राहुल गांधी के मोदी पर हमले, कोटा-जालोर-अजमेर में सभा

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लोकसभा चुनाव के दंगल में हर राजनीतिक पार्टी पूरे जोर-शोर से लगी है. एनडीए फिर से सत्ता वापसी की आस लगाए हुए है तो यूपीए देश की बागडोर अपने हाथ में लेने की जद्दोजहद में लगी है. शीर्ष नेता लगातार चुनावी रैलियों के जरिए मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं और चुनावी सभा भी की जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरूवार को राजस्थान में तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया. कोटा में रामनारायण मीणा, जालोर में रतन देवासी, और अजमेर में रिजु झुनझुनवाला के समर्थन में चुनावी रैलियां की. इन सभाओं के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर हमला बोला. चुनावी सभाओं के दौरान कांग्रेस … Read more

पांच साल में अब अयोध्या जाएंगे पीएम मोदी, करेंगे चुनावी रैली

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लोकसभा चुनाव का रोमांच चरम पर है. सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक रखी है. अब तक तीन चरणों का मतदान हुआ है जिनमें देश की लगभग आधी सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं. वहीं इस बार उत्तर प्रदेश का चुनावी रण भी रोचक है. यहां साल 2014 के चुनावों में 80 में से 73 सीटें लाने वाले बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती को पार करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. पीएम मोदी ने आज वाराणसी में बड़ा रोड़ शो किया है इसके अलावा वे 1 मई को अयोध्या जाएंगे. 5 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल … Read more

27 अप्रैल को जोधपुर में रोड शो करेंगी प्रियंका गांधी!

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राजस्थान की ‘हॉट सीट’ में शुमार जोधपुर संसदीय क्षेत्र पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को घेरने और मोदी सरकार में मंत्री रहे गजेंद्र सिंह शेखावत को जिताने के लिए बीजेपी अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सीट पर पहले ही बड़ी जनसभा कर चुके हैं. अब 26 अप्रैल को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का रोड शो होना भी है. ऐसे में अब कांग्रेस इस सीट पर अतिरिक्त ध्यान दे रही है. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर की सीट पर पल-पल नजर बनाए हुए हैं. अब पीएम मोदी की सभा और अमित शाह के रोड … Read more

तीन चरणों के मतदान का रुझान कर रहा बीजेपी की उम्मीदों को तीन तेरह

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क्या भाजपा की हार अब तय हो चुकी है? क्या प्रधानमंत्री के पद से नरेंद्र मोदी की विदाई सुनिश्चित है? देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? क्या राहुल गांधी की किस्मत चमकने वाली है या फिर ‘डार्क हॉर्स’ के तौर पर शरद पवार का नाम सामने आ सकता है? आखिर कांग्रेस इस चुनाव में कितनी सीटें हासिल कर सकती है? 2019 के लोकसभा चुनाव में तीन चरणों के मतदान के बाद ऐसे तमाम सवाल सियासी फ़िज़ाओं में उभरने लगे हैं.

मतदाताओं के बीच चुनावी नतीजों को लेकर कयास तो लग ही रहे हैं, सियासी गलियारों में परिणाम के बाद की परिस्थितियों के लिए जोड़-घटाव अभी से शुरू हो चुके हैं. जब तीन सौ से ज्यादा सीटों पर मतदान संपन्न हो चुके हैं तो नतीजों को लेकर कुछ-कुछ संकेत भी नज़र आने लगे हैं. आने वाले संकेत राजनीति में काफी हद तक बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. यानी कि केंद्र की सत्ता बदल भी सकती है या यूं कहें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी छिन सकती है.

ऐसे नतीजे की आशंका बीजेपी के भीतर भी जताई जा रही है. यह अलग बात कि मतदान के चार चरण शेष होने के कारण सार्वजनिक तौर पर ऐसा कहने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है. हां, सामान्य बातचीत में एनडीए के कई नेता यह ज़रूर स्वीकार कर रहे हैं कि इस बार बीजेपी गठबंधन की सीटें 200 के आसपास ठहर सकती है. ऐसी आशंकाएं निराधार भी नहीं हैं.

तीन दौर के मतदान से एक चीज़ तो स्पष्ट है कि इस बार मतदाताओं के बीच मोदी नाम की कोई लहर नहीं है. अलग-अलग सूबों में बीजेपी ने जो गठबंधन किए हैं, उससे भी अधिक लाभ मिलता नज़र नहीं आ रहा. उलटे सहयोगी दलों की किसी न किसी ग़लती से खेल और खराब ही हुआ है. उदाहरण के लिए बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की आलोचना के लिए जद (यू) नेताओं ने लगातार जैसी भाषा का इस्तेमाल किया, उससे महागठबंधन ने पूरे चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा करने में कामयाबी हासिल कर ली. वर्ना चुनाव के पहले दौर के मतदान तक एनडीए यहां बढ़त बनाए हुए था.

उत्तरप्रदेश में बीजेपी ने स्वयं के लिए चुनौती को समझते हुए ओबीसी वोटर्स पर दांव लगाया था लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में उसके छोटे-बड़े सहयोगियों ने ऐसा कारनामा किया कि ओबीसी वोट सपा-बसपा गठबंधन की ओर जाता दिखायी दे रहा है. महाराष्ट्र में शिवसेना सहयोगी होने के बावजूद अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए मोदी सरकार को लेकर जैसी भाषा इस्तेमाल हो रही है, इससे भी वहां का मतदाता भ्रमित हुआ है. ऊपर से शिवसेना से अलग हुई राज ठाकरे की पार्टी जिस तरह खुलकर एनडीए के ख़िलाफ़ नयी-नयी तकनीकों के सहारे प्रचार कर रही है, उससे कांग्रेस-राकांपा की संभावनाएं बढ़ी हैं.

बंगाल से ख़बरें आ रही हैं कि ममता बनर्जी के तृणमूल पर थोक से वोट पड़ रहे हैं. पूर्वोत्तर में नागरिक संशोधन विधेयक के मसले पर बीजेपी अपने पैर पर पहले ही कुल्हाड़ी चला चुकी है. गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे सूबों में पिछली बार के मुकाबले बीजेपी को कुछ न कुछ नुकसान होने के आसार प्रबल हैं. दक्षिण में लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी बेहतर होते हुए नहीं दिख रही. ओडिशा को लेकर पार्टी नेता जरूर आशान्वित हैं लेकिन लेकिन वहां से जैसी खबरें आ रही हैं, बीजेपी के लिए मुसीबत पैदा होने वाली हैं.

शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में वोटरों का उत्साह भी इस ओर इशारा करता है कि सत्ताधारी सरकार के लिउए चुनौतियां बढ़ी हैं. शहरी वोटरों को बीजेपी का प्रबल समर्थक माना जाता रहा है लेकिन इस वोट बैंक की चुनावों में अरूचि देखते हुए संभव है कि बीजेपी की सीटों का आंकड़ा पिछली बार के मुकाबले काफी नीचे लुढ़क सकता है. लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या सच में कांग्रेस इतनी सीटें ला रही है कि वह अपने नेतृत्व में सरकार बनाने में कामयाब हो सके. मतदान के हालिया रुझान को देखते हुए इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता कि उसका प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले काफी बेहतर होने वाला है. हां, पार्टी बहुमत से काफी दूर रहे, इसमें कोई संदेह नहीं है. कांग्रेसी नेता भी मान कर चल रहे हैं कि पार्टी का आंकड़ा 200 तक पहुंच सकता है. पार्टी भी इसी रणनीति पर काम कर रही है.

कांग्रेस चाह रही है कि किसी भी तरह उसकी सीटों की संख्या बीजेपी की सीटों से अधिक हो ताकि चुनाव पश्चात गठबंधन का रास्ता उसके पक्ष में बनाने में आसानी हो. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कहा है, ‘कांग्रेस बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी लेकिन कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. इसलिए दिल्ली में नयी सरकार के लिए चुनाव के बाद गठबंधन ज़रूरी है.’ ऐसे में यह तो तय हो ही गया है कि सत्तारूढ़ बीजेपी शासन में वापसी करने में सफल नहीं होगी. वजह है कि न तो इन्हें पर्याप्त सीटें मिलेंगी और न ही इनके साथ कोई गठबंधन करने जा रहा है.

अगर एनडीए या यूपीए में से किसी को बहुमत हासिल नहीं होता तो त्रिशंकु स्थिति में संसद का सिरमौर कौन होगा, इसके लिए 23 मई का इंतज़ार करना ज़रूरी है. माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस यूपीए गठबंधन को मिलाकर 200 का आंकड़ा पार करेगी तो राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाने का फैसला ले सकती है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस एनडीए के उन सहयोगियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी जिनकी राजनीति का मिज़ाज धर्मनिरपेक्षतावादी हो. लेकिन यह स्थिति तब आयेगी जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए 200 सीटों का आंकड़ा आराम से पार कर पाए.

कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस ने इसके लिए विचार-मंथन करना शुरू कर दिया है. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में अगर उसके पास बहुत उपयुक्त आंकड़ा नहीं रहा तो वह विपक्षी गठबंधन की सरकार बनाने की ओर मदद का हाथ बढ़ाएगी. ऐसे में कुछ नाम सामने आ सकते हैं. इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, तृणमूल की ममता बनर्जी, बीजद के बीजू पटनायक, आंध्र से चंद्रबाबू नायडु, उत्तर प्रदेश से मायावती शामिल हैं. जाहिर है इसमें शरद सबसे आगे हो सकते हैं.

वजह- उनकी छवि ऐसी है जिस पर शायद ही किसी विपक्षी पार्टी को ऐतराज हो. इसके अलावा प्रधानमंत्री बनने की उनकी ख्वाहिश के बारे में भी सभी जानते हैं. थक-हारकर इस बार उन्होंने एक तरह से राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया और चुनाव से दूरी बनायी, मगर यह कोई बड़ी बाधा नहीं है. अगर उनके नाम पर सहमति बनी तो वें उपचुनाव जीतकर संसद के सदस्य बन सकते हैं. जैसे-जैसे मतदान के दौर बीत रहे हैं, उनको लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गयी है. एक खेमा अभी से उनकी राह बनाने में जुट गया है.

बहरहाल, बीजेपी का एक खेमा मोदी की जगह नितिन गड़करी को आगे करने की कोशिश कर रहा है. इस आशंका में कि बहुमत न आने की स्थिति में पार्टी गड़करी के चेहरे को आगे कर समर्थन जुटा सकती है. संघ ने तो बहुत पहले इस ओर इशारा कर दिया था. शायद मतदान से पहले ही संघ को अंदेशा हो चुका था कि मोदी की विदाई तय है. उनके तमाम आंतरिक सर्वेक्षण इस ओर इशारा कर रहे थे कि नोटबंदी, जीएसटी, बेरोज़गारी जैसे मसलों ने बीजेपी का नुकसान कर दिया है और उसकी भरपायी शायद अब संभव नहीं. मतदान के बीतते चरणों के साथ वह आशंका धरातल पर उतरती साफ नज़र भी आ रही है. फिर भी आखिरी तस्वीर के लिए 23 मई का इंतज़ार करना होगा क्योंकि लोकतंत्र में चुनाव का खेल भी अब टी-20 क्रिकेट की तरह रोमांचक हो चला है.

पीएम मोदी को वाराणसी में टक्कर देंगे कांग्रेस के अजय राय

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कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर दो उम्मीदवारों की सूची जारी की है. वाराणसी से कांग्रेस ने अजय राय और गोरखपुर से मधुसूदन तिवारी को प्रत्याशी बनाया है. वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. यहां से प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव लड़ने की संभावना थी लेकिन पार्टी ने अब यहां से अजय राय को उम्मीदवार बनाया है. अजय राय 2014 में भी वाराणसी से कांग्रेस के प्रत्याशी थे. अजय राय पिंडरा विधानसभा से पांच बार विधायक रह चुके है. यहां सपा- बसपा गठबंधन ने शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया है. Congress Central Election Committee announces the next list of candidates for the ensuing elections to the … Read more

प्रधानमंत्री मोदी का वाराणसी में शक्ति प्रदर्शन, कल करेंगे नामांकन दाखिल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज दोपहर 3 बजे से वाराणसी में रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे. रोड शो से पहले पीएम मोदी बनारस हिंदू विश्वविद्याल में पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे. इसके बाद बीएचयू के बाहर से रोड शो की शुरुआत करेंगे. मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में वाराणसी के साथ गुजरात की वड़ोदरा सीट से चुनाव लड़ा था जहां दोनों सीटों से उन्हें विजयश्री हासिल हुई. बाद में उन्होंने वड़ोदरा सीट छोड़ दी थी. बात करें रोड शो की तो पांच किमी. लंबे इस रोड शो के दौरान एनडीए और बीजेपी के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे. इस मौके पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय … Read more

‘मोदी बायोपिक’ रिलीज पर रोक बरकरार, चुनाव आयोग ने बताया ‘हैजियोग्राफी’

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लोकसभा चुनाव में आदर्श आचार संहिता की कड़ाई से पालना को लेकर निर्वाचन आयोग का कड़ा रूख देखा जा रहा है. नेताओं के विवादित बयानों पर सख्ती दिखाने के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी पर आधारित वेब सीरीज पर भी आयोग की गाज गिर चुकी है. इसके अलावा विवेक ओबरॉय स्टारर पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने बायोपिक देखकर इसे ‘हैजियोग्राफी’ दिया है और मतदान तक रिलीज पर रोक बरकरार रखी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ पर आचार संहिता के उल्लंघन को देखते हुए रिलीज पर रोक बरकरार रखी गई … Read more

गुजरात में पीएम मोदी के रोड़ शो पर चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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अहमदाबाद में तीसरे चरण के मतदान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड़ शो के मामले में चुनाव आयोग ने गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग में इस मामले को लेकर शिकायत की थी. साथ ही चुनाव आयोग से मांग की थी कि पीएम मोदी के चुनाव प्रचार पर 72 घंटे की रोक लगाई जाएं. बता दें कि तीसरे चरण में गुजरात की सभी सीटों के लिए वोट डाले गऐ थे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी वोट डालने अहमदाबाद पहुंचे थे. वोट देने के बाद पीएम मोदी ने यहां खुली जीप में यात्रा की थी और कुछ देर वो पैदल भी चले … Read more

ग्राउंड रिपोर्ट: उदयपुर सीट पर मोदी के शोर में दबे स्थानीय मुद्दे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात से सटी उदयपुर सीट पर लोगों की जुबान से स्थानीय मुद्दे गायब हैं और मोदी का शोर है. ‘पॉलिटॉक्स’ ने यहां के सैकड़ों लोगों से बात की और ज्यादातर ने मोदी को वोट देने की बात कही. इनमें से कई ने मौजूदा सांसद अर्जुनलाल मीणा के कामकाज को अच्छा नहीं बताया, फिर भी मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए उन्हें फिर से वोट देने की बात कही. 
 
जनता के इस रुख से बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन मीणा का चेहरा चमका हुआ है और कांग्रेस प्रत्याशी रघुवीर मीणा मायूस हैं. एक दौर था जब यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. अब तक हुए 16 चुनाव में कांग्रेस ने 10 बार जीत दर्ज की है लेकिन ये आंकड़े रघुवीर मीणा का हौसला नहीं बढ़ा रहे. कांग्रेस के कार्यकर्ता खुले मन से यह स्वीकार कर रहे हैं कि मुकाबले में पार्टी की स्थिति कमजोर है.
 
डॉ. सीपी जोशी और गिरिजा व्यास की नाराजगी के चलते रघुवीर मीणा अकेले ही चुनाव की कमान संभाले हुए हैं. रही-सही कसर विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका देने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी की सक्रियता ने पूरी कर रखी है. बीटीपी ने बिरधी लाल को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस को यह आशंका है कि बिरधी लाल आसपुर और खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में रघुवीर मीणा के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे.
 
मतदान से पहले ही खुद को मुकाबले से बाहर मान रही कांग्रेस संघर्ष की स्थिति तक पहुंचने के जतन कर रही है. पार्टी के उम्मीदवार रघुवीर मीणा को यह डर सता रहा है कि पिछले चुनाव की तरह मुकाबला एक तरफा नहीं हो जाए. आपको बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अर्जुन मीणा ने कांग्रेस के रघुवीर मीणा को 2,36,762 मतों के भारी अंतर से पराजित किया था. अर्जुन को 6,60,373 वोट तो रघुवीर को 4,23,611 वोट मिले थे. 
 
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित यह सीट आदिवासी बाहुल्य है. यहां लगभग 20 लाख मतदाता हैं. इनमें 55 से 60 प्रतिशत एसटी वर्ग, 10 प्रतिशत ओबीसी, 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 6 प्रतिशत राजपूत और 5 प्रतिशत अल्पसंख्यक वर्ग के वोटर हैं. पहले के चुनावों के ट्रेंड पर नजर डालें तो राजपूत, ब्राह्मण, वैश्यों का झुकाव बीजेपी के पक्ष में और जाट, गुर्जर, मीणा और दलितों का झुकाव कांग्रेस के पक्ष में रहा है. वहीं अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों का मत स्थानीय समीकरण के हिसाब से दोनों दलों में बंटता रहा है. 
 
उदयपुर लोकसभा की 8 विधानसभा सीटों में से 5 सीटों पर भी आदिवासी मीणा समुदाय के वोटर सर्वाधिक हैं. बीटीपी के मुकाबले में आने के बाद मीणा आदिवासी समाज के वोट तीन जगह बंटते हुए दिखाई दे रहे हैं. तीनों दल इसमें से ज्यादा संख्या अपने पक्ष में करने के लिए पसीना बहा रहे हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि आदिवासी वोट बराबर बंटने पर भी उसका पलड़ा भारी रहेगा, क्योंकि बाकी जातियों के एकमुश्त वोट उसे मिलेंगे. 
 
बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन मीणा की बात करें तो उनके चुनाव प्रचार की कमान पूरी तरह से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के हाथों में है. वे ही अर्जुन के रणनीतिकार हैं. कटारिया का मेवाड़ में कितना प्रभाव है. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सत्ता से बाहर होने के बावजूद इस क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन कांग्रेस से अच्छा रहा.  
 
मेवाड़ और वागड़ में दोनों दलों के दिग्गज सभाएं कर चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी की उदयपुर में सभा से बीजेपी के पक्ष में माहौल और पुख्ता हुआ है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बेणेश्वर में सभा हो चुकी है. हालांकि इससे बाद भी कांग्रेस उत्साहित नहीं है. सत्ता होने के बावजूद राहुल की सभा में 30 हजार लोग बमुश्किल जुट पाए. 
 
ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि मतदान के दिन लोगों का रुख क्या रहता है. उदयपुर में बीजेपी के अनुकूल दिख रहा माहौल बरकरार रहता है या कांग्रेस मुकाबले में आने में सफल होती है? फिलहाल तो इस सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है.