महाराष्ट्र में संजय राउत का आया बड़ा बयान तो शिवसेना और कांग्रेस के बीच तनातनी पर लगा विराम

महाराष्ट्र में संजय राउत का आया बड़ा बयान

Politalks.News/Maharashtra. महाराष्ट्र की राजनीति हर एक दिन हिचकोले के साथ आगे बढ़ रही है. प्रदेश में हर दिन के राजनीतिक हालात ये सवाल खड़ा करते हैं कि महाविकास अघाड़ी सरकार आखिर कितने दिन चलेगी. हाल ही में आए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि सूबे की महाविकास अघाड़ी सरकार में सबकुछ ठीक नहीं हैं. पटोले ने कहा था कि कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी, तो इसके जवाब में सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग आज अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, उन्हें जनता चप्पलों से मारेगी. जिसके बाद ये साफ़ हो गया था … Read more

ताउते प्रभावित गुजरात को आर्थिक सहायता देने पर शिवसेना, एनसीपी ने कहा- महाराष्ट्र को क्यों भूले मोदी?

महाराष्ट्र को क्यों भूले मोदी?

Politalks.News/Maharashtra-Gujarat. देश की सियासत में पक्ष और विपक्ष के नेता एक दूसरे पर तंज कसने के मौकों की तलाश में ही रहते हैं. सभी राजनीतिक दल ऐसे-ऐसे मुद्दों पर चाहे फिर वो राष्ट्रहित, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक महामारी कुछ भी क्यों न हो एक दूसरे पर निशाना साधने से नहीं चूकते हैं. बात करें कोरोना महामारी की तो, पिछले वर्ष कोरोना की पहली लहर से अभी दूसरी लहर तक देश में कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘घमासान‘ मचा हुआ है. दोनों पार्टियों के नेता एक दूसरे पर इस महामारी को लेकर आए दिन ‘तंज‘ कस रहे हैं. लेकिन आज बात करेंगे प्राकृतिक आपदा यानी ‘तूफानों‘ की. पिछले वर्ष 2020 में … Read more

बंगाल में BJP को रोकने के लिए TMC-RJD-NCP के बीच हुआ गठबंधन, सपा भी हो सकती है शामिल

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Politalks.News/BengalAssemblyElection. पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अलग-थलक पड़ी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को थोड़ा संबल मिलता नजर आ रहा है. बंगला चुनाव में बिहार की सबसे प्रमुख पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ ममता बनर्जी की टीएमसी के गठबंधन पर सहमति बन गई है. इसके लिए आरजेडी और एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गठबंधन बनाने के लिए अपनी सहमति व्यक्त कर दी है. बंगाल चुनाव में बीजेपी (BJP) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए बने टीएमसी-आरजेडी-एनसीपी के गठबंधन को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने सोमवार को कोलकाता में पश्चिम … Read more

राहुल पर पवार के बयान बाद गर्माई सियासत, कांग्रेस के गठबंधन तोड़ने की धमकी के बाद NCP की सफाई

Sharad Pawar With Rahul Gandhi 1539384632

Politalks.News/Maharashtra. कांग्रेस की नाराजगी के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी में ‘निरंतरता की कमी‘ वाली टिप्पणी पर पार्टी ने सफाई दी है. एनसीपी का कहना है कि ये टिप्पणी केवल केवल ‘पिता जैसी सलाह‘ थी. दरअसल बीती 3 दिसम्बर को एक साक्षात्कार के दौरान शरद पवार ने राहुल गांधी को पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनमें कुछ हद तक ‘निरंतरता की कमी‘ लगती है. इसके बाद एनसीपी प्रमुख की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र की मंत्री और कांग्रेस नेता यशोमति ठाकुर ने गठबंधन के सहयोगियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि वे महाराष्ट्र में स्थिर … Read more

कराची स्वीट्स से शुरू हुई सियासत पहुंची PoK और बांग्लादेश तक, राउत बोले- पहले कश्मीर तो ले लो

Karachi Sweets Fight Between Bjp And Shiv Sena

Politalks.News/Maharashtra. मुंबई की बांद्रा वेस्ट स्थित कराची स्वीट्स के नाम पर शुरु हुई वार तकरार अब मुंबई से निकल पीओके तक पहुंच गई है. कराची को लेकर पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के एक बयान पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि अगर कराची हिन्दुस्तान में आता है तो शिवसेना उसका स्वागत करती है लेकिन सबसे पहले पाकिस्तान के कब्जे में जो कश्मीर है, उसे तो ले आइए. रविवार को अपने एक बयान में बीजेपी नेता फडणवीस ने कराची को हिन्दुस्तान में मिलाने की बात कही थी. मुद्दा मुंबई की कराची स्वीट्स के नाम बदलने को लेकर शुरु हुआ था. देवेंद्र फडणवीस के बयान पर पलटवार करते हुए शिवसेना सांसद … Read more

विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने की खबरें अफवाह, बीजेपी के विधायक हमारे संपर्क में: एनसीपी

देवेंद्र फडणवीस और नवाब मलिक (एनसीपी)

PoliTalks.news/Maharashtra. मध्यप्रदेश में सरकार के तख्ता पलट के बाद राजस्थान में भी कथित तौर पर बीजेपी द्वारा हॉर्स ट्रेडिंग और सरकार पलटने की कोशिश की जा रही है. राजस्थान के बाद अगला निशाना महाराष्ट्र पर होगा जहां शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की तीन पहियों वाली महाविकास अघाड़ी सरकार चल रही है. उद्धव ठाकरे इस गठबंधन सरकार के मुखिया यानि मुख्यमंत्री हैं. महाराष्ट्र में सियासी गलियारों में लगातार खबर आ रही है कि एनसीपी के 12 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. यह खबर इसलिए भी लोगों के गले उतर रही है क्योंकि बीजेपी ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने को पहले ही हामी भर दी है और कांग्रेस के बयानों को हवा … Read more

महाविकास अघाडी सरकार के मंत्रियों में हुआ विभागों का बंटवारा, एकनाथ शिंदे बने प्रदेश के गृहमंत्री

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्दव ठाकरे ने महाविकास अघाडी सरकार (Mahavikas Aghadi Government) बनने के 15 दिन बाद मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया. फिलहाल उन्होंने अपने पास कोई विभाग नहीं रखा. उम्मीद है कि 23 दिसम्बर को मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा. शिवसेना के मंत्री एकनाथ शिंदे को गृह मंत्रालय ​जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया गया है. पार्टी के ही दूसरे मंत्री सुभाष देसाई को उद्योग, उच्च शिक्षा, रोजगार एवं कृषि विभाग दिया. कांग्रेस के बालासाहेब थोरात को राजस्व एवं उर्जा मंत्री और डॉ.नितिन राउत को सार्वजनिक निर्माण मंत्री बनाया. राकंपा के छगन भुजबल को ग्रामीण विकास एवं जल संपदा विभाग मिला जबकि जयंत पाटिल … Read more

राकंपा और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना शिवसेना को पड़ा भारी, बीजेपी में शामिल हुए 400 शिवसैनिक

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी (MVA) की सरकार तो जैसे तैसे बन गई लेकिन लगता है शिवसैनिकों (Maharashtra ShivSena) को एनसीपी और खास तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण की विचारधारा वाली पार्टी कांग्रेस से गठबंधन करना रास नहीं आ रहा. यही वजह रही कि मुंबई के धारावी में करीब 400 शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. ये सभी कार्यकर्ता शिवसेना के कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिवसेना ने भ्रष्ट और विरोधी विचारधारा वाले दलों से हाथ मिलाया है. धारावी के एक कार्यक्रम में इन सभी ने भाजपा की … Read more

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने संजय राउत के तीखे तेवरों ने बनाई शिवसेना की सरकार

(Sanjay Raut)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में ठाकरे राज कायम हो गया और उद्वव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए. महाविकास अघाड़ी गठबंधन वाली इस सरकार के शिल्पकार शरद पवार रहे जिन्होंने अपने कुटिल चाणक्य दिमाग से बीजेपी के धुरंधर अमित शाह तक को मात दे दी, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में एक महीने चले इस सियासी मैच में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने बाला साहब की सेना के सच्चे सिपाही संजय राउत (Sanjay Raut) की उनके सपने को पूरा करने की निष्ठा और तटस्थता को किसी तरह से कम नहीं आकां जा सकता. विधानसभा चुनाव के बाद से ही संजय राउत एक ही बात पर अडिग रहे कि चाहे कुछ भी हो मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा. संजय राउत ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र की जनता की भावना है और लाखों शिवसैनिकों की भी भावना है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही हो, ताकत के बल पर कोई महाराष्ट्र की कुंडली नहीं बदल सकता, ये बालासाहेब की सेना है और शतरंज खेलने में माहिर संजय राउत ने महाराष्ट्र की सियासत में इस तरह मोहरे फिट किए कि वे हारी हुई बाजी जीतने वाले ‘बाजीगर’ बन गए.

संजय राउत शिवसेना की ओर से राज्यसभा सांसद के साथ पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव संपादक भी हैं. एक लेखक, एक रिपोर्टर के तौर पर जाने जाने वाले संजय अपने तीखे बोल की वजह से खासतौर पर पहचाने जाते हैं. महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आने के बाद बीजेपी के साथ सत्ता के बंटवारे के तहत सरकार में बराबर की भागीदारी की मांग सबसे पहले संजय राउत (Sanjay Raut) ने ही उठाई. गौर करने वाली बात ये रही कि पार्टी प्रमुख उद्दव ठाकरे तक ने इस बारे में कोई टीका टिप्पणी नहीं की और एक तरह से राउत को ही फ्री हैंड दे दिया.

वे संजय राउत ही थे जो चुनावी नतीजों से पहले और बाद में भी लगातार शरद पवार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं से संपर्क साध रहे थे. उन्हीं के कहने पर उद्दव ठाकरे ने एनसीपी की शर्त के अनुसार, मोदी सरकार में एक मात्र शिवसेना मंत्री अरविंद सावंत को मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाया.

वे संजय राउत ही थे जिन्होंने एक तरफ तीनों पार्टियों का आपस में सम्पर्क बनाए रखा और दूसरी तरफ सामना के माध्यम से देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते रहे. उन्होंने किसानों सहित ऐसे मुद्दे प्रमुखता से उठाये जो फडणवीस और बीजेपी सरकार की कमजोर कड़ी थे. इसके अलावा, उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल को भी देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधने का प्रमुख अस्त्र बनाया और वहां से तीखे प्रहार जारी रखे. संजय राउत (Sanjay Raut) शिवसेना के ऐसे नेता रहे जो न केवल इन चुनावों में प्रमुखता से हाईलाइट हुए, बल्कि अपनी बात पर अडिग रहते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसकी आस बीजेपी तो क्या, खुद शिवसेना और उद्दव ठाकरे तक को नहीं थी.

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संजय राउत ने उद्दव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए राजी किया जो इस रेस में कभी थे ही नहीं. भाजपा से बातचीत में भी हमेशा उद्दव के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे को ही सीएम पद का दावेदार बताया गया. लेकिन गठबंधन की दोनों पार्टियों के वीटो के बाद किसी अनुभवी को ही मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी, यहां एक बार तो खुद संजय राउत (Sanjay Raut) का नाम भी शरद पवार ने मुख्यमंत्री के लिए उठाया और संकेत एकनाथ शिंदे के भी आने लगे. लेकिन राउत के प्रयासों के बाद आखिर में महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेता बनकर उद्दव बाला साहेब ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. गौर करने वाली बात ये भी रही कि न तो उद्दव ने चुनाव लड़ा और न ही सक्रिय तौर पर राजनीति की. हां, पर्दे के पीछे रहकर सत्ता को नियंत्रित जरूर किया.

महाविकास अघाड़ी सरकार के शिल्पकार रहे शरद पवार ने सबसे बड़ा जो काम किया वो यह कि कट्टर हिंदूवादी शिवसेना और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस यानि दो विपरीत विचारधारा वाली कट्टर विरोधी पार्टियों को एक लाइन में लाकर खड़ा कर दिया. इस खासे मुश्किल काम में उनकी सहायता की संजय राउत ने जिनके बिना शायद ये सम्भव नहीं हो पाता. शरद पवार भी संजय राउत (Sanjay Raut) की भूमिका से अनभिज्ञ नहीं हैं. यही वजह रही कि तीनों पार्टियों की जब एक साथ परेड कराई गई तब उद्दव ठाकरे और शरद पवार ने संयुक्त तौर पर उन्हें महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति का ‘मैन ऑफ द मैच‘ कहकर पुकारा.

महाराष्ट्र की राजनीति के पल पल बदलते घटनाक्रम में एक दौर वो भी आया जब वे बीमारी के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती हुए. इस दौरान राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया था लेकिन शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में आपसी संपर्क कमजोर पड़ने से सियासी गतिविधियां अचानक से बदल गई और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. लेकिन संजय राउत ने जल्दी ही अस्पताल की चार दिवारी से निकलते हुए फिर से मोर्चा संभाला और तीनों पार्टियों के बीच टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ते हुए बतौर एक सूत्रधार काम किया.

संजय राउत की मेहनत रंग लाई. इसके साथ ही कथित तौर पर शरद पवार की बेहद उच्च कोटि की सियासी रणनीति में पूरा महाराष्ट्र ऐसा उलझा कि बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह तक उलझ कर रह गये. शरद पवार ने ऐसी तिहरी चाल खेली कि एक ही झटके में राष्ट्रपति शासन भी हट गया, प्रदेश की सत्ता की कुर्सी पर गठबंधन का मुख्यमंत्री भी विराजमान हो गया और बीजेपी की छवि भी धूमिल कर दी.

खैर…जो भी हुआ, अंत भला तो सब भला. जो भी हुआ हो और जिसने भी किया हो, संजय राउत (Sanjay Raut) की ईमानदारी और पार्टी के प्रति निष्ठाभाव कम न हुआ. हालांकि इस पूरे सियासी नाटक से पर्दा गिरने से उठने तक संजय राउत को किसी बड़े पद के तौर पर कोई ईनाम भले ही न मिला हो लेकिन शिवसेना को एक वरिष्ठ नेता, प्रखर वाचक और एक रणनीतिकार जरूर मिल गया है जिसकी जरूरत उन्हें फिर से भविष्य में पड़ने वाली है.

‘पवार जी सिर्फ मेरे पिता नहीं हैं वह मेरे बॉस भी हैं and Boss is always right’- सुप्रिया सुले

Supriya Sule with Sharad Pawar

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. सोमवार को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता शरद पवार ने एबीपी के मराठी न्यूज़ चैनल एबीपी माझा के एक साक्षात्कार में दावा किया था कि पीएम मोदी ने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया था. मंगलवार को पवार के इस बयान पर नेशनल न्यूज़ चैनल एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत करते हुए शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा कि, “यह पीएम मोदी की ‘उदारता’ थी लेकिन मेरे पिता ने ‘विनम्रतापूर्वक’ मना कर दिया था.” सुप्रिया (Supriya Sule) ने कहा, “मैं इस मीटिंग में नहीं थी, यह दो वरिष्ठों के बीच थी. यह पीएम मोदी की उदारता था कि उन्होंने ऐसा प्रस्ताव दिया. महाराष्ट्र … Read more