Narendra Modi
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नामांकन दाखिल करने के बाद बोलीं सोनिया- मोदी जी 2004 मत भूलिए
यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने आज अपनी परम्परागत सीट रायबरेली से पांचवीं बार नामांकन दाखिल कर दिया. पर्चा दाखिल करने से पहले सोनिया गांधी ने हवन कर पंडितों का आशीर्वाद लिया. उसके बाद रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा भी मौजूद रहे. नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘2004 मत भूलिए. वाजपेयी भी अजेय थे लेकिन हम जीते.’ आपको बता दें कि देश में वाजपेयी की पॉपुलर्टी को देखते हुए सभी सियासी पंडितों ने एनडीए सरकार वापसी का दावा किया था लेकिन 2004 में सभी सियासी पंडितों के … Read more
बढ़ सकती हैं ‘चौकीदार’ की मुश्किलें, रैली में आचार संहिता का उल्लंघन!
चुनावी चौसर में उम्मीदवारों के साथ-साथ पार्टी के शीर्ष नेता दम-खम लगाने में कहीं पीछे नहीं रहना चाहते और धुंआधार रैलियां कर वोटरों को लुभाने की कोशिश की जा रही है. इसी बीच पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली में अपने संबोधन के बयान को एक निर्वाचन अधिकारी द्वारा आचार संहिता का उल्लघंन माना है. बता दें कि, रैली में पीएम मोदी द्वारा, युवा मतदाता जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं, उनसे कहा गया कि वे अपना वोट पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक के वीर जवानों को समर्पित करें. इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा. दरअसल, हाल ही में … Read more
मध्य प्रदेश: अपनी विरासत दूसरी पीढ़ी को सौंपने जा रहे हैं कमलनाथ
मध्य प्रदेश की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर है जब एक पीढ़ी अपनी विरासत दूसरी पीढ़ी को सौंपने जा रही है. बात कर रहे है मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट की, जहां पिछली नौ बार के सांसद और लोकसभा में वरिष्ठ नेता कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ को अपनी राजनीतिक विरासत देकर खुद मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदेश की सत्ता चलाएंगे. आज तक कमलनाथ ने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है लेकिन अब पहली बार विधानसभा चुनाव के दंगल में उतर रहे हैं. वहीं नकुलनाथ ने छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से नामांकन दर्ज किया है.
1980 में इंदिरा गांधी के कहने और संजय गांधी के आदेश पर मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य छिंदवाड़ा लोकसभा से चुनाव लड़ने पहुंचे कमलनाथ ने पहले ही चुनाव में अपनी अलग पहचान स्थापित की. छिंदवाड़ा लोकसभा के अंर्तगत आने वाले पातालकोट जिसके बारे में कहा जाता था कि यहां धूप भी बड़ी मुश्किल से पड़ती थी, वहां सांसद रहते कमलनाथ ने विकास की ऐसी गंगा बहाई कि गुजरात मॉडल की तरह पिछले विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा मॉडल की खूब चर्चा हुई. वैसे पहले संजय गांधी की मौत और उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या ने कमलनाथ के राजनीतिक करिअर के उठान पर असर ज़रूर डाला लेकिन वे कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति प्रतिबद्ध बने रहे.
कमलनाथ के अनुसार, उनकी लोकसभा सीट नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय के बेहद ही करीब है. उन्होंने जितने भी लोकसभा चुनाव लड़े, आरएसएस ने उनके खिलाफ जमकर प्रचार किया. संघ स्वयंसेवक यहां चुनाव आते ही डेरा डाल देते थे और घर-घर जाकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार करते थे लेकिन उन्होंने अपने काम से उनके इस दुष्प्रचार का जवाब दिया. अब कमलनाथ के सुपुत्र नकुलनाथ के समक्ष भी यही चुनौतियां आएंगी.
हालांकि कमलनाथ ने सांसद रहते छिंदवाड़ा के विकास के साथ ही यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए कई अभूतपूर्व काम किए. आदिवासी और नामालूम इलाक़े से 1980 में पहली बार जीतने वाले कमलनाथ ने छिंदवाड़ा की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है. उन्होनें यहां स्कूल-कालेज सहित आईटी पार्क तक बनवाए हैं. स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, इस सोच के साथ उन्होंने केन्द्र में मंत्री रहते वेस्टर्न कोल्ड फील्ड्स और हिन्दुस्तान यूनिलिवर जैसी कंपनियों को छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में स्थापित कराया. उन्होंने यहां कई ट्रेनिंग सेंटर भी खुलवाए ताकि स्थानीय लोग आत्मनिर्भर बन सकें.
नौ बार लोकसभा चुनाव जीत लोकतंत्र के सबसे बडे़ मंदिर पहुंच चुके कमलनाथ इस बार छिंदवाड़ा से लोकसभा से नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. लगातार 1980, 84, 89, 91, 98, 99, 2004, 2009 और 2014 में उन्होंने यहां से जीत दर्ज की. 1996 में हवाला कांड में नाम आने के बाद पार्टी ने जब उनको टिकट नहीं दिया तो उन्होंने छिंदवाड़ा से अपनी पत्नी अलका नाथ को चुनाव लड़वाया और कमलनाथ के नाम पर उन्होंने भी जीत दर्ज की. हालांकि वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं. उनके इस्तीफे के बाद हुए हुए उपचुनाव में कमलनाथ को बीजेपी प्रत्याशी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुन्दर लाल पटवा से हार का स्वाद चखना पड़ा था. अगले साल 1998 में फिर हुए चुनावों में इस बार पटवा कमलनाथ के सामने पानी भरते नजर आए.
कमलनाथ की छिंदवाड़ा लोकसभा में लोकप्रियता इस कदर हावी है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में लोकसभा की सात विधानसभाओं में से चार पर बीजेपी विधायकों का कब्जा होने के बावजूद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कमलनाथ ने जीत दर्ज की. यही वजह है कि छिंदवाड़ा को कमलनाथ का गढ़ कहा जाता है इसीलिए उन्होंने छिंदवाड़ा के शिकारपुर में अपना बंगला बनवाया है, जहां उनका हेलीकॉप्टर सीधे उतरता है. अब उसी कमलनाथ के गढ़ में उनके बेटे नकुल नाथ अपने पिता की विरासत को आगें बढ़ाने मैदान में उतर रहे हैं. 9 अप्रैल, 2019 को जहां कमलनाथ विधायक का चुनाव लड़ने के लिए छिंदवाड़ा विधानसभा से नामांकन दाखिल किया तो वहीें छिंदवाड़ा लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर नकुलनाथ ने भी पर्चा दाखिल किया है.
दरअसल, कमलनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधायक होना जरूरी है. वहीं छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को जीत नकुलनाथ अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाना चाहते हैं. छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ के सामने बीजेपी ने नत्थन शाह को चुनाव मैदान में उतारा है जो छिंदवाड़ा लोकसभा की जुन्नारदेव विधानसभा सीट से 2013 में विधायक रहे और आरएसएस के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से देखे जाते रहे हैं. ऐसे में उनका वास्तविक मुकाबला नागपुर यानि राष्ट्रीय स्वमंसेवक संघ से है. इस तरह कमलनाथ की परंपरागत लोकसभा सीट पर अपने पिता की विरासत को संभालना और उसे आगे बढ़ाना नकुलनाथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, वहीं कमलनाथ के सामने बीजेपी से युवा नेता विवेक साहू बंटी होंगे जो उन्हें विधानसभा चुनाव में चुनौती देंगे.
जोधपुर सीट से जीत के लिए यह खास काम कर रहे हैं वैभव गहलोत
कहते हैं कि किसी भी सफल पुरुष के पीछे किसी ने किसी महिला का हाथ जरूर होता है यह कहावत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बिल्कुल सटीक बैठती है। यूं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में प्रदेश की जनता का जितना हाथ है, उतना ही हाथ उनकी बड़ी बहन विमला का है।
बचपन से ही अशोक गहलोत अपनी बहन विमला के सानिध्य में पढ़ाई-लिखाई कर बड़े हुए और उन्हीं के यहां रहकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले अपनी बड़ी बहन विमला का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अब उनके पुत्र वैभव गहलोत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने में लगे हैं। शायद वैभव गहलोत को इस बात का एहसास हुआ है कि उनके पिता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सफलता के पीछे उनकी बड़ी बहन विमला का आशीर्वाद ही है।
यही वजह रही कि जब वैभव गहलोत अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरूआत करने जा रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने अपनी बुआ विमला का आशीर्वाद लेना उचित समझा। नामांकन दाखिल करने से पहले वैभव गहलोत सीधे अपनी बुआ विमला के घर पहुंचे और अपनी बुआ का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया. विमला देवी ने भी हमेशा की तरह अपने लाडले भतीजे को आशीर्वाद और स्नेह के साथ दुलारा. उसके बाद उन्होंने वैभव के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधकर नेकी भी दी। यहां से आशीर्वाद लेने के बाद वैभव गहलोत सीधे ही नामांकन भरने पहुंचे।
आमतौर पर कोई भी प्रत्याशी नामांकन दाखिल करता है तो वह पहले भगवान के चरणों में सिर झुका कर और पूजा अर्चना कर अपना नामांकन दाखिल करता है लेकिन वैभव ने अपनी बुआ का आशीर्वाद लेकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की है। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उस दौरान विमला ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि हर चुनाव में अशोक गहलोत मतदान के बाद सीधे उनके पास आते हैं और यहां से आशीर्वाद लेने के बाद ही जयपुर लौटते हैं।
2013 के चुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व्यस्तता के चलते मतदान करने के बाद अपनी बहन विमला से बिना मिले जयपुर निकल गए और चुनावी परिणाम से तो सभी वाकिफ हैं। इस चुनाव में कांग्रेस 50 सीटें भी नहीं निकाल पाई थी. इस बार जब 2018 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मतदान किया, उसके तुरंत बाद अपनी बहन के घर पहुंचे और उनसे आशीर्वाद लेकर जयपुर की ओर निकले। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर बनने की घोषणा हुई तो विमला देवी ने कहा था कि पिछले चुनाव में व्यवस्थाओं के चलते अशोक गहलोत उनके पास नहीं आ सके थे जिसके चलते शायद वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए लेकिन इस बार वह उनके यहां आकर उनका आशीर्वाद लिया तो आज एक बार फिर वह मुख्यमंत्री बन रहे हैं।
अपने पिता अशोक गहलोत से प्रेरणा लेकर वैभव गहलोत ने भी आज इस परंपरा को जारी रखा है। अब देखना होगा कि हमेशा अपने भाई अशोक गहलोत के कलाई में रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें विपरीत परिस्थितियों में सफलता दिलाने वाली उनके बड़ी बहन विमला अपने भतीजे के लिए कितना लकी साबित होती है।
गुजरात: लोकसभा से एक पहले दिन कांग्रेस को झटका, अल्पेश ठाकोर ने दिया इस्तीफा
देश में गुरूवार से चुनावों का सबसे बड़ा कुंभ लोकसभा चुनाव शुरू होने जा रहे हैं. चुनाव से ऐन वक्त गुजरात कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है. गुजरात में कांग्रेस के युवा चेहरे अल्पेश ठाकोर ने इस्तीफा दे पार्टी को अलविदा कह दिया है. ठाकोर के करीबी धवल झाला ने अल्पेश के कांग्रेस पार्टी छोड़ने की पुष्टि की है. उनके बीजेपी ज्वॉइन करने की पूरी संभावना है. हालांकि उन्होंने पिछले महीने ही बीजेपी में शामिल होने की खबरों का खंडन किया था. बरहाल, अल्पेश लंबे समय से पार्टी से नाराज बताए जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, अल्पेश ठाकोर लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी से … Read more
लोकसभा चुनाव कल से, पहले चरण में 20 राज्यों की 91 सीटों पर होगी वोटिंग
लोकसभा चुनाव कल यानि 11 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं. देश में 17वीं लोकसभा के लिए कुल 543 सीटों पर होने वाले चुनाव कुल 7 चरणों में संपन्न होंगे. पहले चरण में 20 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की कुल 91 सीटों पर मतदान होगा. राजस्थान में 29 अप्रैल और 6 मई को वोट पड़ेंगे. 29 राज्यों और 7 केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 543 सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव में देश के 89.71 करोड़ वोटर अपने मतदान का इस्तेमाल करेंगे. इनमें 1.6 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे. सत्ता के 7 चरण (चरण – तारीख – राज्य – सीटें) पहला — 11 अप्रैल — 20 — 91 … Read more
दौसा सीट पर संस्पेंस बरकरार, जसकौर मीणा के टिकट की घोषणा अटकी
दौसा लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार को लेकर संस्पेंस बढ़ गया है. बुधवार को मीडिया में यह खबर सामने आई कि पार्टी ने जसकौर मीणा को टिकट दे दिया है, लेकिन इसकी अधिकृत घोषणा नहीं हुई. हालांकि प्रदेश बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जसकौर मीणा को उम्मीदवार बनाने की सूचना साझा की गई, जिसे बाद में हटा लिया गया. इस बीच जसकौर ने दावा किया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव की तैयारी करने की सूचना के साथ बधाई भी दे दी है. जसकौर ने यह भी कहा कि किरोड़ी लाल मीणा और ओमप्रकाश हुड़ला मेरे भाई हैं, हम तीनों मिलकर तीन गुना ताकत के साथ आएंगे और विश्वास है … Read more