खट्टर सरकार पर मंडराया सरकार जाने का खतरा, दुष्यंत चौटाला ने दी इस्तीफे की धमकी

Dushyant Choutala

Politalks.News/Haryana. संसद में किसान संबंधी बिल पास होने के बाद देशभर में बवाल मचा हुआ है. सदन में विपक्ष और सड़क पर किसान संगठन केंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. एनडीए की सहयोगी अकाली सांसद हरसिमरत कौर ने इस बिल के विरोध में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि सरकार के साथ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी केंद्र सरकार के इस फैसले का बचाव करते हुए बिल को अन्नदाता के हित में बताया है. इधर, हरियाणा में खट्टर सरकार में सहभागी जजपा के दो विधायकों ने भी बिल का विरोध किया है. इस बीच जजपा प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने धमकी भरे स्वर … Read more

किसान बिल पर दुष्यंत चौटाला की पार्टी में फूट, दो विधायकों ने दी इस्तीफे की धमकी

Farmers Bill In Haryana

Politalks.News/Haryana. लोकसभा के बाद राज्यसभा में पारित हुए किसानों से जुड़े कृषि बिल अब राज्यों गठबंधन सरकारों की मुसीबत बनती जा रही हैं. इसमें पहला नंबर है हरियाणा की खट्टर सरकार में भागीदार बने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी का. बिल को लेकर पार्टी में फूट पड़ते दिख रही है. आगाह करने के बावजूद जेजेपी के दो विधायकों ने कृषि बिल के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. दोनों विधायकों ने पार्टी स्टैंड के खिलाफ जाते हुए कृषि बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. साथ ही इस्तीफे की धमकी भी दी है जिसके बाद जजपा के साथ बीजेपी की मुश्किलें भी बढ़ रही है. जजपा के … Read more

खट्टर सरकार वहन करेगी निर्माण क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों का किराया: दुष्यंत चौटाला

हरियाणा की खबर

पॉलिटॉक्स न्यूज/हरियाणा. प्रदेश की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने प्रवासी मजदूरों को वापिस लाने के चलते एक अहम फैसला लिया है. अब प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को हरियाणा में आने का बसों का किराया प्रदेश सरकार वहन करेगी. इसके तहत 1500 रुपये की सहायता प्रदेश सरकार द्वारा दी जाएगी. यह जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम और जजपा के चीफ दुष्यंत चौटाला ने दी है. पंचकुला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई श्रम कल्याण बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. बैठक में प्रवासी मजदूरों को किराया देने के अलावा मजदूरों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की मंजूरी का निर्णय निदेशालय स्तर पर लेने का फैसला भी लिया … Read more

आखिर उद्वव ने पूरा किया बाला साहेब ठाकरे को दिया ‘शिवसैनिक को सूबे का मुख्यमंत्री’ बनाने का वचन

Uddhav Thackeray

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में पिछले एक महीने से चल रहे सियासी घमासान का आखिर पटाक्षेप हो ही गया. लम्बे समय से पल-पल बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच अब प्रदेश में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के संयुक्त गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी‘ की सरकार बनने जा रही है और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) होंगे सूबे के अगले मुख्यमंत्री. उद्वव ठाकरे को मंगलवार शाम मुम्बई के होटल ट्राइडेंट में हुई शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की संयुक्त बैठक में ‘महाविकास अघाड़ी’ का विधायक दल का नेता चुना गया. बैठक के बाद तीनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. उद्वव ठाकरे का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार 28 नवम्बर को शिवाजी पार्क में होगा.

इस तरह उद्वव ठाकरे अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे को इस बार महाराष्ट्र में शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाने का दिया वचन पूरा करने जा रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि चुनाव से पहले और परिणामों के बाद तक शिवसेना की ओर से मुख्यमंत्री की रेस में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे सबसे आगे थे, लेकिन गठबंधन दलों एनसीपी और कांग्रेस के वीटो के बाद अब महाराष्ट्र में 20 साल बाद शिवसेना के मुख्यमंत्री के रूप में उद्वव ठाकरे का नाम तय हो गया है. इससे पहले 1999 में शिवसेना से नारायण राणे महाराष्ट्र के आखिरी मुख्यमंत्री थे.

महाराष्ट्र की सियासत में फिर हुआ बड़ा उलटफेर, फ्लोर टेस्ट से पहले गिरी भाजपा सरकार, उद्दव ठाकरे लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

महाराष्ट्र की राजनीति में बिना कुर्सी और बिना कोई पद लिए सूबे की सत्ता को रिमोट कंट्रोल से चलाने वाली बाला साहेब ठाकरे की विरासत को अब उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) कुर्सी पर बैठकर चलाने जा रहे हैं. आदित्य ठाकरे के वर्ली से चुनाव लड़ने से पहले तक ठाकरे परिवार में से किसी ने कोई चुनाव नहीं लड़ा. यहां तक कि जब तक बाला साहेब ठाकरे अपनी फोरम में रहे तब तक महाराष्ट्र में सत्ता किसी की भी रही हो, राज शिवेसना का ही रहा. लेकिन बाला साहेब के अंतिम वर्षों में चीजें धीरे धीरे बदलने लगीं. अब वर्तमान में बाला साहेब के राजनीतिक वारिस उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. ऐसे में वे कुर्सी पर बैठकर सूबे की सत्ता चलाएंगे.

बाला साहेब के राजनीतिक वारिस उद्धव ठाकरे के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते हैं:

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) का जन्म 27 जुलाई 1960 को मुंबई में हुआ. उनकी पत्नी का नाम रश्मि ठाकरे हैं, उद्धव और रश्मि ठाकरे के दो बच्चे आदित्य ठाकरे और तेजस ठाकरे हैं. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के पुत्र हैं. उद्धव ठाकरे को पार्टी की बागडोर बाला साहेब के जीवनकाल में विरासत में मिली है. 19 जून, 1966 को बाला साहेब ने शिवसेना की स्थापना की थी. वर्ष 2004 में बाला साहेब ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को पार्टी प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी. जून 2006 से उद्धव ठाकरे शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक हैं. सबसे पहले शिवसेना ने उद्धव के नेतृत्व में साल 2002 के बीएमसी चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन किया था.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) अपनी आक्रामक और उग्र रुख के कारण कई बार विवादों में घिर चुके हैं. एक बार उद्धव ने उस समय अपनी ही पार्टी के नेता रहे संजय निरुपम को चेतावनी देते हुए कहा था, “यदि वो (संजय) मुंबई में किसी भी प्रकार से कार्यों में बाधा डालेंगे, तो मैं उनके दांत तोड़ दूंगा.” उनके इस आक्रामक रुख से आवेश में आकर ही हिंदू और मराठियों के लिए हमेशा मुखर रहने वाले शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उस समय उत्तर भारतीयों पर हमले को अंजाम दिया था.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित हुए एक कार्टून के लिए उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी थी. 25 सितंबर, 2016 को पहले ‘सामना’ में और बाद में ‘दोपहर का सामना’ में मराठा समुदाय पर चित्रित एक विवादास्पद कार्टून प्रकाशित किया गया था जिसके लिए उद्धव को माफ़ी मांगनी पड़ी थी. शिवसेना के 53 साल के इतिहास में पहली बार 2019 के विधानसभा चुनावों में उद्धव ठाकरे के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे ने वर्ली से चुनाव लड़ा. आदित्य ठाकरे शिवसेना की प्रदेश इकाई युवा सेना के भी अध्यक्ष रहे हैं.

मंगलवार को महाविकास अघाड़ी का नेता चुने जाने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा- मैं उन सभी सवालों के जवाब देने को तैयार हूं, जो देवेंद्र फड़नवीस ने उठाए, मैं किसी बात से नहीं डरता. झूंठ हिंदुत्व का हिस्सा नहीं हैं, जब आपको जरूरत थी तो आपने गले लगा लिया और जब जरूरत नहीं पड़ी तो आपने हमें छोड़ दिया. ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा- आपने ही दूरी बनाने की कोशिश की. मुझे अब जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, मैं उसे निभाने को तैयार हूं. उन्होंने कहा- मैं अकेला नहीं, मेरे साथ आप सभी मुख्यमंत्री हैं, जो आज हुआ है, वह वास्तविक लोकतंत्र है. हम साथ मिल कर राज्य के किसानों के आंसू पोछेंगे. हम मिल कर एक बार फिर वही महाराष्ट्र बनाएंगे, जिसका सपना छत्रपति शिवाजी महाराज ने देखा था. मैंने कभी भी प्रदेश का नेतृत्व करने का सपना नहीं देखा था. मैं सोनिया गांधी और शरद पवार जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, हम एक-दूसरे पर विश्वास रखते हुए देश को एक नई दिशा दे रहे हैं.

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बता दें, एनसीपी और कांग्रेस से एक-एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाना भी तय हुआ है. एनसीपी की ओर से विधायक दल के नेता जयंत पाटिल को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा वहीं कांग्रेस की ओर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाला साहेब थोराट को उप मुख्यमंत्री बनाया जाना तय है. इससे पहले मंगलवार को ही थोराट को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया. सरकार बनाने का फार्मूला तीनों पार्टियां पहले ही तय कर चुकी हैं, जिसके तहत शिवसेना और एनसीपी के 15-15 मंत्री बन सकते हैं और कांग्रेस से 12 मंत्री होंगे. अब केवल कांग्रेस और एनसीपी के बीच विधानसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर बात अटकी हुई है, कांग्रेस चाहती है कि स्पीकर का पद उसे मिले और एनसीपी भी.

इससे पहले मंगलवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को फ्लोर टेस्ट करवाने के आदेश के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बहुत तेज हो गई. एनसीपी नेताओं और परिवार के समझाने के बाद सबसे पहले अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंपा. इसके लगभग एक घण्टे बाद देवेंद्र फड़नवीस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान किया और थोड़ी देर बाद राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. इन दोनों के इस्तीफे के बाद शिव सेना प्रवक्ता संजय राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे पूरे पांच साल के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहेंगे.

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याद दिला दें, यह विधानसभा चुनाव शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ा था जिसके तहत कुल 288 सीटों में से शिवसेना ने 124 सीटों पर चुनाव लड़कर 56 सीटों पर विजयश्री प्राप्त की, वहीं बीजेपी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़कर 105 सीटों पर जीत दर्ज की. लेकिन चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री के पद पर ढाई-ढाई साल के विवाद के बाद बीजेपी और शिवसेना का ये 30 साल पुराना रिश्ता टूट गया है. फिलहाल बीजेपी से नाता तोड़ उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) एनसीपी और कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने जा रहे हैं.

महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के गठन का रास्ता साफ, उद्वव ठाकरे के नाम पर बनी सहमति, 20 साल बाद बनेगा शिवसेना का मुख्यमंत्री

(Coalition Government in Maharashtra)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. फाइनली महाराष्ट्र में पिछले 28 दिनों से जारी सियासी घमासान का पटाक्षेप कमोबेश अब हो चुका है. महाराष्ट्र में अगली (Coalition Government in Maharashtra) सरकार शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनने जा रही है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी की शुक्रवार को चली लंबी बैठक के बाद मुख्यमंत्री का ऐलान किया. इसके बाद शिवसेना के खेवनहार और प्रवक्ता संजय राउत ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. ऐसे में दोनों नेताओं के बयान के बाद अब ये कन्फर्म माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जो सस्पेंस बना हुआ था वो … Read more

वीडियो खबर: महाराष्ट्र में ‘शिराकां’ सरकार, मुख्यमंत्री के लिए उद्वव ठाकरे के नाम पर बनी सहमति

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सरकार गठन पर छाये बादल धीरे धीरे झटते नजर आ रहे हैं. शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के बीच बैठकों का दौर लगातार जारी है. उम्मीद जताई जा रही है ‘शिराकां सरकार’ (Shirakan Government) अगले हफ्ते तक फ्लोर पर आ सकती है. उद्दव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने पर सहमति बनते दिख रही है.

महाराष्ट्र में ‘शिराकां’ सरकार का खाका तैयार, 4-5 दिनों में बन सकती है सरकार, सीएम गहलोत और कमलनाथ की भी रही अहम भूमिका

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहा सियासी घमासान का पटाक्षेप अब होता नजर आ रहा है. बुधवार को एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं की दिल्ली स्थित शरद पवार के घर हुई बैठक के बाद दोनों दलों के नेताओं ने सयुंक्त रूप से जल्द सरकार बनाने की घोषणा की. सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में ‘शिराकां‘ (शिवसेना-राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी-कांग्रेस) (Shirakan Government) सरकार खाका तैयार हो गया है, जिसके तहत शिवसेना और एनसीपी को ढाई-ढाई साल की कमान मिलेगी. यानी ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री रहेगा तो बाकी ढाई साल एनसीपी का, वहीं विधानसभा अध्यक्ष पद भी शिवसेना या एनसीपी को ही मिलेगा, जबकि कांग्रेस को उप-मुख्यमंत्री पद के साथ कुछ महत्वपूर्ण विभाग देने पर तीनों दलों में सहमित बन चुकी है.

सूत्रों के अनुसार बुधवार को शरद पवार के घर कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं की हुई बैठक के दौरान शिवसेना से भी फोन पर बात की गई. इसके बाद एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के बीच मिलकर महाराष्ट्र में सरकार (Shirakan Government) बनाने पर सहमति बनी. अब गुरुवार को एक बार फिर दोपहर 2 बजे कांग्रेस और एनसीपी की साझा बैठक होगी. इस बैठक के बाद दोनों दलों के नेता मुंबई के लिए रवाना होंगे. बताया जा रहा है कि शुक्रवार को मुंबई में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एक और बैठक होगी, जिसके बाद शुक्रवार को ही गठबंधन सरकार का ऐलान किया जा सकता है.

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आखिर कैसे मानीं सोनिया गांधी?

कांग्रेस और शिवसेना के बीच विचाराधात्मक मुद्दों को लेकर बड़ी गहरी खाई है जो कि आज से नहीं बल्कि शिवसेना के गठन के समय से है और शायद कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति नहीं होती तो शायद बाल साहेब को कट्टर हिन्दुत्व की भावना वाली शिवसेना के गठन की जरूरत भी नहीं पड़ती. लेकिन जहां ‘मुख्यमंत्री की कुर्सी’ मूंछ का सवाल बन गई तो अपनी बात की लाज रखने के लिए शिवसेना कांग्रेस के साथ गठबंधन को भी राजी हो गई. लेकिन कांग्रेस अपने मुस्लिम वोट बैंक के खिसकने के डर से अटकी हुई थी. (Shirakan Government) शिवसेना को समर्थन देने को लेकर असमंजस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार की तरफ से इस मामले पर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती थीं.

सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के मुसलमानों की भी यही इच्छा है कि चाहे कांग्रेस शिवसेना को समर्थन दे दे लेकिन किसी भी हाल में बीजेपी को दुबारा सत्ता पर आसीन न होने दे. इसके अलावा जब वैचारिक विरोधी शिवसेना को समर्थन देने की बात आई तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के कई सीनियर नेताओं से लंबी मंतेना की. इस चर्चा में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री कमलनाथ के साथ की गई बातचीत भी काफी कारगर रही. सूत्रों की मानें तो इन दोनों नेताओं ने ही शिवसेना को समर्थन देने की वकालत की. दोनों नेताओं ने आलाकमान के सामने दलील दी कि महाराष्ट्र में अभी पार्टी चौथे नम्बर पर आ चुकी है और आने वाले चुनावों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है, ऐसी स्थिति में अगर हम सरकार (Shirakan Government) में रहते हैं तो इस स्थिति से बचा जा सकता है, इसलिए हमारा शिवसेना को समर्थन करना बहुत जरूरी है.

बड़ी खबर: महाराष्ट्र में शिवसेना के खेवनहार बने संजय राउत, उद्दव ठाकरे ने दिया फ्री हैंड

उधर महाराष्ट्र में शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में सुबे में सरकार बनाने का दावा करते हुए लिखा है कि महाराष्ट्र में किसी भी पल सरकार (Shirakan Government) बन सकती है और 21 दिनों से चल रही अस्थिरता जल्द समाप्त होगी. सामना में आगे लिखा गया कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एकसाथ मिलकर मजबूत और स्थिर सरकार देंगे. बता दें कि शिवसेना महाराष्ट्र में लगातार सरकार बनाने का दावा कर रही है. वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि आने वाले 2 से 5 दिनों में सभी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. दिल्ली में न्यूज एजेंसी ANI से संजय राउत ने कहा, ‘जब 3 दल सरकार बनाते हैं तो प्रक्रिया लंबी होती है. यह प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है. आने वाले 2-5 दिनों में जब प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो महाराष्ट्र में सरकार बनाई जाएगी. संजय राउत ने कहा कि शिवसेना का मुख्यमंत्री बनना चाहिए यह महाराष्ट्र की जनता की इच्छा है. यह राज्य की जनभावना है कि उद्धव ठाकरे जी ही सरकार का नेतृत्व करें.

वीडियो खबर: संजय राउत का भाजपा पर तंज, कहा- कोई अपने आपको भगवान न समझे

Sanjay Raut-Shiv Sena

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. अब तक महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता की राजनीति जो मुंबई में चल रही थी वो अब दिल्ली शिफ्ट हो गई है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर शिवेसना के खेवनहार संजय राउत (Sanjay Raut) तक सब दिल्ली आ गए हैं. शिवसेना को एनडीए से बाहर किए जाने से नाराज संजय राउत (Sanjay Raut) ने बीजेपी पर जबरदस्त हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में बड़े-बड़े बादशाह आए ओर चले गए लेकिन लोकतंत्र कायम है. कोई भी अपने आप को भगवान समझने की कोशिश ना करे, जनता सबसे बड़ा भगवान है.

दिल्ली शिफ्ट होने के बाद ओर भी दिलचस्प हुई महाराष्ट्र की राजनीति, उधर ‘सामना’ का घातक प्रहार जारी

Politics of Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र की राजनीति (Politics of Maharashtra) दिल्ली शिफ्ट होने के बाद ओर भी दिलचस्प होती जा रही है. सोमवार को राज्यसभा के 250वें सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एनसीपी नेताओं की तारीफ करके इस राजनीति को ओर गरमा दिया. उधर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का सपना देख रही शिवसेना को शरद पवार के सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद आए बयान से बड़ा झटका लगा है. शरद पवार ने कहा कि हमारे बीच सरकार बनाने को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई. वहीं शरद पवार और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद पवार से मिलने पहुंचे शिवसेना नेता संजय राउत ने मुलाकात के बाद कहा कि, शरद पवार को समझने में कई जन्म लग जाएंगे. राउत ने कहा कि पवार साहेब का कद बड़ा है, प्रधानमंत्री भी उनकी तारीफ करते हैं.

दूसरी तरफ सोमवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि मैंने बीजेपी और शिवसेना में समझौते एक नया फार्मूला सुझाया है, जिसके तहत 3 साल तक मुख्यमंत्री पद बीजेपी के लिए और बाकी के 2 साल शिवसेना के लिए हो सकता है. अठावले के मुताबिक इस बारे में उनकी संजय राउत से बात भी हो चुकी है और इसके जवाब में संजय राउत ने कहा कि अगर बीजेपी सहमत हो तो इस पर विचार किया जा सकता है. लेकिन जिस तरह की आग उगलने वाली राजनीति इन दिनों देखी जा रही है उससे अब बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (Politics of Maharashtra) की संभावना तो दूर-दूर तक नजर नहीं आती है.

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हमारी यह बात इससे भी साबित होती है कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से बनी दैनिक दिनचर्या के तहत आज फिर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी नेताओं पर अपना हमला जारी रखा. शिवसेना ने बीजेपी नेता प्रहलाद जोशी को टेढ़े मुंहवाला बताते हुए कहा कि कश्मीर में मुफ़्ती की पार्टी से निकाह करने से पहले बीजेपी ने एनडीए से पूछा था क्या? फिर हमें एनडीए से निकालने वाले तुम कौन हो? शिवसेना ने कहा कि बीजेपी नेताओं (Politics of Maharashtra) की बयानबाजी से साफ हो गया है कि इनके विचारों की खुजली बाहर आ गई है.

शिवसेना ने एनडीए गठबंधन से खुद को अलग किए जाने का जबरदस्त विरोध करते हुए अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि, “राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में से शिवसेना के नहीं होने की घोषणा दिल्ली के बीजेपी नेताओं ने किस आधार पर और किसकी अनुमति से की? दिल्ली के मोदी मंत्रिमंडल में से किसी एक प्रह्लाद जोशी ने यह घोषणा की है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से शिवसेना के संबंध जुड़ने के कारण उन्हें ‘एनडीए’ से बाहर निकाल दिया गया है और उनके सांसदों को संसद में विरोधी पक्ष में बैठाया गया है.” शिवसेना ने कहा, “जिस टेढ़े मुंहवाले ने ये घोषणा की है उसे शिवसेना का मर्म और ‘एनडीए’ का कर्म-धर्म का नहीं पता.”

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‘सामना’ में आगे लिखा कि, “कश्मीर में राष्ट्रद्रोही और पाकिस्तानियों के गीत गानेवाली महबूबा मुफ्ती के साथ सत्ता के लिए निकाह करने वाली बीजेपी ने ‘एनडीए’ की अनुमति ली थी क्या? सारे लोगों के विरोध में जाने के दौरान ‘मोदी’ का बचाव करने वाले शिवसेना प्रमुख के संगठन को ‘एनडीए’ से बाहर निकालने का मुहूर्त मिला वो भी शिवसेना प्रमुख बाला साहेब की पुण्यतिथि का? खुद को हरिश्चंद्र का अवतार मानने वालों ने हरिश्चंद्र जैसा बर्ताव नहीं किया. अब इनकी (Politics of Maharashtra) राजनीति की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. महाराष्ट्र के कोने-कोने में अब सिर्फ एक ही गर्जना होगी, ‘शिवसेना जिंदाबाद!’ हिम्मत है तो आओ, आओ सामने। हम तैयार हैं.”

शिवसेना ने आगे लिखा, “एनडीए से शिवसेना को बाहर निकालने की बात करनेवालों को एक बार इतिहास देख लेना चाहिए. बालासाहेब ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीज और पंजाब के बादल जैसे दिग्गजों ने जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नींव रखी उस समय आज के ‘दिल्लीश्वर’ गुदड़ी में भी नहीं रहे होंगे. कइयों का तो जन्म भी नहीं हुआ होगा. आज ‘एनडीए’ का प्रमुख या निमंत्रक कौन है इसका उत्तर मिलेगा क्या? शिवसेना को बाहर निकालने का निर्णय किस बैठक में और किस आधार पर लिया गया? कोई बताएगा.”

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शिवसेना ने आगे कहा, “कोई एक टेढ़े मुंहवाला (प्रह्लाद जोशी) उठता है और शिवसेना को ‘एनडीए’ से बाहर निकालने की घोषणा करता है. ठीक ही हुआ, इस कृत्य से तुम्हारे विचारों की खुजली आज बाहर आ गई. पिछले कुछ दिनों से झूठ-मूठ की खुजली शुरू थी. उसके पीछे की असली बीमारी अब बाहर आई. (Politics of Maharashtra) इन खुजलीबाजों को इस कृत्य के लिए दिन भी मिला तो कौनसा शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के सातवें स्मृतिदिन का मुहूर्त मिला.”