चौथे चरण का चुनाव प्रचार बंद, 71 सीटों पर मतदाता चुनेंगे सांसद

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लोकसभा चुनाव में तीन चरण का मतदान हो चुका है. चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होने जा रहा है जिसमें 9 राज्यों की 71 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. यह चरण बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण है. क्योकिं 2014 में इन सीटों पर बीजेपी को जबरदस्त कामयाबी मिली थी. वही कांग्रेस के हाथ निराशा लगी थी. इस चरण में बीजेपी के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती है जबकि कांग्रेस यहां 2009 की तरह अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में दोबारा वापसी के लिए दिन रात एक कर रहे हैं. वही राहुल गांधी अपनी खोई … Read more

चौथे चरण के चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन, यूपी में दिग्गजों का जमावड़ा

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देश में लोकसभा चुनाव का चौथा चरण शुरू होने जा रहा है. चौथे चरण के लिए मतदान 29 अप्रैल को होंगे जिसमें 9 राज्यों की 71 सीटों पर वोटिंग होगी. आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है. ऐसे में सियासी मैदान के सबसे बड़े गढ़ यूपी में आज दिनभर दिग्गजों का जमावड़ा देखने को मिलेगा. आज यहां सबसे व्यस्त कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैं. पीएम मोदी आज यूपी में 3 जनसभाओं को संबोधित करेंगे. मोदी की पहली जनसभा दोपहर 12 बजे कन्नौज में होनी हैं. उसके बाद दोपहर 12.30 बजे हरदोई और तीसरी व अंतिम जनसभा दोपहर 2 बजे सीतापुर में है. प्रधानमंत्री श्री @narendramodi 27 अप्रैल 2019 को … Read more

उत्तरप्रदेश: मैदान में नहीं, फिर भी इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी

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यूपी के लोकसभा चुनाव में कई सियासी धुरंधर ऐसे हैं जो खुद तो चुनावी दंगल में नहीं उतरे लेकिन उनके परिवार के सदस्य या नजदीकी के मैदान में होने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. हालात कुछ ऐसे हैं कि खुद चुनाव लड़ने पर वह जितनी मेहनत करते, उससे कहीं ज्यादा मेहनत उन्हें अपने ‘प्रियजन’ की कामयाबी के लिए करनी पड़ रही है. ऐसे ही कुछ नेताओं के बारे में यहां बताया जा रहा है.

राम गोपाल यादव – समाजवादी पार्टी
राम गोपाल यादव को समाजवादी पार्टी का थिंक टैंक माना जाता है. राम गोपाल यादव वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं. मुलायम सिंह की तरह चुनाव के दौरान पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी उनके कंघों पर भी होगी लेकिन फिरोजाबाद सीट उनके लिए भी अहम बन गई है. यहां से उनके पुत्र अक्षय यादव सपा के टिकट पर मैदान में हैं. हालांकि, अक्षय इस सीट से मौजूदा सांसद भी हैं लेकिन इस बार उनकी टक्कर किसी और से नहीं बल्कि अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से है.

कल्याण सिंह – बीजेपी
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह भले ही संवैधानिक पद पर हों, लेकिन यूपी की एटा सीट उनकी प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखी जा रही है. दो बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के बेटे राजवीर एटा संसदीय सीट से एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं. 2014 का लोकसभा चुनाव राजवीर अपने पिता कल्याण सिंह की सीट एटा से जीत चुके हैं. वर्तमान में राजवीर इसी सीट से सांसद हैं. मैदान में भले ही राजवीर सिंह हों लेकिन दांव पर इज्जत कल्याण सिंह की लगी हुई है.

स्वामी प्रसाद मौर्य – बीजेपी
बसपा छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में आए स्वामी प्रसाद मौर्य योगी सरकार में मंत्री हैं. उनके ऊपर भी लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी है. फिलहाल उनका पूरा ध्यान बदायूं सीट पर केंद्रित है. दरअसल इस सीट से बीजेपी ने मौर्य की बेटी संघमित्रा को उतारा है. उसके साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बदायूं सीट समाजवादियों का गढ़ है और अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव इस सीट से लगातार चुनाव जीतते आए हैं. ऐसे में संघमित्रा की सफर बदायूं सीट पर आसान नहीं होगा.

पीएल पुनिया – कांग्रेस
रिटायर्ड आईएएस पीएल पुनिया सपा और बसपा के करीबी संबंध होने के बावजूद कांग्रेस से राजनीति कर रहे हैं. वर्तमान में राज्यसभा सदस्य होने के साथ वह छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमिटी के प्रभारी भी हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में पीएल पुनिया राजधानी से सटी बाराबंकी सीट से सांसद रहे लेकिन पिछली बार मोदी लहर में हार गए. इस बार बाराबंकी से उनके पुत्र तनुज पुनिया कांग्रेस के टिकट से मैदान में हैं. अब यह सीट पुनिया के लिए नाक का सवाल बनी हुई है.

राम लाल राही – कांग्रेस
1991 में कांग्रेस की नरसिंम्हा राव सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे रामलाल राही मिश्रिख संसदीय सीट से दो बार सांसद रहे. उनके पुत्र बीजेपी में हैं और वर्तमान में हरगांव सीट से विधायक हैं. रामलाल राही ने पिछले दिनों फिर कांग्रेस में वापसी की. कांग्रेस ने राही की पुत्रवधु मंजरी राही को उनकी लोकसभा सीट मिश्रिख से मैदान में उतारा है. चुनाव भले ही बहू लड़ रही है लेकिन प्रतिष्ठा तो रामलाल राही की ही दांव पर है.

अमर सिंह – बीजेपी
भारतीय राजनीति में अमर सिंह कोई अनजाना नाम नहीं है. यूपी से अपना सियासी सफर शुरू करने वाले अमर सिंह कभी मुलायम सिंह के दाहिने हाथ माने जाते थे अब उनका हाथ बीजेपी के साथ है. अमर सिंह की खास मानी जाने वाली अभिनेत्री जया प्रदा ने भी हाल ही में सपा का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामा है और पार्टी के टिकट पर रामपुर से मैदान में हैं. हालांकि वह पूर्व में भी इसी सीट से सपा सांसद रह चुकी हैं. सीधी टक्कर सपा के आजम खान से है. अगर जया प्रभा यहां से चुनाव हारती हैं तो किरकिरी तो अमर सिंह की ही होगी न.

उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में पेराशूटी उम्मीदवारों के भरोसे कांग्रेस!

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सत्ता की कुर्सी के लिए जरूरी जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए राजनैतिक दलों के लिए पार्टी की नीति और कार्यकर्ताओं से किए गए वादे कोई महत्व नहीं रखते. जैसे ही चुनाव करीब आते हैं, राजनैतिक दल अपने वादों से उलट जुगाड़ू और जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर देते हैं. ताजा उदाहरण के तौर पर कांग्रेस को ही देख लीजिए. पिछले लोकसभा और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से वादा किया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी अपने कार्यकर्ताओं पर विश्वास कर उन्हें चुनाव लड़वाएगी लेकिन चुनाव आते ही कांग्रेस अध्यक्ष अपने द्वारा किए गए वादों को भूल बैठे. नतीजा यह रहा कि यहां एक-दो नहीं बल्कि करीब डेढ़ दर्जन ऐसी सीटें हैं जहां पार्टी हाईकमाल ने बाहरी या जुगाड़ू प्रत्याशियों पर दांव खेला है. आइए जानते हैं पेराशूटी उम्मीदवारों के बारे में-

इटावा:
पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को किनारे कर हाईकमान ने इस सीट पर चंद दिनों पहले बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए अशोक दोहरे को मैदान में उतारा है. अशोक दोहरे वर्तमान में यहां से सांसद हैं और टिकट कटने पर कांग्रेस में शामिल हो गए. इस सीट पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह प्रबल दावेदार बताए जा रहे थे.

सीतापुर:
कांग्रेस ने सीतापुर सीट पर भी हाल ही में पार्टी ज्वॉइन करने वाली कैसरजहां को टिकट दिया है. कैसरजहां सीतापुर सीट से बसपा के टिकट पर 2009 में सांसद चुनी गई थीं लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला. नाराज कैसरजहां ने बसपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया. यहां से पूर्व मंत्री अम्मार रिजवी जैसे कई दिग्गज टिकट मांग रहे थे.

देवरिया:
पूर्वांचल की इस सीट पर कांग्रेस ने नियाज अहमद को पंजे का चुनाव चिंह देकर चुनावी दंगल में उतारा है. नियाज अहमद कुछ दिन पहले ही बसपा छोड़ कांग्रेस में आए हैं. पार्टी में शामिल होते ही उन्हें कांग्रेस ने गिफ्ट स्वरूप देवरिया से टिकट थमा दिया. जबकि इससे पहले कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को यहां से चुनाव लड़ाने का आश्वासन दिया था. विधानसभा चुनावों के बाद से ही अखिलेश लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे लेकिन अब सब शांत हो गया है.

बांदा:
बुंदेलखंड की बांदा संसदीय सीट पर कांग्रेस ने दस्यु सरगना बाल कुमार पटेल पर दांव लगाया है. चुनाव से पहले सपा पार्टी छोड़ पार्टी में शामिल हुए पटेल का उस क्षेत्र में खासा वोट बैंक माना जाता है. इस सीट से कांग्रेस के पूर्व मंत्री विवेक सिंह टिकट मांग रहे थे. दिल्ली हाईकमाल सहित आला नेताओं ने उन्हें आश्वासन के ​साथ चुनावी तैयारियों में जुटने का आश्वासन भी दिया था.

मोहनलालगंज:
लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर कांग्रेस ने राम शंकर भार्गव को दिया टिकट वापिस लेकर पूर्व मंत्री आरके चौधरी को मैदान में उतारा. पहले इस सीट पर भार्गव को टिकट दिए जाने का ऐलान किया जा चुका था और उन्होंने जनसंपर्क भी शुरू कर दिया था. लेकिन पार्टी ने भार्गव से मुंह मोड़कर जिताऊ प्रत्याशी के चक्कर ने बसपा से पार्टी में शामिल हुए आरके चौधरी को टिकट थमा दिया.

बहराइच:
इस सीट पर कांग्रेस में अपनों को छोड़ जुगाड़ू प्रत्याशी के रूप में सावित्री बाई फुले को हाथ का साथ दिया है. फुले 2014 में बीजेपी के टिकट पर यहां से सांसद चुनी गई थीं, लेकिन इस बार टिकट कटने से उन्हें कांग्रेस की याद आयी. टिकट घोषणा से पहले यहां से पूर्व सांसद कमल किशोर कमांडो मजबूत दावेदार माने जा रहे थे.

यूपी की इन सीटों पर पेराशूटर

  • हरदोई : वीरेंद्र कुमार वर्मा – बीजेपी
  • मिश्रिख : मंजरी राही – बीजेपी
  • जौलान : बृजलाल खाबरी – बीएसपी
  • फतेहपुर : राकेश सचान – सपा
  • बासगांव : कुश सौरभ – रिटायर्ड आईपीएस
  • बिजनौर : नसीमुद्दीन सिद्दीकी – पिछले चुनाव के बाद कांग्रेस में आए
  • गौतमबुद्धनगर : डॉ. अरविंद सिंह चौहान – बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह के पुत्र
  • घोसी : बाल कृष्ण चौहान – बीएसपी
  • बस्ती : राज किशोर सिंह – सपा
  • भदोही : रमाकांत यादव – बीजेपी
  • आगरा : प्रीता हरित – भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोड़ कर आईं
  • मुरादाबाद : इमरान प्रतापगढ़ी – पहली बार राजनीति में, प्रतिष्ठित शायर

यूपी: महागठबंधन की संयुक्त जनसभा रामपुर-फिरोजाबाद में, शिवपाल यादव होंगे निशाने पर

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उत्तरप्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव फिरोजाबाद और रामपुर में आज साझा रैली करेंगे. फिरोजाबाद में मायावती और अखिलेश बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी अक्षय यादव के लिए वोट मागेंगे. अक्षय मुलायम के भाई रामगोपाल के पुत्र हैं जिनका मुकाबला उनके चाचा शिवपाल यादव से होगा. फिरोजाबाद जनसभा में सपा-बसपा के निशाने पर मुख्य तौर पर शिवपाल यादव ही होंगे. अखिलेश से अदावत के बाद शिवपाल ने चुनाव से पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया है. शिवपाल ने प्रदेश की अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए है. बीजेपी ने यहां से चन्द्रसेन चादौन को अपना प्रत्याशी बनाया है. यह भी पढ़ें: 24 साल बाद चुनावी … Read more

मुलायम सिंह ने खेला आखिरी चुनाव का कार्ड, कहा- भारी बहुमत से जिताना

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कहते हैं राजनीति में कोई किसी का परमानेंट दुश्मन या दोस्त नहीं होता है. यह बात आज उस समय बिल्कुल सटीक बैठी जब पिछले ढ़ाई दशक से धुर-विरोधी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती एक मंच पर साथ दिखे. यह घटना भारतीय सियासत की ऐतिहासिक तस्वीर बन गई जिसका गवाह बना उत्तरप्रदेश का मैनपुरी. यहां चुनावी महारैली के मंच पर सपा नेता पिता-पुत्र मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच में बसपा सुप्रीमो मायावती बैठी थीं. दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे की ओर देख मुस्कुराए और एक-दूसरे के संबोधन पर तालियां भी बजाई. सपा और बसपा के बीच 1995 के बाद ऐसी तकरार हो गई थी कि उसे … Read more