BJP के केंद्रीय नेतृत्व के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी जोधपुर सीट

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लोकसभा चुनाव के रण में ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने पूरा जोर लगा रखा है. राजस्थान में दोनों ही पार्टियां ‘मिशन-25’ के साथ मैदान में हैं. इसे हासिल करने के लिए दिग्गज नेता जमकर पसीना बहा रहे हैं. वैसे तो दोनों पार्टियों की सभी सीटों पर नजर है, लेकिन जोधपुर सीट पर फोकस सबसे ज्यादा है. जोधपुर से बीजेपी ने मोदी सरकार के मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को मौका दिया है. अब तक के चुनाव प्रचार में यह माना जा रहा था कि यह सीट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए प्रतिष्ठा … Read more

राजसमंद में बीजेपी-कांग्रेस के करोड़पति उम्मीदवार निकले बे‘कार’

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17वीं लोकसभा के गठन के लिये देशभर में लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है. मरुधरा में चुनाव के पहले फेज में राजसमंद सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. राजसमंद से बीजेपी ने जयपुर घराने की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी तो कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष देवकीनंदन गुर्जर पर दांव खेला है. दोनों ही प्रत्याशी धन कुबेर हैं, लेकिन बे‘कार’ हैं.

जी हां, आपने सही सुना. धनकुबेर हैं, लेकिन बे‘कार’ हैं. दोनों ने अपने नॉमिनेशन में यह बात स्वीकार की है. दीया कुमारी की ओर से दिए गए हलफनामे के अनुसार उनके पास 16.59 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है. इसमें 92,740 लाख रुपये की चल संपत्ति, 64.88  लाख रुपये के गहने, 1.08 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति, और 12.39 करोड़ रुपये की बैंक व पोस्ट ऑफिसों में नकद जमा है. दीया ने माना है कि उनके पास कोई वाहन नहीं है.

वहीं, देवकीनंदन गुर्जर के पास कुल 13 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है. इसमें 1.93 करोड़ रुपये की चल संपत्ति, 5.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति, 2 लाख रुपये नकद, 2 लाख रुपये बैंक व पोस्ट ऑफिस में जमा,  1.57 करोड़ रुपये कंपनी, न्यास आदि में निवेश, 84 हजार रुपये के गहने और 18.48 लाख रुपये की अन्य संपत्तियां शामिल हैं. उनके पास भी कोई कार नहीं है. हालांकि वे एक ट्रैक्टर जरूर है.

ऐसे में राजसमंद सीट से चुनाव लड़ रहे दोनों प्रत्याशी भले ही लग्जरी कारों के काफिलों के साथ अपने प्रचार में जी जान से जुटे हैं, लेकिन उनके चुनावी हलफनामे को देखकर तो ये ही कहा जा सकता है कि दोनों ही प्रत्याशी भले ही मालदार हों मगर बे‘कार’ हैं.

 

 

राष्ट्रपति कोविंद पर टिप्पणी के बाद गहलोत की सफाई, कहा-गलत परोसा गया बयान

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राजस्थान के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी अशोक गहलोत ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लेकर दिये गये अपने बयान पर सफाई दी है. गहलोत ने ट्वीट कर कहा है कि कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. वे राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं. वह खुद राष्ट्रपति से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर उनकी सादगी और व्यक्तित्व से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि मेरे बयान में ऐसा कुछ नहीं था जैसा कि मीडिया बता रहीं हैं. गहलोत के इस बयान के बाद बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी मांगने को कहा है. It is very unfortunate that my comments during PC have been misquoted by … Read more

दिग्गी के सामने चुनौती पेश करेंगी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

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देश में लोकसभा चुनाव का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है. इससे ऐन वक्त पहले बीजेपी ने मध्य प्रदेश की चार सीटों पर उम्मीदवारों की एक नई लिस्ट जारी की है. इस सूची में गुना, सागर, विदिशा और भोपाल सीट का नाम शामिल है. भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बनाया गया है जो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के सामने ताल ठोकेंगी. इनके अलावा, बीजेपी ने गुना से डॉ. केपी यादव, सागर से राज बहादुर सिंह और विदिशा से रमाकांत भार्गव को टिकट देकर चुनावी दंगल में उतारा है. List of BJP candidates for ensuing general election to the legislative assembly 2019 of Madhya Pradesh by BJP … Read more

राजस्थान : श्रीगंगानगर में अंदरूनी कलह से परेशान बीजेपी और कांग्रेस

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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र में इन दिनों मौसम अलग-अलग करवटें ले रहा है, वहीं चुनावी मौसम में राजनीतिक पारा भी चढ़ता दिख रहा है. एक तरफ बीजेपी ने यहां से जीतकर चार बार दिल्ली पहुंचने वाले निहालचंद चौहान पर दांव खेला है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी खासे विचार-विमर्श के बाद पूर्व सांसद भरत मेघवाल पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है. बता दें कि, गंगानगर लोकसभा सीट का एक दिलचस्प इतिहास रहा है कि यहां से कभी कोई गैर मेघवाल सांसद नहीं बना. वर्तमान में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के निहालचंद मेघवाल यहां से सांसद हैं.

प्रदेश की गंगानगर लोकसभा सीट पर भले ही शुरू से ही कांग्रेस हावी रही हो, लेकिन बात की जाए पिछले दो दशकों की तो बीजेपी ने यहां अच्छी खासी पैठ जमाई है. बीजेपी के यहां पैर जमाने का श्रेय वर्तमान सांसद व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद चौहान को दिया जाता है, जिन्हें यहां की जनता ने चार बार जितवाकर दिल्ली भेजा है. वहीं, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में निहालचंद को पटकनी देने वाले कांग्रेस प्रत्याशी भरत मेघवाल अब फिर से मैदान में है. यहां कांग्रेस के मजबूत नेता की छवि रखने वाले भरत समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों में भी अच्छी पकड़ वाले माने जाते हैं.

श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के दबदबे के तिलिस्म को तोड़ने वाले निहालचंद को इस बार टिकट की पूरी उम्मीद थी और वे पहले से ही लोगों से संपर्क में जुट चुके थे. पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषणा के बाद निहाल ने अपना प्रचार अभियान और तेज कर दिया. इस क्षेत्र में पड़ने वाली कृषि मंडी क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर मत व समर्थन के लिए डटे हुए हैं और केन्द्र सरकार की योजनाओं और मोदी लहर के चलते अच्छे रेसपोंस का दावा भी किया जा रहा है.

वहीं खासी कसमकश के बाद कांग्रेस का टिकट पाने वाले पूर्व सांसद भरत मेघवाल भी प्रचार में जुटे हैं और पार्टी के घोषणा पत्र के साथ किसान कल्याण जैसे दावों की बात कर लोगों के बीच पहुंच रहे हैं. हांलाकि भरत मेघवाल का चुनाव प्रचार अभी निहालचंद के मुकाबले धीमा बताया जा रहा है. आलम ये है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में तो भरत मेघवाल के चुनाव कार्यालय तक अभी नहीं खोले गए हैं. लेकिन जनता के बीच पहुंचना जारी है.

वहीं, दोनों ही प्रत्याशियों के लिए पार्टी की अंदरूनी नाराजगी चिन्ता का विषय है. जिससे भितरघात तक का खतरा दोनों उम्मीदवारों के लिए मंडरा रहा है. हांलाकि प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कहीं दिखाई नहीं पड़ रहा है. बात करें, गांव-गली और कस्बे-शहर के आम मतदाता की तो कहीं मोदी लहर और एयरस्ट्राईक के बाद माहौल में तब्दिली देखी जा रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस भी जनता के मूड को अब साफ तौर पर सत्ता बदलने वाला बता रही है. अपने-अपने दावे ठीक है लेकिन आखिरी फैसला तो जनता को ही करना तय है.

बता दें कि, बीते साल के विधानसभा चुनाव में जीत कर प्रदेश की सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं. वहीं कम मत प्रतिशत अंतर से हारी बीजेपी इस हार की भरपाई करने की रणनीति अपनाने में लगी है. गौरतलब है कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत कर आने वाली बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में अलवर और अजमेर की सीट कांग्रेस के हाथों गंवा बैठी. वहीं, साल 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने 73 सीटों के साथ बीजेपी को विपक्ष बिठाया और 99 सीटों के साथ कांग्रेस को सत्ता सौंपी.

गौरतलब है कि, श्रीगंगानगर जिले की पांच और हनुमानगढ़ की तीन विधानसभा को मिलाकर कुल 8 विधानसभा श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र में आती हैं. जिसमें गंगानगर जिले की सादुलशहर, गंगानगर, करनपुर, सूरतगढ़ और रायसिंह नगर विधानसभा और हनुमानगढ़ जिले की सांगरिया, हनुमानगढ़ और पिलीबंगा विधानसभा सीट शामिल हैं. 2018 की आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में इस 8 सीटों में से 4 पर बीजेपी, 3 पर कांग्रेस और 1 पर निर्दलीय उम्मदीवार ने जीत दर्ज की. जिसमें बीजेपी ने सूरतगढ़, रायसिंह नगर, सांगरिया और पीलीबंगा सीटें जीती, जबकि कांग्रेस ने सादुलशहर, करनपुर और हनुमानगढ़ की सीट पर कब्जा जमाया, वहीं गंगानगर सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की.

अब बात करते हैं गंगानगर लोकसभा सीट पर अब तक बने सांसदों की तो शुरू से ही कांग्रेंस का इस सीट पर दबदबा रहा है. आजादी के बाद हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर 10 बार जीत दर्ज की, जबकि 4 चार बार बीजेपी का कब्जा रहा. वहीं 1 बार जनता पार्टी और 1 बार भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत दर्ज की. साल 1952 से 1971 तक लगातार 5 बार कांग्रेस के पन्नाराम बारूपाल यहां से सांसद रहे, जबकि साल 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर बेगाराम ने इस सीट पर कब्जा जमाया. साल 1980 और 1984 में कांग्रेस के बीरबल राम यहां से सांसद रहे, लेकिन 1989 में जनता पार्टी के टिकट पर बेगाराम ने एक बार फिर वापसी की.

तो वहीं, साल 1991 में कांग्रेस से बीरबल राम एक बार फिर सांसद बने. तो वहीं साल 1996 के चुनाव में बीजेपी ने युवा नेता और पूर्व सांसद बेगाराम के पुत्र निहालचंद मेघवाल को टिकट दिया जिन्होंने कांग्रेस के बीरबल राम को शिकस्त दी. साल 1998 के हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शंकर पन्नू ने जीत दर्ज की तो वहीं साल 1999 में बीजेपी से निहालचंद मेघवाल ने वापसी की. इसके बाद साल 2004 का चुनाव में निहालचंद फिर सांसद बने लेकिन साल 2009 के चुनाव में निहालचंद कांग्रेस के भरतराम मेघवाल से चुनाव हार गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में निहालचंद मेघवाल ने चौथी बार इस सीट पर कब्जा जमाया और केंद्र सरकार में मंत्री बने.

पीएम मोदी ने महाराष्ट्र में खेला जाति कार्ड, कहा- पिछड़ा हूं इसलिए कह रहे चोर

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा कथित ‘सभी मोदी चोर हैं ‘ बयान पर देश की सियासत गर्माती जा रही है एक ओर सुशील मोदी ने कानूनी पेच के जरिए राहुल गांधी को घेरने की कोशिश की है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी नेताओं ने भी राहुल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जिससे कांग्रेस अध्यक्ष की मुश्किलें लगातार थमने की बजाए और बढ़ती नजर आ रहीं हैं. इसी बीच पीएम मोदी ने महाराष्ट्र में राहुल गांधी को घेरते हुए जाति कार्ड खेल दिया है. पीएम मोदी ने यहां माढा में चुनावी सभा से राहुल गांधी पर देश के चौकीदारों और पिछड़े समाज को गाली देने का सीधा आरोप … Read more

भाटी के गढ़ में गायब हुई बीजेपी, नहीं दिख रहे पार्टी के झंडे-बैनर

लोकसभा चुनावों को लेकर राजस्थान में बीजेपी के सबसे बड़े अंसतोष की बात की जाए तो वो बीकानेर में देखने को मिला, जहां पार्टी ने अर्जुन मेघवाल को तीसरी बार टिकट दिया तो इसके विरोध में कद्दावर नेता देवी सिंह भाटी ने एक बार फिर पार्टी को अलविदा कह दिया. इन दिनों बीकानेर सहित पूरे राजस्थान में मौसम का पारा तो गर्म है ही साथ ही राजनीति का पारा भी कुछ ज्यादा ही गर्मी दे रहा है. भाटी के बीजेपी छोड़ने के बाद अब भाटी के गढ़ कोलायत में पार्टी की स्थिति लचर नजर रही है, आलम ये है कि कहीं भी पार्टी का झंडा-बैनर तक नजर नहीं आ रहा … Read more

‘असली-नकली’ प्रत्याशी के फेर में बिहार की बांका लोकसभा सीट, त्रिकोणीय मुकाबला !

देश में चल रहे चुनावी समर में हर प्रत्याशी अपने तरीके से चुनाव प्रचार में लगा है. कोई नई योजना लाने के साथ मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के वादे करता दिख रहा है तो कोई स्थानीय मुद्दों को शीर्ष तक पहुंचाने का भरोसा दिला मतदाताओं का मन जीतने में लगा है लेकिन बिहार की एक लोकसभा सीट की राजनीति में नया ट्विस्ट सामने आया है. जहां एक निर्दलीय प्रत्याशी अपने आपको न सिर्फ केन्द्र के सत्ताधारी एलाइंस का केंडिडेट बताकर वोट मांग रही है बल्कि उनकी योजनाएं और करवाए गए विभिन्न कामों को भी गिना रहीं है. इस पसोपेश में केवल एनडीए का असली प्रत्याशी ही नहीं बल्कि मतदाता … Read more

लोकसभा चुनाव: आज थम जाएगा दूसरे चरण के चुनावी प्रचार का शोर

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लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 13 राज्यों की 97 सीटों पर चुनावी प्रचार का शोर आज शाम पांच बजे थम जाएगा. दूसरे चरण के चुनावी में तमिलनाडु की 39, कर्नाटक की 14, महाराष्ट्र की 10, यूपी की आठ, बिहार और ओडिशा की पांच-पांच, छतीसगढ़ की तीन, जम्मू-कश्मीर की दो और मणिपुर, त्रिपुरा और पुडुचेरी की एक-एक सीट पर मतदान होगा. बता दें, देश में कुल सात चरणों में लोकसभा चुनाव संपन्न होंगे. पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को हो चुका है. बड़े नेताओं की किस्मत का होगा फैसला चुनाव के दूसरे चरण में देश के बड़े नेताओं की किस्मत दांव पर है. मोदी सरकार के चार मंत्रियों की … Read more