कांग्रेस में अनर्गल बयानबाजी रोकने के लिए अनुशासन कमेटी का होगा गठन, राजनीतिक नियुक्तियां 15 दिसम्बर तक

Avinash Pandey and Sonia Gandhi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान कांग्रेस में पिछले काफी समय से कांग्रेस की सत्ता और संगठन में तालमेल कायम नहीं हो पा रहा है. इसको लेकर पार्टी आलाकमान ने कई बार अपनी गहरी चिंता भी व्यक्त की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता आये दिन मीडिया के सामने अलग-अलग मुददों पर अपनी अलग-अलग राय रखते नजर आते है. पिछले दिनों निकाय चुनाव में हाईब्रिड फॉमूला हो या स्टेट हाइवे पर टोल वापसी का निर्णय इन मुददों पर पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयान किसी से छुपे नहीं है. (Avinash Pandey) राजधानी दिल्ली में गुरूवार सुबह कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी व राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे (Avinash Pandey) के बीच मुलाकात … Read more

राजस्थान निकाय चुनाव: एक ऐसा वार्ड जहां रहते हैं केवल 16 मतदाता

Nasirabad Nagar Palika

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के 49 नगर निकायों में नामांकन और पर्चों की जांच का दौर मंगलवार को खत्म हो गया. 8 नवंबर तक नाम वापसी और 9 नवंबर को चुनाव चिंह आवंटन की प्रक्रिया होगी. 16 को मतदान और 19 को नतीजे आएंगे. ये तो हुई चुनाव के कार्यक्रम की बात लेकिन क्या आपको पता है कि लोकल बॉडी इलेक्शन में एक ऐसा भी वार्ड है जहां केवल 16 मतदाता रहते हैं. यहां तीन उम्मीदवारों ने पार्षद के लिए पर्चा भरा है. सीधा और साफ है जिसे 6 या 7 वोट मिले, वही बन जाएगा पार्षद. (Nasirabad Nagar Palika) यह भी पढ़ें: निकाय प्रमुखों के लिए बना हाईब्रीड फॉर्मूला आज … Read more

राजस्थान में निकाय प्रमुखों के लिए बना हाईब्रीड फॉर्मूला आज भी कायम, सरकार ने नहीं की संशोधित अधिसूचना जारी

DLB, Heads of Local Bodies

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में 49 नगरीय निकायों के चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करने का काम मंगलवार को पूरा हो गया. लेकिन पार्षद बने बिना निकाय क्षेत्र के किसी भी व्यक्ति को महापौर या पालिका अध्यक्ष (Heads of Local Bodies) बनाने वाला हाईब्रीड फॉर्मूला आज भी कायम है. सरकार ने प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट सहित कुछ मंत्री और विधायकों के विरोध के बाद स्पष्टीकरण देते हुए एक प्रेसनोट तो जारी कर दिया लेकिन संशोधित विभागीय अधिसूचना जारी नहीं की है. बल्कि पुरानी अधिसूचना के आधार पर ही नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी.

गौरतलब है कि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने गत 17 अक्टूबर को घोषणा की थी कि निकाय क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति और पार्षद का चुनाव हारा हुआ उम्मीदवार भी निकाय प्रमुख (Heads of Local Bodies) का चुनाव लड़ सकता है, जिसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी. गहलोत सरकार के इस नियम का खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवम उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot), मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास व खाद्य व आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा सहित कई विधायकों ने खुले तौर पर विरोध भी किया था. सचिन पायलट ने इस नियम का जबरदस्त विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गलत बताया और स्पष्ट कहा था कि इससे बैकडोर एंट्री को बढ़ावा मिलेगा. यह निर्णय व्यावहारिक नहीं है, जो व्यक्ति पार्षद का चुनाव नहीं जीत पा रहा हो उसको हम चेयरमैन या मेयर का चुनाव लडने दें, यह सही नहीं है.

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वहीं इस हाईब्रीड फॉर्मूले की घोषणा के बाद विपक्ष में बैठी भाजपा को भी बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक ओर मौका मिला और बीजेपी इस फॉर्मूले के साथ-साथ पार्टी में पड़ी फूट को मुद्दा बनाने में जुट गई और इस नियक के खिलाफ प्रदेश में आंदोलन की घोषणा भी की. ऐसे में यह मामला दिल्ली कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा. कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद निकाय प्रमुख के चुनाव में पार्षद नहीं होने की शर्त को हटाए जाने पर सहमित बनी थी.

इसके बाद यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने एक प्रेसनोट के जरिये स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें कहा गया था कि आगामी चुनाव में पार्षदों में से ही निकाय प्रमुख (Heads of Local Bodies) चुने जाएंगे. इस नियम का इस्तेमाल उसी परिस्थिति में किया जाएगा जब निकाय अध्यक्ष की सीट एससी, एसटी व ओबीसी व महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो और इस वर्ग का पार्टी का कोई उम्मीदवार चुन कर न आ पाए. ऐसी स्थिति में इस प्रावधान के तहत राजनीतिक दल अपने अन्य किसी कार्यकर्ता को निकाय प्रमुख का उम्मीदवार बना सकेंगे.

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इस सम्बंध में सरकार के स्वायत्तशासन विभाग ने स्पष्टीकरण तो जारी कर दिया, लेकिन अधिसूचना में बदलाव नहीं किया है. इस हिसाब से बिना पार्षद बने अगर कोई व्यक्ति निकाय अध्यक्ष (Heads of Local Bodies) का चुनाव लड़ना चाहे तो उसे रोका नहीं जा सकता. ऐसे में निकाय प्रमुख के चुनाव में धनबल के इस्तेमाल की आशंका पूरी तरह बनी हुई है. इसका दुरुपयोग छोटी नगरपालिकाओं में सबसे ज्यादा होने की आशंका है.

वहीं सरकार द्वारा अधिसूचना जारी न करके सिर्फ प्रेसनोट के जरिये स्पष्टीकरण जारी करने मात्र से ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी के नेताओं के विरोध के सुर शांत हो गए. क्योंकि निकाय प्रमुख के चुनाव के लिए जो गली छोड़ी गई है, इसका फायदा अब दोनों ही राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से उठाएंगी.

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बता दें, प्रदेश के 49 निकायों के 2105 वार्डों में पार्षदों के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का काम मंगलवार को और नामांकन पत्रों की जांच का काम बुधवार को पूरा हो गया है. अब उम्मीदवारों को 8 नवंबर तक नाम वापसी का मौका मिलेगा. 9 नवम्बर को उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे और 16 नवम्बर को सुबह 7 से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. वहीं 19 नवम्बर को मतगणना होगी. अध्यक्ष पद (Heads of Local Bodies) का चुनाव 26 नवंबर को होगा.

राजस्थान: निकाय चुनाव का पहला नतीजा कांग्रेस के पक्ष में, बाड़मेर के वार्ड 12 से कांग्रेस प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित

Barmer Local Body Eletions

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में 16 नवम्बर को होने वाले 49 नगर निकायों के चुनाव (Local Body Elections) का पहला नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आ गया है. बाड़मेर के वार्ड नं0 12 में भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से यहां कांग्रेस प्रत्याशी महावीर जैन को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है. वहीं मंगलवार को 49 निकायों के 2105 वार्डों के होने वाले पार्षदों के चुनाव के लिए 10 हजार 942 उम्मीदवारों के 13 हजार 283 दाखिल किए नामांकन पत्रों की छंटनी का काम बुधवार को पूरा हो गया. बता दें, 2105 वार्डों में से भाजपा ने 162 और कांग्रेस ने 60 वार्डों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारें हैं. … Read more

वीडियो खबर: राजनीतिक नियुक्तियों पर क्या बोले पायलट

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने जयपुर के PCC कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के खिलाफ देशभर में हर जिले में कांग्रेस 5 से 15 नवंबर तक देश में छाई मंदी पर प्रदर्शन करेगी. इस दौरान राजनीतिक नियुक्तियों पर भी पायलट ने अपने विचार रखे.

राजस्थान: निकाय चुनाव में टिकट की मारामारी के बीच चले लात-घूंसे

वीडियो खबर: गहलोत ने लिया मोदी सरकार को आड़े हाथ

Gehlot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने तिहाड जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से मुकालात की. मुलाकात के बाद गहलोत ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि चिदंबरम को षडयंत्र के तहत जेल में बंद किया गया है. 25 साल पहले जब में टेक्सटाइल मंत्री था तब से देख रहा हूँ, चिदम्बरम (chidambaram) ने 45 साल तक विभिन्न पदो पर रहते हुए देश की सेवा की. 45 साल देश की सेवा करने के बाद उन्हें यह इनाम मिला कि बिना कोई मुकदमे, बिना किसी आरोप के उन्हें जेल में बंद कर दिया गया.

दीवाली की शिष्टाचार मुलाकात के बाद से अचानक तेज हुई गहलोत-पूनिया के बीच जुबानी जंग

(Gehlot-Poonia)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया (Gehlot-Poonia) के बीच दिन-प-दिन जुबानी जंग तेज होतीं जा रही है. ताजे मामले के अनुसार सोमवार को पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने भीलवाड़ा के करेड़ा में कहा कि पूनिया कुर्सी बचाने के लिए दिल्ली के इशारे पर उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. गहलोत के इस बयान पर बड़ा पलटवार करते हुए सतीश पूनिया ने कहा कि गहलोत अपने बेटे की वजह से हताश, निराश और परेशान हैं और कुर्सी बचाने के लिए उनको रोजाना दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. यह भी पढ़ें:- सतीश पूनिया को सीएम गहलोत ने कहा नया-नया मुल्ला हैं इसीलिए वे जोर-जोर … Read more

गहलोत के दिल्ली दौरे के बाद पायलट के सुर पड़े नरम, बसपा से आए विधायकों के प्रति बदला नजरिया

Sachin Pilot and Ashok Gehlot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए छः विधायकों को लेकर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) का नजरिया अब बदल गया है. इन सभी विधायकों पर किसी समय बेबाकी से बयान दे रहे पायलट के सुर अब नरम पड़ते दिख रहे हैं. रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में निकाय चुनाव को लेकर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने इन सभी विधायकों की तरफदारी करते हुए कहा कि, “बसपा छोड़ कांग्रेस में आये सभी छः विधायक अब हमारी पार्टी का हिस्सा हैं, उनका विलय हो चुका है. वे संगठन में आए हैं तो उन्हें जिम्मेदारी भी दी जाएगी.”

आपको बता दें इससे पहले इन छः विधायकों के बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने पर सचिन पायलट ने मीडिया से कहा था कि, “वे बगैर किसी शर्त, बगैर किसी प्रलोभन और लोभ-लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं तो उनका स्वागत है. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा“. पायलट ने अपनी इस बात को मीडिया के सामने एक नहीं बल्कि कई बार दोहराया था. इस तरह पायलट (Sachin Pilot) ने स्पष्ट सन्देश दिया था कि कांग्रेस सरकार में पार्टी बदलने वाले बसपा विधायकों (BSP MLAs) को राजनीतिक नियुक्तियों से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

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वहीं रविवार शाम निकाय चुनावों को लेकर पीसीसी में हुई बैठक से पहले राजधानी के एक होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लम्बी मंत्रणा हुई जहां बसपा से कांग्रेस में विलय हुए छः में से पांच विधायक राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), और विधायक दीपचंद खेरिया भी मौजूद रहे. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के साथ बैठकर इन सभी विधायकों से लंबी मंत्रणा की. इस बैठक में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल, अर्थव्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरने, राजनीतिक नियुक्तियों, आगामी निकाय चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई. यहीं यह निर्णय भी हुआ कि उक्त सभी विधायकों को संगठन स्तर पर पूरा सम्मान दिया जाएगा.

इसके बाद रविवार शाम पीसीसी में हुई बैठक के बाद पायलट ने मीडिया को बताया कि सभी छह बसपा विधायकों ने लिखित में माननीय विधानसभा अध्यक्ष महोदय सीपी जोशी को आग्रह किया था कि वे सभी कांग्रेस में विलय करना चाहते हैं, जिस पर जोशी ने सोच समझकर अपना निर्णय विधायकों के पक्ष में सुनाया जो की अंतिम होता है. इस निर्णय के बाद उनका सीधे ही कांग्रेस पार्टी में विलय हो गया है. जहां तक कांग्रेस की बात है, सभी विधायक एक नए संगठन में आए हैं. पायलट ने कहा कि जहां-जहां कांग्रेस पार्टी उन सभी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपेगी, उसे वे ग्रहण करेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें औपचारिकता की कोई बात नहीं है लेकिन उनके कांग्रेस में विलय होने से निकाय चुनावों में निश्चत तौर पर पार्टी को लाभ मिलेगा.

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इससे पहले जब बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ था, तब पायलट ने उन सभी के कांग्रेस की सदस्यता न लेने की बात पर नाराजगी भी जाहिर की थी. यहां तक कि बसपा विधायकों के कांग्रेस में इस तरह विलय की जानकारी न तो संगठन के आला अधिकारियों को थी और न ही राजस्थान कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट को. इसके बाद पायलट और मुख्यमंत्री गहलोत के बीच की खींचतान भी खुलकर सामने आई थी. इस दौरान पायलट ने साफ तौर पर कहा था कि खून-पसीना बहाकर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार लाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा. इसके अलावा रविवार से पहले तक पायलट की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि अभी तक इन सभी 6 विधायकों ने न तो कांग्रेस की सदस्यता ही ग्रहण की है और न ही पीसीसी चीफ (Sachin Pilot) से मुलाकात.

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रविवार को पीसीसी में हुई बैठक के बाद अविनाश पांडे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद ही इन 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ है और अब ये सभी कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं. पांडे ने भी ये भी साफ किया कि सत्ता और संगठन में इन विधायकों को पूरा सम्मान मिलेगा और प्रदेश के निकाय चुनाव में भी इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी. इस तरह अविनाश पांडे्य और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के रविवार को सामने आए ताजा बयानों के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस महीने में होने जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में इन सभी छः विधायकों को सम्मानजनक पद मिलना तय है. जिसके तहत इनमें से 2-3 को मंत्री पद और 3-4 को राजनीतिक नियुक्ति के तहत मलाईदार पद मिलना पक्का है.

आरएलपी ने की निकाय चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा, बेनीवाल ने भविष्य के लिए जिंदा रखी उम्मीदें

RLP on Local Body Elections

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में होने वाले निकाय चुनाव (Local Body Elections) में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है. नागौर सांसद और RLP के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने इस सम्बंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी है. हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि यदि कोई प्रत्याशी अच्छा होगा, तो पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के बाद उसको समर्थन देने पर विचार किया जाएगा. 1-वर्तमान में हो रहे निकाय चुनाव @RLPINDIAorg नही लड़ेगी मगर व्यक्तिशः कोई प्रत्याशी अच्छा होगा तो पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के बाद उसको समर्थन देने पर विचार करेगी !#Election2019 @pantlp @prempratap04 @babulalsharma19 @amitvajpayee — HANUMAN BENIWAL (@hanumanbeniwal) November 3, 2019 इसके बाद … Read more