‘दलगत राजनीति से ऊपर थे स्व. भैरोंसिंह शेखावत’- वेंकैया नायडु

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु बुधवार दोपहर विशेष विमान से अपने एकदिवसीय दौरे पर जयपुर पहुंचे जयपुर आगमन पर भाजपा के नेताओं द्वारा एयरपोर्ट पर नायडु का भव्य स्वागत किया गया. इसके बाद नायडु एयरपोर्ट से सीधे राज्यपाल कल्याण सिंह से मिलने राजभवन पहुंचे, जहां विभिन्न विषयों पर दोनो के बीच चर्चा हुई. राज्यपाल से मुलाकात के पश्चात उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु स्व. भैरोंसिंह शेखावत की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला में शिरकत करने शहर के बिडला आडिटोरियम पहुंचे.

राजधानी जयपुर के बिडला आडिटोरियम में बुधवार की शाम पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.भैरोंसिंह शेखावत की स्मृति में द्वितीय व्याख्यान कार्यक्रम आयोेजित किया गया. इस कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने शिरकत की एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद ओम माथुर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया मंच पर मौजूद रहे. इस व्याख्यान कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने पूर्व उप राष्ट्रपति स्व. भैरोंसिंह शेखावत के जीवन और उनके साथ बिताये गए राजनैतिक पलों को सभी के साथ साझा कर उन्हे याद किया.

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बिडला आडिटोरियम में आयोजित इस व्याख्यान कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.भैरोंसिंह शेखावत को याद कर कहा की, “स्व. भैरोंसिंह ने अपने राजनैतिक जीवन में संसदीय परम्पराओं और मूल्यों को स्थापित किया जो कि आज के नेेता नहीं करते, आगे नायडु ने कहा कि स्व.भैरोंसिंह के जीवन मूल्यों का मैं भी अनुसरण करता हूं”.

व्याख्यान कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने आगे अपने संबोधन में नेताओं को सीख देते हुए कहा कि राजनिती में एक दूसरे के प्रतिद्वंदी होना सही है, लेकिन किसी को एक दुसरे से शत्रुता नहीं रखनी चाहिए बल्कि एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए हम एक दूसरे का सम्मान करेंगे तभी तो आगे बढेंगे सभी नेता और पार्टियों का यही मकसद होना चाहिए. स्व. भैरोंसिंह शेखावत सभी दल के नेताओं से रखते थे मित्रता लेकिन इन दिनों राजनीतिक पार्टियों में कटुता आई है. राजनीतिक पार्टियों की कटुता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है हम सभी का मकसद आम आदमी के जीवन स्तर को उंचा उठाना होना चाहिए.

उपराष्ट्रपति नायडु ने स्व. भैरोंसिह शेखावत के जीवन पर आगे बोलते हुए कहा कि स्व.भैरोसिंह को हमेशा गांव, गरीब, किसान के लिए बडी चिंता होती थी. स्व. भैरोंसिंह हमेशा आम जनता के बीच रहना पसंद करते थे, वो एक जमीन से जुडे हुए नेता थे. वो हमेशा किसान के हित कि बात करते थे और किसान के लिए चिंतित रहते थे. वो एक जन साधारण के नेता थे. इसीलिए विधायक, फिर मुख्यमंत्री से लेकर उपराष्ट्रपति पद तक पहुंच पाये.

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि व राज्यसभा सांसद ओम माथुर सहित राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.

स्व. भैरोंंसिंह शेखावत के व्यक्तित्व पर क्या बोले ओम माथुर

राजधानी जयपुर के बिडला आडिटोरियम में 14 अगस्त की शाम पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. भैरोंसिंह शेखावत की स्मृति में द्वितीय व्याख्यान कार्यक्रम आयोेजित किया गया. इस व्याख्यान कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने पूर्व उप राष्ट्रपति स्व. भैरोंसिंह शेखावत के साथ बिताये गए राजनैतिक अनुभव को सभी के साथ साझा कर उन्हें याद किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु, विशिष्ट अतिथि व राज्यसभा सांसद ओम माथुर सहित राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.

डिनर डिप्लोमैसी पर जोया हसन ने फेरा पानी, जोशी की टिप्पणी ने किया आग में घी का काम

पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के कार्यकाल में बंद हुई आपसी सौहार्द बढाने की परम्परा को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फिर से शुरू करते हुए बुधवार, 31 जुलाई को सभी दलों के विधायकों और ब्यूरोक्रेट्स को रात्रि भोजन पर आमंत्रित किया. मुख्यमंत्री की इस पहल की सभी ने सराहना भी की और किसी हद तक सत्ता और सियासत के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बना भी हो, लेकिन दूसरे ही दिन विधानसभा में आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुए एक घटनाक्रम ने सीएम अशोक गहलोत की डिनर डिप्लोमैसी पर पानी फेर दिया और आग में घी का काम किया विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की टिप्प्णी ने. बुधवार, 31 जुलाई की रात को राजस्थान … Read more

पायलट बने विधायक दल के कप्तान

बुधवार को राजधानी के सवाईमान सिंह स्टेडियम स्थित राजस्थान क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर सुबह का नजारा कुछ अलग सा था. अकसर खुले मंच या विधानसभा में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले सभी दलों के दिग्गज विधायक और मंत्री यहां एक साथ क्रिकेट खेलते दिखे. कुछ मंत्री-विधायक मैच की कमेन्ट्री करते नजर आए तो कुछ अपने साथी विधायकों की हौसला अफजाही करते और एक दूसरे के साथ ठहाके लगाते हुए नजर आये. दरअसल बुधवार सुबह राजस्थान क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर एक विशेष क्रिकेट मैच खेला गया. यह मैच राजस्थान विधानसभा अधिकारी/ कर्मचारी स्टाफ और सदन के भीतर बैठने वाले विधायकों के बीच खेला गया. विधायकों की टीम डिप्टी … Read more

निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा को ज्यादा समय देने पर भाजपा विधायक भड़के

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को भाजपा के सदस्य इस बात पर भड़क गए कि निर्दलीय सदस्य को बोलने के लिए ज्यादा समय क्यों दिया जा रहा है? भाजपा विधायकों के हंगामे के कारण सदन की बैठक आधा घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी. इसके बाद सदन की बैठक शुरू हुई तो कांग्रेस के अमीन खान और भाजपा के अभिनेष महर्षि भिड़ गए. दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ आस्तीनें चढ़ा लीं. अन्य विधायकों ने दोनों को अलग ले जाकर समझाया.

विधानसभा में शुक्रवार को सिंचाई, लघु सिंचाई एवं भूमि संरक्षण विभाग की अनुदान मांगों पर बहस हो रही थी. भूजल विभाग के मंत्री बीडी कल्ला ने बहस का जवाब दिया. इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने अन्य विभागों की अनुदान मांगों को भी पारित करवा लिया. सिंचाई, लघु सिंचाई एवं भूमि संरक्षण विभाग की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने विरोध किया तो लोढ़ा उनसे बहस करने लगे.

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि जांच करा लो, पहले माथुर आयोग बनाया था, उसका क्या हुआ. लोढ़ा ने कहा आयोग का अध्यक्ष मुझे बनाओ, फिर देखो क्या होता है. इस पर भाजपा विधायक हंगामा करने लगे. पीठासीन सभापति जितेन्द्र सिंह ने समझाइश की कोशिश की जो बेअसर रही. सभापति ने एक भाजपा विधायक का नाम पुकारा तो संयम लोढ़ा ने एक मिनट का समय और मांग लिया. सभापति ने मंजूरी दी तो कई भाजपा विधायक आसन के सामने पहुंच गए. हंगामा बढ़ने पर पहले राजेन्द्र पारीक आसन पर पहुंचे. फिर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया. फिर भी शोर-शराबा जारी रहा तो जोशी ने आधा घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी.

दुबारा फिर से बैठक शुरू होने पर सीपी जोशी ने कहा कि बोलने का समय देने में त्रुटि हुई है तो उसे दिखवा लेंगे. लेकिन भाजपा विधायक नहीं माने. गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि हमें तीन मिनट में घंटी बजाकर रोकते हैं, जबकि हमें गाली देने वालों को एक घंटे तक बोलने की अनुमति है. प्रोसीडिंग निकालो, कैसे-कैसे शब्दों का प्रयोग किया है. ऐसा कब तक चलेगा? यह बर्दाश्त नहीं होगा. आसन के सामने नारेबाजी की ओर इशारा करते हुए जोशी ने कहा कि क्या यह बर्दाश्त हो जाएगा?

जोशी ने कहा कि भाजपा को एक घंटा 36 मिनट, कांग्रेस को एक घंटा 14 मिनट का समय दिया गया है. मैं यहां न्याय करने के लिए बैठा हूं. सुनना चाहोगे या नहीं? नहीं में जवाब मिलने पर जोशी ने बहस समाप्त करते हुए मंत्री बीडी कल्ला को जवाब देने के लिए कह दिया. कल्ला ने हंगामे के बीच जवाब दिया. इसके बाद अध्यक्ष ने अन्य विभागों की अनुदान मांगें पारित करवाकर सदन सोमवार सुबह तक स्थगित कर दिया.

धारीवाल ने नरेन्द्र मोदी को बताया सफाईकर्मियों को पीड़ा पहुंचाने वाली पुस्तक का लेखक, सदन में हंगामा

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को मंत्री शान्ति धारीवाल के एक बोल पर जोरदार हंगामा हो गया. जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सदन की कार्यवाही को गुरुवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा. स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के एक बोल पर बुधवार को विधानसभा में दोनों पक्षो के बीच जोरदार हंगामा हो गया. दरअसल मंत्री शान्ति धारीवाल ने नगर आयोजना व प्रादेशिक विकास की अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए कहा कि सफाईकर्मियों के लिए पूर्ववर्त्ती सरकारों ने कुछ नहीं किया. कुछ पुस्तकों में सफाईकर्मियों के किये पीड़ादायक शब्दों का प्रयोग किया गया है. मंत्री धारीवाल ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए सदन में कहा कि एक … Read more

राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के यूट्यूब पर सीधे प्रसारण ने पकड़ा तूल

राजस्थान में पहली बार विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया जा रहा है. विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण दिखाया जाना कितना उचित है इसको लेकर नेताओं और विश्लेषकों के अपने-अपने मत सामने आ रहे हैं.

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कई बार विधायकों की बहस में ऐसे शब्द बोल दिए जाते हैं जो अपशब्दों की श्रेणी में आते हैं. ऐसे शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाता है. विधायकों को कार्यवाही का संपादित वीडियो दिया जाता है. लेकिन अब यूट्यूब पर सदन की कार्यवाही को सीधे देखा जा सकता है. यूट्यूब के लिंक के जरिए कार्यवाही टीवी चैनल पर प्रसारित की जा सकती है. इसे सेट टॉप बॉक्स के जरिए रिकॉर्ड भी किया जा सकता है.

कई नेताओं ने विधानसभा की कार्यवाही के यूट्यूब पर सीधे प्रसारण को लेकर सवाल उठाया है. उनकी चिंता यह है कि अब विधानसभा में बोले जाने वाले अपशब्द भी जनता सुनेगी, जबकि अपशब्दों को कार्यवाही से हटाने की परंपरा रही है. यूट्यूब पर सीधे प्रसारण के कारण यह परंपरा भंग हो रही है. हालांकि इससे फायदा भी है. कार्यवाही की सीधा प्रसारण होने से विधायकों को संभलकर बोलना पड़ेगा.

गौरतलब है कि एक बार पहले राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल का दूरदर्शऩ पर सीधा प्रसारण करने की तैयारी हुई थी. उस समय भी यह व्यवस्था बनी थी कि अगर कोई असंसदीय शब्द सदन में आएगा तो उसे संपादित करके ही प्रसारित किया जाएगा. गोवा में विधानसभा की कार्यवाही का स्थानीय कैबल चैनल पर सीधा प्रसारण होता है. कर्नाटक में भी यह सिलसिला शुरू हुआ था, तब सदन में कुछ विधायक आपत्तिजनक फिल्म देखते हुए कैमरे में कैद हो गए थे.

आम तौर पर संसद और सभी विधानसभाओं में असंसदीय शब्द कार्यवाही से निकाल दिए जाते हैं. इसकी रिपोर्ट लोकसभा को भेजी जाती है. बताया जाता है कि असंसदीय शब्दों में 30-40 फीसदी हिस्सा राजस्थान का होता है. आम आदमी भी निर्धारित शुल्क का भुगतान कर विधानसभा की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग हासिल कर सकते हैं. अब आम आदमी यूट्यूब से भी कार्यवाही को डाउनलोड कर सकते हैं.

विधानसभा में कई बार तीखी बहस होती है, जिसमें सदस्य अपशब्द बोल जाते हैं. एक बार एक मंत्री ने साले कह दिया. बाद में उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने सालेह नाम पुकारा था. विधानसभा में चप्पल उछालने की घटनाएं भी हुई हैं. कई बार उत्तेजित विधायक अध्यक्ष के आसन तक पहुंच जाते हैं. एक बार विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को गुंडा-बदमाश कह दिया था. ऐसे शब्द कार्यवाही से अपने आप हट जाते हैं. यूट्यूब पर सीधा प्रसारण होने से विधानसभा में होने वाला हंगामा, नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप आदि जनता सीधे देख सकेगी.

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा है कि विधायकों को सदन की कार्यवाही का संपादित वीडियो ही दिया जाता है, जो कि सीधा प्रसारण नहीं है. यूट्यूब पर सीधा प्रसारण होने के पांच-सात दिन बाद आम जनता सहित सभी संबंधित पक्षों से फीडबैक लिया जाएगा. इसके बाद आवश्यक हुआ तो व्यवस्था में सुधार करेंगे. फिलहाल सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जा रहा है. फीडबैक के आधार पर कमेटियों की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के बारे में फैसला किया जाएगा.

विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण से विधायकों को भी जिम्मेदार बनना पड़ेगा. विधायक विधानसभा में उपस्थित है या नहीं, विधानसभा अध्यक्ष का अपमान तो नहीं किया जा रहा है, प्रश्न पूछने वाले विधायक सदन से गायब तो नहीं है, सीधे प्रसारण से ये सारी बातें उजागर हो जाएंगी.

राजस्थान विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राव राजेन्द्र सिंह ने कहा कि संसद की कार्यवाही का उनके चैनल पर सीधा प्रसारण होता है. लेकिन विधानसभा की कार्यवाही का यूट्यूब पर प्रसारण विरोधाभासी होगा. विधानसभा की व्यवस्था है कि जो जनहित में नहीं है, वह नहीं दिखाया जाए. सीधा प्रसारण होने से यह व्यवस्था भंग होगी.

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह का कहना है कि कई बार सदन की कार्यवाही के दौरान सदस्य ऐसे शब्द बोल देते हैं, जिनको कार्यवाही से निकालना पड़ता है. जहां तक सीधा प्रसारण का सवाल है, इस बारे में कोई नियम नहीं है.

पूर्व विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि एक बार विधानसभा की कार्यवाही को लेकर कमेटी बनी थी, जिसने सीधे प्रसारण की सिफारिश की थी. सीधे प्रसारण को लेकर जहां तक नियमों का सवाल है, विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश ही नियम होता है.