सचिन पायलट के खिलाफ किसने रची साजिश

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (Rajasthan Congress) में एक व्यक्ति एक पद की मांग तेज हो रही है. निशाने पर सचिन पायलट (Sachin Pilot) हैं, जो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. अगर दबाव बढ़ा तो पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ सकता है. इस संभावना के मद्देनजर कुछ नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए लॉबिंग भी शुरू कर दी है.

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राजस्थान (Rajasthan) की कानून व्यवस्था को लेकर आईजी एवं जिला पुलिस अधीक्षकों की दो दिवसीय कॉफ्रेंस (Confrense) बुधवार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय (Police Headquarter) में शुरु हुई. इस कांफ्रेंस में गृहमंत्री का जिम्मा संभाल रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने डीजीपी, आईजी, एसपी सहित गृह सचिव से प्रदेश की कानून व्यवस्था की जानकारी ली. पुलिस मुख्यालय पर आयोजित इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री गहलोत ने बुधवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि आज सभी से जिले वार चर्चा की हैं. कल सभी पुलिस अधिक्षकों से वन टु वन चर्चा की जायेगी. सीएम गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार की मंशा प्रदेश … Read more

राजस्थान कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद की मांग तेज

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (Rajasthan Congress) में एक व्यक्ति एक पद की मांग तेज हो रही है. निशाने पर सचिन पायलट (Sachin Pilot) हैं, जो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. अगर दबाव बढ़ा तो पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ सकता है. इस संभावना के मद्देनजर कुछ नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए लॉबिंग भी शुरू कर दी है. प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडे पहले ही कह चुके हैं कि प्रदेश में पूर्णकालिक अध्यक्ष होना चाहिए. मंगलवार को राजस्व मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने भी यही मांग उठाई.

गौरतलब है कि 29 अगस्त को अविनाश पांडे ने कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ लंबी बैठक की थी. उसके बाद उन्होंने कहा था कि प्रदेश में पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग आ रही है. उनके इस बयान के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति करवट लेने लगी है और एक बार फिर एक व्यक्ति एक पद की मांग चल पड़ी है. सोनिया से पांडे की मुलाकात के बाद हरीश चौधरी दिल्ली जाकर पांडे से मिले थे.

हरीश चौधरी ने कहा कि एक व्यक्ति को एक ही पद संभालना चाहिए. हालांकि हरीश चौधरी खुद दो पदों पर हैं और AICC के सचिव होने के साथ ही कैबिनेट मंत्री भी बने हुए हैं. चौधरी ने कहा कि उन्होंने मंत्री बनने के बाद हाईकमान के सामने AICC सचिव का पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी. प्रदेश में जिन नेताओं के पास भी दो पद हैं, उन्हें स्वविवेक से एक पद छोड़ने का फैसला करना चाहिए. दो पदों पर रहते हुए किसी भी पद के साथ न्याय करना संभव नहीं है.

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हरीश चौधरी ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या वह खुद प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं? उन्होंने कहा कि एक सोची-समझी साजिश के तहत जाट प्रदेशाध्यक्ष की मांग उठाई जा रही है. पहले किसानों के नाम पर और अब जाति का नाम पर जाटों को पार्टी से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को फैसला लेने का अधिकार दिया है. सोनिया गांधी जो भी फैसला लेंगी, वही सर्वमान्य होगा.

इस बीच AICC के मीडिया पैनलिस्ट संदीप चौधरी (Sandeep Choudhary) ने कहा है कि राजस्थान में युवा जाट नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. इसके साथ ही चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी चाहिए. इसी तरह सरकार में भी सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाने की जरूरत है. इसके तहत किसी दलित नेता को उप मुख्यमंत्री बनाना चाहिए, जिससे निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी को लाभ मिलेगा.

गहलोत सरकार की शिकायत पहुंची हाईकमान तक, सोनिया ने दिये निर्देश

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में गुटबाजी अपने चरम पर है. सरकार और संगठन में चल रही खिंचतान अब जगजाहिर है. राजस्थान कांग्रेस में आपसी खींचतान की खबर हाईकमान को भी लग गई है. हाल ही में पार्टी के कई पदाधिकारियों व नेताओं ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल के जरिये कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से सरकार के मंत्रियों की शिकायत की है. सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे (Avinash Pandey) को वास्तविक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने 8 माह से अधिक का समय हो चुका है. सरकार के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) हैं और संगठन के मुखिया हैं सचिन पायलट (Sachin Pilot).

गौरतलब है कि राजस्थान में चुनाव के पहले से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चली तनातनी अभी तक मतलब सरकार बनने के बाद तक भी बदस्तूर जारी है. इसके अनेकों उदाहरण हैं जो कि कई मौकों पर साफ देखे गए हैं. फिर चाहे वो टिकट विरतण के समय की खींचतान हो या चुनाव जीतने के बाद कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चली लम्बी तनातनी. या फिर पिछले 8 माह में सरकार या संगठन का कोई कार्यक्रम हो. ऐसा कोई अवसर नहीं गया होगा जहां पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सबने महसूस नहीं किया हो.

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सूत्रों ने बताया राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस का शासन आने के बाद से ही कांग्रेस का आम कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पार्टी के पदाधिकारी भी सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों के नहीं मिलने और काम नहीं करने को लेकर नाराज चल रहे थे. स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत किये जाने के बावजूद मंत्रियों का रवैया नहीं बदला तो पार्टी के कुछ नाराज पदाधिकारियों ने सरकार और मंत्रियों की आलाकमान से जुड़े नेताओं और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर शिकायत की. वेणुगोपाल ने इसकी जानकारी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को दी.

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मंत्रियों के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रहेंगे. जबकि प्रदेश में सरकार बनने के 8 माह बाद भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की सरकार से नाराजगी अब कांग्रेस के आलाकमान को भी बहुत खल रही है. सोनिया गांधी ने इस संबंध में पार्टी के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से वास्तविक रिपोर्ट मांगी है.

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पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के मुलाकात कर उन्हें भी यह रिपोर्ट दी थी कि सरकार के मंत्री न तो जिलों में जाते है और यदि जाते भी हैं तो सरकारी या निजी कार्यक्रम के बाद वापस आ जाते हैं. ये मंत्री कांग्रेस कार्यालय जाना तो दूर वहां के नेताओं से भी नहीं मिलते हैं. यही वजह थी कि हाल ही में राजीव गांधी के 75वें जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कार्यकर्ता को तवज्जो देने और मंत्रियों को जिले में जाने, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के साथ ही उनकी समस्याएं दूर करने की बात कही थी.

सचिन पायलट ने कहा था कि राजीव गांधी संगठन को महत्वपूर्ण मानते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था. मुख्यमंत्रीजी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों की सुनिए. जब कार्यकर्ता और विधायक आपके पास काम लेकर जाएं तो आप डीपीआर बनाने की बात नहीं कहकर तुरंत उसकी घोषणा कर दिया कीजिए. राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी कहा करते थे कि हमेशा सरकार से ज्यादा संगठन को तवज्जो देनी चाहिए. अब यह बात भी आलाकमान के पास पहुंची है कि सरकार न तो प्रदेश कांग्रेस को तवज्जो दे रही है और ना ही कार्यकर्ताओं को.

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प्रदेश में सरकार ने अभी अपने एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया है और सरकार के प्रति इतनी जल्दी कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी से अब पार्टी हाईकमान भी चिंता में है. हाईकमान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायतों को इसलिए भी सही मान रहा है कि यदि सरकार का कामकाज अच्छा होता और कार्यकर्ता तथा जनता खुश होती तो लोकसभा चुनावों में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता. इसीलिए अब सोनिया गांधी ने प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से स्थिति की वास्तविक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. जिससे कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूरी बनाने वाले मंत्रियों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आ सके और उसी के अनुसार उन ओर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके.

आखिर किसने रची रामेश्वर डूडी के खिलाफ हत्या की साजिश?

बीकानेर (Bikaner) के पूर्व सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi ) के खिलाफ हत्या की साजिश रचने का मामला सामने आया है. हरियाणा की सिरसा पुलिस (Sirsa Police) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर इस साजिश का खुलासा किया. इनमें से एक आरोपी बीकानेर (राजस्थान) का रहने वाला है. उसने कबूल किया है कि रंजिश के चलते उसने डूडी की हत्या की योजना बनाई.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने मीडिया से बातचीत में इसे पॉलिटिकल रंजिश का रंग देते हुए हत्या की साजिश रचने की बात कही. इस संबंध में रामेश्वर डूडी मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के आवास पर पहुंच कर खुद की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की. उन्होंने सरकार से प्रोडक्शन वारंट के जरिए दोनों आरोपियों को राजस्थान लाकर पूछताछ करने की मांग भी की है ताकि साजिश के पीछे किसका हाथ है, इसका खुलासा हो सके. वर्तमान में रामेश्वर डूडी की सुरक्षा में दो पीएसओ तैनात हैं.

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इससे पहले गत रात मामला सामने आने पर सीएम गहलोत ने डूडी से फोन पर बातचीत की और घटना की जानकारी ली. वहीं बीकानेर रेंज के डीआईजी जोसमोहन ने बताया कि आरोपियों को लाने के लिए एक टीम सिरसा भेजी जा चुकी है.

दोनों स्टेट गैंग के सदस्य, एक बीकानेर निवासी
इस मामले में सिरसा डीएसपी राजेश चेची ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार इससे पहले हरियाणा की सिरसा सीआईए पुलिस ने रविवार को ऐलनाबाद क्षेत्र के मिठीसुरेरां गांव में गश्त के दौरान स्टेट गैंग के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक बीकानेर के सांवतसर निवासी श्याम सुंदर बिश्नोई (Shyam Sundar Bisnoi) और दूसरा हरियाणा के अटेला का रहने वाला देवेंद्र सिंह उर्फ बेड़ा उर्फ देव है. दोनों के पास से दो अवैध पिस्तौल, आठ कारतूस और एक बाइक बरामद हुई है. दोनों आरोपी हार्डकोर क्रिमिनल्स है. इन अपराधियों पर हत्या और लूटपाट सहित कई मामले दर्ज हैं.

रंजिश के चलते रची हत्या की योजना
पुलिस की पूछताछ में श्याम सुंदर ने बताया कि पिछले साल उसके खिलाफ बीकानेर में एक लड़की के अपहरण व दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था जिसमें डूडी ने लड़की पक्ष की पैरवी की थी. इस मामले में बिश्नोई को सजा भी हुई. इसी के चलते उसने डूडी की हत्या की साजिश रची. श्याम सुंदर ने बताया कि उसने डूडी के घर, उनके घूमने आने-जाने का समय, सुरक्षा गार्ड सहित अन्य जानकारियां जुटा ली थी. वह कथित तौर पर पटना जेल में बंद किसी बदमाश से 6 पिस्तौल और साढ़े पांच सौ कारतूस लेने जाने वाला था. इसके लिए उसने 3.60 लाख रुपये का भुगतान किया है. इस काम में देवेंद्र उसकी मदद कर रहा था.

बीकानेर जेल से जुड़े हैं साजिश के तार
जैसा श्याम सुंदर ने बताया, डूडी की हत्या की साजिश बीकानेर जेल में ही रची गयी. बीकानेर के चर्चित रामकिशन सियाग हत्याकांड में जेल में बंद शंकरलाल जाट और अजीत बडबर की श्याम सुंदर से वहीं मुलाकात हुई थी. इस तीनों ने मिलकर डूडी की साजिश रचने को अंजाम दिया. शंकर और अजीत ने ही श्याम सुंदर को हथियार और कारतूस दिलाने का जिम्मा लिया था.

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आदतन अपराधी हैं श्याम सुंदर और देवेंद्र
श्याम सुंदर और देवेंद्र दोनों आदतन अपराधी हैं. श्याम सुंदर के खिलाफ राजस्थान (Rajasthan) और हरियाणा (Haryana) में छह केस दर्ज हैं. हाल में 2 जून को उसने झुंझुनूं के खेतड़ी में साथियों के साथ मिलकर वासी बनवास संदीप सैनी की घर में घुसकर हत्या कर दी थी. पुलिस को उनकी तलाश है. इसके अलावा, बीकानेर के जेएनवीसी, नापासर, नोखा और कोटगेट पुलिस थानों में रेप, चोरी, आम्र्स एक्ट के मुकदमे दर्ज हैं. देवेंद्र आपराधिक प्रवृति का है. उसके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज हैं.

‘जब राज नहीं होता तो जूते के जोर से काम कराना हमें आता है’- सर्राफ, भाजपा विधायक, पूर्व शिक्षामंत्री

राजस्थान (Rajasthan) के भाजपा विधायक (BJP MLA) और पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ (Kalicharan Saraf) ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, ‘जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है‘. इस पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस (PCC) प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा की, ‘सर्राफ ने इस तरह का बयान देकर मर्यादित भाषा का हनन करते हुए उनकी औंछी मानसिकता का उदाहरण दिया है.’ वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि, ‘कालीचरण सर्राफ का यह बयान अलोकतांत्रिक है’.

दरअसल गुरूवार सुबह पूर्व शिक्षा मंत्री एवं राजधानी जयपुर के मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक कालीचरण सर्राफ जयपुर के करतारपुरा फाटक के पास नाले में हो रहे कटाव, अतिक्रमण सहित अन्य मांगो के लिए धरना दे रहे थे धरना खत्म होने के बाद सर्राफ जब पत्रकारों से रूबरू हुए तो उन्होंने कहा- “जब राज होता है तो कलम की ताकत से काम होता है, जब राज नहीं होता तो जूते के जोर पर काम होते है, हमें जूते के जोर पर काम कराना आता है” सर्राफ का यह बयान धरना स्थल पर चर्चा का विषय बन गया और इसके बाद शुरू हुआ राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला.

पूर्व शिक्षामंत्री सर्राफ के इस अमर्यादित बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा (Archana Sharma) ने एक प्रेस नोट और एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि, ‘सर्राफ ने धरने के दौरान जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह उनकी औंछी मानसिकता का एक उदाहरण है.’ आगे उन्होंने कहा कि, ‘जब कालीचरण सर्राफ मंत्री थे तब उन्होंने अपनी कलम का इस्तेमाल भ्रष्टाचार व अपराध को संस्थागत करने के लिये किया था, यही कारण है कि जनता ने उनको नकार दिया. आगे उन्होंने कहा कि राजनीति के लम्बे अनुभव के बावजूद इस तरह के विवादित बयानों से स्पष्ट होता है कि उन्हें जनभावनाओं से कोई सरोकार नहीं है. सुर्खियों में बने रहने के लिये वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.’

कालीचरण सर्राफ के द्वारा दिये गये धरने के पर अर्चना शर्मा ने कहा कि सर्राफ ने जिस क्षेत्र में धरना दिया वहॉं उनके मंत्री रहते हुए नाले में बहकर एक युवक की मौत हो गयी थी. तब सर्राफ ने इस पुरे मामले की सुध तक नहीं ली थी. आगे शर्मा ने सर्राफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्राफ जब मंत्री थे उस समय उनके एक समर्थक ने व्यापारी को सरेआम गोली मारी थी जिससे जाहिर होता है सर्राफ भ्रष्टाचार को ही पनपाने के माहिर नहीं हैं अपितु अपराधियों के भी संरक्षक है. कालीचरण सर्राफ द्वारा दिया गया धरना अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिये रचा गया प्रपंच मात्र है.

वहीं भाजपा विधायक सर्राफ के विवादित बयान पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी (Mahesh Joshi) ने पलटवार करते हुए कहा- ‘कालीचरण सराफ एक वरिष्ठ नेता हैं, उनका यह बयान अलोकतांत्रिक है, सर्राफ को उनकी पार्टी सीरियस नहीं लेती, भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का अभाव है इसलिए सर्राफ की जुबान बार बार फिसलती रहती है.’

आपकों बता दें कि कालीचरण सर्राफ व अर्चना शर्मा दोनों एक ही विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनैतिक ताल ठोकते आये हैं. सर्राफ के सामने अचर्ना शर्मा को पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पडा है. कालीचरण सर्राफ भाजपा के वरिष्ट नेता हैं और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गये हैं, सर्राफ पूर्व में राजे सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में से एक माने जाते है.

हरियाणा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक तंवर को हटाने की तैयारी

हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर कांग्रेस ने पार्टी नेताओं के अंदरूनी मतभेद दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) के बीच भारी मतभेद चल रहे हैं. पांच साल पहले राहुल गांधी ने अशोक तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था. इन दिनों हुड्डा और तंवर के बीच भारी खींचतान चल रही है, जिससे विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर विपरीत असर पड़ सकता है. हुड्डा लंबे समय से अशोक तंवर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव हरियाणा के प्रभारी गुलाम नबी आजाद (Gulam Nabi Azad) ने हाल ही प्रदेश के प्रमुख नेताओं से बातचीत की है और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को भी परिस्थितियों से अवगत कराया है. इसके बाद तंवर को हटाने की संभावना मजबूत हो गई हैं. आजाद ने जिन नेताओं से विचार विमर्श किया है, उनमें हुड्डा और तंवर के अलावा कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य कुमारी शैलजा, विधायक दल की नेता किरण चौधरी, वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) और अजय यादव शामिल हैं. इन बैठकों को हरियाणा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

आजाद नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सभी गुटों में सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं. कुमारी शैलजा के नाम पर सर्वसम्मति नजर आ रही है. कुमारी शैलजा (Kumari Selja) दलित नेता हैं और पार्टी में वरिष्ठ भी हैं. उनको प्रदेशाध्यक्ष बनाने से हरियाणा में पार्टी के अंदरूनी मतभेद दूर हो सकते हैं. शैलजा के अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय यादव भी प्रदेशाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फिलहाल कुमारी शैलजा का नाम तय नहीं हुआ है. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा या उनके पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा (Deependra Hooda) को भी प्रदेशाध्यक्ष बनाने पर विचार किया जा रहा है.

बड़ी खबर: हरियाणा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने खेला बड़ा दांव

एक कयास यह भी है कि कांग्रेस हाईकमान भूपेन्द्र हुड्डा की पार्टी पर दबाव बनाने की नीति से खुश नहीं है. हाल ही में रोहतक की रैली में हुड्डा ने बगावती तेवर दिखाए थे, जिससे पार्टी हाईकमान सतर्क भी है. एक संभावना यह भी है कि हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया जा सकता है, भले ही विधानसभा का कार्यकाल कुछ ही दिनों में समाप्त हो रहा हो. कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि हुड्डा को महत्व देना जरूरी है, जिससे कि वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार से पीछे न हटें.

सूत्रों ने बताया कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की संभावना नहीं है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का पुनर्गठन किया जा सकता है. और प्रमुख नेताओं को सामूहिक जिम्मेदारी के आधार पर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. कांग्रेस हाईकमान को पूरा भरोसा है कि बगावती तेवर दिखाने के बावजूद हुड्डा कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे.

मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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गुर्जर समाज ने दी गहलोत को चेतावनी

लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है. दरअसल, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में अगर कोई फेरबदल हुआ तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं.

जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

जयपुर में एक नए और कांग्रेस नेता का उदय हो रहा है. ये हैं महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी. महेश जोशी लोकसभा सांसद रह चुके हैं और फिलहाल विधानसभा में मुख्य सचेतक हैं. रोहित जोशी काफी पहले से कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और युवा कांग्रेस के महासचिव हैं. हाल ही उन्होंने अपने जन्मदिन पर कांग्रेस में धमाकेदार पारी खेलने के संकेत दे दिए हैं.

सोमवार 26 अगस्त को रोहित जोशी के जन्मदिन पर जयपुर में करीब दो दर्जन अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां रोहित जोशी का स्वागत किया गया. मंदिर और मस्जिद भी इनमें शामिल थे. इन सभी कार्यक्रमों की पूर्व सूचना पहले से जारी कर दी गई थी. इस तरह इन स्वागत कार्यक्रमों के जरिए जयपुर में युवा नेता की लोकप्रियता प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया. समझा जाता है कि रोहित जोशी जयपुर के महापौर पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं और इन एक दर्जन कार्यक्रमों को उसी सिलसिले में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

रोहित जोशी को युवा कांग्रेस महासचिव नियुक्त करने के बाद संगठन चुनाव अधिकारी बनाकर गोवा भेजा गया था. इसके बाद रोहित ने संसदीय चुनाव में जयपुर से उम्मीदवारी का दावा पेश किया था और पूरे शहर में होर्डिंग और पोस्टर लगवा दिए थे. हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला था. तब महेश जोशी ने कहा था कि वह कभी भी अपने पुत्र की राजनीतिक रूप से मदद नहीं करेंगे. रोहित में योग्यता होगी तो वह खुद राजनीति में अपनी जगह बना लेंगे.

इससे पहले जयपुर में पंडित नवल किशोर शर्मा ने अपने पुत्र बृजकिशोर शर्मा को राजनीति में स्थापित किया था. बृजकिशोर शर्मा 2008 में जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और तत्कालीन गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ था, तब बृजकिशोर शर्मा भी हार गए थे. अगले 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी जगह हवामहल से महेश जोशी को टिकट दे दिया गया था.
बृजकिशोर शर्मा ने फिर से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी और हवामहल विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रचार करने से इनकार कर दिया था. अब उनकी जगह जयपुर में रोहित जोशी नए कांग्रेस नेता के रूप में उभर रहे हैं.