महाराष्ट्र: नहीं बन पाई सहमति, शायद अब शिवसेना की जरूरत नहीं बीजेपी को

महाराष्ट्र (Maharashtra) में आगामी विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Elections 2019) के मद्देनजर शिवसेना (ShivSena) और बीजेपी (BJP) के बीच सीटों के बंटवारे (Seats sharing) को लेकर बुधवार रात हुई पहले दौर की बैठक (Meeting) बेनतीजा ही रही. दोनों पार्टियां में आपसी गठबंधन की सीटों के साथ ही सहयोगी छोटे दलों को आवंटित की जाने वाली सीटों पर सहमत नहीं हो पाईं हैं. शिवसेना चाहती है कि राज्य की 288 विधानसभा सीटों पर उसके और बीजेपी के बीच बराबर का यानि 144-144 सीटों का बंटवारा होना चाहिए. इसके साथ ही शिवसेना ने यह भी कहा है कि बीजेपी महाराष्ट्र में छोटे सहयोगी दलों को दी जाने वाली सीटें अपने हिस्से से दे. इसके अलावा शिवसेना की ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग पर भी बीजेपी ने अपनी सहमति अभी तक नहीं दी है.

बता दें, महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने चुनाव पूर्व गठबंधन पर सहमित जताते हुए प्रदेश की कुल 48 सीटों में से बीजेपी ने 25 और शिवसेना ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ना स्वीकार किया था. तभी से यह भी तय माना जा रहा था कि आने वाले विधानसभा चुनाव 2019 में भी बीजेपी-शिवसेना का यह गठबंधन जारी रहेगा. लेकिन वर्तमान हालात में ऐसी सम्भावना नजर नहीं आती. हालांकि, गठबंधन का भविष्य चुनाव से पहले तय होने वाले फॉर्मूले पर निर्भर करेगा. माना जा रहा है कि प्रदेश में चुनाव की घोषणा गणेशोत्सव बाद हो सकती है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल व शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई सीट बंटवारे पर बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं.

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बुधवार को बीजेपी (BJP) और शिवसेना (ShivSena) के बीच सीट बंटवारे को लेकर हुई पहली बैठक बेनतीजा रही. सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने शिवसेना की विधानसभा की 144 सीटों और ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग को नकार दिया है. जल्द ही इस मुद्दे पर अब दूसरी बैठक होने की सम्भावना है. सीट बंटवारे की पहली बैठक में बीजेपी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील, मंत्री गिरीश महाजन और सुधीर मुनगंटीवार और शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई शामिल थे.

बताया जा रहा है कि पहली बैठक में मुख्यत: उन संभावित सीटों पर चर्चा की गई जो सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जानी है. प्रदेश में RPI (A) और राष्ट्रीय समाज पक्ष (RSP) जैसी छोटी पार्टियां बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का हिस्सा हैं. शिवसेना के एक नेता का कहना है कि बीजेपी इस बात के लिए शिवसेना को तैयार करने में लगी हैं कि दोनों दलों की सीटिंग सीटों को छोड़ कर जो सीटें बचती हैं उसमें से छोटे मित्र दलों के लिए 18 सीटें देने के बाद ही बची हुई सीटें बीजेपी और शिवसेना के बीच आधी-आधी बांटी जाए.

दोनों पार्टियों के बीच हुई पहली बैठक के बारे में बीजेपी ने एक नेता ने बताया कि अभी, तो शिवसेना के नेता सीट बंटवारे की टेबल पर बैठे हैं इसलिए अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. इसीलिए समय का इंतजार करिए, लेकिन इतना तय है कि सीट बंटवारे का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और युवा नेता आदित्य ठाकरे ही लेंगे.

बड़ी खबर: तीन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मजबूत तैयारी

वहीं महाराष्ट्र बीजेपी सूत्रों की मानें तो बीजेपी यहां 171 सीटों से बातचीत शुरू करना चाहती है, जबकि शिवसेना कुल सीटों की आधी चाहती है. इसके लिए वह लोकसभा चुनाव से पूर्व शाह, ठाकरे और देवेंद्र फड़नवीस के बीच की बातचीत का हवाला देती है. बीजेपी आधी-आधी सीटों की बात कभी नहीं स्वीकारती है. लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी के चुनावी उम्मीदवार भी नहीं चाहते हैं कि गठबंधन हो. उनका मानना है कि गठबंधन की स्थिति में कम ही लोगों को ही चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा. हालांकि, वह पार्टी की तरफ से सभी सीटों के लिए की जा रही तैयारियों को लेकर आशान्वित जरूर हैं.

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2014 के दौरान बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था जिसमें बीजपी को 122 सीटों व शिवेसना को 63 विजयश्री प्राप्त हुई थी. हालांकि, तब कांग्रेस व राकांपा (NCP) ने भी अलग-अलग ही चुनाव लड़ा था जबकि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 2019 कांग्रेस और रांकपा ने 50-50 सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमतिके साथ गठबंधन की घोषणा कर दी है.

बेरी सीट पर रघुवीर कादयान की सल्तनत को चुनौती दे पाएंगे मनोहर लाल खट्टर?

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2019) की घोषणा चुनाव आयोग की तरफ से जल्द की जा सकती है. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग अक्टूबर और नवंबर के महीने में हरियाणा में विधानसभा चुनाव करवा सकता है. पॉलिटॉक्स न्यूज ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर एक विशेष कार्यक्रम शुरु किया है. जिसमें हम आपको रोज एक नए विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिर्पोट (Ground Report) से अवगत करवाते है. आज हम आपको हरियाणा की बेरी विधानसभा सीट (Beri Assembly Constituency) के जमीनी हालात से रुबरु करवाएंगे.

बेरी विधानसभा क्षेत्र झज्जर जिले के अन्तर्गत आता है, लेकिन बेरी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा क्षेत्र रोहतक लगता है. विधानसभा क्षेत्र पर पिछले काफी समय से कांग्रेस का एक-क्षत्र राज है. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और भूपेन्द्र हुड्डा के खास सिपहसालार चौधरी रघुवीर सिंह कादयान (Choudhary Raghuveer Singh Kadayan) पिछले चार चुनाव से यहां लगातार अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं.

राजनीतिक इतिहासः
हरियाणा गठन के साथ ही बेरी विधानसभा भी अस्तित्व में आई. बेरी विधानसभा सीट से सर्वप्रथम 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रताप सिंह दौलुता विधायक चुने गए थे. 1968 के चुनाव में पार्टी ने प्रताप सिंह की जगह रण सिंह को प्रत्याशी बनाया और रण सिंह ने प्रताप सिंह को मात दी. साल 1972 में प्रताप सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीत हासिल की. 1977, 80 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की.

साल 1987 में लोकदल उम्मीदवार के रुप में रघुवीर सिंह कादयान ने जीत हासिल की, लेकिन कादयान जीत के इस सिलसिले को बरकरार नहीं रख पाये और 1991 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश से हार बैठे. 1996 के चुनाव में बाजी वीरेन्द्र ने मारी. साल 2000 को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रघुवीर कादयान को उम्मीदवार बनाया. बेरी की जनता ने इस बार रघुवीर को निराश नहीं किया और रघुवीर बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब हुए.

साल 2000 में शुरु हुआ रघुवीर कादयान की जीत का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है. साल 2014 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर होने के बावजूद भी रघुवीर कादयान चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. उन्होंने इंडियन नेशलन लोकदल के चतर सिंह को लगभग 4500 मतों से मात दी थी.

सामाजिक समीकरणः
बेरी विधानसभा सीट रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है. बेरी विधानसभा सीट में जाट समाज बहुतायात में है. जाट वोटर्स के कारण ही रघुवीर लगातार चुनाव जीतने में कामयाब हो रहे हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में कादयान को इनेलो के कमजोर होने का भी फायदा मिलेगा. इस चुनाव में रघुवीर कादयान को जाट वोट एकमुश्त मिलने का अनुमान है, जैसा लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से जाट समाज का समर्थन दीपेन्द्र हुड्डा को एकतरफा मिला था.

2019 विधानसभा चुनावः
विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम पार्टियों ने प्रत्याशी चयन की प्रकिया शुरु कर दी है. पार्टियों के वरिष्ठ नेता इलाकों में अपने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में लग गए है. कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन में कोई समस्या नहीं है. तंवर के हटने के बाद पार्टी पर पुरा नियंत्रण भूपेन्द्र हुड्डा का होगा इसलिए टिकट एक बार फिर रघुवीर कादयान को मिलना तय है. रघुवीर कादयान, हुड्डा के करीबी है, तो इसलिए भी उनके टिकट पर कोई संशय नहीं है.

बीजेपी की तरफ से बेरी विधानसभा सीट को लेकर दावेदारों की सूची काफी लंबी है. इन दावेदारों में विक्रम सिंह कादयान, प्रदीप अहलावत, शिव कुमार रंगीला प्रमुख दावेदार है. जजपा की तरफ से उपेन्द्र कादयान का टिकट लगभग पक्का है. इनेलो इस बार प्रमोद राठी पर दांव लगाने का मन बना चुकी हैं.

जीत की संभावनाः
रघुवीर कादयान के लिए इस बार का चुनाव पिछले चुनावों की तरह आसान नहीं होने वाला है. हमारे इस तर्क के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश कांग्रेस के अंदर मची भारी गुटबाजी है. कादयान हुड्डा गुट के नेता हैं तो दुसरे गुट के नेता उन्हें चुनाव में कमजोर करने के पुरे प्रयास करेगें. जिसका नुकसान सीधा-सीधा रघुवीर सिंह कादयान को चुनाव में होगा. 2019 में बीजेपी और कांग्रेस के मध्य रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा यह तय है.

मैं मध्य प्रदेश का सुपर सीएम नहीं हूं: दिग्विजय सिंह

Digvijay Singh on Mohan bhagwat

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इन आरोपों का जोरदार शब्दों में खंडन किया है कि वह मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) में सुपर सीएम के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ (Kamalnath) अपने आप में मजबूत नेता हैं और उन्हें किसी सुपर सीएम की जरूरत नहीं है. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन पर आरोप कि वह गैर जरूरी तरीके से सरकार के काम में रुकावटें पैदा करते रहते हैं. दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh)  ने कहा कि मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला है. वे सरकार … Read more

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए भाजपा की मजबूत तैयारी

देश में तीन राज्यों हरियाणा (Haryana), झारखंड (Jharkhand) और महाराष्ट्र (Maharastra) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) होने वाले हैं. भाजपा की तैयारियां जोरों पर है जबकि विपक्ष लड़ाई से पहले ही हारने की स्थिति में दिख रहा है. चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया है. लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने अपने चुनाव अभियान का पहला चरण करीब-करीब पूरा कर लिया है. विपक्षी पार्टियां अभी सीटों के तालमेल में ही उलझी हुई हैं और किस नेता के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा, यह तय नहीं है.

हरियाणा में भाजपा के चुनाव अभियान के तहत बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो चुके हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दो रैलियां कर चुके हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोहतक में विजय संकल्प रैली कर रहे हैं. इस तरह भाजपा का चुनाव अभियान पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों को दूर करने में जुटी हुई है. हाल की कांग्रेस ने नेताओं के आपसी विवाद थामने के लिए कुमारी शैलजा को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hooda) को विधायक दल नेता बना दिया है. चुनाव अभियान समिति के प्रमुख भी हुड्डा ही रहेंगे.

इसके बावजूद यह पूरी तरह तय नहीं है कि कांग्रेस के भीतरी मतभेद, विवाद आसानी से हल हो पाएंगे. हरियाणा में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस कभी भी किसी भी मुद्दे पर भाजपा सरकार को न तो घेर पाई है और न ही चुनौती दे पाई है. एक स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि इतने सालों से चल रहे झगड़े एकदम से खत्म होना मुश्किल है.

हरियाणा में राजनीतिक रूप से मजबूत चौटाला परिवार (Chautala Family) में भी फूट पड़ी हुई है. इसको देखते हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो अपनी मौजूदगी दिखा पाएगी, इसमें संदेह है. अजय चौटाला (Ajay Chautala) ने अपनी अलग जननायक जनता पार्टी (JJP) बना ली है. उनकी पार्टी का बसपा से तालमेल हो चुका है. उनका दावा है कि इस बार हरियाणा में चारकोणी मुकाबला होगा. भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जेपीपी के बीच टक्कर होगी.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस अपनी महाजनादेश यात्रा पूरी कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ राज्य के हर क्षेत्र के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की. दूसरी तरफ महाराष्ट्र का मुख्य विपक्षी गठबंधन कांग्रेस और राकांपा आपसी झगड़ों में उलझा हुआ है. दोनों ही पार्टियों के प्रमुख नेताओं में पार्टी छोड़ने का रुझान बढ़ता जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद दोनों ही पार्टियों में उत्साह की कमी नजर आ रही है.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिया है, लेकिन पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं. दोनों ही पार्टियां प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीएस) से तालमेल करना चाहती हैं. लोकसभा चुनाव में वीबीएस के कारण दोनों पार्टियां कम से कम आठ सीटों पर नुकसान उठा चुकी हैं. कांग्रेस के सामने वीबीएस ने शर्त रखी है कि वह राकांपा को गठबंधन से अलग करे. यह शर्त मानना कांग्रेस के लिए मुश्किल है.

महाराष्ट्र में एक हद तक राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MANS) का भी असर है. लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार किया था. विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर मनसे के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस और राकांपा, दोनों पार्टियां अभी राज ठाकरे से गठबंधन के बारे में कोई फैसला नहीं ले पाई है.

झारखंड की राजधानी रांची में 12 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की रैली का कार्यक्रम तय हो चुका है. विपक्षी खेमे को अब तक कांग्रेस के साथ बैठक का इंतजार है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) के नेता हेमंत सोरेन अपने स्तर पर 26 अगस्त को साहेबगंज से राज्य में बदलाव यात्रा शुरू कर चुके हैं. वह पूरे राज्य का दौरा करने के बाद 19 सितंबर को रांची में बड़ी रैली को संबोधित करेंगे. कांग्रेस अभी तक अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझी हुई है. पार्टी को एकजुट करने के लिए कांग्रेस ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार को हटाकर उनकी जगह रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. लेकिन इसका उलटा असर हो रहा है. कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में जाने की योजना बना रहे हैं.

इस तरह तीनों राज्यों में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी अभी से काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. एक तरफ तीनों राज्यों में जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं और जो बचे हुए हैं वो आपसी खींचतान के चलते एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी लोकसभा में मिले भारी बहुमत और उसके बाद के ताबड़तोड़ लिए गए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (Jammu Kashmir Reorganization) जैसे कई बिलों को लागू करवाने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज है.

महाराष्ट्र में उथल-पुथल, भाजपा में शामिल हो सकते हैं हर्षवर्धन पाटिल

महाराष्ट्र (Maharastra) के कद्दावर कांग्रेस नेता हर्षवर्धन पाटिल (Harshavardhan Patil) ने बुधवार को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस (Devendra Fadnavis) की तारीफ की और राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Panwar) तो कुटिल व धूर्त नेता बताते हुए भाजपा में शामिल होने के संकेत दे दिए. समझा जाता है कि वह कभी भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं. पुणे जिले की इंदापुर विधानसभा सीट विवाद की जड़ बताई जाती है. हर्षवर्धन पाटिल (Harshavardhan Patil) इंदापुर के विधायक रह चुके हैं. अब राकांपा नेता दत्ता भरणे यहां से विधायक हैं. इस सीट पर कांग्रेस और राकांपा, दोनों पार्टियां दावा कर रही हैं. विवाद अब तक नहीं सुलझ पाया है. बुधवार को हर्षवर्धन पाटिल … Read more

महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा के बीच सीटों का तालमेल पूरा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) की तैयारियां जोरों पर है. भाजपा-शिवसेना विरोधी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने के प्रयास चल रहे हैं. सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ मिलकर भाजपा-शिवसेना (BJP-ShivSena) के खिलाफ एक सीट पर एक उम्मीदवार की योजना बना रही हैं. कांग्रेस (Congress) और राकांपा (NCP) महाराष्ट्र में प्रमुख विपक्षी पार्टियां हैं. दोनों में सीटों का तालमेल हो चुका है. दोनों ही पार्टियां विधानसभा की कुल 250 सीटों में से 38 सीटें अन्य छोटी विपक्षी पार्टियों को देने के लिए तैयार हैं. मंगलवार को दोनों पार्टियों की बैठक हुई थी. इसमें करीब 90 फीसदी सीटों पर तालमेल पूरा हो चुका है. कांग्रेस-राकांपा का 38 सीटें अन्य छोटी पार्टियों … Read more

‘बीजेपी के पास निरमा वॉशिंग पाउडर, अन्य पार्टी के कचरे को वॉशिंग मशीन में धोकर भाजपा में लेते हैं’

जब से बीजेपी लोकसभा में भारी बहुमत से जीतकर आयी है, उनके मंत्री और विधायकों के बड़बोल और विवादित बयानों पर लगाम नहीं लग रहे. राज्य सरकार के मंत्री हो या फिर केंद्रीय मंत्री, अपने-अपने बयानों से चर्चा में बने रहने की कोशिश करते हैं. इस समय भाजपा दलबदल को लेकर लगातार विपक्ष के निशाने पर है. ऐसे समय में मोदी सरकार में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री राव साहेब दानवे पाटिल (Raosaheb Danve Patil) ने एक विवादित बयान (controversial statement) दिया है जिसके चलते वे सुर्खियों में बने हुए हैं. उन्होंने ये बयान महाराष्‍ट्र के जालना में आयोजित महाजनादेश यात्रा सभा को संबोधित करने के दौरान दिया. अपने … Read more

महाराष्ट्र शिव सेना और बीजेपी एक दूसरे के खिलाफ लड़ेंगी विधानसभा चुनाव!

महाराष्ट्र शिव सेना विधानसभा चुनाव 2014 कर तरह ही महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव 2019 में भी शिव सेना और बीजेपी एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं. सीटों के बंटवारे को लेकर फिर एक बार महाराष्ट्र में शिवसेना- बीजेपी के बीच ठन गई है. दोनों पार्टियों की ओर से आये ताज़ा बयानों के बाद गठबंधन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. सूत्रों के हवाले से मिली ख़बर के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले तय हुए 50-50 के फ़ॉर्मूले पर रज़ामंदी नहीं होगी. बीजेपी ने 180-108 यानि शिवसेना को 108 सीटें देने का प्रस्ताव रखा जिसे शिवसेना ने नामंज़ूर किया है और अकेले चुनाव लड़ने की तैयारियां भी शुरू कर दी है.

दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि अनुच्छेद 370 पर लिए गए मोदी सरकार के सख्त फैसले से पूरे देश में बीजेपी के पक्ष में माहौल और मजबूत बन गया है. इसी के चलते महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को लेकर सीएम पद पर दावेदारी करने वाली बीजेपी के तेवर और बढ़ गए हैं. लेकिन शिव सेना भी पीछे हटने वाली नहीं है उसका कारण इस बार के चुनाव में ठाकरे खानदान से पहली बार आदित्य ठाकरे सीधे चुनाव लड़ सकते हैं और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी ठोक सकते हैं. इसलिए मौजूदा स्थिति में अक्टूबर में होनेवाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़ सकती हैं.

महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना इस बार जमीनी तौर पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय है. वजह कि पार्टी के ‘राजकुमार’ और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे पहली बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. अगर वह चुनाव में उतरते हैं तो यह पहला मौका होगा, जब ठाकरे घराने का कोई सदस्य सीधे तौर पर चुनाव मैदान में होगा. अब तक शिवसेना सिर्फ चुनाव लड़ाती रही है. शिवसेना के कुछ नेता आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में भी पेश कर रहे हैं.

शिवसेना ने पिछले दिनों अपने मुखपत्र में लिखे एक संपादकीय में भी गठबंधन में बराबरी की बात करते हुए इस बार मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी के संकेत दिए थे. शिवसेना की ओर से मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोकने की चर्चाओं पर विराम लगाने की मंशा के साथ पिछले दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा था कि मुख्यमंत्री पद पर कोई भ्रम नहीं है. मुख्यमंत्री बीजेपी का ही बनेगा. वही दोबारा सीएम बनेंगे.

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दरअसल इस तनातनी की शुरुआत हुई बीजेपी की तरफ़ से जब लोकसभा चुनाव के ठीक बाद बीजेपी ने ये कहना शुरु कर दिया कि चुनाव शिवसेना के साथ लड़ेंगे लेकिन मुख्यमंत्री तो बीजेपी का ही होगा. इस बात पर शिवसेना की तरफ़ से आपत्ति जताई गई मगर धीरे धीरे महाराष्ट्र बीजेपी के बड़े नेता ही ये संकेत देने लगे कि गठबंधन होगा तो उनकी शर्तों पर. शिवसेना ने इसे वादाखिलाफी करार देते हुए अकेले लड़ने की तैयारी शुरु की.

बीजेपी के इस तेवर को देखते हुए शिवसेना ने अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी शुरु कर दी और ताबड़तोड़ दूसरे पार्टी के नेताओं की इनकमिंग भी शुरु कर दी है. वहीं बीजेपी ने भी गठबंधन नहीं होने पर सभी 288 सीटों के लिए उम्मीदवार जुटाना शुरू कर दिया है. अब सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने शिवसेना पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है और उनके सामने 180-108 का फार्मूला रखा दिया जिसे शिवसेना ने अफ़वाह क़रार दिया है.

बता दें कि शुरुआती तौर पर दोनों दलों के नेताओं की ओर से 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ने पर चर्चा के संकेत दिए गए. वहीं 18 दल अन्य सहयोगी दलों को देने पर बात चली. हालांकि अभी सीटों का पेंच सुलझा नहीं है. कहा जा रहा है कि बदले माहौल के बीच बीजेपी ज्यादा सीटों पर लड़ सकती है. 2014 के विधानसभा चुनाव में कुल 288 में बीजेपी को 122 और शिवसेना को 63 सीटें मिलीं थीं.

तय फार्मूले के मुताबिक मुख्यमंत्री पद ढाई ढाई साल दोनों पार्टियों को मिलना था लेकिन अब उसपर खुद मुख्यमंत्री ने पूर्णविराम लगा दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वो आदित्य ठाकरे को उप मुख्यमंत्री बनाकर उनके साथ काम करना पसंद करेंगे. ऐसे में शिवसेना ये समझती है कि अकेले चुनाव लड़ना ही सही होगा जिसके लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं. यानि 2014 की तरह ही बीजेपी शिवसेना एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं.

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राज ठाकरे से ईडी ने करीब नौ घंटे तक की पूछताछ

इन दिनों महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ का सामना कर रहे हैं. ईडी इन्फ्रास्ट्रक्टर लीजिंग एंज फाइनेंस (ईएल एंड एफएस) कंपनी के कर्ज और निवेश के मामले की जांच कर रहा है. इसी सिलसिले में राज ठाकरे को समन भेजा गया था. गुरुवार को राज ठाकरे सुबह 11.25 बजे अपने परिवार के सदस्यों के साथ दक्षिण मुंबई स्थित ईडी के दफ्तर पहुंचे और रात 8.15 बजे दफ्तर से निकले. ईडी के अधिकारियों ने उनसे करीब नौ घंटे पूछताछ की. राज ठाकरे ने ईडी के दफ्तर से निकलने के बाद बाहर इंतजार कर रहे संवाददाताओं के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और कार में … Read more

मनसे प्रमुख राज ठाकरे को ईडी का समन

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसिस सर्विस (आईएल एंड एफएस) में हुई वित्तीय धांधली के सिलसिले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे को समन भेजा गया है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है. राज ठाकरे से मनी लांड्रिंग के सिलसिले में पूछताछ होगी. ईडी ने उन्मेष जोशी को भी समन भेजा है, जो महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवसेना नेता मनोहर जोशी के पुत्र हैं. उन्मेष जोशी सोमवार को मुंबई में ईडी के दफ्तर में हाजिर हो चुके हैं. ईडी के दफ्तर के बाहर उन्मेष जोशी ने पत्रकारों को बताया कि लगता है, ईडी के अधिकारी जांच में हमको भी शामिल करना चाहते हैं. उन्होंने बातचीत की, … Read more