बीजेपी और महाराष्ट्र के राज्यपाल से सुरजेवाला ने पूछे ये 10 सवाल जो देश की आम जनता के मन में भी हैं शायद

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक जो कुछ भी सियासी गलियारों में घटा, वो किसी भी तरह से संवैधानिक तो नहीं कहा जा सकता. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, देश के गृहमंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से पूछे ये 10 सवाल जो शायद आज सभी के मन में भरे हुए हैं… यह भी पढ़ें: उद्दव ठाकरे की सेना पर फडणवीस की सर्जिकल स्ट्राइक, एक रात में पलटा सत्ता का पासा आइए जानते हैं जनता के ये 10 सवाल 1. महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार बनाने का दावा कब और … Read more

‘मुझे मत देखो यूं उजाले में लाकर, सियासत हूं मैं, कपड़े नहीं पहनती’

Randeep Singh Surjewala

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र की राजनीति में बीते 24 घंटे किसी जलजले से कम नहीं रहे. सत्ता की बागड़ोर संभालने का सपना देख रहे शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे की नींद खुली भी नहीं होगी, उससे पहले देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बन भी गए. अजित पवार ने एनसीपी का विभिषण बनते हुए अपने चाचा शरद पवार को दगा देकर डिप्टी सीएम की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया. इस घटना ने सीधे तौर पर ये साबित किया कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’. आज की ये घटना सोशल मीडिया पर ऐसी ट्रेंडिंग रही कि टॉप 10 हैशटैग केवल महाराष्ट्र से जुड़े रहे. यह भी पढ़ें: उद्दव ठाकरे की सेना पर फडणवीस की सर्जिकल स्ट्राइक, एक … Read more

उद्दव ठाकरे की सेना पर फडणवीस की सर्जिकल स्ट्राइक, एक रात में पलटा सत्ता का पासा

Devendra Fadanvis Motabhai

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. लगता है उद्दव ठाकरे की गठबंधन की सेना के सैनिकों पर देवेंद्र फडणवीस ने आधी रात को सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. इस सर्जिकल स्ट्राइल की फडणवीस की ओर से अगुवाई की एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार ने जिन्होंने अपनी ही पार्टी में तोड़ फोड करते हुए 54 विधायकों की समर्थन की चिट्ठी फडणवीस तक पहुंचा दी और इसी आधार पर शनिवार सुबह 5:47 बजे महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा हुई और सुबह 8:05 बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की उपस्थिति में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ग्रहण की. (Motabhai) हालांकि एनसीपी में वर्तमान हालात … Read more

राजनीति में फिर से साबित हुआ ‘मोदी है तो मुमकिन है’, रातों-रात बनी महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार

Devendra4Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र की राजनीति (Devendra4Maharashtra) में शुक्रवार की रात एक ऐसी रात रही जिसके लिए ‘भूचाल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए, वो भी कम होगा. शुक्रवार शाम तक शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस एक स्वर में कह रही थी कि प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनेगी और उद्दव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. रात में सियासी चक्र उलटी दिशा में घूमा और सुबह 8:05 बजे देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने दूसरी बार राजभवन के एक बंद कमरे में मुख्यमंत्री और अजित पवार (Ajit Pawar) ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली. गहरी नींद से जागी महाराष्ट्र की जनता, तीनों पार्टियों के नेताओं सहित एक-आध मीडिया को छोड़कर ज्यादातर … Read more

महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के गठन का रास्ता साफ, उद्वव ठाकरे के नाम पर बनी सहमति, 20 साल बाद बनेगा शिवसेना का मुख्यमंत्री

(Coalition Government in Maharashtra)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. फाइनली महाराष्ट्र में पिछले 28 दिनों से जारी सियासी घमासान का पटाक्षेप कमोबेश अब हो चुका है. महाराष्ट्र में अगली (Coalition Government in Maharashtra) सरकार शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनने जा रही है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी की शुक्रवार को चली लंबी बैठक के बाद मुख्यमंत्री का ऐलान किया. इसके बाद शिवसेना के खेवनहार और प्रवक्ता संजय राउत ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. ऐसे में दोनों नेताओं के बयान के बाद अब ये कन्फर्म माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जो सस्पेंस बना हुआ था वो … Read more

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में ‘शिराकां’ सरकार, मुख्यमंत्री के लिए उद्वव ठाकरे के नाम पर बनी सहमति

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सरकार गठन पर छाये बादल धीरे धीरे झटते नजर आ रहे हैं. शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के बीच बैठकों का दौर लगातार जारी है. उम्मीद जताई जा रही है ‘शिराकां सरकार’ (Shirakan Government) अगले हफ्ते तक फ्लोर पर आ सकती है. उद्दव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने पर सहमति बनते दिख रही है.

महाराष्ट्र में ‘शिराकां’ सरकार का खाका तैयार, 4-5 दिनों में बन सकती है सरकार, सीएम गहलोत और कमलनाथ की भी रही अहम भूमिका

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहा सियासी घमासान का पटाक्षेप अब होता नजर आ रहा है. बुधवार को एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं की दिल्ली स्थित शरद पवार के घर हुई बैठक के बाद दोनों दलों के नेताओं ने सयुंक्त रूप से जल्द सरकार बनाने की घोषणा की. सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में ‘शिराकां‘ (शिवसेना-राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी-कांग्रेस) (Shirakan Government) सरकार खाका तैयार हो गया है, जिसके तहत शिवसेना और एनसीपी को ढाई-ढाई साल की कमान मिलेगी. यानी ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री रहेगा तो बाकी ढाई साल एनसीपी का, वहीं विधानसभा अध्यक्ष पद भी शिवसेना या एनसीपी को ही मिलेगा, जबकि कांग्रेस को उप-मुख्यमंत्री पद के साथ कुछ महत्वपूर्ण विभाग देने पर तीनों दलों में सहमित बन चुकी है.

सूत्रों के अनुसार बुधवार को शरद पवार के घर कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं की हुई बैठक के दौरान शिवसेना से भी फोन पर बात की गई. इसके बाद एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के बीच मिलकर महाराष्ट्र में सरकार (Shirakan Government) बनाने पर सहमति बनी. अब गुरुवार को एक बार फिर दोपहर 2 बजे कांग्रेस और एनसीपी की साझा बैठक होगी. इस बैठक के बाद दोनों दलों के नेता मुंबई के लिए रवाना होंगे. बताया जा रहा है कि शुक्रवार को मुंबई में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एक और बैठक होगी, जिसके बाद शुक्रवार को ही गठबंधन सरकार का ऐलान किया जा सकता है.

बड़ी खबर: दिल्ली शिफ्ट होने के बाद ओर भी दिलचस्प हुई महाराष्ट्र की राजनीति, उधर ‘सामना’ का घातक प्रहार जारी

आखिर कैसे मानीं सोनिया गांधी?

कांग्रेस और शिवसेना के बीच विचाराधात्मक मुद्दों को लेकर बड़ी गहरी खाई है जो कि आज से नहीं बल्कि शिवसेना के गठन के समय से है और शायद कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति नहीं होती तो शायद बाल साहेब को कट्टर हिन्दुत्व की भावना वाली शिवसेना के गठन की जरूरत भी नहीं पड़ती. लेकिन जहां ‘मुख्यमंत्री की कुर्सी’ मूंछ का सवाल बन गई तो अपनी बात की लाज रखने के लिए शिवसेना कांग्रेस के साथ गठबंधन को भी राजी हो गई. लेकिन कांग्रेस अपने मुस्लिम वोट बैंक के खिसकने के डर से अटकी हुई थी. (Shirakan Government) शिवसेना को समर्थन देने को लेकर असमंजस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार की तरफ से इस मामले पर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती थीं.

सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के मुसलमानों की भी यही इच्छा है कि चाहे कांग्रेस शिवसेना को समर्थन दे दे लेकिन किसी भी हाल में बीजेपी को दुबारा सत्ता पर आसीन न होने दे. इसके अलावा जब वैचारिक विरोधी शिवसेना को समर्थन देने की बात आई तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के कई सीनियर नेताओं से लंबी मंतेना की. इस चर्चा में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री कमलनाथ के साथ की गई बातचीत भी काफी कारगर रही. सूत्रों की मानें तो इन दोनों नेताओं ने ही शिवसेना को समर्थन देने की वकालत की. दोनों नेताओं ने आलाकमान के सामने दलील दी कि महाराष्ट्र में अभी पार्टी चौथे नम्बर पर आ चुकी है और आने वाले चुनावों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है, ऐसी स्थिति में अगर हम सरकार (Shirakan Government) में रहते हैं तो इस स्थिति से बचा जा सकता है, इसलिए हमारा शिवसेना को समर्थन करना बहुत जरूरी है.

बड़ी खबर: महाराष्ट्र में शिवसेना के खेवनहार बने संजय राउत, उद्दव ठाकरे ने दिया फ्री हैंड

उधर महाराष्ट्र में शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में सुबे में सरकार बनाने का दावा करते हुए लिखा है कि महाराष्ट्र में किसी भी पल सरकार (Shirakan Government) बन सकती है और 21 दिनों से चल रही अस्थिरता जल्द समाप्त होगी. सामना में आगे लिखा गया कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एकसाथ मिलकर मजबूत और स्थिर सरकार देंगे. बता दें कि शिवसेना महाराष्ट्र में लगातार सरकार बनाने का दावा कर रही है. वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि आने वाले 2 से 5 दिनों में सभी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. दिल्ली में न्यूज एजेंसी ANI से संजय राउत ने कहा, ‘जब 3 दल सरकार बनाते हैं तो प्रक्रिया लंबी होती है. यह प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है. आने वाले 2-5 दिनों में जब प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो महाराष्ट्र में सरकार बनाई जाएगी. संजय राउत ने कहा कि शिवसेना का मुख्यमंत्री बनना चाहिए यह महाराष्ट्र की जनता की इच्छा है. यह राज्य की जनभावना है कि उद्धव ठाकरे जी ही सरकार का नेतृत्व करें.

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Sanjay Raut-Shiv Sena

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. अब तक महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता की राजनीति जो मुंबई में चल रही थी वो अब दिल्ली शिफ्ट हो गई है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर शिवेसना के खेवनहार संजय राउत (Sanjay Raut) तक सब दिल्ली आ गए हैं. शिवसेना को एनडीए से बाहर किए जाने से नाराज संजय राउत (Sanjay Raut) ने बीजेपी पर जबरदस्त हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में बड़े-बड़े बादशाह आए ओर चले गए लेकिन लोकतंत्र कायम है. कोई भी अपने आप को भगवान समझने की कोशिश ना करे, जनता सबसे बड़ा भगवान है.

दिल्ली शिफ्ट होने के बाद ओर भी दिलचस्प हुई महाराष्ट्र की राजनीति, उधर ‘सामना’ का घातक प्रहार जारी

Politics of Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र की राजनीति (Politics of Maharashtra) दिल्ली शिफ्ट होने के बाद ओर भी दिलचस्प होती जा रही है. सोमवार को राज्यसभा के 250वें सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एनसीपी नेताओं की तारीफ करके इस राजनीति को ओर गरमा दिया. उधर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का सपना देख रही शिवसेना को शरद पवार के सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद आए बयान से बड़ा झटका लगा है. शरद पवार ने कहा कि हमारे बीच सरकार बनाने को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई. वहीं शरद पवार और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद पवार से मिलने पहुंचे शिवसेना नेता संजय राउत ने मुलाकात के बाद कहा कि, शरद पवार को समझने में कई जन्म लग जाएंगे. राउत ने कहा कि पवार साहेब का कद बड़ा है, प्रधानमंत्री भी उनकी तारीफ करते हैं.

दूसरी तरफ सोमवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि मैंने बीजेपी और शिवसेना में समझौते एक नया फार्मूला सुझाया है, जिसके तहत 3 साल तक मुख्यमंत्री पद बीजेपी के लिए और बाकी के 2 साल शिवसेना के लिए हो सकता है. अठावले के मुताबिक इस बारे में उनकी संजय राउत से बात भी हो चुकी है और इसके जवाब में संजय राउत ने कहा कि अगर बीजेपी सहमत हो तो इस पर विचार किया जा सकता है. लेकिन जिस तरह की आग उगलने वाली राजनीति इन दिनों देखी जा रही है उससे अब बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (Politics of Maharashtra) की संभावना तो दूर-दूर तक नजर नहीं आती है.

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हमारी यह बात इससे भी साबित होती है कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से बनी दैनिक दिनचर्या के तहत आज फिर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी नेताओं पर अपना हमला जारी रखा. शिवसेना ने बीजेपी नेता प्रहलाद जोशी को टेढ़े मुंहवाला बताते हुए कहा कि कश्मीर में मुफ़्ती की पार्टी से निकाह करने से पहले बीजेपी ने एनडीए से पूछा था क्या? फिर हमें एनडीए से निकालने वाले तुम कौन हो? शिवसेना ने कहा कि बीजेपी नेताओं (Politics of Maharashtra) की बयानबाजी से साफ हो गया है कि इनके विचारों की खुजली बाहर आ गई है.

शिवसेना ने एनडीए गठबंधन से खुद को अलग किए जाने का जबरदस्त विरोध करते हुए अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि, “राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में से शिवसेना के नहीं होने की घोषणा दिल्ली के बीजेपी नेताओं ने किस आधार पर और किसकी अनुमति से की? दिल्ली के मोदी मंत्रिमंडल में से किसी एक प्रह्लाद जोशी ने यह घोषणा की है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से शिवसेना के संबंध जुड़ने के कारण उन्हें ‘एनडीए’ से बाहर निकाल दिया गया है और उनके सांसदों को संसद में विरोधी पक्ष में बैठाया गया है.” शिवसेना ने कहा, “जिस टेढ़े मुंहवाले ने ये घोषणा की है उसे शिवसेना का मर्म और ‘एनडीए’ का कर्म-धर्म का नहीं पता.”

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‘सामना’ में आगे लिखा कि, “कश्मीर में राष्ट्रद्रोही और पाकिस्तानियों के गीत गानेवाली महबूबा मुफ्ती के साथ सत्ता के लिए निकाह करने वाली बीजेपी ने ‘एनडीए’ की अनुमति ली थी क्या? सारे लोगों के विरोध में जाने के दौरान ‘मोदी’ का बचाव करने वाले शिवसेना प्रमुख के संगठन को ‘एनडीए’ से बाहर निकालने का मुहूर्त मिला वो भी शिवसेना प्रमुख बाला साहेब की पुण्यतिथि का? खुद को हरिश्चंद्र का अवतार मानने वालों ने हरिश्चंद्र जैसा बर्ताव नहीं किया. अब इनकी (Politics of Maharashtra) राजनीति की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. महाराष्ट्र के कोने-कोने में अब सिर्फ एक ही गर्जना होगी, ‘शिवसेना जिंदाबाद!’ हिम्मत है तो आओ, आओ सामने। हम तैयार हैं.”

शिवसेना ने आगे लिखा, “एनडीए से शिवसेना को बाहर निकालने की बात करनेवालों को एक बार इतिहास देख लेना चाहिए. बालासाहेब ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीज और पंजाब के बादल जैसे दिग्गजों ने जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नींव रखी उस समय आज के ‘दिल्लीश्वर’ गुदड़ी में भी नहीं रहे होंगे. कइयों का तो जन्म भी नहीं हुआ होगा. आज ‘एनडीए’ का प्रमुख या निमंत्रक कौन है इसका उत्तर मिलेगा क्या? शिवसेना को बाहर निकालने का निर्णय किस बैठक में और किस आधार पर लिया गया? कोई बताएगा.”

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शिवसेना ने आगे कहा, “कोई एक टेढ़े मुंहवाला (प्रह्लाद जोशी) उठता है और शिवसेना को ‘एनडीए’ से बाहर निकालने की घोषणा करता है. ठीक ही हुआ, इस कृत्य से तुम्हारे विचारों की खुजली आज बाहर आ गई. पिछले कुछ दिनों से झूठ-मूठ की खुजली शुरू थी. उसके पीछे की असली बीमारी अब बाहर आई. (Politics of Maharashtra) इन खुजलीबाजों को इस कृत्य के लिए दिन भी मिला तो कौनसा शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के सातवें स्मृतिदिन का मुहूर्त मिला.”