चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का परिवार आयकर विभाग के राडार पर

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Ashok Lavasa) के परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ आयकर विभाग (Income tax department) ने जांच शुरू कर दी है. गौरतलब है कि अशोक लवासा तीन मुख्य चुनाव आयुक्तों में से एक हैं और पिछले लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की बैठकों में अपने मतभेद जाहिर करते रहे हैं. जब चुनाव आयोग ने नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) को आचार संहिता उल्लंघन (Income tax act) के मामले में क्लीन चिट दी थी, उस समय लवासा ने विरोध किया था. जिन लोगों के खिलाफ जांच हो रही है, उनमें अशोक लवासा की पत्नी नोवेल सिंघल लवासा (Novel Singhal Lavasa) और उनकी बहन … Read more

वीडियो खबर: रामगढ़ बांध को लेकर सांसद किरोड़ी मीणा ने की ये मांग

राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने जमवारामगढ़ बांध (Jamwaramgarh Dam) के आसपास प्रभावशाली लोगों के किए अतिक्रमण को हटाने की मांग की. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद ऐसे लोगों को हटाया नहीं जा रहा जबकि बाढ़ जयपुर जिले की लाइफ लाइन है. मीणा ने बाढ़ की पुरानी रौनक लौटाने के साथ चंबल या यमुना नदी का पानी भी डायवर्ट करने की मांग की. इसके लिए उन्होंने बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी.

दिल्ली में मनोज तिवारी और गौतम गंभीर के बीच भारी खींचतान

दिल्ली भाजपा (Delhi BJP) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है. अगले साल दिल्ली विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. उससे पहले यह स्थिति भाजपा के लिए असुविधाजनक है. समस्या मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) और गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के बीच पिछले कुछ दिनों से पैदा हुई खटास के कारण है. दोनों ही भाजपा नेता होने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्र के स्टार का दर्जा रखते हैं. मनोज तिवारी मशहूर गायक और अभिनेता हैं, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष (Delhi BJP President) हैं, जबकि गौतम गंभीर दिग्गज क्रिकेटर रह चुके हैं और दिल्ली से सांसद चुने गए हैं. इस तरह दिल्ली भाजपा में दोनों का अच्छा खासा दखल बन गया है.

पिछले कुछ दिनों से मनोज तिवारी और गौतम गंभीर एक-दूसरे के सामने आने से बच रहे हैं. दोनों ने एक मंच पर उपस्थित होना बंद कर दिया है. मनोज तिवारी लंबे समय से भाजपा में हैं और राजनीति में जम गए हैं, जबकि गंभीर राजनीति में नए-नए आए हैं. जैसे ही भाजपा में शामिल हुए, वैसे ही टिकट मिल गया और लोकसभा चुनाव जीत गए. दिल्ली की राजनीति में गंभीर की पकड़ बनना अभी-अभी शुरू हुआ है. इस प्रक्रिया में उन्होंने सबसे पहले मनोज तिवारी से वैर भाव बनाया है.

बड़ी खबर: अमेरिका में मोदी की विशाल हाउडी रैली से बदलते राजनयिक समीकरण

इन दोनों दिग्गजों की राजनीति कुछ दिन चलेगी, जब तक भाजपा हाईकमान कोई फैसला नहीं करता. गंभीर समर्थकों की मांग है कि दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बदलना चाहिए. हाल ही दिल्ली में एक कार्यक्रम में तिवारी और गंभीर, दोनों आमंत्रित थे. दोनों का कार्यक्रम में उपस्थित होना तय था, लेकिन मनोज तिवारी पहुंच गए, गौतम गंभीर ने अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम में नहीं जाने का फैसला कर लिया. वह इस कार्यक्रम से गैरहाजिर रहे. जिसको लेकर बड़ी चर्चाएं चल रही हैं.

इस समय सबकी निगाहें भाजपा हाईकमान की तरफ है. तिवारी को दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो इसे गौतम गंभीर की सफलता मानी जाएगी और अगर तिवारी अध्यक्ष बने रहते हैं तो यह गंभीर के लिए संकेत होगा कि वह अपने दायरे में रहें और दिल्ली का पार्टी प्रभार तिवारी को संभालने दें. मनोज तिवारी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर उभर रहे हैं. दिल्ली में भाजपा उनके नाम पर ही चुनाव लड़ेगी. अगर तिवारी प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाए जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री पद पर दावा समाप्त हो जाएगा.

वीडियो खबर: कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बूस्टर डोज भरेंगी सोनिया गांधी

कांग्रेस (Congress) की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) पूर्व वित्तमंत्री पी.चिदंबरम (P. Chinmayanand) से मिलने तिहाड़ जेल पहुंचे. सोनिया गांधी ने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच ये संदेश पहुंचाने के लिए कहा कि कैसे जांच एजेंसियां कांग्रेस और अन्य विपक्ष के नेताओं को परेशान कर रही है एवं कईयों को जेल में डाल रही है. ऐसी संकट की घड़ी में सोनिया गांधी का अपने नेताओं के साथ खड़े होना कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक बूस्टर डोज़ का काम करेगा.

महाराष्ट्र: ‘क्या सच में भारत-पाक के बंटवारे से भी मुश्किल है भाजपा-शिवसेना गठबंधन’

Pressure politics

महाराष्ट्र (Maharastra) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हो चुकी है. 288 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित होंगे. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने गठबंधन कर सीटें आपस में बांट ली है. दोनों ने 125-125 सीटों पर सहमति बना अन्य 38 सीटें अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ दी. भाजपा सत्ताधारी पार्टी है और शिवसेना सहयोगी पार्टी, इसके बावजूद दोनों में सीटों के बंटवारे का मंथन समुद्र-मंथन से भी मुश्किल लग रहा है. पार्टी के एक नेता ने तो गठबंधन पर यहां तक कहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना (BJP-Shiv Sena Alliance) के बीच महज 288 सीटों का बंटवारा करना भारत-पाक के बंटवारे से भी मुश्किल फैसला लग रहा है.

ये बयान दिया है शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut-Shiv Sena) ने जो सीट बंटवारे से जुड़ी परेशानियों से भली-भांति परिचित हैं. राउत ने कहा, ‘इतना बड़ा महाराष्ट्र है लेकिन ये जो 288 सीटों का बंटवारा है, ये भारत पाकिस्तान के बंटवारे से भी भयंकर है. यदि हम सरकार में होने के बजाय विपक्ष में होते तो तस्वीर दूसरी होती.’ उन्होंने ये भी कहा कि फिलहाल इस बारे में मंथन चल रहा है लेकिन सीटों के बंटवारे पर जो भी फैसला होगा, उसे तुरंत मीडिया को बताया जाएगा.

वैसे महाराष्ट्र की आंतरिक राजनीति को देखा जाए तो राउत के इस बयान से इत्तफाक रखा जा सकता है. विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे का ये विवाद अभी का नहीं बल्कि लोकसभा चुनावों से भी पहले का है. लोकसभा चुनावों में भाजपा और शिवसेना चाहें एक साथ चुनावी जंग लड़ रही थी लेकिन शिवसेना अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए लगातार भाजपा और उनकी नीतियों पर हमला कर रही थी. महाराष्ट्र में भाजपा सत्ताधारी पार्टी है और पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने शिवसेना सहित कांग्रेस और एनसीपी तीनों को एक साथ पटखनी देते हुए 288 में से 122 सीटों पर कब्जा कर लिया. शिवसेना भाजपा की आधी सीटों तक ही पहुंच सकी और 63 पर सिमट गयी. कांग्रेस को 42 और एनसीपी को 41 सीटें मिली.

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लोकसभा चुनाव 2019 में दोनों पार्टियों ने 25-23 के अंतर से चुनाव लड़ा और कुल 41 सीटों पर कब्जा किया. उसके बाद से शिवसेना बीजेपी से 144-144 सीटों पर हक मांगने लगी. सियासी गलियारों में इस खबर से भी बाजार गर्म रहा कि शिवसेना चुनाव जीतने की स्थिति में ढाई-ढाई साल दोनों पार्टियों के मुख्यमंत्री बिठाने के जुगाड़ में है. हालांकि भाजपा ने इस बात पर कभी मुहर नहीं लगाई. इसके बाद शिवसेना ने आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बताना शुरू कर दिया और प्रचार भी उसी तरह से हुआ.

हाल में एक मीडिया कार्यक्रम में महाराष्ट्र के भाजपायी मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री पद किसी को देने और सांझा करने से साफ इंकार कर दिया. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि गठबंधन की स्थिति में शिवसेना चाहे तो डिप्टी सीएम बना सकती है. लेकिन हमारी बात अभी भी वहीं अटकी है…भाजपा-शिवसेना के बीच सीटों का बंटवारा.

उद्दव ठाकरे ने बीच का रास्ता निकालते हुए भाजपा से 150-130 के अनुसार सीट बांटने के बारे में बात की लेकिन भाजपा ​अपने सहयोगी को केवल 110 सीटों पर निपटाना चाहती है. अपने ठस से मस न होने की वजह ये भी है कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव-2014 में भाजपा ने अकेले अपने दम पर तीनों विपक्षी पक्षों को धूल चटाई थी. हालांकि सरकार शिवसेना से गठजोड़ करके ही बनाई लेकिन शिवसेना को हमेशा ये बात याद रही कि भाजपा की सरकार केवल और केवल शिवसेना के सहयोग से बन पायी है.

अब इन चुनावों में भी शिवसेना इस बात का अहसास भाजपा को करा रही है कि अकेले दम पर वो प्रदेश में सरकार नहीं बना सकती और उन्हें शिवसेना के साथ की जरूरत है. हालांकि कहीं न कहीं शिवसेना को इस बात का अहसास भी है कि वो खुद भी आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में कांग्रेस, एनसीपी के साथ मोदी आंधी का सामना नहीं कर पाएंगे. ठीक ऐसा ही इल्म भाजपा को भी है कि तीन पुरानी पार्टियों को अकेले टक्कर दे पाना बिना किसी सहारे के पहाड़ चढ़ने जैसा है. यही वजह है कि शिवसेना के इतने आघातों के बाद भी भाजपा गठबंधन के लिए पूरी तरह से तैयार है.

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भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तो करोड़ों लोगों की आवाजों पर अपने कान बंद करते हुए आजाद भारत के सीने पर एक लाल लकीर खींचते हुए हिंदूस्तान-पाकिस्तान बना दिया लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का ये अटूट बंधन बंधा रहेगा या टूट जाएंगा, जल्दी ही मोदी-शाह बिग्रेड इससे पर्दा उठा देगी.

सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के तिहाड़ जाकर चिदंबरम से मिलने के राजनीतिक मायने

आईएनएक्स मीडिया (INX Media) मामले में पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेसी नेता पी.चिदंबरम (P.Chidambaram) तिहाड़ जेल में हैं. दिल्ली की एक अदालत ने 19 सितम्बर को चिदंबरम की न्यायिक हिरासत की अवधि तीन अक्टूबर तक बढ़ा दी है. इसका मतलब ये है कि अब पी.चिदंबरम तीन अक्टूबर तक जेल में ही रहेंगे. सोमवार को कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने तिहाड़ जेल पहुंच चिदंबरम से मुलाकात की और उनके हालचाल पूछे. इस दौरान उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) भी रहे. ये पहली बार है कि सोनिया गांधी और मनमनोहन सिंह ने किसी जेल में पहुंच किसी कैदी के हालचाल जाने हो.

अब राजनीतिक गलियारों में दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के चिदंबरम से जेल जाकर मिलने के काफी तरह के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. ये इसलिए भी है क्योंकि आज से पहले कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व पीएम कभी किसी से भी मिलने इस तरह की जगह पर नहीं पहुंचे. विपक्ष तो छोड़िए, पक्षधारी नेता भी इस मुलाकात के बारे में कुछ भी बता नहीं पा रहे हैं. सीनियर नेता इस बारे में केवल इतना ही बता पा रहे हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है.

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते सोनिया गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते डॉ.मनमोहन सिंह इस बात को भली-भांति समझते है। कि मोदी सरकार ने सत्ता में वापसी के बाद कांग्रेस पार्टी और पार्टी के नेताओं को जनता के सामने भ्रष्टाचारी साबित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. यही वजह है कि कांग्रेस के पी.चिदंबरम और डीके शिवकुमार जैसे वरिष्ठ नेता जेल की सलाखों के पीछे हैं. पार्टी के कई नेताओं पर सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है. खुद सोनिया गांधी और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भी ईडी जांच चल रही है और कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार इन मिले मौकों को जरूर भुनाने का प्रयास करेगी.

ऐसे में सोनिया गांधी अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को इस मुलाकात के जरिए ये संदेश देना चाहती हैं कि मोदी सरकार केवल बदले की भावना से कांग्रेस के नेताओं को जेल में ठूस रही है. ऐसे बुरे वक्त में भी कांग्रेस एक है और अपने नेताओं के साथ खड़ी है.

असल में जब पी.चिदंबरम देश के गृहमंत्री थे, तब उन्होंने अमित शाह को तीन महीने तक एक मामले में जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया था. अब अमित शाह देश के होम मिनिस्टर हैं तो उन्होंने केवल बदले की कार्यवाही करते हुए चिदंबरम को तिहाड़ पहुंचवाया है. वहीं डीके शिवकुमार को हाल में कर्नाटक संकट के बीच बागी विधायकों को मनाने की कोशिश करने का इनाम मिला है.

इससे पहले भी सोनिया गांधी सभी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षों को कह चुकी है कि सभी प्रदेशाध्यक्ष अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस नेताओं की हो रही गिरफ़्तारी को लेकर यह संदेश जनता के बीच पहुंचाएं कि जांच एजेंसियां कांग्रेस और अन्य विपक्ष के नेताओं को परेशान कर रही है एवं कईयों को जेल में डाल रही है. ऐसी संकट की घड़ी में सोनिया गांधी का अपने नेताओं के साथ खड़े होना कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक बूस्टर डोज़ का काम करेगा.

माना ये भी जा रहा है कि सोनिया गांधी इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिव कुमार (DK ShivKumar) से भी मुलाक़ात करेंगी. मनीलॉड्रिंग मामले में शिव कुमार ईडी की कस्टडी में हैं. इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी तिहाड़ पहुंच पी.चिदंबरम से मुलाकात की थी.

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के फैसले की आलोचना

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy)  में चल रहे मंदी का दौर थामने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने फौरी उपाय करते हुए कॉर्पोरेट कंपनियों को अच्छी राहत दी है. इसके साथ ही शेयर बाजार में जबर्दस्त बढ़त देखी गई और सूचकांक अचानक 5.3 फीसदी ऊपर चढ़ गया. सेंसेक्स में एक दशक में पहली बार एक दिन में 1921.15 अंकों की बढ़त के साथ 38,014.62 अंकों पर बंद हुआ. इस बीच दिन भर के कारोबार के दौरान एक बार सेंसेक्स ने अब तक की सर्वोच्च 22 फीसदी बढ़त बना ली थी. इसी तरह निफ्टी भी 5.32 फीसदी बढ़त के साथ 11,274.20 अंकों पर बंद हुआ. इस तरह निफ्टी … Read more

कारो​बारियों की मिली बड़ी राहत, मोदी 2.0 सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

PoliTalks news

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की गिरती हालत, आर्थिक मंदी और कारोबारियों की नाराजगी के बीच मोदी 2.0 सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया. केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स घटाने के साथ कैपिटल गेन पर टैक्स लेकर व्यवसाइयों को बड़ी राहत देने का प्रयास किया. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ये जानकारी दी. इसके साथ कई अन्य बड़े ऐलान किए. इसका बाजार में सकारात्मक असर देखने को मिला. सरकार की घोषणाओं के बाद शेयर बाजार में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिली. निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद शेयर बाजार ने जो रफ्तार पकड़ी, उसने एक नया रिकॉर्ड बना दिया. कारोबार के दौरान … Read more

वीडियो खबर: सिंधिया ने कमलनाथ से की ये मांग

पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) से एक मांग की है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के वे किसान जो प्राकृतिक आपदा एंव बाढ़ पीड़ित हैं, उन्हें शत प्रतिशत मुआवजा मिलना चाहिए. सिंधिया ने प्रदेश सरकार से मांग की कि कमलनाथ सरकार ऐसा फैसला लेते हुए किसान हित में कार्य करे.

चुनाव जीतने की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेरने में जुटीं कुमारी शैलजा

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस (Haryana Congress) अध्यक्ष कुमारी शैलजा (Kumari Selja) ने विधानसभा चुनाव का टिकट चाहने वालों के सामने ऐसी अव्यावहारिक शर्तें रखी हैं, जिनसे हरियाणा में पहले ही सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस की परेशानियां और बढ़ जाएंगी. कांग्रेस के टिकट के लिए आवेदन करने वालों को यह घोषणा करनी होगी कि वे शराब नहीं पीते हैं और खादी पहनते हैं. इस समय हरियाणा में कांग्रेस के 14 विधायक हैं. अगर शैलजा की तरफ से लागू शर्तों का सख्ती से लागू किया गया तो इनमें से आठ-दस विधायकों को फिर से टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा. शैलजा ने एक ट्वीट के जरिए चुनाव लड़ने के लिए लागू मापदंडों … Read more