हरियाणा: आदमपुर में भजनलाल के परिवार को तगड़ी चुनौती दे रहीं भाजपा की सोनाली फोगाट

हरियाणा में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल (Bhajan Lal) का परिवार ऐसा परिवार है, जो हिसार जिले के आदमपुर विधानसभा क्षेत्र (Aadampur Assembly) से कभी भी कोई भी चुनाव नहीं हारा. इस बार आदमपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें BJP की उम्मीदवार सोनाली फोगाट (Sonali Phogat) ने तगड़ी चुनौती पेश कर दी है. सोनाली फोगाट (40) पहले अभिनेत्री थी और अपने 20 साल के करियर में कुछ फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में काम कर चुकी हैं. 12 साल पहले वह भाजपा में शामिल होकर राजनीति में सक्रिय हो गई थीं. फिलहाल वह हरियाणा प्रदेश भाजपा की महिला … Read more

वीडियो खबर: तेज हुए अशोक तंवर के बगावती तेवर

अशोक तंवर (Ashok Tanwar) हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) के 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे. उनकी जगह कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. इसके बाद से ही अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने Congress के खिलाफ बगावती रूख अख्तियार कर लिया था. बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुडा (Bhupinder Singh Hooda) और शैलजा पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया.

वीडियो खबर: डूडी के सवाल पर चुप्पी साध गये सीपी जोशी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के अध्यक्ष बन गए. वैभव गहलोत के RCA अध्यक्ष बनने के साथ ही पूर्व अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi) गुट के पूरे पैनल की भी जीत हुई. मुख्यमंत्री पुत्र वैभव गहलोत ने अपने प्रतिद्वंदी राम प्रकाश चौधरी को 25-6 से मात दी. इस मौके पर आरसीए के पूर्व अध्यक्ष सीपी जोशी ने वैभव को बधाई देते हुए कहा कि वे युवा होने के नाते युवा क्रिकेटर्स की सोच को समझेंगे. इस मामले में उन्होंने रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) से जुड़े सभी सवालों पर चुप्पी साधे रखी.

गुड़गांव विधायक उमेश अग्रवाल भाजपा से बगावत पर उतारू

हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election-2019) से पहले जहां कई लोगों के अपनी पार्टियां छोड़कर भाजपा में जाने की खबरें आ रही हैं, वहीं एक खबर यह भी है गुड़गांव के भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल (Umesh Agarwal) ने पार्टी से बगावत कर दी है. इस बार उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिल रहा है, जिससे वह असंतुष्ट हैं. भाजपा ने इस बार गुड़गांव से सुधीर सिंगला (Sudhir Singla) को टिकट दे दिया है. उमेश अग्रवाल के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के संबंध पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहे हैं. संभवतः इसी लिए अग्रवाल का टिकट कट गया. इस बार उमेश अग्रवाल की पत्नी अनीता … Read more

वीडियो खबर: जीत के बाद क्या बोले वैभव गहलोत

येन-केन प्रकारेण आखिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के अध्यक्ष बन ही गए. वैभव गहलोत के RCA अध्यक्ष बनने के साथ ही पूर्व अध्यक्ष सीपी जोशी गुट के पूरे पैनल की भी जीत हुई. मुख्यमंत्री पुत्र वैभव गहलोत ने अपने प्रतिद्वंदी राम प्रकाश चौधरी को 25-6 से मात दी.

आखिर गहलोत बन ही गये RCA के वैभव, जोशी गुट के पूरे पैनल की हुई जीत

येन-केन प्रकारेण आखिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के अध्यक्ष बन ही गए. वैभव गहलोत के RCA अध्यक्ष बनने के साथ ही पूर्व अध्यक्ष सीपी जोशी गुट के पूरे पैनल की भी जीत हुई, जिसमें उपाध्यक्ष पद पर अमीन पठान, सचिव पद पर महेंद्र शर्मा और संयुक्त सचिव पद पर महेंद्र नाहर ने जीत दर्ज की. वहीं कोषाध्यक्ष पद पर कृष्णकुमार नीमावत और कार्यकारिणी सदस्य पद पर देवाराम चौधरी ने जीत दर्ज की. इसी के साथ पॉलिटॉक्स की खबर पर एक बार फिर मुहर लग गई. पॉलिटॉक्स ने सबसे पहले ही 28 अगस्त को अपनी खबर के जरिये दर्शकों को … Read more

विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में बगावत चरम पर, तंवर की बगावत पड़ेगी भारी

विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा कांग्रेस में राजनीतिक गुटबाजी अपने चरम है. हरियाणा (Haryana) में टिकट वितरण में अपने समर्थकों की अनदेखी से नाराज कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए बनी एवं कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया. लेकिन तंवर की इस्तीफ़ा पॉलिटिक्स का पार्टी पर कोई विशेष असर नहीं हुआ. अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद जारी हुई कांग्रेस की दूसरी और अंतिम सूची में भी तंवर के समर्थकों की छोड़ो खुद तंवर का नाम ही नहीं था. यहां तक कि टिकट देना तो दूर कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने तंवर से मिलने या बात करना तक उचित नहीं समझा.

अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस के 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे. हाल ही में उनकी जगह कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके बाद से ही अशोक तंवर ने पार्टी के खिलाफ बगावती रूख अख्तियार कर लिया था. बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कांग्रेस में हुडा और शैलजा पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया था. इसके बाद अशोक तंवर ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हुड्डा गुट पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान तंवर ने बताया कि उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है.

बड़ी खबर: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम

प्रेस-कॉन्फ्रेंस में अशोक तंवर ने आरोप लगाया कि हरियाणा कांग्रेस अब ‘हुड्डा कांग्रेस’ बनती जा रही है और बताया की उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें समितियों से मुक्त किया जाए और वह सामान्य कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. वह चुनाव के लिए बनी प्रदेश चुनाव समिति सहित कई समितियों में शामिल थे. तंवर ने संवाददाताओं से कहा, ‘आप सभी जानते हैं कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव है. पिछले पांच साल का घटनाक्रम सबके सामने है. पार्टी के अंदर ऐसी ताकतें हैं जिन्होंने पार्टी को लगातार कमजोर किया. जमीन से जुड़े नेताओं को काम करने से रोका.’

इस दौरान तंवर ने सीधे-सीधे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा (Bhupinder Singh Hodda) पर तंज कसते हुए कहा, ‘देश में लोकतंत्र है, लेकिन हरियाणा में बड़े-बड़े राजघराने हैं. कुछ हमारी पार्टी में हैं और कुछ लोग दूसरी पार्टी में हैं. मेरे खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाया, लेकिन लोकसभा चुनाव में छह फीसदी वोट बढ़ा.’ तंवर ने टिकट वितरण में मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बताया जाए कि किन मापदंडों के आधार पर टिकट दिए गए हैं. उन्होंने पार्टी पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सोहना विधानसभा सीट का टिकट 5 करोड़ में बेचा गया है.

अशोक तंवर ने कहा कि मैंने पार्टी के लिए खून और पसीना दोनों दिया है. मैं पांच साल तक प्रदेश का अध्यक्ष रहा. मैंने पूरे समर्पण के साथ पार्टी की सेवा की. मैं साधारण परिवार से राजनीति में आया हूं. पांच साल मैंने विपक्ष की भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि पार्टी में पुराने लोगों को टिकट नहीं दिया गया. उन लोगों को टिकट दिया गया है जिन्होंने हाल ही में पार्टी ज्वाइन की है, ये वही लोग हैं जो पहले कांग्रेस की आलोचना करते थे. उन्होंने कहा कुछ लोगों को नई लीडरशिप बर्दाश्त नहीं. उन्होंने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिन लोगों ने कांग्रेस को कमजोर किया उनको टिकट क्यों? उन्होंने पार्टी को आह्वान करते हुए कहा कि मैं मानव बम हूं. अब चुप नहीं बैठूंगा.

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लेकिन अशोक तंवर की इन सारी कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं हो पाया और कांग्रेस ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी, और लिस्ट में अशोक तंवर और कुमारी शैलजा का दोनों नाम नहीं था. अशोक तंवर को इस चुनाव में टिकट नहीं दिया गया, इससे साफ पता चलता है कि टिकट वितरण में सिर्फ और सिर्फ भूपेन्द्र हुड्डा की चली है. अशोक तंवर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नजदीकी माने जाते हैं और राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है उसके बाद से उनके नजदीकी माने जाने वाले सभी कांग्रेसी नेताओं का कमोबेश यही हश्र हो रहा है. बहराल, हरियाणा में 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में अशोक तंवर की बगावत पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाती, इसका पता 24 अक्टूबर को आने वाले नतीजों में सामने आएगा.

आशा खेदर के विधानसभा प्रत्याशी बनने से गांव की पर्दा प्रथा टूटी

हरियाणा के हिसार जिले के सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र उकलाना से भाजपा उम्मीदवार आशा खेदर (Asha Khedar BJP) को उस समय आश्यर्य हुआ, जब वह अपने पति विनय खेदर के गांव खेदर पहुंची. उन्होंने गांव की परंपरा के अनुसार अपना चेहरा पूरी तरह घूंघट में छिपा लिया था. खेदर गांव में पर्दा प्रथा अभी भी सख्ती से लागू थी. आशा खेदर उम्मीदवार बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची थी. बाद में उन्होंने घूंघट हटाना पड़ा. इस तरह गांव में सख्ती से चली आ रही पर्दा प्रथा टूटी.

आशा खेदर प्रतिभाशाली दलित महिला है. संस्कृत और अंग्रेजी में एमए कर चुकी है. पुलित्जर और बुकर जैसे पुलस्कारों की विजेता झुंपा लाहिड़ी पर पीएचडी कर रही हैं. उन्होंने एक जाट व्यापारी से विवाह किया है, जो खेदर के निवासी हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट दे दिया है. चुनाव प्रचार के विवाह के 13 साल बाद पहली बार उन्होंने खेदर में घूंघट हटाया.

आशा खेदर के खेदर पहुंचने पर गांव के लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े. वह गांव की बहू थी. बहू होने के नाते उन्हें घूंघट करना जरूरी था. उन्होंने परंपरा का पालन किया. उन्हें देखने के लिए करीब दो हजार लोगों की भीड़ जुटी थी. लोगों ने उनसे घूंघट हटाकर बात करने का अनुरोध किया, जिसे मानने के अलावा आशा के सामने और कोई उपाय नहीं था. इसके बाद उन्होंने घूंघट हटाकर चुनाव प्रचार किया. इसके साथ ही वह गांव की अन्य बहू-बेटियों से भी घूंघट हटाने की अपील करने लगी.

इस प्रकार हरियाणा के रूढ़िवादी गांव खेदर की एक बहू के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन जाने से गांव की कई महिलाओं को पर्दा प्रथा से मुक्ति मिली. आजकल के जमाने हमेशा घूंघट में चेहरा छुपाए रहना महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल होता है. आशा के उम्मीदवार बनने से अकस्मात एक क्रांति हो गई. हालांकि वह क्रांति करने नहीं गई थी. वह चुनाव प्रचार करने गई थी. जब स्थानीय लोगों ने खुद ही उनसे घूंघट हटाने के लिए कह दिया तो वे अन्य महिलाओं को कैसे मना करेंगे?

बड़ी खबर: अशोक तंवर का पत्ता कटा, कांग्रेस की अंतिम लिस्ट में भी नहीं आया नाम

जिला परिषद सदस्य राजबीर खेदर ने कहा राजनीति कर रही महिला घूंघट में रहे, यह अच्छा नहीं लगता. अगर वह चुनाव जीत गईं तो मंत्री भी बन सकती है. तब बड़े कार्यक्रमों के मंच पर उनका घूंघट पहनकर पहुंचना किसको अच्छा लगेगा? सरपंच शमशेर सिंह ने कहा की गांव की बहू होने से उसे पर्दा करना पड़ता है, लेकिन लोगों से वोट मांगने के लिए पर्दा कैसे कर सकती है? हम सभी ने उनसे पर्दा हटाकर जनसंपर्क करने के लिए कहा है.

आशा चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत में डिग्री ली और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में डिग्री हासिल की. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ही उन्होंने बीएड और एमफिल किया. रोहतक बीएमयू से उनकी पीएचडी पूरी होने के करीब है. झुंपा लाहिड़ी के उपन्यासों में पात्रों की पहचान पीएचडी का विषय है. उनके पिता हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी थे. वह चंडीगढ़ में पली-बढ़ी. अब वह उकलाना कस्बे में अपने पति विनय और 11 वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं. पास ही बरवाला में विनय का पेट्रोल पंप है. उनके पति के परिवार के अन्य सदस्य खेदर गांव में रहते हैं. आशा ने बताया कि वह नियमित तौर पर ससुराल जाती थी, लेकिन वहां कभी भी घूंघट नहीं हटाया.

आशा 2007 में भाजपा में शामिल हुई थी और फिलहाल भाजपा की हिसार इकाई की महासचिव हैं. लोग बताते हैं कि वह कार्यक्रमों के संचालन में कुशल है और जिले में जब भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दौरा करते हैं, उनके कार्यक्रमों का संचालन आशा ही करती हैं. उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता होगी. उकलामा में कॉलेज पहले ही खुल चुका है, जिसकी मांग यहां के लोग लंबे समय से कर रहे थे. अब जल्दी ही यहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खुलने वाला है. आगे इस क्षेत्र का और भी विकास होगा.