‘नाथूराम गोडसे देशभक्त एवं प्रज्ञा ठाकुर शांति के नोबेल पुरस्कार की विजेता’

Politalks News

सोशल मीडिया पर आज भोपाल सीट पर बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान जमकर वायरल हो रहा है. उन्होंने बयान दिया, ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे और हमेशा रहेंगे.’ हालांकि पार्टी के दवाब और विपक्ष के हंगामे के बाद उन्होंने अपने बयान पर माफी मांग ली लेकिन तब तक साध्वी प्रज्ञा और उनका यह विवादित बयान सोशल मीडिया की सुर्खियों में छा गया. इस पर अलग-अलग तरह के कमेंट और मीम बनने लगे. सबसे उपर ब्रूस वायने का एक ट्वीट रहा जिसमें उन्होंने लिखा कि नाथूराम गोडसे देशभक्त एवं महात्मा गांधी आतंकवादी और प्रज्ञा ठाकुर शांति के नोबेल पुरस्कार की विजेता हैं. @WaizArd20 “NathuRam Godse was Desh Bhakt and Mahatma … Read more

आज के दिन बनी थी देश में गैर-कांग्रेसी दल की पहली पूर्ण बहुमत सरकार

PoliTalks news

देश मे लोकसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी एक सप्ताह शेष है. इससे पहले आज एक खास दिवस है. दरअसल, पांच साल पहले आज के ही दिन यानि 16 मई को भारत के इतिहास में पहली बार किसी गैर कांग्रेसी दल को बहुमत मिला था. यह सरकार थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार. इस सरकार को 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटों पर कामयाबी मिली थी. हिंदी पट्टी के राज्यों में तो बीजेपी ने विपक्ष का सूपड़ा ही साफ कर दिया था. कई राज्यों में तो कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड़ और हिमाचल प्रदेश की सभी सीटें बीजेपी के … Read more

बंगाल में एक दिन पहले प्रचार थमने पर भड़का विपक्ष

politalks.news

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद कल देर रात चुनाव आयोग ने बंगाल में सभी दलों के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है. यह रोक तय समय सीमा से 19 घंटे पहले लगाई गई है. चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद विपक्षी पार्टियों ने काफी सवाल खड़े कर दिए हैं. बीएसपी सुप्रीमो मायावती, प्रकाश करात और रणदीप सूरजेवाला ने कहा कि चुनाव आयोग को रोक ही लगानी थी तो हिंसा के बाद ही क्यों नहीं लगाई. इसके लिए गुरुवार का इंतजार क्यों किया गया है. नेताओं ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में हालात इतने खराब है तो रोक … Read more

क्या यूपी में गठबंधन से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ है?

PoliTalks news

सपा और बसपा का साथ आना यूपी की सियासत में ‘दो ध्रुवों का एक साथ’ हो जाने जैसा रहा. इसकी चर्चा पूरे देश में है. जाहिर है कि जब चर्चा इतना असर दिखाए तो वोटर्स का प्रभावित होना लाज़मी है. अब तक हुए छह चरणों के चुनाव में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. कुछ एक सीटों को छोड़ दें तो गठबंधन के ज्यादातर प्रत्याशी खुद-ब-खुद यह संदेश देने में सफल रहे कि बीजेपी से मुकाबले में वही हैं. कांग्रेस के बड़े नाम तो पूरी लड़ाई में यही साबित करने में रह गए कि वे भी चुनाव लड़ रहे हैं.

शुरुआत अमरोहा के चुनाव से करते हैं. यहां से कांग्रेस ने राशिद अल्वी को टिकट दिया था. टिकट मिलने के कुछ दिन के भीतर ही उन्होंने निजी कारणों से के चलते अपना टिकट वापस कर दिया. कांग्रेस को बाद में यहां से सचिन चौधरी को मैदान में उतारना पड़ा. ऊपरी तौर पर भले ही यह कहा गया हो कि उन्होंने निजी कारणों से टिकट वापस किया, लेकिन भितरखाने के लोग हकीकत बयां करते हैं कि गठबंधन के प्रत्याशी के सामने लोग उन्हें ‘वोट कटवा’ मान रहे थे. ऐसे में उन्होंने चुनाव न लड़ना ही मुनासिब समझा.

इसी तरह, सहारनपुर में कांग्रेस उम्मीदवार रहे इमरान मसूद की भी सारी ताकत यही साबित करने में लगी रही कि वह बीजेपी के उम्मीदवार राघव लखनपाल से सीधे मुकाबले में हैं. दूसरी तरफ गठबंधन के उम्मीदवार हाजी फजलुर्रहमान को वोटर्स में यह संदेश देना आसान था कि उनके पास वोटर्स का अंकगणित कहीं अधिक मजबूत है.

सपा-बसपा और आरएलडी के अपने बेस वोट बैंक हैं जबकि कांग्रेस के पास इस तरह के वोट बैंक की कमी है. ऐसे में साफ है कि बेस वोट बैंक का अंकगणित महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में गया है. इस संगठन से जो भी मैदान में उतरा, उसके पास सपा, बसपा और आरएलडी के वोट एकमुश्त थे. ऐसे में उसे केवल मजबूती से चुनाव लड़ना है. बाकी की राह उसके लिए कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले आसान रही.

वहीं, कांग्रेस का सिंबल पाने वाले नेताओं को भी यह साबित करना कठिन रहा कि वह गठबंधन के बेस वोट के बावजूद ज्यादा मजबूत हैं. कुछ एक अपवादों को छोड़ दें तो ज्यादातर जगहों पर यही स्थिति बनी रही. उन्नाव सीट पर कांग्रेस की अन्नू टंडन, कानपुर सीट पर श्रीप्रकाश जायसवाल आदि नेताओं की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा केवल गठबंधन उम्मीदवार के वोटों के अंकगणित से भारी दिखाने में लगा.

वैसे भी सपा, बसपा और बीजेपी के इतर कांग्रेस को मूवमेंट बेस्ड पार्टी माना जाता है. अगर चुनाव के समय कांग्रेस अपने मूवमेंट से लोगों को जोड़ पाती है तो परिणाम बेहतर दिखाई देते हैं. अन्यथा उसके पास करने के लिए कुछ खास नहीं होता है. 2009 में किसानों की कर्जमाफी की बात को जिस तरह से कांग्रेस ने ऊपर तक पहुंचाया था, उसका असर परिणाम के रूप में भी मिला. पार्टी यूपी में 21 सीटें जीतने में कामयाब रही.

इस बार कांग्रेस ने चुनाव मैदान में जाते हुए जनता के लिए न्यूनतम आय योजना का बड़ा वादा किया. लेकिन स्थिति यह रही कि वह इस वादे के बारे में जनता को पूरी तरह बता पाने में ही असफल रह गई. अधिकतर लोग इस योजना के बारे में अनभिज्ञ हैं जिससे वोटर्स के साथ कांग्रेस का जुड़ाव उस हद तक नहीं हो सका जितना उसे अपना असर छोड़ने के लिए जरूरी था.

वहीं, दूसरी तरफ गठबंधन का उम्मीदवार अपने जातीय अंकगणित से अपने लिए वोटर्स में अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा. उसका मजबूत कैडर बैकअप भी उसके लिए जनता के बीच पहुंचा. इस तरह से गठबंधन का उम्मीदवार बीजेपी से मुकाबले में दिखा जबकि कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी और लड़ाई बीजेपी बनाम गठबंधन के तौर पर वोटर्स के बीच पहुंच गई.

अमित शाह ने कोलकाता हिंसा के लिए टीएमसी को ठहराया जिम्मेदार

PoliTalks News

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में अमित शाह के रोड-शो में हुई हिंसा के लिए बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है. एक प्रेस कॉन्फेंस कर अमित शाह ने कहा कि देश में लोकसभा चुनाव के छह चरण संपन्न हो चुके हैं और बंगाल को छोड़कर देश के किसी भी हिस्से से हिंसा की खबरें नहीं आ रही हैं. इसका मतलब साफ है कि हिंसा सिर्फ टीएमसी के गुंडे ही कर रहे हैं. शाह ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी सिर्फ 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि बीजेपी पूरे देश में चुनाव लड़ रही है. अगर बीजेपी हिंसा करती तो देश के सभी हिस्सों से हिंसा की … Read more

बिहार: क्या नीतीश कुमार एनडीए से बगावत करने की तैयारी कर रहे हैं?

politalks News

आम चुनाव के आखिरी चरण में 19 मई को बिहार की आठ सीटों के लिए वोटिंग होगी.  इन सीटों में से महज एक नालंदा सीट पर जेडीयू का कब्जा है. पांच सीटें सासाराम, पटना साहिब, पाटलीपुत्र, आरा और बक्सर बीजेपी के खाते में है जबकि एक सीट पर रालोसपा और एक पर निर्दलीय का कब्जा है. यानी कि सातवें चरण का चुनाव बीजेपी के लिए काफी अहम है.

सातवें चरण के मतदान ठीक पहले एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने बिहार को विशेष राज्य दिए जाने की अपनी पुरानी मांग फिर से दोहराना शुरू कर दिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हम पंद्रहवें वित्त आयोग के सामने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग रखेंगे, क्योंकि बिहार के सर्वांगीण विकास के लिए यही स्थाई समाधान है. बिहार का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा.’

जेडीयू के दूसरे नेताओं ने भी केसी त्यागी के बयान का समर्थन किया है. इतना ही नहीं, जदयू ने ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की उस मांग का भी समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की है. पार्टी का मानना है कि पिछड़ेपन के चलते बिहार और ओडिशा दोनों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए.

जेडीयू के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं और अब नवीन पटनायक ने भी यही मांग की है. दोनों ही राज्य पिछड़े हैं और बाढ़, तूफान और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं अक्सर आती हैं. इन राज्यों के संसाधन का एक बड़ा हिस्सा इन आपदाओं से निबटने में जाया हो जाता हैं इसलिए दोनों राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए.

लोकसभा चुनाव का आखिरी चरण पूरा होने से पहले ही जेडीयू का फिर से विशेष राज्य का मुद्दा उठाना कई सवाल खड़े करता है. क्या जेडीए के रुख में यह बदलाव नतीजे आने के बाद बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर की ओर इशारा कर रहा है? क्या नीतीश कुमार का बीजेपी से फिर से मोहभंग हो गया है? क्या जेडीयू ने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है?

जानकार बताते हैं कि तमाम सर्वेक्षणों में बीजेपी को कम सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है. अगर ऐसा होता है तो बीजेपी को अन्य सहयोगी दलों की जरूरत पड़ेगी. इतना ही नहीं, अभी जो पार्टियां उनके साथ हैं, संभव है कि बीजेपी को कम सीट आने की सूरत में उसे छोड़ कर दूसरे खेमे में चली जाएं. इसलिए बीजेपी को मौजूदा सहयोगियों का साथ भी चाहिए होगा. जदयू का शीर्ष नेतृत्व इससे अच्छी तरह वाकिफ है और उसे यह भी पता है कि ऐसे मौकों पर ही बीजेपी पर दबाव डाला जा सकता है.

सातवें चरण के चुनाव से ठीक पहले विशेष राज्य का दर्जा देने के घिसे राग को फिर से अलाप कर जेडीयू बीजेपी नेतृत्व को दबाव में रखने की कवायद कर रही है. केसी त्यागी के बयान से पहले जदयू एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी भी एक बयान देकर सियासी अटकलों को हवा दे चुके हैं. आपको बता दें कि बलियावी ने पिछले दिनों नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग की थी.

गुलाम रसूल बलियावी ने कहा था, ‘अगर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को महसूस हो रहा है कि उनकी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिल पाएगा, तो एनडीए को चाहिए कि वह नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाए.’ बलियावी के इस बयान के राजनीतिक विश्लेषक कई मतलब निकाल रहे हैं. कोई इसे बीजेपी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कवायद बता रहा है तो कोई तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की स्थिति में नीतीश को चेहरा बनाने की कोशिश बता रहा है.

इस चर्चा के बीच यह काबिलेगौर है कि चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज की जगह अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं. ऐसा इसलिए है ताकि बाद में जेडीयू को अच्छी सीट मिलने की सूरत में बीजेपी यह न जता सके कि उसके चलते जेडीयू ने ज्यादा सीटें जीतीं. बिहार में जेडीयू ही नहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के तेवर भी बदलने लगे हैं. हाल ही में पार्टी के सांसद और राम विलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ने कहा कि बीजेपी को राम मंदिर की जगह विकास के मुद्दे पर फोकस करना चाहिए.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम के बाद बिहार में सियासी उलटफेर की संभावना सबसे ज्यादा है, क्योंकि जेडीयू और एलजेपी हर हाल में ये कोशिश करेंगे कि सत्ता में बने रहें. अगर केंद्र में एनडीए की सरकार बनने की संभावना कमजोर होती है तो जेडीयू और एलजेपी खेमा भी बदल भी सकते हैं. एलजेपी मुखिया को तो वैसे भी चुनावी मौसम विज्ञानी कहा जाता है, क्योंकि वह हमेशा सत्ताधारी पार्टियों के साथ ही गठबंधन करते हैं.

इधर, पिछले सात-आठ सालों में जेडीयू ने भी जिस तेजी से अपना खेमा बदला, उसे देख कर पुख्ता तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आने वाले समय में वे अन्य गठबंधन में शामिल नहीं होंगे. गौरतलब है कि आम चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर भी जेडीयू ने बीजेपी पर खासा दबाव बनाया था, जिसके चलते ही बीजेपी जीती हुई पांच सीटों का नुकसान उठाना पड़ा और महज दो लोकसभा सीटें जीतनेवाले जेडीयू को 17 सीटें दी गईं.

जानकार बताते हैं कि क्षेत्रीय पार्टियों के लिए इस तरह के मौकों का फायदा उठाना आम बात है. पूर्व में भी ये पार्टियां अपनी सहूलियत के हिसाब से खेमा बदलती रही हैं, इसलिए इस बार भी ऐसा ही कुछ हो, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. जेडीयू के बयान को लेकर विपक्षी पार्टियों ने एनडीए पर हमला शुरू कर दिया है. पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव लगातार कह रहे हैं कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार एनडीए को छोड़ सकते हैं.

आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने विशेष राज्य के दर्जे की जेडीयू की मांग पर कहा कि नीतीश कुमार आखिरी चरण के चुनाव से पहले पैंतरा बदल रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह बीच में लंबे समय तक इसको लेकर चुप्पी साधे रहे और अब दोबारा यह मुद्दा उछाल रहे हैं. शिवानंद तिवारी मानते हैं कि नीतीश कुमार बीजेपी पर दबाव भी बनाना चाहते हैं, लेकिन वह ये एहसास भी जताते रहना चाहते हैं कि वह लालू प्रसाद यादव को लेकर सॉफ्ट नहीं हैं.

शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव पर जुबानी हमले को नीतीश कुमार ने और तीखा कर दिया है. वह बीजेपी को बताना चाहते हैं कि उनके लिए लालू यादव विकल्प नहीं हैं. आखिरी चरण के मतदान से पहले एनडीए की सहयोगी पार्टियों का ये रुख चुनाव बाद बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है. ऐसे में ये देखने वाली बात होगी कि बीजेपी इस चुनौती से कैसे निपटती है.

बंगाल में बवाल पर वीडियो-वीडियो खेल रही टीएमसी और बीजेपी

PoliTalks bnews

कोलकाता में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कल किए गए रोड शो के दौरान भड़की हिंसा में हुए उत्पात की आग तो शायद ठंड़ी नहीं हुई लेकिन अब इस मामले पर टीएमसी और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए वीडियो-वीडियो का खेल रही हैं. दोनों पार्टियों ने कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करते हुए इन्हें सबूतों के तौर पर पेश किया है और हिंसा की वजह एक-दूसरे पर मढ़ दिया. बात दें, मंगलवार शाम को कोलकाता में अमित शाह के एक रोड शो में टीएमसी और बीजेपी समर्थक एक-दूसरे से भिड़ गए थे. हिंसा भड़कती देख रोड शो को रद्द कर दिया गया. इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस … Read more

राहुल ने मोदी पर ली चुटकी, पूछा- क्या बारिश में सभी विमान हो जाते हैं रडार से गायब?

PoliTalks

सियासत में बयानों का बड़ा महत्व है. कई बार ऐसा होता है कि बयान नेता के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. ऐसा ही कुछ प्रकरण प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के साथ हुआ है. पीएम मोदी ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान बादल छाए रहने से भारतीय वायुसेना के विमानों को रडार से बचने में मदद मिली थी. उनके इस बयान पर राहुल गांधी ने चुटकी ली है. राहुल गांधी ने बयान पर कहा, ‘मोदीजी के अनुसार जब भी भारत में तुफान और बारिश आती है तो सारे विमान रडार की रेंज से बाहर हो जाते है.’ अभिनेता अक्षय कुमार को … Read more