जयपुर में दंगा भड़काने की साजिश नाकाम

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले तीन दिनों से सांप्रदायिक दंगा भड़काने के प्रयास चल रहे हैं. सोमवार 12 अगस्त को रामगंज इलाके में कुछ कांवड़ियों के माध्यम से उपद्रव शुरू हुआ. कांवड़ियों के जयकारों से भड़ककर कुछ शरारती तत्वों ने पत्थर फेंके. झड़प हुई. मामला शांत हो गया. रात साढ़े दस बजे के बाद ईदगाह के पास सड़क पर कुछ उपद्रवी प्रकट हुए और उन्होंने दिल्ली जाने वाली बसों और अन्य वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया. वे राहगीरों को रोककर नाम पूछकर मारपीट करने लगे. इसके बाद मंगलवार रात गंगापोल इलाके में सोमवार रात की तरह साढ़े दस बजे रावलजी चौराहे पर दंगा फैलाने का प्रयास शुरू हो गया. दो पक्ष आमने-सामने हुए. झगड़ा हुआ, पथराव हुआ, वाहनों में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट शुरू हो गई.

सोमवार रात और दूसरे दिन मंगलवार को उसी तय समय पर गंगापोल में यह अचानक हुआ घटनाक्रम था. जबकि कहीं से कोई उकसावा नहीं था. सोमवार को ईद का त्योहार था. दिन भर सांप्रदायिक सद्भाव के साथ परंपरागत तरीके मनाया गया. राजस्थान में धारा 370 जैसा कोई लफड़ा भी नहीं है. तनाव जैसी कोई बात ही नहीं थी. सुबह कांवड़ियों पर पथराव के घटना के बाद पुलिस को सतर्क रहना चाहिए था, वह नहीं रही और दोनों रात अपनी आदत के मुताबिक घटनाक्रम प्रारंभ होने के एक घंटे बाद मौके पर पहुंची. इस दौरान शहर के ज्यादातर जन प्रतिनिधियों का रवैया हास्यास्पद और शर्मनाक रहा. चुनाव के समय जनता के सामने गिड़गिड़ाने वाले ये नेता सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच सकते थे, लेकिन आदर्श नगर विधायक रफीक खान के अलावा और कोई नहीं पहुंचा.

सोमवार रात एक ही जगह उपद्रव हुआ था. मंगलवार रात दो अलग-अलग गुटों ने दो जगह उपद्रव शुरू किया. 10.30 बजे रावलजी के चौराहे पर और 11.20 बजे बदनपुरा में. दोनों जगह दंगे भड़काने का एक ही तरीका था. पांच उपद्रवी दस-पंद्रह स्थानी उपद्रवियों को साथ में लेकर हंगामा शुरू करते हैं. भीड़ जुट जाती है और वह भीड़ उकसावे के बाद बर्बर हो जाती है. सोमवार रात ईदगाह रोड पर दंगाइयों के निशाने पर राहगीर थे. दिल्ली बाईपास से गुजरने वाले वाहनों को उन्होंने निशाना बनाया. मंगलवार रात गंगापोल में उन्होंने उपद्रव को विस्तार देते हुए वाहनों में तोड़फोड़ के साथ ही दुकानों को निशाना बनाया. दंगाइयों की भीड़ रावजी चौराहे पर अनियंत्रित हुई और देखते ही देखते गंगापोल, सुभाष चौक की तरफ फैल गई. पुलिस ने पहुंचकर आधा घंटे में भीड़ को तितड़ बितर कर दिया. इसके लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े.

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जब दंगाई गंगापोल में दंगा भड़काने में सफल नहीं रहे तो नजदीकी इलाके बदनपुरा के शांति कालोनी, जयंती कालोनी आदि मोहल्लों में उपद्रव शुरू हो गया. अब तक दंगाई पथराव और तोड़फोड़ ही कर रहे थे. जयंती कालोनी में दंगाइयों ने धारदार हथियार भी निकाल लिए. शांति कालोनी में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ. कई लोग मामूली रूप से घायल हुए. यह दिल्ली बायपास से सटा इलाका है और नजदीक ही खोले के हनुमानजी का मंदिर है. हालांकि पुलिस ने दंगाइयों पर काबू करने में काफी मशक्कत की और देर रात पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका था, लेकिन आम लोगों में दहशत का आलम पसर चुका था. बहरहाल शहर के 15 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी गई है. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है. गश्त जारी है. इस तरह जयपुर में लगातार दूसरे दिन दंगा भड़काने का प्रयास विफल रहा.

सोमवार रात के बाद मंगलवार रात को भी दंगा भड़कने से साफ था कि कुछ लोग शहर का माहौल खराब करने में जुटे हैं, फिर भी यहां के तमाम जनप्रतिनिधि लापरवाह और उदासीन दिखे, जैसे कि उनका इस घटनाक्रम से कोई लेना देना ही न हो. एक अखबार के संवाददाता ने छह लोगों को फोन किया था. हवामहल विधायक महेश जोशी को रात 12.28 बजे फोन किया, तो उन्होंने नहीं उठाया. दूसरी बार फोन करने पर कहा कि तबीयत ठीक नहीं थी, सो गया था. बताओ क्या हुआ? दंगा भड़कने की सूचना दी तो उन्होंने कहा कि पुलिस फोर्स लगा तो रखी है. चिंता न करें. इसके बाद शायद वह सो गए होंगे.

किशनपोल के विधायक अमीन कागजी को फोन किया तो बोले, खास मीटिंग में हैं. फिर फोन किया तो बताया कि सुभाष चौक थाने पर हैं. इसके बाद 15 बार फोन नहीं उठाया. 16वीं बार उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई बात नहीं करनी. वहीं पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को रात 11.21 बजे फोन किया और हालात बताए तो उन्होंने कहा, हां, सूचना मिली है. जैसी सरकार वैसा माहौल है. मैं कमिश्नर से बात करता हूं. 11.46 बजे फोन कर बताया कि पुलिस अब तक नहीं पहुंची, तो चतुर्वेदी ने कहा, एसपी जल्दी ही पहुंचेंगे.

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रात 11.27 बजे सिविल लाइंस क्षेत्र के विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास को फोन किया तो उन्होने कहा कि चिंता मत करो, सब्र करो. मेरी पुलिस कमिश्नर से बात हो गई है. कुछ ही देर में पुलिस पहुंच रही है. तो वहीं विधायक अशोक लाहोटी तो दो कदम आगे निकले, अशोक लाहोटी को 11.23 बजे फोन किया, तो उन्होंने पहले घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त की, फिर कहा, चिंता मत करो, मैं अभी पुलिस से बात करता हूं. फोर्स भेजने को कहता हूं. इसके बाद उनसे फोन पर बात नहीं हो पाई. शायद मोबाइल ऐरोप्लेन मोड ओर चला गया होगा.

इन सबसे अलग आदर्श नगर विधायक रफीक खान को जब 11 बजे उपद्रव की सूचना मिली तो वह तत्काल दिल्ली बाईपास पहुंच गए थे. उन्होंने पुलिस और दोनों समुदायों के लोगों से बातचीत की. लोगों को घर लौट जाने के लिए समझाते रहे. रात दो बडे शांति व्यवस्था बहाल होने के बाद वह घर लौटे. रफीक खान के अलावा शहर के पांच नेता, जिनमें एक भाजपा के और चार कांग्रेस के हैं, टालमटोल करते ही दिखे. क्या इन जन प्रतिनिधियों के मन में नहीं आया कि दंगा भड़क रहा है तो उन्हें तुरंत मौके पर पहुंचना चाहिए? क्या आजकल के जन प्रतिनिधि सिर्फ बयानबाजी और विरोधी पार्टी की आलोचना के दम पर ही राजनीति करेंगे? इन्हें जनता के सुख-दुख से कोई लेना-देना है या नहीं?

राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति इसी माह

राजस्थान में मदन लाल सैनी के निधन के बाद उनकी जगह नए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति इस महीने होने की संभावना है. उनके निधन के बाद से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद खाली है. हालांकि इससे भाजपा को कोई ज्यादा असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है. प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बगैर ही सदस्यता अभियान जोरशोर से जारी है. संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सदस्यता अभियान समाप्त होने के बाद संगठन चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा. विश्वसनीय सूत्रों से खबर मिली है कि प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र गहलोत को संगठन चुनाव प्रभारी और प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल को सह प्रभारी बनाया जा रहा है. जल्दी … Read more

प्रियंका को राजस्थान से राज्यसभा में भेजने की मांग

राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन से खाली राज्यसभा सीट पर 26 अगस्त को उपचुनाव होगा, जिसके लिए नामांकन भरने की आखिरी तारीख 14 अगस्त है. पहले यह भाजपा की सीट थी, लेकिन अब राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस का बहुमत होने से यह सीट कांग्रेस को मिलना लगभग तय है. राजस्थान की सीट पर किसको उम्मीदवार बनाया जाए, इस पर कांग्रेस हाईकमान विचार कर रहा है. इस बीच राजस्थान से इस सीट पर प्रियंका गांधी को सांसद बनाकर राज्यसभा भेजने की अटकलें लगाई जा रही है.

पूर्व में इस सीट पर कांग्रेस की तरफ से डॉ. मनमोहन सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी. मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सांसद थे. उनका कार्यकाल जून में समाप्त हो चुका है. मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से राज्यसभा में भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन वहां कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक ने खाली राज्यसभा सीट पर वाइको को चुने जाने का वादा कर लिया था, इसलिए मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से राज्यसभा में नहीं भेजा जा सका. तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने राज्यसभा की तीन-तीन सीटें जीती हैं.

राजस्थान की राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार के चयन की कवायद के बीच कांग्रेस विधायक खिलाड़ीलाल बैरवा ने कहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनाया जाना चाहिए. प्रियंका गांधी को राज्यसभा में भेजने के साथ ही उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से जो परिस्थितियां बनी हैं, उसमें कांग्रेस कार्यकर्ता परेशान हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में ख़िलाड़ीलाल बैरवा ने कहा कि वह नेक इंसान हैं, लेकिन आज के हालात को ध्यान में रखते हुए प्रियंका गांधी का कद बढ़ाया जाना जरूरी है. प्रियंका के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने से पार्टी को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा. राजस्थान से प्रियंका गांधी का रिश्ता बनेगा, जिससे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों पर भी विराम लगेगा.

चुनाव आयोग ने गुरुवार एक अगस्त को राजस्थान और उत्तर प्रदेश की एक-एक खाली राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है. राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस का बहुमत होने से वह इस सीट को आसानी से जीतने की स्थिति में है, क्योंकि 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में 198 सदस्य हैं जिसमें कांग्रेस के पास 100 सदस्य है तथा एक लोक दल, 11 निर्दलीय सदस्यों के समर्थन के साथ बसपा के 6 सदस्यों का समर्थन भी है, इस तरह उपचुनाव में यह सीट कांग्रेस की तय है. प्रियंका गांधी या मनमोहन सिंह या फिर कोई ओर, राज्यसभा में उनका कार्यकाल तीन अप्रैल 2024 तक रहेगा. चुनाव के लिए सात अगस्त को अधिसूचना जारी होने वाली है.

राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 14 अगस्त होगी, 19 अगस्त तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. उप्र की एक सीट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर के इस्तीफे से खाली हुई है. वह सपा छोड़कर भाजपा में चले गए हैं. पूरी संभावना है कि नीरज शेखर भाजपा के कोटे से राज्यसभा में पहुंच जाएं.

मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग पर कठोर कानून वाले विधेयक राजस्थान विधानसभा में पास

राजस्थान विधानसभा ने सोमवार को राज्य में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए “राजस्थान लिंचिंग संरक्षण विधेयक-2019” और ऑनर किलिंग की घटनाओं पर रोकथाम के लिए संशोधित विधेयक ‘राजस्‍थान सम्‍मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक, 2019’ ध्वनिमत से पारित कर दिया. मणिपुर के बाद अब राजस्थान मॉब लिचिंग कानून बनाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है. राजस्थान में अब मॉब लिंचिंग की घटना में पीड़ित की मौत पर दोषियों को आजीवन कारावास और पांच लाख रुपये तक का जुर्माने की सजा भुगतनी होगी. वहीं, मॉब लिंचिंग में पीड़ित के गंभीर रूप से घायल होने पर 10 … Read more

सीपी जोशी ने मंत्री को लगाई फटकार

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने श्रम मंत्री टीकाराम जूली को जोर से डांट दिया. जूली एक मुद्दे पर बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे. जोशी ने कहा, ‘सरकार का पक्ष ठीक नहीं है. आप इस मामले में विभाग के अधिकारियों के साथ फिर से चर्चा करिए, उसके बाद मैं सदन में फिर से इस पर चर्चा करवाउंगा.’ जोशी के यह कहते ही कांग्रेस के विधायक स्तब्ध रह गए और भाजपा विधायकों ने मेजें थपथपाकर समर्थन किया.

शून्यकाल में भाजपा विधायक मदन दिलावर ने कोटा की एएसआई कंपनी के श्रमिकों के साथ अन्याय का मुद्दा उठाते हुए इस पर आधा घंटा विशेष बहस कराने की मांग की थी. उनका कहना था कि इस मामले में श्रम कानूनों का उल्लंघन हुआ है. इसे सीपी जोशी ने मंजूर कर लिया. दिलावर ने कहा कि 24 जुलाई को उन्होंने प्रश्नकाल में सरकार से पूछा था कि रामगंज मंडी में चल रही एएसआई कंपनी में ठेका रजिस्टर बनाकर रखा जाता है? इस पर श्रम मंत्री ने सदन में झूठ बोला. कंपनी में काम कर रहे ठेका श्रमिकों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है. श्रम विभाग इसका रिकॉर्ड ही नहीं रखता.

दिलावर ने आरोप लगाया कि श्रम मंत्री ने अपने जवाब में 60-65 श्रमिक होने की बात कही, जबकि कंपनी में 35 हजार से ज्यादा ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं. इस पर श्रम मंत्री ने कहा कि विधायक जिन श्रमिकों के बारे में बात कर रहे हैं, वे खनन श्रमिक हैं. खनन श्रमिकों और फैक्ट्री श्रमिकों में अंतर होता है. खनन श्रमिकों के बारे में सवाल पूछा ही नहीं था. जवाब में मंत्री ने श्रम कानूनों की धाराएं पढ़ना शुरू कर दिया.

जोशी ने श्रम मंत्री टीकाराम जूली को टोकते हुए कहा कि आप मुद्दे की बात कीजिए, लेकिन जुली बार-बार अपना जवाब दोहराते रहे. इस पर जोशी नाराज हो गए और कहा, ‘बैठ जाइए. सरकार का व्यू ठीक नहीं है, इसे समझिए. इस बारे में आपको चिंता करनी चाहिए और विभाग के अफसरों से भी चर्चा करें. इसके बाद इस मुद्दे पर सदन में फिर से चर्चा कराई जाएगी’.

राजस्थान विधानसभा में हंगामे के बीच तीन विधेयक पारित

PoliTalks news

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सरकार ने तीन विधेयक पारित करवा लिए. ये विधेयक हैं सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय एवं वितरण का नियमन) (राजस्थान) संशोधन विधेयक, राजस्थान मंत्री वेतन (संशोधन) विधेयक 2019 और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक. सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय एवं वितरण का नियमन) (राजस्थान) संशोधन विधेयक स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने पेश किया. विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में हुक्का बार का संचालन पूरी तरह बंद हो चुका है. अब कहीं भी इसका संचालन करते हुए पाए … Read more

गौ-संरक्षण पर शकुंतला रावत के गैर सरकारी संकल्प पर हंगामा

राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायक शकुंतला रावत के एक संकल्प पर पक्ष-विपक्ष में हंगामा हुआ. इस संकल्प में मांग की गई कि राज्य में जन सहयोग से संचालित गौशालाओं के लिए किसी भी किस्म की जमीन का रजिस्ट्रेशन और रजिस्ट्री तहसील स्तर पर होनी चाहिए. रावत के इस गैर सरकारी संकल्प का विपक्ष ने भी समर्थन किया और इसे सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की. फिर भी यह संकल्प पारित नहीं हो सका. विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने संकल्प पारित करवाने के लिए पीठासीन सभापति राजेन्द्र पारीक से मतदान करवाने की मांग की. इस पर पारीक ने इस पर बहस समाप्त कर दी और अन्य विधायी कार्य … Read more