शाहजहांपुर दुष्कर्म मामला: 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पहुंचे स्वामी चिन्मयानंद

शाहजहांपुर में एसएस लॉ कॉलेज की छात्रा से दुष्कर्म मामले में यूपी की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) ने पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayanand) को गिरफ्तार कर लिया. बाद में उनका मेडिकल टेस्ट करवाने के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया जहां भारी फोर्स की तैनाती के बीच उनका मेडिकल कराया गया. यहां से उन्हें स्थानीय अदालत में ले जाकर पेश किया गया. अदालत ने स्वामी चिन्मयानंद को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. स्वामी चिन्मयानंद को शाहजहांपुर से गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले पिछले शुक्रवार केा शाहजहांपुर में एसआईटी की टीम ने स्वामी चिन्मयानंद से करीब सात घंटे पूछताछ की और उनके आवास … Read more

नासिक में पीएम मोदी ने शिवसेना पर साधा निशाना, शरद पवार को लिया आड़े हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को महाराष्ट्र के नासिक जिले में थे. यहां उन्होंने महाजनादेश यात्रा के समापन के अवसर पर इशारों-इशारों में शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे और शरद पवार पर निशाना साधा. रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर पर बयानबाजी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस समय राम मंदिर पर कई ‘बयान बहादुर’ सामने आ रहे हैं. मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि प्रभु राम के लिए वे सिर्फ देश की न्याय प्रणाली पर श्रद्धा रखें. अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई चल रही है. याद दिला दें, 16 सितंबर को शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया था, ‘शिवसैनिक … Read more

झारखंड: नाराज डॉ.अजय कुमार ने कांग्रेस छोड़ थामी ‘झाडू’

झारखंड कांग्रेस (Jharkhand Congress) के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अजय कुमार (Dr. Ajoy Kumar) ने तमाम अटकलों के बीच गुरुवार को कांग्रेस का थामन छोड़ आम आदमी पार्टी ज्वॉइन कर ली. उन्होंने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में आप पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. उन्होंने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता का त्याग पत्र सौंपा. यह दूसरी बार है जब उन्होंने पद से इस्तीफा दिया. इससे पहले लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद डॉ.अजय कुमार ने अगस्त में झारखंड प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. दरअसल उनके पार्टी छोड़ने की असली वजह लोकसभा चुनाव के परिणाम नहीं बल्कि झारखंड कांग्रेस के … Read more

महाराष्ट्र: दो डूबती नावों को एक दूसरे का सहारा, राह नहीं आसान

कहते हैं, डूबते हुए को तिनके का सहारा भी काफी है लेकिन महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनावों में तो इससे भी कहीं बढ़कर होने जा रहा है. यहां दो डूबती नावों को एक दूसरे का सहारा मिला है. वो भी उनके खिलाफ जो उससे चार गुना बड़ा है. राह कतई भी आसान नहीं है लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. इन होल वाली नावों में सेंध लगाने के लिए शिवसेना भी है जिससे भी पार पाना सरल नहीं होगा.

दरअसल महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है. दोनों पार्टियों ने 125-125 सीटें आपस में बांटी है. शेष 38 सीटें सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी गयी है जिनपर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगी. इस भागीदारी को एनसीपी चीफ शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वीकृति दे दी है. हालांकि अन्य सहयोगी पार्टियों का निर्णय फिलहाल अधर झूल में है. बता दें, महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं. चुनाव का कार्यक्रम 19 सितम्बर तक घोषित होने की उम्मीद जताई जा रही है.

अब इन दोनों पार्टियों के साथ जो अहम दिक्कत है वो ये कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी रह गयी हैं. पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 122 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वहीं शिवसेना ने 62, कांग्रेस ने 42 और एनसीपी ने 41 सीटों पर कब्जा जमाया. अन्य 31 सीटों में से बहुजन विकास अगाड़ी को तीन, एआईएमआईएम को दो, सीपीआईएम, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, समाजवादी पार्टी और आरएसपी को एक-एक सीट मिली. सात सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की.

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लोकसभा चुनाव-2014 में बीजेपी को 23, शिवसेना को 18, एनसीपी को चार, कांग्रेस को दो और अन्य को एक सीट पर जीत मिली. हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भी स्थितियां इससे अलग नहीं रही. हालांकि बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन गठबंधन में दोनों पार्टियों ने मिलकर 41 जीतों पर अपना कब्जा जमाया. कांग्रेस व सहयोगियों को पांच और दो सीटों पर अन्य को जीत मिली.

जिस तरह के पिछले तीन चुनावों के परिणाम हैं, उससे देखते हुए तो कांग्रेस और एनसीपी बीजेपी व शिवसेना की टक्कर में कहीं टिक नहीं पा रही. हां, इस बार भाजपा और शिवसेना में सीटों के बंटवारे को लेकर जो खबरे आ रही हैं, उससे शरद पवार और कांग्रेस आलाकमान पर राहत के छीटे जरूर लगे होंगे. अगर बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन टूटता है तो इसका थोड़ा फायदा तो कांग्रेस-एनसीपी को जरूर होगा. हालांकि नंबर तीन और चार की पार्टियां होने के बावजूद ये दोनों मिलकर नंबर एक और दो को कितनी टक्कर दे पाएंगी, ये तो भविष्य के गर्भ में छुपा है.

दोनों पार्टियों की शेष 38 सीटों पर बंटवारे को लेकर एक एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के बयान के मुताबिक दोनों दलों के नेताओं ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना की आंधी को रोकने के लिए फैसला लिया है कि अलांइस में वाम दल (क्षेत्रीय पार्टियां) को भी शामिल किया जाएगा. गठबंधन में बीजेपी विरोधी राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है.

‘मीडिया की हेडलाइन मेनेज करने से नहीं होता आर्थिक सुधार’

लगातार डुलमुल अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर विपक्ष के वार मोदी सरकार पर कम नहीं हो रहे. वे आज भी उतने ही तीखे और कटाक्ष भरे हैं जितने पहले थे. केंद्र सरकार प्रयास भी कर रही है लेकिन इकोनॉमी है कि हाथ से मख्खन की तरह फिसलती जा रही है. इसी बीच खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सोशल मीडिया (ट्विटर) पर फॉलोअर्स की संख्या 50 मिलियन के पार पहुंच गई है. इसी बात पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने जमकर पीएम मोदी पर धावा बोला है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की हेडलाइन मैनेज करने से आर्थिक सुधार नहीं होता. मगर भाजपा सरकार इस … Read more

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा में खींचतान, शिवसेना को समझ नहीं आ रहा बीजेपी का गणित

महाराष्ट्र (Maharastra) में जहां विपक्षी कांग्रेस-राकांपा गठबंधन (Congress-NCP Alliance) ने 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तालमेल कर लिया है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) में सीटों को लेकर भारी खींचतान चल रही है. अब शिवसेना आरे कॉलोनी की जमीन पर मेट्रो 3 कारशेड निर्माण परियोजना का विरोध करने में जुटी है, जिसका फैसला देवेन्द्र फड़नवीस सरकार कर चुकी है. सोमवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस परियोजना का हस्र भी नानार रिफाइनरी परियोजना की तरह होने वाला है. महाराष्ट्र सरकार कुछ माह पूर्व नानार रिफाइनरी परियोजना रद्द करने की घोषणा कर चुकी है. रिफाइनरी का निर्माण सिंधुदुर्ग के नानार में प्रस्तावित था. … Read more

वीडियो खबर: कायम है सिंधिया महाराज का जलवा

एक दिन के दौरे पर इंदौर (Indore) पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपने राजनीतिक कौशल की सियासी चाल से मध्यप्रदेश की राजनीति को फिर से गरमा दिया. सिंधिया ने उनके प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले सुरेश पचौरी , दिग्विजयसिंह और कमलनाथ गुट के नेताओं से अलग-अलग उनके घर जाकर मुलाकात की और साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वन टू वन मुलाकात कर एक तरह से शक्ति प्रदर्शन भी किया. जिसके बाद से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के राजनीतिक गलियारों में भी हलचलें तेज हो गई.

वीडियो खबर: इंदौर में क्या बोल गए ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अपनी ही सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अगर अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका तो वह आगे आने को मजबूर होंगे. उन्होंने रेत के अवैध खनन और कारोबार में लगे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

‘संसद में सोने वाले माननीय मंत्रीजी युवाओं को अयोग्य बता रहे हैं’

देश में आर्थिक मंदी पर चारों ओर से घिरी मोदी 2.0 सरकार के केंद्रीय श्रम रोजगार राज्यमंत्री संतोष गंगवार (Santosh Gangwar) ने हाल में एक बयान दिया. उन्होंने कहा कि देश में नौकरियों की कमी नहीं है बल्कि योग्य लोगों की कमी है. अपने संसदीय क्षेत्र बरेली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के लोगों में योग्यता नहीं है इसलिए उन्हें काम नहीं मिल रहा. अब इस बयान पर मंत्रीजी खुद घिर गए हैं. यहां तक की बिहार के मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है. उन पर उत्तर भारतीयों को अपमानित करने का आरोप लगाया है. वहीं सोशल मीडिया यूजर्स ने संतोष गंगवार … Read more

संसद की स्थायी समितियों के पुनर्गठन में भी बीजेपी का बहुमत

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से जूड़ी संसदीय स्थायी समितियों का गठन हो चुका है, जिसका काफी समय से इंतजार था. भाजपा का बहुमत भरपूर होने से मंत्रालयों से जुड़ी स्थायी समितियों में भी भाजपा सदस्यों की संख्या पर्याप्त हो चुकी है, जिसकी वजह सरकार को किसी भी विधेयक को पारित कराने में जरा भी असुविधा नहीं होगी. पहले कुछ समितियों की अध्यक्षता विपक्षी सांसदों के पास थी. अब गृह मंत्रालय और कुछ अन्य विभागों को छोड़कर बाकी सभी विभागों से जुड़ी समितियों में ज्यादातर की अध्यक्षता भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टियों के पास चली गई है. पहले गृह मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति की सदस्यता पी. चिदंबरम के पास … Read more