शत्रुघ्न कांग्रेस में तो आए लेकिन RSS नहीं छोड़ी: आचार्य प्रमोद कृष्णम

politalks news

राजनीति में पार्टी का रिश्ता अलग और पारिवारिक रिश्ता अलग तरह से निभाने की कोशिशें की जाती हैं लेकिन दोनों रिश्ते एक साथ निभाने की बात आए तो किसी एक में खटास लाजमी है. कुछ ऐसा ही हाल है यूपी की लखनऊ लोकसभा सीट पर, जहां हाल ही कांग्रेस में शामिल होने वाले शुत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी एसपी टिकट पर चुनाव मैदान में है और आचार्य प्रमोद कृष्णम उनकी पार्टी के उम्मीदवार. नाराज चल रहे आचार्य ने बयान दिया है कि शत्रुघ्न कांग्रेस में शामिल तो हो गए हैं लेकिन अभी तक आरएसएस से इस्तीफा नहीं दिया है. बता दें कि शत्रुघ्न सिन्हा ने लखनऊ संसदीय सीट से एसपी प्रत्याशी … Read more

राजस्थान: नागौर सीट पर अपनों की अदावत से परेशान हनुमान और ज्योति

Politalks News

प्रदेश में लोकसभा के चुनाव का दूसरा चरण 6 मई को होगा. दूसरे चरण में नागौर लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें टिकी हुई होंगी. इस सीट पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है. कांग्रेस ने दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा को एक बार फिर चुनावी समर में उतारा है, वहीं भाजपा ने आरएलपी के साथ चुनावी गठबंधन करते हुए यह सीट आरएलपी उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल को दी है.

दोनों ही प्रत्याशी की पार्टी और विचारधारा की लड़ाई तो समझ में आती है, लेकिन वास्तविक जिंदगी में भी दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं. ऐसे में दोनों पार्टियों की प्रतिष्ठा से कहीं ज्यादा स्वयं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. तीन दशक बाद भाजपा ने किसी सहयोगी दल से गठबंधन किया है. इस चुनावी समर में सबसे बड़ी खास बात यह है कि दोनों ही उम्मीदवारों को अपने प्रतिद्वंदी के साथ ही खुद ही पार्टी के दिग्गज नेताओं से भी लड़ना होगा.

कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा के टिकट को लेकर काफी विवाद हुआ था. कांग्रेस के अधिकांश विधायक ज्योति मिर्धा को टिकट देने का विरोध कर रहे थे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले नावां विधायक एवं उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, डेगाना विधायक विजय मिर्धा, डीडवाना विधायक चेतन डूडी, पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष जाकिर हुसैन सहित सभी कई नेताओं ने ज्योति मिर्धा को उम्मीदवार नहीं बनाने के मांग की थी.

पार्टी के दिग्गज नेताओं के विरोध के चलते आलाकमान ने एक बार तो ज्योति मिर्धा का टिकट काटने का मानस बना लिया था, लेकिन ऐन वक्त पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की दखलंदाजी के बाद आखिरकार आलाकमान को उन्हें प्रत्याशी बनाना पड़ा. ऐसे में ज्योति मिर्धा के साथ भितरघात की बात से इनकार नहीं किया जा सकता. नागौर की राजनीति में महेंद्र चौधरी, रिछपाल मिर्धा, हरेंद्र मिर्धा, चेतन डूडी का भी काफी बड़ा प्रभाव है. ऐसे में ज्योति मिर्धा इन दिग्गजो से कैसे निपट पाती है यह देखने वाली बात होगी.

बात करें आरएलपी के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल की तो उनकी राह भी आसान नहीं है. भाजपा के अधिकांश नेता आरएलपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी रहे पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान और गजेंद्र सिंह खींवसर को हनुमान बेनीवाल का कट्टर विरोधी माना जाता है. इन दोनों नेताओं का नागौर में काफी प्रभाव है.

इधर केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी का टिकट काटे जाने से भी एक बड़ा खेमा नाराज नजर आ रहा है. सीआर चौधरी आम मतदाताओं के बीच शालीन ओर विनम्र नेता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं. उनका टिकट काटे जाने से उनके समर्थक खुश नहीं हैं. हालांकि कहने को तो सीआर चौधरी हनुमान बेनीवाल के साथ चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं, लेकिन मतदान के दौरान हनुमान बेनीवाल का कितना साथ निभा पाते हैं, यह देखना रोचक होगा.

आनंद पाल प्रकरण के बाद राजपूत वर्ग में भी हनुमान बेनीवाल को लेकर विपरीत माहौल बना हुआ है. नागौर लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें से पांच कांग्रेस के पास, दो भाजपा के पास और एक आरएलपी के पास है. कुल 8 सीटों में से 1 सीट रिजर्व है शेष 7 सीटों पर सभी विधायक जाट समाज से हैं. ऐसे में जाट मतदाताओं का रूझान किस ओर होता है इस पर सभी की निगाहें टिकी होगी. जहां युवाओं में नरेंद्र मोदी और हनुमान बेनीवाल के प्रति जबरदस्त क्रेज है तो वहीं बुजुर्ग और कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में ज्योति मिर्धा की पहचान बाबा की पोती के नाम से है.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नागौर का मुकाबला भी काफी कड़ा होने वाला है. देखना होगा कि क्या अपने दादा नाथूराम मिर्धा की राजनीतिक विरासत पर सवार ज्योति मिर्धा इस बार अपनी जीत सुनिश्चित कर पाती हैं या भाजपा के साथ गठबंधन करने वाले हनुमान बेनीवाल अपनी चुनावी वैतरणी को पार लगाते हैं.

मोदी-शाह पर 6 मई तक निर्णय करे चुनाव आयोग : सुप्रीम कोर्ट

Floor Test in Maharashtra

लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता की कड़ाई से पालना को लेकर निर्वाचन विभाग ने बड़े कदम उठाये हैं, सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की उस याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा अपने चुनावी सभाओं के भाषणों में आचार संहिता का उल्लंघन करने की बात कही है और इस संबध में निर्वाचन आयोग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 6 मई तक फैसला लेने का आदेश दिया है. वकील सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि निर्वाचन आयोग में कुल 40 शिकायतें की थी, जिसमें से 20 के ऑर्डर पास हुए … Read more

दौसा के सियासी दंगल में सविता और जसकौर के बीच रोचक जंग

PoliTalks news

दौसा संसदीय सीट, वह क्षेत्र जिसकी नुमाइंदगी लंबे समय तक कांग्रेस के दिग्गज़ नेता राजेश पायलट ने की. वह इस सीट से पांच बार सांसद चुने गए थे. हालांकि दौसा कांग्रेस का मजबूत किला रहा है लेकिन 2009 में परिसीमन के बाद ये सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई और तभी से कांग्रेस के लिए यहां से जीत का खाता खुलना बंद हो गया. इस बार दौसा सीट पर सीधा मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. कांग्रेस ने सविता मीणा और बीजेपी ने जसकौर मीणा को प्रत्याशी बनाया है. अब जनता जनार्दन दोनों की किस्मत का फैसला करेगी.

दौसा सीट का इतिहास
दौसा लोकसभा सीट का लंबे समय तक राजेश पायलट ने प्रतिनिधित्व किया है. वह यहां से पांच बार सांसद की कुर्सी संभाल चुके हैं और यहीं से कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे. उनकी पॉपुलर्टी यहां इतनी अधिक थी कि 2000 में जटवाड़ा के पास एक सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद राजनीति में अनुभवहीन उनकी पत्नी रमा पायलट ने बीजेपी के आर.के. शर्मा को करीब 65 हजार मतों से मात दी. 2004 में राजेश पायलट के सुपुत्र सचिन पायलट ने राजनीति में कदम रखा और एक लाख 15 हजार मतों से यह सीट अपने नाम की. 2009 में परिसीमन के बाद ये सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई.

उसके बाद हुए दोनों चुनावों में कांग्रेस की हालात बदतर हो गई. 2009 के चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मण मीणा के साथ बीजेपी उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी. इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी किरोड़ी लाल मीणा ने जीत हासिल की. 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट मोदी लहर में बह गई और बीजेपी के हरीश मीणा यहां से विजयी हुए. हरीश ने कांग्रेस के नमोनारायण मीणा और तत्कालीन सांसद किरोड़ीलाल मीणा को करीब 45 हजार वोटों से मात दी. कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे. लेकिन विधानसभा चुनावों से पहले हरीश मीणा ने बीजेपी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया और देवली-उनियारा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बन गए.

दौसा सीट का गठन
दौसा लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें दौसा, बस्सी, चाकसु, थानागाजी, बांदीकुई, सिकराय, महुवा और लालसोट शामिल हैं. यहां की चार विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति और दो सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इन क्षेत्रों में आए विधानसभा चुनाव के नतीजे जहां कांग्रेस का मनोबल बढ़ाने वाले हैं, वहीं बीजेपी पर संकट के बादल मंडरा रहे है. इन आठ में से 5 सीटों पर कांग्रेस और शेष 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया है. बीजेपी का खाता भी नहीं खुल सका.

अब बस्सी और थानागाजी विधानसभा से विजयी प्रत्याशियों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. ऐसे में दौसा संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली अनुसूचित जाति और जनजाति के वोटों की बहुतायत यहां कांग्रेस का दावा क्षेत्र में मजबूत करती है. सचिन पायलट की वजह से गुर्जर वोट बैंक जिस तरह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में आ गया था, अगर यह साथ लोकसभा चुनाव में भी मिला तो कांग्रेस को यहां बड़े अंतर से जीत मिल सकती है. लेकिन हाल ही में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बीजेपी में शामिल होने के बाद गुर्जर बीजेपी की तरफ अपना रुख करेंगे, इस बात में कोई संशय नहीं है.

जसकौर बनाम सविता मीणा
यहां से बीजेपी उम्मीदवार जसकौर मीणा पूरी तरह मोदी के भरोसे है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही वोट मांग रही है. क्षेत्र के दिग्गज़ किरोड़ी लाल मीणा ने उनकी परेशानी बढ़ा रखी है. पूर्व सांसद किरोड़ी लाल मीणा प्रदेश के अन्य हिस्सों में तो पार्टी के प्रत्याशियों का प्रचार करते नजर आ रहे है लेकिन एकआद जनसभाओं को छोड़ अपने गृह क्षेत्र में उनकी कुछ खास सक्रियता देखने को नहीं मिल रही है. असक्रियता का कारण है कि किरोड़ी अपने परिवार में से किसी सदस्य को यहां से टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उनकी मांग को दरकिनार करते हुए सवाईमाधोपुर की पूर्व सांसद जसकौर मीणा को टिकट थमा दिया.

पार्टी पहले यहां से महुवा विधायक ओमप्रकाश हुड़ला की पत्नी प्रेमप्रकाश हुड़ला को टिकट देना चाहती थी लेकिन किरोड़ी लाल मीणा के दबाव में ऐसा संभव न हो सका. इस बात के चलते मीणा के साथ हुड़ला भी दौसा में असक्रिय हैं. टिकट का देरी से घोषित होना भी जसकौर के लिए परेशानी का सबब है. जसकौर मीणा सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र से 1998 और 1999 में दो बार सांसद और वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुकी है.

बात करें सविता मीणा की तो सविता मीणा इससे पहले बांदीकुई विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी है. वह दौसा के विधायक मुरारीलाल मीणा का पत्नी है. दौसा विधायक का प्रभाव क्षेत्र में आसानी से देखा जा सकता है. मीणा तीसरी बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए है. वह एक बार बांदीकुई और दो बार दौसा सीट से विधायक चुने गए है और गहलोत की पिछली सरकार में मंत्री भी चुके हैं. उनकी इस क्षेत्र में पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह दो बार बसपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके है. सविता के चुनाव प्रचार की पूरी जिम्मेदारी मुरारी लाल मीणा ने अपने कंधों पर ले रखी है. अब 23 मई को ये देखना दिलचस्प होगा कि दौसा मोदी लहर पर सवार होगा या कांग्रेस के हाथ को मजबूत करेगा.

राजस्थान: अलवर और भरतपुर में बसपा बिगाड़ सकती है कांग्रेस का खेल

PoliTalks news

देश की सियासत में हाथी की चाल हमेशा से हाथ के लिए परेशानी का सबब रही है. इसकी वजह है यूपी में जो दलित वोटर बसपा का वोट बैंक माना जाता है, वही वोटर राजस्थान में कांग्रेस का वोट बैंक है. अब बसपा का प्रभाव राजस्थान की राजनीति पर पड़ता साफ नजर आ रहा है. हाल में संपन्न हुए प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार नगर, किशनगढ़-बास, तिजारा, नदबई, करौली और उदयपुरवाटी सहित छह सीटों पर क​ब्जा जमाने में कामयाब हुए थे. जिन सीटों पर बसपा के विधायक चुने गए, अब उन इलाकों में कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी टेंशन में दिख रहे हैं. वजह है कि उक्त छह सीटों … Read more

स्मृति ईरानी ने वीडियो अपलोड कर प्रियंका गांधी पर साधा निशाना

PoliTalks news

देश में लोकसभा चुनाव का रोमांच चरम पर है. अब तक चार चरण संपन्न हो चुके हैं और आगामी तीन चरणों का मतदान शेष है. किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता अपने चुनाव प्रचार मेें कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते. कोई रैलियों के तो कोई सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष पर नुकीले प्रहार कर रहे हैं. वैसे कहा जाए तो इस बार का चुनाव पूरी तरह से सोशल मीडिया पर ही हो रहा है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने ट्वीटर हैंडल पर एक वीडियो अपलोड कर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर हमला बोला है. स्मृति ने ट्वीट में वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया है, … Read more

बीकानेर संभाग: तीनों सीटों पर सीधा मुकाबला, राहुल-मोदी दिखा रहे दम

politalks news

राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों में से 13 सीटों पर चुनाव संपन्न होने के बाद दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपना पूरा ध्यान शेष रही बारह सीटों पर केंद्रित कर लिया है. बीकानेर संभाग की तीनों सीटों पर भी 6 मई को ही मतदान होना है. खास बात यह है कि तीनों सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है जबकि पड़ौसी जिले नागौर में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के बीच चुनावी जंग है. संभाग की बीकानेर, श्रीगंगानगर और चूरू संसदीय सीटों पर कांग्रेस व बीजेपी उम्मीदवारों में सीधा मुकाबला देखा जा रहा है.

बीकानेर संभाग की तीनों सीटों पर कांग्रेस व बीजेपी ने अपना पूरा दम लगा रखा है. दोनों बड़े दल संभाग में अपने शीर्ष नेता के साथ मैदान में उतर चुके हैं. कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को चूरू में एक आमसभा को संबोधित कर चुके हैं जबकि बीजेपी की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी तीन मई को बीकानेर के सार्दुल क्लब मैदान में सभा को संबोधित करने वाले हैं.

निहालचंद-भरत मेघवाल में टक्कर
संभाग की श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर बीजेपी से चार बार सांसद रहे निहालचंद चौहान का मुकाबला कांग्रेस के भरतराम मेघवाल से है. श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र में सादुलशहर, गंगानगर, करनपुर, सूरतगढ़, रायसिंह नगर विधानसभा और हनुमानगढ़ जिले की सांगरिया, हनुमानगढ़ और पिलीबंगा विधानसभा सीट शामिल हैं. 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में इन 8 सीटों में से 4 पर बीजेपी, 3 पर कांग्रेस और 1 पर निर्दलीय उम्मदीवार ने जीत दर्ज की. इसे देखते हुए इस बार मुकाबला टक्कर का माना जा रहा है.

राहुल कस्वां-रफिक मंडेलिया मुकाबला
चूरू लोकसभा सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर से मौजूदा सांसद राहुल कस्वां पर भरोसा जता मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस ने रफीक मंडेलिया पर दांव खेला है. यहां भी कांटे की टक्कर मानी जा रही है. इस लोकसभा क्षेत्र में जिले की सादुलपुर, तारानगर, सुजानगढ़, सरदारशहर, चूरू, रतनगढ़ विधानसभा सीटों के अलावा हनुमानगढ़ जिले की नोहर व भादरा क्षेत्र शामिल है. हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों में इन 8 में से 5 पर कांग्रेस, 2 पर बीजेपी और 1 पर सीपीएम ने जीत दर्ज की है.

सूरज की तपन का पड़ेगा असर
बता दें कि श्रीगंगानगर व चूरू, दोनों जिलों में ग्रामीण मतदाता सर्वाधिक है. इन दिनों यहां के ग्रामीण क्षेत्र में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच रहा है. ऐसे में सूर्यदेव के तपते रूख के चलते मतदान प्रतिशत पर गर्मी का असर देखा जा सकता है जिसका सीधा असर दोनों ही राजनीतिक दलों पर पड़ने वाला है. बढ़ते तापमान के आंकड़ों के आकलन के अनुसार मतदान के दिन 45 डिग्री तापमान रहने की आशंका है. ऐसे में मतदान पर असर पड़ना लाजमी है.

बीकानेर में बीजेपी का अंतिम शॉट ‘मोदी’
बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में प्रचार थमने से ठीक चौबीस घंटे पहले प्रधानमंत्री और वर्तमान में बीजेपी के तारणहार नरेंद्र मोदी स्वयं सभा को संबोधित करने आ रहे हैं. पीएम मोदी की सभा के लिए बीजेपी ने एक लाख समर्थकों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य तय किया है. ऐसे में मोदी की सभा का यह लक्ष्य तय बीजेपी के अंतिम शॉट पर बड़ी उपलब्धि हो सकती है. इससे न सिर्फ बीकानेर शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनने के आसार हैं.

फिलहाल यही कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी का ग्रामीण क्षेत्र में खासा विरोध है. इसी बीच पार्टी अगर एक लाख लोगों का लक्ष्य पूरा करती है तो इसका सत्तर फीसदी हिस्सा गांव-ढ़ाणियों से ही आना वाला है. वहीं अगर पीएम मोदी की इस सभा में तय लक्ष्य के अनुसार भीड़ नहीं उमड़ी तो यह बीजेपी प्रत्याशी के लिए परेशानी का सबब भी हो सकता है.

बीकानेर आए पर रूके नहीं राहुल
बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में प्रचार थमने से ठीक चौबीस घंटे पहले प्रधानमंत्री और वर्तमान में बीजेपी के तारणहार नरेंद्र मोदी स्वयं सभा को संबोधित करने आ रहे हैं. पीएम मोदी की सभा के लिए बीजेपी ने एक लाख समर्थकों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य तय किया है. ऐसे में मोदी की सभा का यह लक्ष्य तय बीजेपी के अंतिम शॉट पर बड़ी उपलब्धि हो सकती है. इससे न सिर्फ बीकानेर शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनने के आसार हैं. फिलहाल यही कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी का ग्रामीण क्षेत्र में खासा विरोध है. इसी बीच पार्टी अगर एक लाख लोगों का लक्ष्य पूरा करती है तो इसका सत्तर फीसदी हिस्सा गांव-ढ़ाणियों से ही आना वाला है. अगर पीएम मोदी की इस सभा में तय लक्ष्य के अनुसार भीड़ नहीं उमड़ी तो यह बीजेपी प्रत्याशी के लिए परेशानी का सबब भी हो सकता है.

देवीसिंह भाटी का भरोसा
कांग्रेस के लिए जितना प्रचार स्वयं पार्टी के नेता नहीं कर रहे हैं, उससे ज्यादा तो बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम का विरोध करके पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी मदन गोपाल मेघवाल की राह आसान कर रहे हैं. बीकानेर शहर के अलावा नापासर सहित अन्य क्षेत्रों में भाटी की सभाओं में उमड़ रहे लोग विरोध को बढ़ा रहे हैं. वहीं कांग्रेस नेताओं ने कोई खास दमखम अब तक नहीं दिखाया है. भाटी अपने प्रचार में बीजेपी का विरोध कर रहे हैं. ऐसे में परोक्ष रूप से कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील हो रही है.

नोटा का रहेगा बोलबाला
बीकानेर संभाग की तीन सीटों बीकानेर, श्रीगंगानगर व चूरू में से नोटा का सर्वाधिक उपयोग बीकानेर में होता लग रहा है. खासकर शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग नोटा पर विचार कर रहे हैं. बीजेपी प्रत्याशी से स्थानीय लोगों की नाराजगी को कांग्रेस अब तक भुनाने में विफल रही है. अंतिम दिनों में कांग्रेस बाजी पलटने की कोशिश कर सकती है.

श्रीगंगानगर-चूरू में गांव पर निर्भरता
संभाग की श्रीगंगानगर व चूरू लोकसभा क्षेत्र में मतदान का बड़ा हिस्सा गांवों से आता है. ग्रामीण क्षेत्र पर ही कांग्रेस-बीजेपी दोनों काम कर रहे हैं. कांग्रेस का दावा है कि गांवों में मोदी व स्थानीय प्रत्याशी का भारी विरोध है जबकि बीजेपी यही मानकर चल रही है कि शहर व गांव दोनों क्षेत्रों में मोदी लहर समान रूप से चल रही है. संभाग की लोकसभा सीट बीकानेर, श्रीगंगानगर और चूरू में कांग्रेस व बीजेपी प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर है. शहरी क्षेत्र में जहां बीजेपी अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस ने सेंधमारी करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है. खासकर श्रीगंगानगर व चूरू संसदीय क्षेत्रों की बात करें तो मतदान प्रतिशत ही तय करेगा कि किस प्रत्याशी का पलड़ा भारी रहने वाला है.