राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पालयट एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भारी पड़े. पायलट के बढ़ते दवाब के चलते गहलोत सरकार ने निकाय चुनाव के हाईब्रिड फॉर्मूले पर यू टर्न लेना पड़ा. इस फॉर्मूले पर दोनों के बीच की रार जब दिल्ली हाईकमान पर पहुंची तो प्रभारी अविनाश पांडे ने दोनों से मुलाकात कर इस मुद्दे को सुलझाया.
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राजस्थान में 49 नगर निकायों के लिए 16 नवम्बर को होगा मतदान, मतगणना 19 नवम्बर को
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में अगले महिने होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव का अधिकारिक ऐलान शुक्रवार हो गया. प्रदेश में 49 निकायों के लिए 16 नवंबर को मतदान किया जायेगा, मतगणना 19 नवंबर को होगी. चुनाव तारीख की घोषणा होने के साथ ही संबंधित 49 निकायों में शुक्रवार से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों का ऐलान शुक्रवार को राज्य चुनाव आयोग ने कर दिया है. प्रदेश के 49 निकायों के पार्षदों के चुनाव के लिए 16 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे. वहीें मतगणना 19 नवंबर को होगी. वहीं अध्यक्ष, सभापति और मेयर के लिए … Read more
सारण ने किया पायलट पर पलटवार, कहा – राष्ट्रीय लोकदल किसी की मेहरबानी का मोहताज नहीं
राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रदेशाध्यक्ष कृष्णा कुमार सारण ने राजस्थान के डिप्टी सीएम और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट पर पलटवार करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय लोकदल किसी की मेहरबानी का मोहताज नहीं है. लोकदल स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगी. सारण ने ये बयान देकर पायलट पर सीधा प्रहार किया है. दरअसल, होने वाले भरतपुर नगर निगम के चुनाव में रालोद और कांग्रेस के गठबंधन पर हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा था कि नगर निगम चुनाव में कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से गठबंधन नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि भरतपुर नगर निगम में मेयर के पद के लिए रालोद से एकमात्र … Read more
वीडियो खबर: निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव के नतीजों पर ये बोले पायलट
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने प्रदेश में दो सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों पर अपनी राय रखी. साथ ही निकाय चुनाव पर भी मीडिया को बताया. पायलट ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि शांति धारीवाल से उनकी बात हुई है और जनभावना के आधार पर फैसला किया जाएगा. उन्होंने ये भी बताया कि निकाय चुनावों के लिए अभी तक गठबंधन को लेकर कोई बात किसी से भी नहीं हुई है. पार्टी अपने दम पर बॉडी इलेक्शन में उतरेगी और अच्छा प्रदर्शन करेगी.
राजस्थान: उपचुनाव में दोनों सीटों पर BJP बुरी तरह से हारी, मंडावा में कांग्रेस तो खींवसर में RLP की हुई जीत
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश-प्रदेश में होने वाले चुनाव और अन्य राजनीति की खबरों पर सटीक नतीजे देने के बाद पॉलिटॉक्स की खबर पर एक बार फिर से मुहर लग गई है. राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में मंडावा विधानसभा सीट पर कांग्रेस की रीटा चौधरी तो खींवसर में आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) ने जीत दर्ज कर ली है. वहीं दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह से हार हुई है. पॉलिटॉक्स ने अपनी पिछली खबरों में पहले ही इस बात का जिक्र कर दिया था कि मंडावा से रीटा चौधरी (Rita Choudhary) तो खींवसर से रालोपा के नारायण बेनिवाल को मिलेगी जीत. इससे पहले लगातार दो चुनाव हार चुकीं रीटा चौधरी के लिए मंडावा उपचुनाव करो या मरो की स्थिति जैसा था. लेकिन यहां रीटा ने भाजपा की सुशीला सींगड़ा को 33704 मतों से पटखनी देते हुए एक बार फिर से मंडावा में कांग्रेस को खड़ा कर दिया है. (Narayan Beniwal) (Rita Choudhary)
बड़ी खबर: स्वीकार है हार, खींवसर में RLP ने अपने दम पर की जीत दर्ज, मंडावा में हुआ विश्वासघात- पूनिया
वहीं खींवसर विधानसभा क्षेत्र के लिए हमने शुरू से बताया कि यह क्षेत्र हनुमान बेनीवाल का गढ़ माना जाता है. यहां से खींवसर हनुमान के भाई नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) ने आरएलपी-भाजपा गठबंधन की लाज रखते हुए कांग्रेस के दिग्गज हरेंद्र मिर्धा को 4370 वोटों से हराया. एक समय सातवें राउण्ड तक की वोटिंग में हरेंद्र मिर्धा बेनीवाल से आगे चल रहे थे. उस समय ऐसा लगने लगा था कि दोनों सीटें कांग्रेस के पक्ष में आ जाएंगी. भाजपा के खेमे में उस समय सन्नाटा पसरा हुआ था लेकिन उसके बाद बेनीवाल ने बढ़त बनाना शुरू किया और लगातार बढ़त बनाते हुए हरेंद्र मिर्धा को पीछे छोड़ दिया.
हालांकि सत्ताधारी कांग्रेस के हाथ से दो में से एक सीट निकल गई लेकिन गुटों में बंटी कांग्रेस को इस जीत से हौंसला जरूर मिलेगा और आगामी निकाय चुनावों में कांग्रेस को इससे भारी फायदा होगा.
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बात करें मंडावा विधानसभा उपचुनाव की तो जैसा पॉलिटॉक्स ने शुरू से अपने दर्शकों को बताया कि मंडावा में सुशीला सींगड़ा को पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नुकसान उठाना पड़ेगा. इस सीट से विधायक रहे नरेंद्र खींचड़ के झुंझुनूं से सांसद बनने के बाद मंडावा सीट खाली हुई थी. नरेंद्र खींचड़ यहां से अपने सुपुत्र अतुल खींचड को लड़ाना चाहते थे, अधिकांश कार्यकर्ता इससे सहमत भी थे. राजेश बाबल व गिरधारीलाल के नाम भी पैनल में रखे गए थे लेकिन इसी बीच नामांकन के एक दिन पूर्व चंद घंटों पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुई सुशील सींगड़ा को उम्मीदवार बना दिया गया. पायलट प्रत्याशी को मैदान में उतारे जाने पर स्थानीय नेता अच्छे खासे नाराज थे. वहीं विधायक से सांसद बने नरेन्द कुमार यह कभी चाहेंगे कि भविष्य में मंडावा सीट पर खुद उनके या उनके परिवार की जगह किसी ओर का वर्चस्व कायम हो. बीजेपी कि इस आंतरिक कलह का बड़ा नुकसान सिंगड़ा को हुआ वहीं रीटा चौधरी ने यहां से भारी मतों से एक तरफा जीत हासिल की.
वहीं खींवसर में नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) क्षेत्र में हनुमान बेनीवाल की पकड़ और आरएलपी के युवा मतदाताओं के दम पर अपनी लाज बचा पाए हैं. नारायण को हरेंद्र मिर्धा पर मिली सिर्फ 4370 वोट की लीड कांग्रेस के उम्दा प्रदर्शन की झलक दिखाती है. हरेंद्र मिर्धा ने इस क्षेत्र में विरोधी हवा के बीच जाकर हनुमान किले में फतेह करना कबूल किया लेकिन कुछ वोटों से पीछे रह गए. कुल मिलाकर कहा जाए तो वे किनारे पर आकर हार गए लेकिन टक्कर कांटे की रही.
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ऐसे में यह कहा जाना बिलकुल गलत नहीं होगा कि लोकसभा चुनाव में मिले भारी बहुमत और उसके बाद देश में बीजेपी द्वारा राष्ट्रीय मुद्दों पर लिए गए बड़े-बड़े निर्णयों के बाद भी राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में खींवसर और मंडावा दोनों सीटों पर बीजेपी बुरी तरह चुनाव हार गई है. वहीं खींवसर में हनुमान बेनीवाल (RLP) और मंडावा में रीटा चौधरी ने जीत दर्ज की है.
निकाय चुनाव प्रणाली पर सरकार को घेरने का भाजपा ने बनाया मास्टरप्लान
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बुधवार को प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के आहवान पर प्रदेश के भाजपा सांसदो और विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में आगामी निकाय चुनाव व संगठनात्मक चुनावों पर चर्चा की गई. बैठक में प्रदेश के 13 सांसद, एक राज्यसभा सांसद व 53 विधायक मौजूद रहे. पार्टी मुख्यालय पर आयोजित हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गैर हाजिर रहीं. प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित सांसदों और विधायकों की इस बैठक के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने बैठक की जानकारी पत्रकारों को देते हुए कहा कि प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों, सरकार के निकाय चुनाव में … Read more
आलाकमान ने दी पायलट की बात को तवज्जो, निकाय प्रमुख के चुनाव के लिए पार्षद होना होगा जरूरी
पॉलिटॉक्स ब्यूरो: राजस्थान में होने वाले निकाय प्रमुखों के चुनाव के लिए गहलोत सरकार के अहम फैसले (हाईब्रीड फॉर्मूले) पर पार्टी आलाकमान ने रोक लगा दी है. सूत्रों से मिली जानकारी के बाद अब निकाय प्रमुख के चुनाव के लिए पार्षद होना जरूरी होगा. इससे पहले गुरुवार को यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने घोषणा की थी कि निकाय क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति और पार्षद का चुनाव हारा हुआ उम्मीदवार भी निकाय प्रमुख का चुनाव लड़ सकता है, जिसे हाईब्रीड फॉर्मूले का नाम दिया गया. जिसके बाद से प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है. खुद कांग्रेस के अंदर ही इस हाईब्रीड फॉर्मूले का जबरदस्त विरोध हो रहा है. प्रदेश कांग्रेस … Read more
वीडियो खबर: भरतपुर मेयर पर पायलट ने किया विश्वेन्द्र सिंह का समर्थन, नहीं होगा गठबंधन
राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस सचिन पायलट ने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस और आरएलडी का गठबंधन सिर्फ विधानसभा चुनाव तक ही था, निकाय चुनाव में हम कहीं भी किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे.
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वीडियो खबर: ‘सभी को करना चाहिए निकाय चुनाव के हाईब्रिड फॉर्मूले का सम्मान’
राजस्थान में चल रही निकाय चुनाव के हाईब्रिड फॉर्मूले पर पार्टी मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने पॉलिटॉक्स टीम को दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि मतभेद ठीक नहीं है. सभी को हाईब्रिड फॉर्मूले का सम्मान करना चाहिए.
वीडियो खबर: निकाय चुनाव में हाईब्रिड फार्मूले पर फिर बोले पायलट
राजस्थान के निकाय चुनावों पर गहलोत सरकार (Gehlot Government) के हाईब्रिड फॉर्मूले पर डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने फिर धावा बोला. पायलट ने कहा कि निकाय चुनावों पर ये फैसला सही नहीं है. इस पर सरकार को पुर्नविचार करना चाहिए.