हरियाणा (Haryana) के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने में आएगी. हुड्डा और तंवर के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है. अशोक तंवर राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व संभाले हुए थे.
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AICC की बैठक के बाद गहलोत और पायलट ने की सोनिया से मुलाकात, गहलोत के चेहरे पर मायूसी तो कॉन्फिडेंट दिखे पायलट
कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी, पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल और एके एंटनी सहित कांग्रेस के महासचिव, राज्यों के प्रभारी, कांग्रेस विधायक दल के नेता बैठक में मौजूद रहे. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालाने के बाद सोनिया गांधी की अध्यक्षता में यह पहली बैठक थी. बैठक में भाग लेने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे.
इनसाइड स्टोरी, जरूर पढ़ें:- सीएम गहलोत को सोनिया गांधी की नसीहत, तो पायलट ने मारा नहले पर दहला
एआईसीसी की बैठक के बाद मुख्यमंत्री गहलोत ने 10, जनपथ पहुंच कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से करीब 35 मिनट की मुलाकात की. जानकारों की मानें तो सोनिया ने प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर गहलोत से अपनी नाराजगी जाहिर की है. वहीं गहलोत ने नए पीसीसी चीफ, एक और डिप्टी सीएम, प्रदेश में राजनैतिक नियुक्तियां सहित कुछ जरूरी मुद्दों पर सोनिया से चर्चा करनी चाही लेकिन उन्हें किसी भी मुद्दे पर अभी स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं. सोनिया से मुलाकात के बाद सीएम गहलोत के चेहरे पर खुशी नजर नहीं आयी और वे सीधे जयपुर के लिए रवाना हो गए. गहलोत के 10, जनपथ से निकलने के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सोनिया गांधी से मुलाकात की.
गौरतलब है कि बैठक में भाग लेने से पहले बुधवार को सीएम गहलोत ने सीएम गहलोत ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की और प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर लंबी मंत्रणा की. गहलोत ने प्रियंका से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और सरकार व संगठन के कामकाज को लेकर चर्चा की. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक व्यक्ति एक पद को लेकर भी चर्चा हुई. इसके बाद गहलोत के शुभ चिंतक माने जाने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से भी प्रियंका ने मुलाकात की. इससे पहले गहलोत ने जन सूचना पोर्टल की लॉन्चिंग के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात मांगा था लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पायी थी. हालांकि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोपाल सिंह ईड़वा मंगलवार को पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष से मिलकर प्रदेश के राजनीतिक हालात का फीडबैक दे चुके हैं.
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गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित एआईसीसी की बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ता आरपीएन सिंह नें पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि बैठक में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं की नौकरी पाने के बजाय जा रही है. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि सरकार राजनैतिक द्वेश के हिसाब के हिसाब से काम कर रहीं है जो बोलता है उसकी आवाज दबाई जा रही है. बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यस्था पर कहा कि सबसे पहले सरकार को यह मानना जरूरी है कि अर्थव्यवस्था में गडबडी है. जब तक सरकार मानेंगी नहीं, तब तक अर्थव्यवस्था नहीं सुधरेगी.
बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने रियल एस्टेट सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि बडे शहरों में लगभग 4.5 लाख मकान बनकर तैयार है पर कोई खरीदने वाला नहीं है क्योंकि नौकरियां नहीं है. एआईसीसी मुख्यालय पर आयोजित इस बैठक में कुल 32 नेताओं ने अपनी राय पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष रखी. बैठक में सोनिया गांधी ने मौजूद क्रांग्रेसी नेताओं को निर्देश देते हुए कहा कि अब सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि देश की जनता तक पहुंचने की जरूरत है.
कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने बताया कि इस बैठक में पार्टी ने तीन मुख्य कार्यक्रम आगामी दिनों के लिए निर्धारित किये है इसके तहत 15 से 25 अक्टूबर तक पार्टी देशभर में बडा ऐजुकेशनल कार्यक्रम चलायेगी. इस कार्यक्रम में पार्टी सरकार की विफलताओं को देशवासियों के समक्ष रखेगी. साथ ही सभी राज्यों में 15 से 25 अक्टूबर तक प्रदेश कांग्रेस कमेंटी के पदाधिकारी कॉन्फ्रेंस करेंगे.
वहीं गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक सभी प्रदेशों में एक विशाल पदयात्रा का आयोजन किया जायेगा. इसके तहत 2 अक्टूबर को सभी राज्यों की राजधानी में प्रदेश के सभी बडे कांग्रेसी नेता पदयात्रा करेंगे. इसके बाद 9 अक्टूबर तक ब्लाॅक स्तर पर पदयात्रा का आयोजन होगा. इस दौरान कार्यकर्ता स्वतंत्रता सेनानियों तथा गांधी, पटेल, अंबेडकर जैसे नेताओं के सच्चे संदेशों को जन जन तक पहुंचाएंगे. सदस्यता अभियान पर बोलते हुए आरपीएन सिंह ने बताया कि पार्टी द्वारा आगामी दिनों में सदस्यता अभियान चलाया जायेगा. इस बार पार्टी की सदस्यता डिजिटल तरीके से भी दिलाई जाएगी.
गौरतलब है कि सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई अब शायद अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां दिल्ली दरबार में प्रदेश में नया पीसीसी चीफ और एक डिप्टी सीएम और बनाने की अर्जी लगा चुके हैं तो वही गाहे-बगाहे पायलट खेमा भी सरकार की मुखालफत का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है. हाल ही में बुधवार को पायलट ने प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था के बहाने गहलोत सरकार पर निशाना साधा. ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया ने भी सीएम गहलोत से राजस्थान में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की है.
देश की जनता की गर्दन काट रहा व्हीकल एक्ट: खाचरियावास
राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने मोटर व्हीकल एक्ट (Moter Vehicle Act) का विरोध करते हुए इसे देश और प्रदेश की जनता के लिए आत्मघाती बताया है. खाचरियावास ने बताया कि मोदी सरकार का व्हीकल एक्ट देश की जनता की गर्दन काट रहा है. उन्होंने कहा कि हाल में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी (Nitin Gadkari) ने कहा था कि नियम सभी के लिए एक है और ये एक्ट सभी को मानना पड़ेगा. इसके बाद भी गुजरात सरकार (Gujrat Government) ने बात न मानते हुए जुर्माने की राशि को आधा कर दिया. अब राजस्थान सरकार जुर्माने की राशि को गुजरात सरकार से भी कम करेगी. खाचरियावास ने ये भी कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले का सभी जगहों पर विरोध हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को ये एक्ट वापिस ले लेना चाहिए.
आपको बता दें कि देश के 4 राज्यों ने केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश में लागू करने से मना कर दिया है. इनमें राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और पं.बंगाल शामिल हैं. वहीं ट्रैफिक उल्लंघन के लिए जुर्माना कई गुना बढ़ाए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के बीच गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि को कम करने का ऐलान किया. गुजरात में बीजेपी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कई मामले में जुर्माने की राशि को घटा कर आधा कर दी. हालांकि कुछ नियमों में चालान की राशि नियमानुसार है लेकिन फिर भी सरकार के इस कदम से लोगों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी. हिमाचल सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राहत मांगी है.
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गौरतलब है कि नया मोटर वाहन संशोधन कानून एक सितम्बर से देशभर में लागू कर दिया गया है. इस एक्ट के अनुसार ट्रैफिक नियम (Traffic rules) तोड़ने पर जुर्माने की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. इनमें हैलमेट न पहनने पर जुर्माना एक हजार (जो पहले 100 रुपये था) और लाइसेंस या गाड़ी के पेपर न होने पर जुर्माना दो हजार (जो पहले 200 रुपये था) शामिल है.
जब से नया एक्ट देश में लागू हुआ है, चारों ओर हो हल्ला मचा हुआ है. कई जगहों से चालान के ऐसे मामले सामने आए हैं जो हैरान करने वाले हैं. राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य राज्यों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक चालान की राशि वसूले जाने की खबरे आ रही हैं. इनमें हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और ओडिशा सबसे आगे हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अपना रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को नए कानून का पालन करना ही होगा. केंद्र सरकार नए नियमों से जागरूकता बढ़ने का हवाला दे रही है.
वहीं दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मोटर व्हीकल अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम पड़ी ठंडी
राजस्थान (Rajasthan) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Congress President) पद से हटवाने की मुहिम अब लगता है ठंडी पड़ गई है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान की तरफ से इस तरह के प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा रहा है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) फिलहाल राजस्थान में पार्टी संगठन में फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे नेताओं के आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं, जिससे पार्टी को ही नुकसान होगा.
सचिन पायलट (Sachin Pilot) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ ही उप मुख्यमंत्री पद भी संभाले हुए हैं. पिछले दिनों सचिन पायलट के जन्मदिन से ठीक पहले गहलोत समर्थक मंत्री हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने मीडिया में एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का नियम लागू होना जरूरी है. हालांकि वह खुद गहलोत सरकार में मंत्री होने के साथ ही एआईसीसी सचिव होने के नाते पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी बने हुए हैं. पायलट समर्थकों का कहना था कि जो व्यक्ति यह मुद्दा उठाता है, सबसे पहले उसे एक पद छोड़ना चाहिए.
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एक अखबार में एक कांग्रेस पदाधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि एक व्यक्ति एक पद का मुद्दा गहलोत ने उठवाया था, क्योंकि वह सचिन पायलट (Sachin Pilot) से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पहले राजीव गांधी की जयंती पर और हाल ही सचिन पायलट के जन्मदिन समारोह में भी पायलट और गहलोत में दूरियां स्पष्ट हो चुकी हैं. गहलोत सोनिया गांधी के नजदीक माने जाते हैं, जबकि सचिन पायलट की राहुल गांधी से मित्रता है. राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो और सोनिया ने बागडोर संभाल ली हो, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दखल बना हुआ है, इसलिए पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना मुश्किल प्रतीत होता है.
सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का महत्व बढ़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. न तो राजस्थान में सचिन पायलट का कद कम हो रहा है और न ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों के बगावती तेवरों में कमी आई है. राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो रही है, ऊपर से गहलोत और पायलट की खींचतान से पार्टी संगठन भी लड़खड़ा रहा है. यह स्थिति कांग्रेस के लिए विकट है.
हाल ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) दिल्ली गए थे, तब सोनिया गांधी ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया. गहलोत राजस्थान में 13 सितंबर को कांग्रेस (Congress) की एक वेबसाइट लांच होने के मौके पर सोनिया गांधी को आमंत्रित करना चाहते थे. वह सोनिया गांधी से समय मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर जयपुर लौटना पड़ा. बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान की यात्रा करने से इनकार कर दिया.
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समझा जाता है कि राजस्थान में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गहलोत ने सोनिया के पास तीन नामों का पैनल भेजा है, जिनमें हरीश चौधरी (Harish Choudhary) का नाम भी शामिल है, जो खुद चुनाव हार गए थे. पार्टी पर भी उनकी मजबूत पकड़ नहीं है. हरीश चौधरी के अलावा लालचंद कटारिया और महेश जोशी के नाम भी पैनल में शामिल हैं. गहलोत के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है की गहलोत प्रदेश में पार्टी पर भी अपना नियंत्रण चाहते हैं, जो पायलट के कारण संभव नहीं हो पा रहा है. पंचायत चुनाव नजदीक हैं और उम्मीदवार तय करने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अहम भूमिका रहती है.
गौरतलब है कि सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार चलाने की प्रक्रिया में सक्रिय नहीं हैं. सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में पायलट की कोई भूमिका नहीं रहती है. इसके अलावा गहलोत की तरफ से जारी होने वाले विज्ञापनों में सचिन पायलट का जिक्र नहीं होता है. इस परिस्थिति में गहलोत और पायलट की खींचतान कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.
महाराष्ट्र में कांग्रेस को झटके पर झटका
अभिनेत्री उर्मिला मातेंडकर (Urmila Matondkar) ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. पिछले लोकसभा चुनाव में वह उत्तर मुंबई सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार थी. उर्मिला मातोंडकर का इस्तीफ ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र में कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं. इनमें मुंबई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह (Kripa Shankar Singh) भी शामिल है. उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है. बताया जाता है कि इस स्थिति में वह कांग्रेस नेता रहते हुए मोदी सरकार विरोध करने की स्थिति में नहीं है. अगर उनके खिलाफ अवैध कमाई का मामला प्रचारित हुआ तो उससे कांग्रेस को भी नुकसान ही होगा. इसलिए आर्थिक मामलों से … Read more
वित्तमंत्री का बेतुका लॉजिक, ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ये बताया मुख्य कारण
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ( Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार शाम एक ऐसा बयान दिया जिसका कोई लॉजिक तो नहीं निकल रहा, हां फज्जति जरूर हो रही है. उन्होंने ये बयान ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में पिछले कुछ सालों से चल रही मंदी को लेकर दिया. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में मंदी के लिए ओला और उबर सेवाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ऑटो सेक्टर ऑटो-मोबाइल इंडस्ट्री BS6 स्टैंडर्ड और मिलेनियल्स के माइंड सेट से सबसे ज्यादा प्रभावित है. मिलेनियल्स आजकल गाड़ी खरीदने की जगह ओला-उबर को तवज्जो दे रहे हैं. वित्तमंत्री (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत के … Read more
‘मंदी तब मानेंगे जब प्रियंका वाड्रा के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने जाएंगे’
मोदी सरकार (Modi Government) लंबे समय से अर्थव्यवस्था (Indian Economy) और आर्थिक मंदी (Financial Crisis) को लेकर निशाने पर है. विपक्ष जमकर केंद्र सरकार को आड़े हाथ ले रहा है. कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी लगातार सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को निशाने पर ले रही है. मंगलवार को भी उन्होंने आॅटो सेक्टर (Auto Sector) में चल रही मंदी को लेकर बीजेपी की केंद्र सरकार पर निशाना साधा लेकिन इस पोस्ट की वजह से वे खुद ही सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं. कुछ यूजर्स उनके ज्ञान को लेकर खिल्ली उड़ा रहे हैं तो कुछ मनमोहन सरकार और मोदी सरकार के बीच का अंतर बता रहे … Read more
बगावत व भितरघात के बीच बागियों को मनाने रणक्षेत्र में उतरे हुड्डा
लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस अब तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल कर अपनी नींव गहरी करना चाह रही है. यही वजह है कि सत्ता की चाह में लगातार उक्त तीनों राज्यों में नेतृत्व में परिवर्तन हो रहे हैं. हरियाणा (Haryana) में भी आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. हरियाणा की सियासत में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को कमान सौंपी गयी है. उन्हें पार्टी चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया है. वहीं कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ये हुड्डा के राजनीतिक करियर की अंतिम पारी होने वाली है, इसलिए वे अपनी इस पारी को शानदार तरीके से खेलना चाहते हैं. इसी के चलते हुड्डा हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) में बदलाव और पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं को मनाने में जुट गए हैं ताकि BJP का मुकाबला पूरे जोशो-खरोश के साथ किया जा सके.
बता दें कि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा और नए सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कार्यभार संभाला है. इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई नदारद रहे. तीनों नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा विरोधी गुट के माने जाते हैं और पार्टी में नए बदलाव से बेहद नाराज चल रहे हैं. अब इन सभी नेताओं की नाराजगी दूर करना हुड्डा के जिम्मे है.
हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं की नाराजगी दूर करने का सिलसिला किरण चौधरी से शुरू किया. हुड्डा रविवार को दिल्ली स्थित किरण चौधरी (Kiran Choudhary) के घर पहुंचे. यहां उन्होंने किरण चौधरी और वहां मौजूद उनकी सुपुत्री एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Chaudhary) से मुलाकात की. माना जा रहा है कि ये आपसी मुलाकात रंग लाई है और किरण चौधरी अब हुड्डा के समर्थन में आ खड़ी हुई है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अगला टार्गेट कुलदीप बिश्नोई (Kuldeep Bishnoi) होंगे जिनसे जल्दी मुलाकात की जा सकती है.
बड़ी खबर: आखिर पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं बन पाये प्रदेश अध्यक्ष?
बता दें, बिश्नोई से हुड्डा की अदावत काफी पुरानी है. लोकसभा चुनाव के दौरान बिश्नोई ने हुड्डा के नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. आपसी गुटबाजी का नतीजा भी सबके सामने है. यहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. इसके बावजूद हुड्डा बिश्नोई को अपनी तरफ लाने में कामयाब होंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल हरियाणा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को मनाने की रहेगी. तंवर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बेहद करीबी माने जाते हैं और पिछले 6 सालों से पद का दायित्व संभाले हुए थे. लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में करारी हार के बाद उनका जाना तय लग रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने जैसे ही पार्टी की बागड़ौर फिर से संभाली, सबसे पहले उनका नंबर आया और उनकी जगह सोनिया की खास कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को भेजा गया.
अशोक तंवर (Ashok Tanwar) पिछले 6 सालों से प्रदेश की बागड़ौर संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है. इस बात को हुड्डा भी भली भांति समझते हैं. ऐसे में तंवर की नाराजगी से पार्टी को नुकसान ही होगा इसलिए उन्हें फिर से एक सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद है.
हरियाणा में लंबे समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह जगजाहिर है. प्रदेश में कई नेता एक दूसरे की टांग खींचने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने प्रदेश के नेताओं में एकजुटता लाने का दायित्व किसी नए नेता को नहीं बल्कि अनुभवी भूपेन्द्र हुड्डा को सौंपी. कुमारी शैलजा उनका साथ देगी लेकिन कुल मिलाकर हुड्डा को फ्री हैंड काम करने का पूरा मौका दिया गया है.
प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद असंतुष्टों को साधने में जुटे हुड्डा अच्छी तरह से जानते हैं कि असंतुष्ट और बागी नेता आगामी चुनाव में उनकी रणनीति और समीकरण दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं सोनिया गांधी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि कांग्रेसी नेताओं की बगावत व भितरघात पार्टी को चुनावी रण में और कमजोर करेगी. ऐसे में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को कमान संभलाकर कोई गलती नहीं की.
अब हुड्डा केंद्र की ओर से मिले इस अवसर को कितना और कैसे भुना पाते हैं, आगामी चंद महीने में पता चल ही जाएगा. अगर हुड्डा अपनी इस कोशिश में सफल होते हैं और पार्टी को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो हुड्डा के हाथों में फिर से प्रदेश की कमान आ सकती है. लेकिन अगर वे असफल साबित होते हैं तो भविष्य में उन्हें कोई बड़ा दायित्व मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है.
बीजेपी ने जारी किया- ‘राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज’
राजस्थान (Rajasthan) में बिगडती कानून व्यवस्था (Law-&-Order) को लेकर प्रदेश भाजपा (BJP) का गहलोत सरकार (Gehlot Government) पर हल्ला बोल जारी है. इसी कडी में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चन्द कटारिया (Gulab Chand Katariya) ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बीजेपी की आईटी सेल द्वारा प्रकाशित “अपराध टाइम्स” अखबार का विमोचन किया. जिसका शीर्षक है – “राजस्थान में अपराध टाइम्स – गहलोत का राज, अपराधियों की मौज (Crime Times in Rajasthan – Gehlot’s Government, fun of criminals)“.
राजस्थान में इन दिनों अपराध तंत्र पुलिस तंत्र पर हावी होता दिखाई दे रहा है. प्रदेश में इन दिनों अपराध का बोलबाला है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. प्रदेश में बढ़ते गैंगरेप जैसे संगीन अपराध हों या प्रदेश का बिगडा साम्प्रदायिक सौहार्द, मामूली बातों पर दंगे, झगडा, आगजनी, लूट, हत्या अब प्रदेश में आम बात हो गयी है. इसी को लेकर आज प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था की स्थिती को प्रकाशित करते हुए “अपराध टाइम्स” नामक अखबार का विमोचन किया गया. जिसमें प्रदेश में हो रहे अपराध से जुड़ी सभी बड़ी खबरों को प्रकाशित किया गया है.
प्रदेश में बढ़ा अपराधों का ग्राफ:
प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने प़त्रकार वार्ता में प्रदेश के लाॅ-एंड-आॅर्डर को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का संयुक्त जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान कटारिया ने कहा कि केवल जुलाई 2018 के साथ 2019 की तुलना करें तो अपराधों का ग्राफ 54 प्रतिशत बढ़ा है वहीं अगर जनवरी से जुलाई तक सभी 7 महीने के आंकड़े जोड़ें तो 32 प्रतिशत इजाफा आईपीसी के अपराधों में हुआ है. वहीं जुलाई 2018 से 2019 के जुलाई तक के आंकड़ों को जोड़ें तो प्रदेश में 31 फ़ीसदी अपराध बढ़े हैं.
महिला अपराधों में स्थिति भयावह:
नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में महिला अपराधों के मामले में तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह है. जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में 87 प्रतिशत महिला अपराधों में इजाफा हुआ है. वहीं एसटी के अपराधों के मामलों की बात करें तो अपराधों की बढ़ोतरी में हद ही पार हो गई है, जुलाई 2018 के मुकाबले 2019 में एसटी के खिलाफ 123 प्रतिशत अपराध बढ़े हैं.
सीएम अशोक गहलोत से अपील:
कटारिया ने मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री का भी जिम्मा संभाल रहे अशोक गहलोत से अपील करते हुए कहा कि सीएम गहलोत को पुलिस की साख गिरने से बचाना चाहिए, जो भी लोग पुलिस को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है, उनके खिलाफ सख्ती से काम करना चाहिए, इसमें प्रदेश की पूरी जनता, राजनीतिक दल सरकार के साथ होंगे.
बहरोड की घटना थी सुनियोजित:
बहरोड थाने पर फायरिंग कर पुलिस कस्टडी में बंद अपराधि को छुडा ले जाने के मामले पर कटारिया ने कहा कि इस घटना से सारी हदें पार हो गयी. यह केस सुनियोजित था, पुलिस की मिलीभगत से ये सब हुआ. पुलिस ने अपराधियों पर एक भी गोली नहीं चलाई यह एक बडा सवाल है. आगे कटारिया ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने सिपाही कह रहा है कि उसे हथियार चलाना नहीं आता, इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या होगी?, थानेदार कहता है कि उनकी रिवॉल्वर अचानक जाम हो गई, यह कहना भी शर्मनाक है, इससे पुलिस की छवि खराब होती है.
कार्रवाई से मिला संताष:
बहरोड थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर करने और डिप्टी व एसएचओ को सस्पेंड करने तथा दो हैडकांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई पर कटारिया नें कहा कि पहली बार इस कार्रवाई से कुछ संतोष मिला है. आगे कटारिया ने कहा कि इस मामले पर कल ही मेरी डीजी से बात हुई थी मैनें उनसे इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया था.
पुलिस पर जताया भरोसा:
गुलाब चन्द कटारिया ने आगे कहा कि हमारी पुलिस निकम्मी नहीं है, लेकिन कई बार अधिकारी समय पर एक्शन नहीं करते है. इससे अपराध में बढ़ोतरी होती है और अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. इसके साथ ही कटारिया ने कहा कि प्रदेश में अपराध हमेशा होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, वह चिंताजनक और सवाल उठाने लायक है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सलाह:
कटारिया ने पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम अशोक गहलोत को सलाह देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी गृहमंत्री का जिम्मा भी संभाल रहे हैं ऐसे में समय अभाव के कारण कानून व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते इसलिए उन्हें अपने एक सहयोगी को कानून व्यवस्था का जिम्मा दे देना चाहिए ताकि प्रदेश में कानून पर नियंत्रण रखा जा सके.
13 नंबर बंगले पर कटारिया का कूटनीतिक जवाब:
पूर्व मुख्यमंत्रीयों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को हटाये जाने के हाइकोर्ट के फैसले पर पत्रकारों ने कटारिया से सवाल करते हुए पूछा कि क्या पूर्व सीएम वसंधरा राजे 13 नंबर बंगला खाली करेगी ? इस पर कूटनीतिक जवाब देते हुए कटारिया ने कहा कि जिसे बंगला खाली करवाना है उनसे पूछो मुझे तो खाली करवाना है नहीं. कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, इस मामले में सरकार ही ढीली पड रही है तो मैं क्या करूँ. कटारिया के इस जवाब में उनके मन में छिपी उनकी मंशा को राजनीति के विशेषज्ञ समझ सकते हैं.