महाराष्ट्र: BJP ने बदले अपने सुर, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का फिर किया दावा

Devendra Fadnavis

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. बुधवार को हुई विधायक दल की बैठक के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ही होंगे. विधायक दल के नेता बनते ही फडणवीस ने अपने सुर नरम करते हुए कहा कि जनता अफवाहों पर ध्यान न दें, भाजपा शिवसेना के साथ मिलकर ही सरकार बनाएगी. फडणवीस ने कहा कि 2014 और 2019 में हमने फ्रंटफुट पर चुनाव लड़ा और जीता भी. जो भी अफवाहें हैं, उनपर ध्यान नहीं देना चाहिए. शिवसेना (Shiv Sena) की कुछ डिमांड हैं, उन्हें सुलझा … Read more

वीडियो खबर: तेल थोड़ा कम पड़ गया

Maharashtra Shiv Sena BJP

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आते ही शिवसेना आक्रमक हो गयी है. भाजपा ने 101 और शिवसेना ने 60 सीटों पर कब्जा जमाया. इसके बाद ​शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखे तेवर अपनाते हुए स्पष्ट तौर पर सरकार में 50-50 की भागीदारी की मांग की. इसके बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ (Saamana) में एक लेख के जरिए बीजेपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को घेरने की कोशिश की. इस लेख में शीर्षक लिखा ”तेल लगाए पहलवान बन अखाड़े में कूदे थे सीएम पर बूढ़े शरद पवार ने दिया पटक”.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 से जुड़ी कुछ रौचक और दिलचस्प जानकारी

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बीते गुरुवार को महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए, जिसमें महाराष्ट्र में भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली, शिवसेना को 56 सीटों पर, एनसीपी को 54 सीटों पर तो कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली. महाराष्ट्र में चुनाव परिणामों के बाद आये नतीजों का विश्लेषण करने पर कुछ रौचक और दिलचस्प जानकारी सामने आई है. दिल्ली की एक गैर लाभकारी संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने महाराष्ट्र में चुने गए विधायकों के प्रोफाइल के आंकडों का विश्लेषण किया है. जिसके तहत पिछले विधानसभा की तुलना में, कुछ दिलचस्प तथ्यों के खुलासे इस रिसर्च में सामने आये है. पीआरएस के रिर्सच के अनुसार सभी … Read more

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत चौटाला नहीं है, जिसके पिता जेल में हैं, विकल्प हमारे पास भी है

Sharad Pawar-Congress-BJP in Haryana and Maharashtra Election 2019

शिवसेना ने अपने तेवर तीखे करते हुए हरियाणा में दुष्यंत चौटाला का उदाहरण देते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में है. हमारे पास भी विकल्प है.’ गौरतलब है कि हरियाणा में जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश भाजपा को समर्थन देते हुए खट्टर सरकार बनाने में अहम रोल निभाया. शपथ ग्रहण वाले दिन पिछले 6 साल से जेल में बंद दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला को मिली बेल को उनके भाजपा से हाथ मिलाने की शर्त के तौर पर देखा जा रहा है….

महाराष्ट्र में आक्रामक हुई भाजपा-शिवसेना की ‘दवाब पॉलिटिक्स’

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के सरकार गठन में कुर्सी को लेकर खींचतान जारी है. प्रदेश में सरकार बनाने का सबसे बड़ा दावेदार भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता की कुर्सी पर अपने अपने प्रतिनिधियों को बिठाने पर अड़ गया है. वैसे तो प्रदेश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन एकल बहुमत से दूर से गयी. 60 सीटों पर कब्जा कर शिवसेना भी ठाकरे परिवार के चश्मोचिराग आदित्य ठाकरे को आधे समय के लिए मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी हुई है. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात से साफ इनकार कर दिया.

शिवसेना जहां सरकार में मुख्यमंत्री का पद चाहती है. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने साफ किया है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद देवेंद्र फडणवीस के पास ही रहेगा. इस मसले पर फडणवीस ने कहा कि हमारे पास सिर्फ प्लान एक है, प्लान बी और सी नहीं है.शिवसेना की मांगों पर मेरिट के आधार पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में जो भी छप रहा है, पार्टी उससे नाराज है. लेख में भाजपा के खिलाफ बहुत कुछ लिखा जा रहा है. उन्हें कांग्रेस और एनसीपी के बारे में भी सख्ती से लिखना चाहिए. फडणवीस ने कहा कि सीएम पद को लेकर 50-50 फॉर्मूले को लेकर कोई वादा नहीं हुआ. मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा, इसमें कोई शक नहीं.

बड़ी खबर: BJP ने बदले अपने सुर, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का फिर किया दावा

इधर शिवसेना ने अपने तेवर पहले से तीखे करते हुए हरियाणा में दुष्यंत चौटाला का उदाहरण देते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में है. हमारे पास भी विकल्प है.’ गौरतलब है कि हरियाणा में जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश भाजपा को समर्थन देते हुए खट्टर सरकार बनाने में अहम रोल निभाया. शपथ ग्रहण वाले दिन पिछले 6 साल से जेल में बंद दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला को मिली बेल को उनके भाजपा से हाथ मिलाने की शर्त के तौर पर देखा जा रहा है.

इस मसले में चौटाला परिवार का नाम घसीटने पर दुष्यंत चौटाला ने भी नाराजगी व्यक्त की. जेजेपी प्रमुख ने शिवसेना को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मेरे पिता पिछले 6 साल से जेल में थे. तब शिवसेना को उनकी याद नहीं आयी. पार्टी के भाजपा को समर्थन देने को उनकी पेरोल से जोड़ना गलत है. पिता पर बयान अपमानजनक है.

बता दें, सरकार बनाने के लिए भाजपा को शिवसेना या फिर एनसीपी के सहयोग की आवश्यकता है. ऐसे में शिवसेना ने चुनाव परिणाम के मौके को भुनाते हुए आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री पद में हिस्सेदारी की मांग तेज कर दी और किसी भी हालात में पीछे हटने को तैयार नहीं. भाजपा अकेले सरकार बना नहीं सकती और एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक घोटाले में घसीटने के बाद उनके पास जाने में हिचक रही है. ऐसे में शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का मौका ताड़ रही है. यही वजह है कि शिवसेना अपने मुख पत्र में शरद पवार और उनकी लीडरशिप की जमकर तारीफ कर रही है. साथ ही देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा को जमकर आड़े हाथ ले रही है.

वहीं शिवसेना के साथ सरकार बनाने में पेच फंसने पर भी बीजेपी बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है. अब दोनों ही प्रमुख पार्टियां निर्दलीयों को भी अपने अपने पाले में लाने का जी तोड़ प्रयत्न कर रही हैं. ऐसा करके शिवसेना को बीजेपी ये संदेश देने की कोशिश में है कि वह इस चुनाव में किसी तरह से कमजोर नहीं हुई. बीजेपी के अनुसार, पार्टी को 15 निर्दलीयों का भी समर्थन मिला है और छोटे दलों के कुछ विधायक भी संपर्क में हैं. हाल में विनोद अग्रवाल और महेश बालदी सहित दोनों नव निर्वाचित विधायकों ने दो निर्दलीय विधायकों ने देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया है. वहीं सोमवार को अहमदनगर जिले के नेवासा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक शंकर राव गड़ाख ने सोमवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा. अब शिवसेना के पास 61 सीटों पर समर्थन है.

अब सारे तीन-पांच करने के बाद भी गौर करने वाली बात ये है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में सत्ता पाने के लिए किसी भी संगठन को 145 विधायकों का समर्थन हासिल होना जरूरी है. भाजपा के पास 103 विधायक हैं. शिवसेना के पास 60, एनसीपी के पास 56 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. निर्दलीय विधायकों की संख्या केवल 25 है. सभी विधायकों का समर्थन के बावजूद भाजपा बहुमत पाने में सक्षम नहीं है और न ही कांग्रेस-शिवसेना-निर्दलीय मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. ऐसे में सत्ता की चाबी पूरी तरह से शरद पवार के पास आ गयी है. हालांकि पवार पहले ही ये स्पष्ट कर चुके हैं कि वे शिवसेना से गठबंधन की जगह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे लेकिन शिवसेना के बदले सुर और कांग्रेस का समर्थन मिलकर अगर शरद पवार को एलाइंस में शामिल कर लेते हैं तो लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे देवेंद्र फडणवीस को सिर्फ यही कहना पड़ेगा ‘अंगुर खट्टे हैं’.

शिव सेना ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को दिया “राम” का वास्ता, नहीं तो अन्य विकल्प भी हैं खुले

Sanjay Raut

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में राजनीतिक दंगल के बीच अब सरकार बनाने के लिए शिवसेना भाजपा को राम का वास्ता दे रही है. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि हम सत्ता के भूखे नहीं हैं लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले ही तय हो गया था जिसका मतलब कैबिनेट पोस्ट में बराबर की हिस्सेदारी है. हम सभी राम में विश्वास रखते हैं तो राम की तरह प्राण जाए पर वचन ना जाए की नीति भी अपनानी चाहिए.

राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि गठबंधन का धर्म निभाना जरूरी है. ऐसे में हमें ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं मिलना चाहिए.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में बीजेपी की शिवसेना को दो टूक- नहीं मिलेगा सीएम पद

संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा, ‘बीजेपी को 105 सीटों के साथ सरकार बनाने के लिए कौन रोक रहा है. अगर ऐसा होता है तो ये वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा क्योंकि सरकार के लिए 145 का आंकड़ा चाहिए. अगर कोई लोकतंत्र की हत्या करना चाहता है तो ऐसे नहीं चलेगा.’

सरकार बनाने में हो रही देरी पर शिवसेना सांसद ने कहा कि अगर सरकार बनने में देरी हो रही है तो हमारी गलती नहीं है. राउत ने बीजेपी को गठबंधन धर्म निभाने की याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा को 50-50 फॉर्मूले को निभाना चाहिए. उन्होंने (Sanjay Raut) भाजपा की रणनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव से पहले विपक्ष को खत्म करने की बात हो रही थी लेकिन क्या हुआ.

इसी बीच शिवसेना के एनसीपी के साथ सरकार बनाने की उड़ रही अफवाहों पर राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि हमने अभी इस पर विचार नहीं किया है. ये काफी जल्दबाजी होगी. हालांकि, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि राजनीति में सब संभव है. विकल्प हमेशा खुले रहते हैं जैसे अभी आपको हरियाणा में देखने को मिला है. वहाँ बीजेपी ने बिना बहुमत के ही सरकार बना ली. उन्होंने ऐसे संगठन से हाथ मिलाया जो उनके खिलाफ था.

इस तरह का बयान देकर शिवसेना ने साफ कर दिया है कि अगर भाजपा उनके साथ सत्ता में बंटवारा नहीं करती है तो उन्हें आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए शरद पंवार की शरण में जाने कोई दिक्कत नहीं है. अपने मुख पत्र में शरद पंवार और उनकी लीडरशिप की तारीफों के कसीदे गढ़ उन्होंने सत्ता की कुर्सी तक जाने का सेतु भी तैयार करना शुरू कर दिया है.

यह भी पढ़ें: पवार से पंगा बीजेपी को पड़ सकता भारी, सरकार बनाने के सपने पर ये गठबंधन फेर सकता पानी

हालांकि शरद पंवार ने हाल में एक बयान देकर साफ किया था कि वे गठबंधन करने की बजाए विपक्ष में बैठना ज्यादा पसंद करेंगे लेकिन रोहित पंवार और पार्थ पंवार के सियासी भविष्य को देखते हुए ये सौदा बुरा नहीं है. वहीं भाजपा को केवल सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस की शिवसेना (Sanjay Raut) और एनसीपी के संभावित एलाइंस को मोन स्वीकृति है.

महाराष्ट्र में बीजेपी की शिवसेना को दो टूक- नहीं मिलेगा सीएम पद, 122 विधायकों के समर्थन का किया दावा

Maharashtra Shiv Sena BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बीजेपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) की दबाव की राजनीति के सामने बीजेपी (BJP) नहीं झुकेगी. न तो बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मानी जाएगी और न ही गृह, वित्त, पीडब्लूडी जैसे अहम मंत्रालय देने की जिद मानी जाएगी. हां अगर शिवसेना को मंजूर हो तो उपमुख्यमंत्री पद जरूर दिया जा सकता है और साथी ही केंद्र में उसकी हिस्सेदारी भी बढ़ाई जा सकती है. विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) के बीच सरकार में भागीदारी को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है. एक जमाने में बिना सरकार … Read more

वीडियो खबर, विशेष रिपोर्ट: अमित शाह की रणनीति भी यहां आकर हुई फेल, शरद पवार ने किया सभी को ढेर

शरद पवार से संबंध गांठना शिवसेना के लिए इसलिए भी आसान होगा क्योंकि सभी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि शरद पवार ही एनसीपी हैं और एनसीपी का मतलब शरद पवार ही है. जबकि प्रदेश की भाजपा में देवेंद्र फडणवीस, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अब जेपी नड्डा जैसे कई नाम हैं जिन्हें पार्टी के फैसलों में शामिल किया जाता है…

पूरी खबर के लिए देखें वीडियो:-