राजस्थान में 62 साल बाद टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड, 25 सीटों पर करीब 66 फीसदी मतदान

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राजस्थान में दूसरे चरण का मतदान समाप्त हो गया है. दूसरे चरण की 12 सीटों पर करीब 63.76 फीसदी मतदान हुआ. इन सीटों पर वोटिंग का 62 साल का रिकॉर्ड टूटते हुए पहली बार इतनी वोटिंग हुई है. सबसे ज्यादा मतदान बॉर्डर इलाके की सीट श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में 74.18 फीसदी मतदान हुआ. सबसे कम करौली-धौलपुर में 54.78 प्रतिशत वोटिंग हुई. इन 12 सीटों पर 2014 मेंं 61.80 फीसदी वोटिंग हुई थी. ऐसे में पिछली बार की तुलना में दो फीसदी वोटिंग इन सीटों पर ज्यादा हुई. सुबह सात बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक मतदाताओं में मतदान को लेकर बेहद जोश देखा गया जिसकी बदौलत तीन बजे तक मतदान 50.60 … Read more

पीएम मोदी की कांग्रेस को चुनौती, कहा – राजीव गांधी के नाम पर लड़ो चुनाव

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज झारखंड के चाईबासा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि देश का सबसे बड़ा कोयला घोटाला कांग्रेस की देन है. साथ ही उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस के साथ-साथ नामदार के परिवार को, राग दरबारियों को, उनके चेले चपाटों को चुनौती देता हूं कि वो राजीव गांधी के नाम पर चुनाव लड़कर दिखाएं. साथ ही कहा कि कल मैने एक शब्द बोला और आपको बिच्छू काट गया. यूपी में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कल पीएम नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली में कथित बोफोर्स घोटाले का जिक्र किया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिए बिना राहुल गांधी से कहा कि … Read more

राजस्थान: दूसरे चरण में 2.3 करोड़ मतदाता, जयपुर में सबसे ज्यादा, दौसा में सबसे कम

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राजस्थान में दूसरे चरण का मतदान शुरू हो गया है. दूसरे चरण में प्रदेश की 12 सीटों के लिए मतदान होना है. मतदान सोमवार सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा. आज प्रदेश की जनता जर्नादन सत्ता चाहने वालों का फैसला वोट देकर तय करेगी. इन 12 सीटों पर 134 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इनमें 118 पुरूष और 16 महिला उम्मीदवार हैं. इस लिस्ट में कांग्रेस से 12, बीजेपी से 11, बसपा से 10, कम्यूनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया से एक, माक्सवाद से तीन और आरएलपी से एक, अन्य दलों से 29 और 68 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं. प्रदेश में चुनाव का पहला चरण 29 अप्रैल को … Read more

लोकसभा चुनाव: पांचवें चरण के लिए मतदान शुरू, शाम 6 बजे तक होगी वोटिंग

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देश की सबसे बड़ी पंचायत के चुनाव यानि लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के मतदान आज शुरू हो गए हैं. वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी. इस चरण में विभिन्न राज्यों की 51 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. राजस्थान में भी दूसरे चरण के चुनाव के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं. चौथे चरण में 59.25 फीसदी मतदान हुआ था. 5वें चरण में वोटिंग प्रतिशत बढ़ने की पूरी उम्मीद है. इस चरण में होने वाली वोटिंग कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी की संसदीय सीटों पर भी वोटिंग होनी है. इस चरण में यूपी की अमेठी, रायबरेली, लखनऊ, बिहार की सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, सारण, राजस्थान की … Read more

तीन सरकारी छुट्टियां न बन जाएं जी का जंजाल, बीजेपी-कांग्रेस परेशान

देश में लोकसभा चुनाव का 5वां चरण का मतदान कल है. इस दौरान राज्यों की 51 संसदीय सीटों पर मतदान होगा. सोमवार को ही प्रदेश में लोकसभा चुनावों का दूसरा चरण है जिसमें प्रदेश की 12 सीटों पर 2.30 करोड़ से अधिक मतदाता सत्ताधारियों की किस्मत का फैसला करेंगे. लेकिन दौरान कांग्रेस और बीजेपी के चेहरों पर चिंता की गहरी लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं. वजह है तीन सरकारी अवकाश, जो लगातार आ रहे हैं. 5 मई को रविवार, 6 मई को मतदान और 7 मई को अक्षय तृतीया की सरकारी छुट्टी है. ऐसे में दोनों ही राजनीतिक दलों को यह चिंता सता रही है कि अधिकांश … Read more

राजस्थान: दूसरे चरण की 12 सीटों में तीन पर बीजेपी, दो पर कांग्रेस मजबूत

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राजस्थान में दूसरे चरण की 12 लोकसभा सीटों पर प्रचार का आज अंतिम दिन है. दोनों दलों के दिग्गजों ने ताबड़तोड़ सभाएं करते हुए सियासी फिज़ा अपने पक्ष में बहाने की खूब कोशिशें की. ऐसे में दूसरे चरण की प्रदेश की कईं सीटों पर मुकाबला पहले फेज़ की तुलना में रोचक और कांटे का हो गया है. सात सीटों पर मुकाबला बराबरी का दिख रहा है. वहीं जयपुर शहर, चूरु और श्रीगंगानगर सहित तीन सीटों पर बीजेपी मुकाबले में कहीं आगे दिख रही है. सीकर और करौली में कांग्रेस बेहद मजबूत स्थिति में है. सबसे कांटे की टक्कर नागौर, अलवर, दौसा, बीकानेर और जयपुर देहात में दिख रही है. झुंझुनूं और भरतपुर में मुकाबला बराबरी का बनता जा रहा है.

बीजेपी इन सीटों पर बेहद मजबूत…

श्रीगंगानगर:
यहां मुकाबला बीजेपी केे निहालचंद मेघवाल और कांग्रेस के भरत मेघवाल के बीच है. दो मेघवालों में मुकाबला होने के चलते जातिगत समीकरणों के आधार पर हार-जीत का आकलन करने का कोई तुक नहीं है. निहालचंद मेघवाल पूरी तरह से मोदी चेहरे और मोदी लहर के भरोसे वोट मांग रहे हैं. यहां मोदी इम्पैक्ट की बदौलत निहालचंद शुरुआत से ही बढ़त बनाते हुए दिखे. भरत मेघवाल को अपनों के ही विरोध से जूझना पड़ रहा है.

जयपुर शहर:
यह सीट बीजेपी का परम्परागत गढ़ रही है. चुनाव की शुरुआत से ही कांग्रेस यहां संघर्ष करती नजर आई. यहां से बीजेपी ने मौजूदा सांसद रामचरण बोहरा और कांग्रेस ने पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाया है. सीट पर परिणाम क्या रहेगा, यह तो सीएम अशोक गहलोत के बयान से साफ समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जयपुर में विकास तो खूब कराया लेकिन पता नहीं जयपुर शहर की जनता क्या चाहती है. दूसरी ओर, पीएम मोदी की सभा ने बीजेपी की रही सही कसर पूरी कर ली. कांग्रेस गुलाबी नगर में अभी तक तीन बार ही चुनाव जीत पाई है. भितरघात कांग्रेस के लिए अंतिम दौर तक बड़ी चुनौती साबित होगा.

चूरु:
चूरु में कांग्रेस ने अपने अल्पसंख्यक वोटर्स को खुश रखने के लिए मुस्लिम को टिकट देने का प्रयोग जारी रखा. जाट बाहुल्य इलाके में कांग्रेस ने रफीक मंडेलिया के रूप में मुस्लिम को मौका देकर वाकई में बहुत बड़ा रिस्क लिया है. बीजेपी ने जाट कार्ड और मौजूदा सांसद राहुल कस्वां पर फिर दांव खेला है. हालांकि मंडेलिया ने पैसों की बदौलत माहौल में गर्माहट बनाने की कोशिशें की लेकिन जातिगत समीकरण साधने में नाकाम रहे.

कांग्रेस दो सीटों पर मजबूत…

सीकर:
यहां कांग्रेस ने मैनजेमेंट के माहिर सुभाष महरिया को मैदान में उतारा है. हालांकि पहले बीजेपी मुकाबले में बेहद पिछड़ी नजर आ रही थी लेकिन संघ की मेहनत और मोदी की सभा के बाद सुमेधानंद सरस्वती ने खूब कवर किया है. महरिया बीजेपी में पहले रह चुके हैं इसलिए उनकी हर रणनीति से वाकिफ है. लिहाजा महरिया मोदी लहर में अपने कौशल और मैनजमेंट से अभी भी मुकाबले में बहुत आगे दिख रहे हैं. हालांकि अब उनकी जीत का अंतर पहले के मुकाबले ज्यादा होता नहीं दिख रहा है.

करौली-धौलपुर:
इस सीट पर कांग्रेस सियासी और जातिगत समीकरण सहित दोनों क्षेत्रों में बेहद अच्छी स्थिति में है. लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक पर बीजेपी विधायक है. एक पर बसपा और अन्य छह सीटों पर कांग्रेस के विधायक है. जातिगत समीकरणों से कांग्रेस यहां बेहद मजबूत है. इस सीट पर कांग्रेस अच्छे अंतर से जीत का दावा कर रही है.

सात सीटों पर कड़ी टक्कर…
प्रदेश की शेष सात सीटों में से कहीं पर मुकाबला बेहद कांटे का तो कहीं पर सीधी टक्कर है. नागौर, जयपुर देहात, बीकानेर, अलवर और दौसा में मुकाबला बेहद दिलचस्प है. झुंझुनूं और भरतपुर में भी मुकाबला मतदान की तारीखों तक बराबरी पर आने के पूरे आसार है. कुल मिलाकर कह सकते है कि पहले चरण के मुकाबले कांग्रेस दूसरे चरण में ज्यादा सीटें जीत सकती है. लेकिन मोदी लहर और साइलेंट वोटर्स ने अपना काम कर दिया तो फिर कांग्रेस की टक्कर वाली सीटों पर समीकरण बिगड़ सकते हैं.

बिहार में पीएम मोदी ने AFSPA पर जताई राय, नीतीश की जमकर तारीफ

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लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण के लिए धुंआधार प्रचार के चलते पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को बिहार के दौरे पर रहे. यहां उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित चुनावी सभाओं को संबोधित किया और विपक्ष सहित क्षेत्रीय गठबंधन पर कई वार किए. पीएम ने प्रदेश के चंपारण, रामनगर, बस्ती व प्रतापगढ़ में चुनावी सभाओं में अपना संबोधन दिया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बिहार सीएम नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने बिहार के घर-घर से लालटेन हटाने का काम किया है. चुनावी रैली में संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक शेर बोला – न मैं गिरा ना मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे, पर … Read more

मसूद अजहर पर बैन की कार्रवाई हमने शुरू की, क्रेडिट ले रही बीजेपी: कांग्रेस

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देश में लोकसभा चुनाव के बीच यूएन द्वारा जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने राजनीति में उबाल देखा जा रहा है. एक तरफ पीएम मोदी के साथ-साथ पूरी बीजेपी इसका श्रेय लेने में जुटी है तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने भड़कते हुए इसे यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई कार्रवाई का नतीजा बताया है. कांग्रेस का कहना है कि मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की कोशिश 2009 में शुरू की गई थी, जिसका नतीजा है कि आज यह कामयाबी मिल सकी है. पूर्व गृहमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रेसवार्ता आयोजित कर आंतकी मसूद अजहर मामले में बीजेपी द्वारा श्रेय लेने पर … Read more

राजस्थान: अलवर में एक संन्यासी और राजा में रोचक जंग

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करीब डेढ़ साल पहले अलवर लोकसभा के उपचुनाव में लाखों वोटों से जीतने वाली कांग्रेस के लिए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पैदा हुआ सियासी माहौल पूरी तरह बदल गया है. यही वजह है कि दोबारा शुरु हुई मोदी लहर के बीच कांग्रेस के लिए जीत बरकरार रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है. अलवर के चुनावी रण में मुकाबला एक संन्यासी और एक राजा के बीच है. इस सीट से बीजेपी ने योगी बालकनाथ को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्व अलवर राजघराने के भंवर जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. लेकिन यहां का मुकाबला एक बार फिर यादव बनाम अन्य जातियों के बीच बनता जा रहा है.

बीजेपी के बालकनाथ को महंत चांदनाथ के सांसद रहने के दौरान बीमारी के चलते निष्क्रिय रहने की खामी और बाहरी होने के चलते खतरा मंडरा रहा है. इससे बचने के लिए बालकनाथ हर सभा में ‘मोदी मोदी’ के नारे लगवा रहे हैं और ‘मोदी को मिल गया जोगी’ गाना बजवा रहे हैं. वहीं भंवर जितेंद्र सिंह 2009 में केंद्र में मंत्री रहते हुए अलवर में कराए गए विकास कार्यों को गिनाते हुए मोदी लहर को कम करने में लगे हैं.

बसपा ने यहां अपना प्रत्याशी खड़ा करके कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी हैं. हालांकि मुकाबले में बसपा, कांग्रेस के मेव मुस्लिम और एससी वोट बैंक में सेंध लगाती नहीं दिख रही. यह तय है कि यादव एकतरफा बालकनाथ को वोट देंगे तो मेव मुस्लिम और मीणा कांग्रेस के साथ जाएंगे. ऐसे में जनरल, ओबीसी और दलित वोट बैंक का पलड़ा जिस तरफ भारी रहेगा, नतीजा उसी पर निर्भर करेगा.

सियासी समीकरण
अलवर लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा आती है. डेढ़ साल पहले महंत चांदनाथ के निधन के चलते हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने 1.96 लाख वोटों से यह सीट जीती थी लेकिन विधानासभा चुनाव में पार्टी ने यह बढ़त खो दी. कांग्रेस को यहां से विधानसभा चुनाव में महज तीन सीटें मिली. दो-दो सीटें बीजेपी, बसपा और एक निर्दलीय के खाते में गई.

विधानसभा चुनाव के परिणामों के हिसाब से बात की जाए तो कांग्रेस अलवर ग्रामीण और राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में अच्छी लीड हासिल करेगी. वहीं बीजेपी बहरोड़ और मुंडावर में बढ़त बनाएगी. बीजेपी किशनगढ़बास और अलवर शहर से भी आगे रह सकती है. रामगढ़ सीट पर कांग्रेस खुद को मजबूत मानकर चल रही है लेकिन तिजारा से बसपा विधायक होने के चलते टेंशन में दिख रही है.

जातिगत समीकरण
अलवर का चुनाव मोदी लहर और जातिगत होने के कारण कांटे का हो गया है. पिछले नौ चुनाव में बीजेपी ने लोकसभा मेंं सात बार यादव जाति के नेता को टिकट दिया है. इस बार भी पार्टी ने यादव उम्मीदवार पर दांव खेला है. लिहाजा एक बार फिर मुकाबला यादव बनाम अन्य जातियों के बीच बनता दिख रहा है. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस की जीत की राह मजबूत हो जाएगी. लेकिन बालकनाथ इस समीकरण को भांपते हुए यादवों के अलावा अन्य वोटों को हासिल करने के लिए मोदी लहर पर सवार हो गए है और मोदी मोदी की माला जप रहे है.

अलवर में करीब 18 लाख 62 हजार 400 मतदाता है जिनमें करीब 3.6 लाख यादव, 4.5 लाख दलित, 3.35 लाख मेव मुस्लिम, 1.4 लाख जाट, 1.15 लाख ब्राह्मण, एक लाख वैश्य और बाकी अन्य जातियों के वोट बैंक है. सबसे अहम निर्णायक वोट दलित वोट बैंक है. जो इन वोटों को साध पाएगा, जीत उसी की हो जाएगी.

बालकनाथ यादव हैै और कांग्रेस ने उपचुनाव में नाइट वाचमैन की तर्ज पर उतारे गए मौजूदा सांसद करण सिंह यादव का टिकट काट दिया लिहाजा यादव वोटर्स कांग्रेस से खफा है. बहरोड़ में यादवों के एकतरफा बालकनाथ के साथ जाने की पूरी संभावना है. कांग्रेस प्रत्याशी को इस नुकसान का पूरा ज्ञान भी है. मुंडावर में जाट भाजपा विधायक मंजीत चौधरी के चलते बीजेपी के पाले में जाने की की संभावना है. लिहाजा भंवर जितेन्द्र सिंह को मेव मुस्लिम और मीणावाटी राजगढ़ में मीणा मतदाताओं के एकतरफा वोट लेने होंगे.

बसपा से होने वाले नुकसान की भरपाई में जुटे जितेंद्र सिंह
विधानसभा चुनाव में बसपा अलवर में बड़ी ताकत बनकर उभरी थी. बसपा ने तिजारा और किशनगढ़बास सीट पर जीत दर्ज की थी जबकी मुंडावर में दूूसरे नंबर पर रही थी. इस बार बसपा ने इमरान खान को यहां से टिकट दिया है. इमरान सीधे रुप से कांग्रेस के मेव मुस्लिम औऱ एससी वोटों में सेंध लगाने की कोशिश करेंगे. हालांकि लेकिन धरातल पर फिलहाल ऐसा नजर नहीं आ रहा.

मुस्लिम वोटर्स इमरान और बसपा दोनों में रुचि नहीं दिखा रहे. मुस्लिम वोटर्स इमरान को वोट देने से मोदी राज में कांग्रेस को होने वाले नुकसान से भलीभांंति परिचित है. लिहाजा जानकारों और मुस्लिम वोटर्स का मिजाज देखें तो वो कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. दलितों के वोट जरुर बसपा लेते दिख रही है. ऐसे में भंवर जितेंद्र सिंह बसपा से होने वाले नुकसान को कवर करने में जुटे हुए हैं.

चुनाव में तीसरा पहलू कर रहा है काम
इन तमाम सियासी और जातिगत समीकरणों के बीच अलवर के कईं मतदाताओं का मिजाज बहुत कुछ बयां करता है. लोगों का कहना है कि साधु और संन्यासियों को धार्मिक कार्यों में रुचि दिखाई चाहिए न की सियासत में. लोगों ने कहा कि महंत चांदनाथ को सांसद चुना तो उन्होंने कुछ नहीं किया. वहींं कुछ वोटर्स ने कहा कि बालकनाथ जीतते है तो फिर हमें यहां से काम के लिए उनके पास हरियाणा जाना होगा. ऐसे में साफ है कि लोगों में बाहरी होने का मुद्दा काम कर रहा है.

एक चौंकाने वाली बात निकलकर यह भी आई है कि लोग 2009 में भंंवर जितेंद्र सिंह के केंद्र में मंत्री रहतेे हुए अलवर में कराए गए कामों को अब भी याद कर रहे हैं. जितेंद्र सिंह की साफ सुथरी छवि भी लोगों को रास आ रही है. इन सबके बीच साइलेंट वोटर्स के मूड को भांपना बहुत कठिन है लेकिन तमाम फैक्टर और समीकरणों के बीच मोदी लहर अब भी बरकार है.