महाराष्ट्र में आक्रामक हुई भाजपा-शिवसेना की ‘दवाब पॉलिटिक्स’

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के सरकार गठन में कुर्सी को लेकर खींचतान जारी है. प्रदेश में सरकार बनाने का सबसे बड़ा दावेदार भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता की कुर्सी पर अपने अपने प्रतिनिधियों को बिठाने पर अड़ गया है. वैसे तो प्रदेश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन एकल बहुमत से दूर से गयी. 60 सीटों पर कब्जा कर शिवसेना भी ठाकरे परिवार के चश्मोचिराग आदित्य ठाकरे को आधे समय के लिए मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी हुई है. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात से साफ इनकार कर दिया.

शिवसेना जहां सरकार में मुख्यमंत्री का पद चाहती है. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने साफ किया है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद देवेंद्र फडणवीस के पास ही रहेगा. इस मसले पर फडणवीस ने कहा कि हमारे पास सिर्फ प्लान एक है, प्लान बी और सी नहीं है.शिवसेना की मांगों पर मेरिट के आधार पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में जो भी छप रहा है, पार्टी उससे नाराज है. लेख में भाजपा के खिलाफ बहुत कुछ लिखा जा रहा है. उन्हें कांग्रेस और एनसीपी के बारे में भी सख्ती से लिखना चाहिए. फडणवीस ने कहा कि सीएम पद को लेकर 50-50 फॉर्मूले को लेकर कोई वादा नहीं हुआ. मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा, इसमें कोई शक नहीं.

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इधर शिवसेना ने अपने तेवर पहले से तीखे करते हुए हरियाणा में दुष्यंत चौटाला का उदाहरण देते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में है. हमारे पास भी विकल्प है.’ गौरतलब है कि हरियाणा में जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश भाजपा को समर्थन देते हुए खट्टर सरकार बनाने में अहम रोल निभाया. शपथ ग्रहण वाले दिन पिछले 6 साल से जेल में बंद दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला को मिली बेल को उनके भाजपा से हाथ मिलाने की शर्त के तौर पर देखा जा रहा है.

इस मसले में चौटाला परिवार का नाम घसीटने पर दुष्यंत चौटाला ने भी नाराजगी व्यक्त की. जेजेपी प्रमुख ने शिवसेना को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मेरे पिता पिछले 6 साल से जेल में थे. तब शिवसेना को उनकी याद नहीं आयी. पार्टी के भाजपा को समर्थन देने को उनकी पेरोल से जोड़ना गलत है. पिता पर बयान अपमानजनक है.

बता दें, सरकार बनाने के लिए भाजपा को शिवसेना या फिर एनसीपी के सहयोग की आवश्यकता है. ऐसे में शिवसेना ने चुनाव परिणाम के मौके को भुनाते हुए आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री पद में हिस्सेदारी की मांग तेज कर दी और किसी भी हालात में पीछे हटने को तैयार नहीं. भाजपा अकेले सरकार बना नहीं सकती और एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक घोटाले में घसीटने के बाद उनके पास जाने में हिचक रही है. ऐसे में शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का मौका ताड़ रही है. यही वजह है कि शिवसेना अपने मुख पत्र में शरद पवार और उनकी लीडरशिप की जमकर तारीफ कर रही है. साथ ही देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा को जमकर आड़े हाथ ले रही है.

वहीं शिवसेना के साथ सरकार बनाने में पेच फंसने पर भी बीजेपी बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है. अब दोनों ही प्रमुख पार्टियां निर्दलीयों को भी अपने अपने पाले में लाने का जी तोड़ प्रयत्न कर रही हैं. ऐसा करके शिवसेना को बीजेपी ये संदेश देने की कोशिश में है कि वह इस चुनाव में किसी तरह से कमजोर नहीं हुई. बीजेपी के अनुसार, पार्टी को 15 निर्दलीयों का भी समर्थन मिला है और छोटे दलों के कुछ विधायक भी संपर्क में हैं. हाल में विनोद अग्रवाल और महेश बालदी सहित दोनों नव निर्वाचित विधायकों ने दो निर्दलीय विधायकों ने देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया है. वहीं सोमवार को अहमदनगर जिले के नेवासा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक शंकर राव गड़ाख ने सोमवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा. अब शिवसेना के पास 61 सीटों पर समर्थन है.

अब सारे तीन-पांच करने के बाद भी गौर करने वाली बात ये है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में सत्ता पाने के लिए किसी भी संगठन को 145 विधायकों का समर्थन हासिल होना जरूरी है. भाजपा के पास 103 विधायक हैं. शिवसेना के पास 60, एनसीपी के पास 56 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. निर्दलीय विधायकों की संख्या केवल 25 है. सभी विधायकों का समर्थन के बावजूद भाजपा बहुमत पाने में सक्षम नहीं है और न ही कांग्रेस-शिवसेना-निर्दलीय मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. ऐसे में सत्ता की चाबी पूरी तरह से शरद पवार के पास आ गयी है. हालांकि पवार पहले ही ये स्पष्ट कर चुके हैं कि वे शिवसेना से गठबंधन की जगह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे लेकिन शिवसेना के बदले सुर और कांग्रेस का समर्थन मिलकर अगर शरद पवार को एलाइंस में शामिल कर लेते हैं तो लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे देवेंद्र फडणवीस को सिर्फ यही कहना पड़ेगा ‘अंगुर खट्टे हैं’.

शिव सेना ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को दिया “राम” का वास्ता, नहीं तो अन्य विकल्प भी हैं खुले

Sanjay Raut

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में राजनीतिक दंगल के बीच अब सरकार बनाने के लिए शिवसेना भाजपा को राम का वास्ता दे रही है. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि हम सत्ता के भूखे नहीं हैं लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले ही तय हो गया था जिसका मतलब कैबिनेट पोस्ट में बराबर की हिस्सेदारी है. हम सभी राम में विश्वास रखते हैं तो राम की तरह प्राण जाए पर वचन ना जाए की नीति भी अपनानी चाहिए.

राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि गठबंधन का धर्म निभाना जरूरी है. ऐसे में हमें ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं मिलना चाहिए.

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संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा, ‘बीजेपी को 105 सीटों के साथ सरकार बनाने के लिए कौन रोक रहा है. अगर ऐसा होता है तो ये वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा क्योंकि सरकार के लिए 145 का आंकड़ा चाहिए. अगर कोई लोकतंत्र की हत्या करना चाहता है तो ऐसे नहीं चलेगा.’

सरकार बनाने में हो रही देरी पर शिवसेना सांसद ने कहा कि अगर सरकार बनने में देरी हो रही है तो हमारी गलती नहीं है. राउत ने बीजेपी को गठबंधन धर्म निभाने की याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा को 50-50 फॉर्मूले को निभाना चाहिए. उन्होंने (Sanjay Raut) भाजपा की रणनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव से पहले विपक्ष को खत्म करने की बात हो रही थी लेकिन क्या हुआ.

इसी बीच शिवसेना के एनसीपी के साथ सरकार बनाने की उड़ रही अफवाहों पर राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि हमने अभी इस पर विचार नहीं किया है. ये काफी जल्दबाजी होगी. हालांकि, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि राजनीति में सब संभव है. विकल्प हमेशा खुले रहते हैं जैसे अभी आपको हरियाणा में देखने को मिला है. वहाँ बीजेपी ने बिना बहुमत के ही सरकार बना ली. उन्होंने ऐसे संगठन से हाथ मिलाया जो उनके खिलाफ था.

इस तरह का बयान देकर शिवसेना ने साफ कर दिया है कि अगर भाजपा उनके साथ सत्ता में बंटवारा नहीं करती है तो उन्हें आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए शरद पंवार की शरण में जाने कोई दिक्कत नहीं है. अपने मुख पत्र में शरद पंवार और उनकी लीडरशिप की तारीफों के कसीदे गढ़ उन्होंने सत्ता की कुर्सी तक जाने का सेतु भी तैयार करना शुरू कर दिया है.

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हालांकि शरद पंवार ने हाल में एक बयान देकर साफ किया था कि वे गठबंधन करने की बजाए विपक्ष में बैठना ज्यादा पसंद करेंगे लेकिन रोहित पंवार और पार्थ पंवार के सियासी भविष्य को देखते हुए ये सौदा बुरा नहीं है. वहीं भाजपा को केवल सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस की शिवसेना (Sanjay Raut) और एनसीपी के संभावित एलाइंस को मोन स्वीकृति है.

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Maharashtra Shiv Sena BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बीजेपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) की दबाव की राजनीति के सामने बीजेपी (BJP) नहीं झुकेगी. न तो बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मानी जाएगी और न ही गृह, वित्त, पीडब्लूडी जैसे अहम मंत्रालय देने की जिद मानी जाएगी. हां अगर शिवसेना को मंजूर हो तो उपमुख्यमंत्री पद जरूर दिया जा सकता है और साथी ही केंद्र में उसकी हिस्सेदारी भी बढ़ाई जा सकती है. विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) के बीच सरकार में भागीदारी को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है. एक जमाने में बिना सरकार … Read more

वीडियो खबर, विशेष रिपोर्ट: अमित शाह की रणनीति भी यहां आकर हुई फेल, शरद पवार ने किया सभी को ढेर

शरद पवार से संबंध गांठना शिवसेना के लिए इसलिए भी आसान होगा क्योंकि सभी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि शरद पवार ही एनसीपी हैं और एनसीपी का मतलब शरद पवार ही है. जबकि प्रदेश की भाजपा में देवेंद्र फडणवीस, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अब जेपी नड्डा जैसे कई नाम हैं जिन्हें पार्टी के फैसलों में शामिल किया जाता है…

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महाराष्ट्र में पवार से पंगा बीजेपी को पड़ सकता भारी, सरकार बनाने के सपने पर ये गठबंधन फेर सकता पानी

NCP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद शिवसेना ने ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर अपने बगावती सुर तेज कर भाजपा के सरकार बनाने के सपने को क्षीण कर दिया. अब न तो भाजपा और न ही देवेंद्र फडणवीस शिव सेना को मुख्यमंत्री का पद देने के लिए राजी हैं. अब कांग्रेस से मिलकर तो भाजपा सरकार बनाएगी नहीं और शरद पवार (NCP) के पास जाने की फडणवीस में हिम्मत है नहीं. ऐसे में भाजपा के सामने अब एक और नया एलांयस खड़ा हो गया है जो बीजेपी को महाराष्ट्र में सरकार बनाने से रोक रहा है. ये है शिवसेना-एनसीपी का सम्भावित गठबंधन. पॉलिटॉक्स के विश्वस्त सूत्रों से तो यही नतीजे सामने आ रहे हैं और शिवसेना के बगावती सुर भी इसी बात का संकेत दे रहे हैं.

दरअसल, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा महाराष्ट्र की नंबर एक पार्टी बनकर उभरी लेकिन सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं जुटा सकी. उनके पिछले चुनाव में जीती गयी सीटों में भी गिरावट देखी गई. वहीं एनसीपी के पिछले प्रदर्शन में अच्छा सुधार हुआ है लेकिन शिवसेना वहीं की वहीं है. ऐसे में स्पष्ट है कि प्रदेश की जनता कम से कम भाजपा पर तो पूरी तरह से विश्वास नहीं कर पा रही है. वहीं जनता की सहानुभूमि एनसीपी के मुखिया शरद पवार के साथ ज्यादा रही. यही वजह है कि NCP का न केवल वोट बैंक बढ़ा, साथ ही उनकी पार्टी ने पहले से ज्यादा सीटें भी जीतीं.

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महाराष्ट्र के चुनावी परिणाम आते ही शिवसेना ने अपने बगावती तेवर फिर से तीखे कर दिए और शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे अपने पुत्र आदित्य ठाकरे को आधी अवधि यानि ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालवाने पर अड़ गए. देवेंद्र फडणवीस पहले ही ये साफ कर चुके हैं कि वे आदित्य या शिवसेना के किसी नेता को केवल डिप्टी सीएम की कुर्सी दे सकते हैं. ऐसे में वे सीएम कुर्सी को साझा करने के मूड में बिलकुल नहीं हैं. वहीं अगर बीजेपी शिवसेना के सामने झुकती है तो सरकार तो बन जाएगी लेकिन उन्हें शुरुआती ढाई साल पहले आदित्य-उद्दव ठाकरे व शिवसेना के नखरे सहने होंगे और आखिरी ढाई भी शिवसेना उनके कामों में दखल देती रहेगी.

भाजपा शिवेसना की बात मानने के मूड में तो दिख नहीं रही और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का विकल्प बन ही नहीं सकता. तो ऐसे में अब केवल शरद पवार एक मात्र विकल्प है, लेकिन पिछले चुनावों के बाद NCP का रवैया भाजपा स्पष्ट तौर पर देख चुकी है जब शरद पवार ने अचानक से भाजपा को दिया समर्थन वापिस ले लिया था. इसके बाद हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा शरद पवार पर ईडी की जो कार्रवाई हुई उसके बाद तो अब फडणवीस भी किस मुंह से पवार के सामने जाकर समर्थन की मांग करेंगे. बता दें, सरकार द्वारा शरद पवार का नाम बैंक घोटाले में लाकर उन पर ईडी की कार्रवाई का दांव ही बीजेपी पर उलटा पड़ गया है. इसके बाद ही भाजपा को चारों ओर से घिर गई थी और पवार जनता की सहानुभूति जीतने में कामयाब रहे.

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लेकिन शिवसेना के पास आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने का इससे बढ़िया मौका दुबारा शायद ही मिले. अगर शिवसेना शरद पवार के पास जाकर संपर्क साधे और वहां ढाई-ढाई का फॉर्मूला चाहे तो उनका काम आसानी से बन सकता है. क्षेत्रप पार्टी होने के नाते जनता के सामने ये अच्छा विकल्प भी है. चूंकि कांग्रेस ने एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है, ऐसे में उन्हें इस स्थानीय गठबंधन को समर्थन देने में कोई आपत्ति नहीं होगी.

इससे शिवसेना ही नहीं बल्कि NCP के कई काम भी सध जाएंगे. लंबे समय से भाजपा सरकार में सत्ता की भागीदारी चाह रही शिवसेना का भविष्य आदित्य ठाकरे आधे या फिर पूरे समय के लिए सत्ता की बागड़ोर संभाल सकते हैं. वहीं अगर शरद पवार चाहें तो अजित पवार या फिर उनके पोते रोहित पवार को डिप्टी सीएम या फिर 50-50 फॉर्मूले के आधार पर सीएम भी बना सकते हैं. शिवसेना को इस पर कोई नुकसान नहीं होना चाहिए.

शिवसेना का अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लगातार शरद पवार और उनकी लीडरशिप की तारीफ के साथ फडणवीस सरकार के कमजोर नेतृत्व का बखान इस दिशा में पहला कदम माना जा रहा है. अगर शिवसेना को अपनी खुद की सरकार बनानी है तो उद्दव ठाकरे किसी भी सूरत में शरद पवार से पंगा नहीं लेंगे और न ही उन्हें नाराज करेंगे. अपने भाषणों में शिवसेना के किसी नेता ने शरद पवार पर सीधे तौर पर कोई आक्षेप भी कभी नहीं लगाए. शायद शिवसेना को इस बात का पहले से आभार था कि प्रदेश में ऐसे स्थिति आ सकती है, शायद इसीलिए शिवसेना ने इन परिथितियों को बरकरार रखा.

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शरद पवार से संबंध गांठना शिवसेना के लिए इसलिए भी आसान होगा क्योंकि सभी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि शरद पवार ही एनसीपी हैं और एनसीपी का मतलब शरद पवार ही है. जबकि प्रदेश की भाजपा में देवेंद्र फडणवीस, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अब जेपी नड्डा जैसे कई नाम हैं जिन्हें पार्टी के फैसलों में शामिल किया जाता है.

लेकिन ये स्थिति केवल और केवल शिवसेना चाहे तो ही बन सकती है. भाजपा को समर्थन के लिए 44 विधायकों की आवश्यकता है. शिवसेना आधे विधायक जीतकर भी विश्वास से भरी है क्योंकि उन्हें पता है कि फडणवीस उनके बिना सरकार बनाने में सक्षम नहीं हैं. अब उन्हें या तो सत्ता ठाकरे परिवार से बांटनी होगी या विपक्ष में बैठना होगा. एनसीपी से गठबंधन हो जाए तो बात अलग है लेकिन इसकी संभावना बहुत कम है. ठाकरे परिवार का पवार परिवार से कोई बड़ा मतभेद भी नहीं है. शरद पवार का महाराष्ट्र की राजनीति में कद और उनकी साफ सुधरी छवि के तो चाहने वाले भी काफी हैं. ऐसे में शिवसेना उनपर आंख मूंदकर भरोसा कर सकती है. और ऐसे में शिवसेना को कांग्रेस का समर्थन मिलना भी तय है. महाराष्ट्र की राजनीति में बन रहा ये तीसरा धड़ा निश्चित रूप से भाजपा की नींदे उड़ाने वाला है, इसमें कोई शक नहीं है.

‘तेल लगाए पहलवान बन अखाड़े में कूदे थे सीएम पर बूढ़े शरद पवार ने दिया पटक’

Saamana

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आते ही शिवसेना आक्रमक हो गयी है. भाजपा ने 101 और शिवसेना ने 60 सीटों पर कब्जा जमाया. इसके बाद ​शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखे तेवर अपनाते हुए स्पष्ट तौर पर सरकार में 50-50 की भागीदारी की मांग की. इसके बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ (Saamana) में एक लेख के जरिए बीजेपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को घेरने की कोशिश की. इस लेख में शीर्षक लिखा ”तेल लगाए पहलवान बन अखाड़े में कूदे थे सीएम पर बूढ़े शरद पवार ने दिया पटक”.

लेख (Saamana) में कहा गया, ‘मौजूदा चुनाव परिणाम से ‘सत्ताधीशों’ को सबक मिला है. साफ है अब सत्ता की धौंस नहीं चलेगी. महाराष्ट्र की जनता ने गठबंधन को 161 सीटें दी लेकिन इस महाजनादेश नहीं कहा जा सकता. चुनाव से पहले बेहद कमजोर कही जा रही कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की जबकि एनसीपी 55 सीटें जीतने में कामयाब हुई. एनसीपी ने इस चुनाव में बड़ी छलांग लगाई है.’

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मुखपत्र में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की लीडरशिप की जमकर तारीफ की गई है. सामना में लिखा है कि ‘वह चुनाव में दमदार नेतृत्व और जिद के साथ लड़े. सीएम ने खुद को तेल लगाए हुए एक पहलवान की तरह मैदान में उतारा पर चुनाव परिणाम के बाद उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि तेल थोड़ा कम पड़ गया. माटी की कुश्ती के उस्ताद की तरह एनसीपी प्रमुख ने उन्हें पटक दिया.’

शिवसेना के मुखपत्र (Saamana) में छपे इस लेख में भाजपा का नाम लिए बगैर कई हमले किए गए. लेख में लिखा, ‘सत्ता के दुरुपयोग कर राजनीतिक रोटियां सेंकने से किसी को खत्म नहीं किया जा सकता. यह चुनाव परिणाम ऐसा है जैसे अब किसी की धौंस नहीं चलेगी. अब चुनाव खत्म हो चुके हैं. हम जनता की सेवा करने जा रहे हैं. कौन हारा और किसे फायदे हुआ, इसका मंथन कुछ समय बाद किया जाएगा.’

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 161 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया है. अगर पिछले विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो इस चुनाव में भाजपा को 22 सीटों का नुकसान हुआ है. वहीं कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन 99 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रहा. एनसीपी ने पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. शिवसेना का प्रदर्शन पहले की तरह बरकरार है. चुनाव ​परिणाम के बाद शिवसेना भाजपा पर ढाई—ढाई साल मुख्यमंत्री पद के लिए दवाब बना रही है. 70 साल के इतिहास में ठाकरे परिवार से उद्दव ठाकरे के सुपुत्र आदित्य ठाकरे वर्ली विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की. अब शिवसेना समर्थक फडणवीस और प्रदेश भाजपा पर आदित्य ठाकरे को ढाई साल के लिए सीएम बनाने का प्रेशर बना रहे हैं.

हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम भाजपा और मोदी जी को आइना दिखाने वाले: अशोक गहलोत

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र एवं हरियाणा विधानसभा सहित कई राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों के परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वालों के लिए ये चुनाव परिणाम बहुत बड़ा झटका हैं. हरियाणा में जनता ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ जनादेश दिया है और भाजपा के ‘अबकी बार 75 पार’ के नारे को नकार दिया है. वहीं महाराष्ट्र में भी भाजपा और उनके सहयोगी दलों की सीटें कम होना और कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ने और पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी और … Read more

महाराष्ट्र में हारकर भी सिकंदर बनी NCP, हरियाणा में कांग्रेस ने जिंदा रखी आस

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. आमिर खान की एक फिल्म में एक डायलॉग था ”जो जीता वही सिकंदर”. बात भी सही है लेकिन महाराष्ट्र में NCP ने इस घारणा को गलत साबित कर दिया. भले ही प्रदेश में भाजपा और शिवसेना की स्पष्ट तौर पर एक तरफा सरकार बन रही है लेकिन यहां एनसीपी के शरद पवार हारकर भी सिकंदर बन गए. वहां जीतने के बाद भी भाजपा और शिवसेना के चर्चे नहीं है लेकिन सियासी गलियारों के साथ-साथ मीडिया संस्थानों में भी इस समय केवल और केवल शरद पवार छाए हुए हैं. वहीं हरियाणा में अस्तित्व खोती कांग्रेस ने अपने आपको जिंदा रहने में सफलता हासिल की. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से … Read more