. आपसी गुटबाजी का नतीजा भी सबके सामने है. यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. इसके बावजूद हुड्डा बिश्नोई को अपनी तरफ लाने में कामयाब होंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल हरियाणा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने की रहेगी. तंवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से पद का दायित्व संभाले हुए थे. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में करारी हार के बाद उनका जाना तय लग रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने जैसे ही पार्टी की बागड़ौर फिर से संभाली, सबसे पहले उनका नंबर आया और उनकी जगह सोनिया की खास कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को भेजा गया.
अशोक तंवर (Ashok Tanwar) पिछले 6 सालों से प्रदेश की बागड़ौर संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है. इस बात को हुड्डा भी भली भांति समझते हैं. ऐसे में तंवर की नाराजगी से पार्टी को नुकसान ही होगा इसलिए उन्हें फिर से एक सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद है.
हरियाणा में लंबे समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कई नेता एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने प्रदेश के नेताओं में एकजुटता लाने का दायित्व किसी नए नेता को नहीं बल्कि अनुभवी भूपेन्द्र हुड्डा को सौंपी. कुमारी शैलजा उनका साथ देगी लेकिन कुल मिलाकर हुड्डा को फ्री हैंड काम करने का पूरा मौका दिया गया है.
प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा अच्छी तरह से जानते हैं कि असंतुष्ट और बागी नेता आगामी चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं सोनिया गांधी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि कांग्रेसी नेताओं की बगावत व भितरघात पार्टी को चुनावी रण में और कमजोर करेगी. ऐसे में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को कमान संभलाकर कोई गलती नहीं की.
अब हुड्डा केंद्र की ओर से मिले इस अवसर को कितना और कैसे भुना पाते हैं, आगामी चंद महीने में पता चल ही जाएगा. अगर हुड्डा अपनी इस कोशिश में सफल होते हैं और पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो हुड्डा के हाथों में फिर से प्रदेश की कमान आ सकती है. लेकिन अगर वे असफल साबित होते हैं तो भविष्य में उन्हें कोई बड़ा दायित्व मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है.
बीजेपी ने जारी किया- ‘राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज’
राजस्थान (Rajasthan) में बिगडती कानून व्यवस्था (Law-&-Order) को लेकर प्रदेश भाजपा (BJP) का गहलोत सरकार (Gehlot Government) पर हल्ला बोल जारी है. इसी कडी में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चन्द कटारिया (Gulab Chand Katariya) ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बीजेपी की आईटी सेल द्वारा प्रकाशित “अपराध टाइम्स” अखबार का विमोचन किया. जिसका शीर्षक है – “राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज (Crime Times in Rajasthan – Gehlot’s Government, fun of criminals)“.
राजस्थान में इन दिनों अपराध तंत्र पुलिस तंत्र पर हावी होता दिखाई दे रहा है. प्रदेश में इन दिनों अपराध का बोलबाला है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. प्रदेश में बढ़ते गैंगरेप जैसे संगीन अपराध हों या प्रदेश का बिगडा साम्प्रदायिक सौहार्द, मामूली बातों पर दंगे, झगडा, आगजनी, लूट, हत्या अब प्रदेश में आम बात हो गयी है. इसी को लेकर आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था की स्थिती को प्रकाशित करते हुए “अपराध टाइम्स” नामक अखबार का विमोचन किया गया. जिसमें प्रदेश में हो रहे अपराध से जुड़ी सभी बड़ी खबरों को प्रकाशित किया गया है.
प्रदेश में बढ़ा अपराधों का ग्राफ:
प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने प़त्रकार वार्ता में प्रदेश के लाॅ-एंड-आॅर्डर को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का संयुक्त जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान कटारिया ने कहा कि केवल जुलाई 2018 के साथ 2019 की तुलना करें तो अपराधों का ग्राफ 54 प्रतिशत बढ़ा है वहीं अगर जनवरी से जुलाई तक सभी 7 महीने के आंकड़े जोड़ें तो 32 प्रतिशत इजाफा आईपीसी के अपराधों में हुआ है. वहीं जुलाई 2018 से 2019 के जुलाई तक के आंकड़ों को जोड़ें तो प्रदेश में 31 फ़ीसदी अपराध बढ़े हैं.
महिला अपराधों में स्थिति भयावह:
नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में महिला अपराधों के मामले में तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह है. जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में 87 प्रतिशत महिला अपराधों में इजाफा हुआ है. वहीं एसटी के अपराधों के मामलों की बात करें तो अपराधों की बढ़ोतरी में हद ही पार हो गई है, जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में एसटी के खिलाफ 123 प्रतिशत अपराध बढ़े हैं.
सीएम अशोक गहलोत से अपील:
कटारिया ने मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री का भी जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत से अपील करते हुए कहा कि सीएम गहलोत को पुलिस की साख गिरने से बचाना चाहिए, जो भी लोग पुलिस को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है, उनके खिलाफ सख्ती से काम करना चाहिए, इसमें प्रदेश की पूरी जनता, राजनीतिक दल सरकार के साथ होंगे.
बहरोड की घटना थी सुनियोजित:
बहरोड थाने पर फायरिंग कर पुलिस कस्टडी में बंद अपराधि को छुडा ले जाने के मामले पर कटारिया ने कहा कि इस घटना से सारी हदें पार हो गयी. यह केस सुनियोजित था, पुलिस की मिलीभगत से ये सब हुआ. पुलिस ने अपराधियों पर एक भी गोली नहीं चलाई यह एक बडा सवाल है. आगे कटारिया ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने सिपाही कह रहा है कि उसे हथियार चलाना नहीं आता, इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या होगी?, थानेदार कहता है कि उनकी रिवॉल्वर अचानक जाम हो गई, यह कहना भी शर्मनाक है, इससे पुलिस की छवि खराब होती है.
कार्रवाई से मिला संताष:
बहरोड थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर करने और डिप्टी व एसएचओ को सस्पेंड करने तथा दो हैडकांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई पर कटारिया नें कहा कि पहली बार इस कार्रवाई से कुछ संतोष मिला है. आगे कटारिया ने कहा कि इस मामले पर कल ही मेरी डीजी से बात हुई थी मैनें उनसे इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया था.
पुलिस पर जताया भरोसा:
गुलाब चन्द कटारिया ने आगे कहा कि हमारी पुलिस निकम्मी नहीं है, लेकिन कई बार अधिकारी समय पर एक्शन नहीं करते है. इससे अपराध में बढ़ोतरी होती है और अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. इसके साथ ही कटारिया ने कहा कि प्रदेश में अपराध हमेशा होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, वह चिंताजनक और सवाल उठाने लायक है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सलाह:
कटारिया ने पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम अशोक गहलोत को सलाह देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी गृहमंत्री का जिम्मा भी संभाल रहे हैं ऐसे में समय अभाव के कारण कानून व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते इसलिए उन्हें अपने एक सहयोगी को कानून व्यवस्था का जिम्मा दे देना चाहिए ताकि प्रदेश में कानून पर नियंत्रण रखा जा सके.
13 नंबर बंगले पर कटारिया का कूटनीतिक जवाब:
पूर्व मुख्यमंत्रीयों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को हटाये जाने के हाइकोर्ट के फैसले पर पत्रकारों ने कटारिया से सवाल करते हुए पूछा कि क्या पूर्व सीएम वसंधरा राजे 13 नंबर बंगला खाली करेगी ? इस पर कूटनीतिक जवाब देते हुए कटारिया ने कहा कि जिसे बंगला खाली करवाना है उनसे पूछो मुझे तो खाली करवाना है नहीं. कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, इस मामले में सरकार ही ढीली पड रही है तो मैं क्या करूँ. कटारिया के इस जवाब में उनके मन में छिपी उनकी मंशा को राजनीति के विशेषज्ञ समझ सकते हैं.