बिहार: पीएम मोदी की चुनावी सौगातों की मिठास ने मिटाई विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने की कड़वाहट

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Politalks.News/Bihar Election. विधानसभा चुनाव की आहट होते ही बिहार के दिन फिर गए हैं, इस राज्य के लोगों के चेहरों पर खूब मुस्कुराहट आ गई है. चुनाव जीतने के लिए इस समय सभी पार्टियों ने चुनावी मैदान में पसीना बहाते हुए नजर आ रही हैं. ऐसे में केंद्र की बीजेपी सरकार भी मैदान में उतर चुकी है. विधानसभा चुनाव से पहले ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेहरबानी से बिहार मालामाल होता जा रहा है‘. पिछले एक माह से पीएम मोदी इस ‘राज्य को सौगात पर सौगात‘ दिए जा रहे हैं. राज्य में चुनाव से पहले विकास योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन का सिलसिला लगातार जारी है. ‘बिहार भी पिछले 5 वर्षों … Read more

बिहार में पीएम मोदी ने एक बार फिर खोला चुनावी सौगातों का पिटारा, 5 दिनों में हुई 16000 करोड़ की घोषणाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार

Politalks.News/Bihar. बिहार में विधानसभा चुनावों की तारीखें जल्द ही जारी होने की संभावना है इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमपी के साथ अब बिहार की जनता के लिए अपनी चुनावी सौगातों का एक बार फिर पिटारा खोल दिया है. पिछले 5 दिनों में पीएम मोदी ने तीसरी बार अपनी घोषणाओं की सौगातों से बिहार की जनता को लुभाया है. मंगलवार को पीएम मोदी ने बिहार में नमामि गंगे से जुड़ी कई प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की. प्रधानमंत्री ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रनिर्माण के इस काम में बहुत बड़ा योगदान बिहार का भी है, बिहार तो देश के विकास को नई ऊंचाई देने वाले लाखों इंजीनियर देता … Read more

बिहार: सीटों के बंटवारे पर कोई विवाद नहीं, एनडीए में ही रहेंगे चिराग- देवेंद्र फडणवीस

Bihar Election

Politalks.News/Bihar. बिहार विधानसभा चुनाव के प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट तौर पर कहा कि चिराग पासवान कहीं नहीं जा रहे और लोजपा एनडीए गठबंधन के बैनर में ही चुनाव लड़ेगी. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद पर भी इनकार किया है. उन्होंने कहा कि लोजपा एनडीए के साथ है और तीनों दल (भाजपा-जदयू-लोजपा) साथ मिलकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. फडणवीस ने विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत का दावा करते हुए कहा कि चुनाव में महागठबंधन का सफाया हो जाएगा. बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने लोजपा प्रमुख चिराग पासवान का पक्ष लेते हुए कहा कि कई बार दलों … Read more

वि.स.चुनाव से पहले बिहार में पीएम मोदी की सौगातों की बहार, कई परियोजनाओं का किया उद्घाटन

Bihar

Politalks.News/Bihar. बिहार में आगामी महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को कई सौगातें दीं. बिहार में कई सौगाते देते हुए पीएम मोदी ने ‘प्रधानमंत्री मतस्य संपदा योजना’ को लॉन्च किया. इसके साथ ही प्रदेश के जिलों में कई अन्य योजनाओं का शिलान्यास किया. पीएम मोदी ने यहां वर्चुअल माध्यम से ‘ई-गोपाला ऐप’ को भी लॉन्च किया. इस ऐप के माध्यम से पशुपालकों को उन्नत पशुधन को चुनने में आसानी होगी और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी, साथ ही पशुपालकों को उत्पादकता से लेकर उसके स्वास्थ्य और आहार से जुड़ी तमाम जानकारियां मिलेंगी. इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार … Read more

नीतीश ने किया चुनाव प्रचार का शंखनाद, साधे जातिगत समीकरण तो संबोधन में ‘चिराग’ पर वार

Bihar

Politalks.News/Bihar. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज अपने बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान का शंखनाद कर दिया. सोमवार को वर्चुअल रैली ‘निश्चय संवाद’ के माध्यम से सीएम नीतीश कुमार ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को संबोधित किया. जदयू प्रदेश मुख्यालय के कर्पूरी सभागार के मंच पर इस दौरान करीब 15 पार्टी नेताओं को जगह दी गई जिसमें करीब करीब सभी जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास करने को ​कोशिश की गई. मंच पर बिराजे नेताओं में कुर्मी, दलित, भूमिहार से लेकर ब्राह्मण और यादव समुदाय तक को साधने की कवायद दिखी. खास बात यहां ये रही कि पार्टी नेताओं ने एनडीए में शामिल लोजपा और पार्टी … Read more

बिहार चुनाव: क्या एक बार फिर नीतीश कुमार के सारथी बन पाएंगे अनुभवी शरद यादव?

Sharad Yadav And Nitish Kumar Bihar

Politalks.News/Bihar. बिहार की राजनीति के भीष्म पितामाह तुल्य शरद यादव (Sharad Yadav) की जदयू में वापसी की बड़ी तेज चर्चा है. हालांकि ढलती उम्र के साथ शरद यादव का वो जनाधार बिहार की राजनीति में नहीं रहा लेकिन जेपी आंदोलन से उपजे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और शरद यादव की केमेस्ट्री कृष्ण और अर्जुन से कम नहीं है. शरद यादव हाल में स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटे हैं लेकिन महागठबंधन में होने के बावजूद न तो राजद और न ही कांग्रेस का कोई नेता उनके हालचाल जानने पहुंचा. दूसरी ओर, जदयू के नेताओं सहित नीतीश कुमार ने फोन पर उनका हालचाल जाना. जदयू के नेता तो उनसे मिलने अस्पताल … Read more

चुनाव विशेष: सोशल कैंपेनिंग के जरिए राजद की नैया पार लगा पाएंगे तेजस्वी यादव!

Tejashwi Yadav Bihar Election 2020

Politalks.news/Bihar. बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें आने में अभी कुछ दिन और लगने वाले हैं, इसलिए पार्टियों ने अपनी अपनी रणनीतियों का काम शुरु कर दिया है. हालांकि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन के चलते देशभर में सात दिन का राजकीय शोक जारी किया है जिसके चलते कुछ दिन सभी प्रस्तावित कार्यक्रम आगे-पीछे हो सकते हैं. पहले से प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी आज वर्चुअल रैली के जरिए बिहार चुनाव का बिगुल बजाने वाले थे, तो सीएम नीतीश कुमार की पहली चुनावी रैली 6 सितम्बर को रखी गई थी. बीजेपी भी 13 सितम्बर से अपने चुनावी प्रचार की शुरुआत करने वाली है. वहीं दूसरी ओर, राजद पिछले एक साल … Read more

बिहार चुनाव में आज से बजेगा कांग्रेस का चुनावी बिगुल, 21 दिन में होंगी 100 वर्चुअल रैलियां

Rahul Gandhi In Bihar Election

Politalks.News/Bihar. बिहार की सियासत में पिछले तीन दशकों से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस इस बार पूरे जोश में है और प्रदेश की राजनीति में दम तोड़ती तस्वीर को पुनर्जीवित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है. बिहार से सटे झारखंड में 22 में से 17 सीटने जीतने के बाद ऐसा दमखम स्वभाविक भी है. अगर बिहार में कांग्रेस को पिछले चुनावों की तुलना में सफलता मिलती है तो दिल्ली चुनाव की हार को भूल फिर से पार्टी खड़ी हो सकती है, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है. इसी दिशा में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक सितम्बर यानि आज बिहार के चुनावी अभियान का बिगुल फूंकने जा रहे हैं. … Read more

चुनाव स्पेशल: गजब की है बिहार की सियासत, 20 साल में 6 बार सीएम बने नीतीश कुमार, तीन बार मुख्यमंत्री बदले

Bihar Election 2020

Politalks.news/Bihar. बिहार में अब विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चली है. कोरोना के चलते रैलियां तो नहीं हो रहीं, लेकिन वर्चुअल रैलियों का दौर जारी है. फिलहाल चुनाव आयोग ने अभी बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन राजद ने डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए अपना चुनाव प्रचार शुरु कर दिया है. जदयू 6 सितम्बर से अपनी डिजिटल रैली की शुरुआत करने वाली है तो भाजपा 13 सितंबर से चुनाव प्रचार शुरू करने जा रही है. वहीं दल-बदल और जोड़-तोड़ का गेम तो पहले से शुरु हो गया है. वैसे देखा जाए तो बिहार की सियासत काफी अजब गजब रही है.

बीते 20 सालों में यहां एक बार राष्ट्रपति शासन लगने के बावजूद 6 बार चुनाव हुए हैं और इस दौरान नीतीश कुमार 6 बार मुख्यमंत्री बने हैं. तीन बार मुख्यमंत्री भी बदले गए हैं. इन 20 सालों में कुल आठ बार सीएम का शपथ ग्रहण हुआ जिसमें नीतीश कुमार 6 बार, राबड़ी देवी और जीतनराम मांझी एक-एक बार मुख्यमंत्री बने.

अगर हम बिहार विधानसभा के पिछले 20 साल के दौरान हुए चुनावों पर गौर करें तो कई चीजें सामने आती हैं. एक बात सबसे खास है बिहार में, यहां जब जब वोटिंग परसेंटेज बढ़ा है, वर्तमान सरकार को ही फायदा हुआ है. लेकिन ये भी सच है कि यादव कुनबे के राज जाने के बाद कभी भी वोटिंग परसेंटेज 60 फीसदी तक भी नहीं हुआ. सबसे ज्यादा वोटिंग पिछले चुनावों में हुई लेकिन यहां भी जदयू ने राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. उस समय 56 फीसदी वोटिंग हुई थी. उससे पहले का वोटिंग परसेंटेज केवल 52 फीसदी था.

एक समय था जब बिहार में कांग्रेस का एकक्षत्र राज हुआ करता था. आजादी के बाद 1989 तक कांग्रेस के 14 मुख्यमंत्रियों ने बिहार में राज किया लेकिन उसके बाद कांग्रेस बिहार में कभी वापसी नहीं कर पाई और न ही कभी चुनौती दे पाई. 1990 के चुनाव में कांग्रेस को 71 सीटें जरुर मिली लेकिन 1995 में 29 सीटों पर सिमट गई. उसके बाद कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता गया. 2015 के चुनाव में नीतीश के साथ आने से जरूर कांग्रेस को फायदा हुआ, लेकिन पिछले 30 सालों कांग्रेस कभी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं आ सकी.

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शुरुआत करें साल 2000 से जब बिहार से झारखंड का बंटवारा नहीं हुआ था. उस समय कुल 324 सीटें हुआ करती थीं. चारा घोटाले में नाम आने के बाद लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी उनकी बागडोर संभाल रही थीं. इस चुनाव में कुल 62.6 फीसदी वोट पड़े लेकिन बहुमत किसी को नहीं मिला. इसमें राजद को 28.3 फीसदी, भाजपा को 14.6 फीसदी और समता पार्टी (अब जदयू) को 8.7 फीसदी वोट मिले थे. समता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को बहुमत न होने के बावजूद तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी जिसको लेकर राजद ने जमकर विरोध किया. इस विरोध के चलते नीतीश की सरकार केवल सात दिन ही चली और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से एक बार फिर से राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनीं.

इसके बाद आया फरवरी 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव जो सच में बिहार की राजनीति का टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. इस चुनाव के बाद बिहार में राजद का ग्राफ गिरता चला गया. इस चुनाव में कुल 46.5 फीसदी वोटिंग हुई जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 16 फीसदी कम रही. वजह रही कि झारखंड बिहार से अलग हो गया था. 210 सीटों पर हुए इस चुनाव में राजद को सबसे ज्यादा 75 सीट और जदयू को 55 सीट मिली. यहां लोजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और 29 सीटें जीतने में कामयाब हुई. उस समय सत्ता की चाबी लोजपा के पाले में थी. अगर लोजपा राजद को सपोर्ट करती तो कांग्रेस के समर्थन से उनकी सरकार बन सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और आखिरकार राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

अक्टूबर में फिर से चुनाव हुए और इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन को बहुमत मिला. इसके साथ ही बिहार में 15 साल से शासन कर रहे लालू राज का अंत हुआ. नीतीश कुमार दूसरी बार सीएम बने. इस चुनाव में कुल 45.85 फीसदी वोट पड़े थे. इसमें सबसे ज्यादा राजद को 23.45 फीसदी वोट मिले लेकिन जीत मिली महज़ 54 सीटों पर. जदयू को 20.46 फीसदी वोटों के साथ 88 सीटों पर जीत मिली.

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साल 2010 यानि नीतीश कुमार के पांच साल के कार्यकाल के बाद यह पहला चुनाव था. जिस तरह से उन्होंने पांच साल के दौरान रोड मैप दिया था, उससे साफ था कि इस बार चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं होने वाला है. नीतीश कुमार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सीएम बन गए. भाजपा-जदयू गठबंधन ने 206 सीटें हासिल की थीं यानी 84 फीसदी सीटें इस गठबंधन के खाते में गई थीं. इस दौरान 52.71 फीसद वोटिंग हुई यानि यानी पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 7 फीसदी ज्यादा. यहां राजद तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई और उसे केवल 22 सीटें मिली. बीजेपी 91 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी. कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन करते हुए केवल चार सीटों पर जीत दर्ज कर पाई.

इसके बाद आया साल 2015 का चुनाव. 2015 का विधानसभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था. इस चुनाव में वर्षों के यार जुदा हो गए थे और पुराने धुर विरोधी एक हो गए थे. 20 साल बाद लालू और नीतीश एक साथ मिलकर महागठबंधन (जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी) के रूप में चुनाव लड़ रहे थे, जबकि दूसरी ओर भाजपा, लोजपा और रालोसपा मिलकर उनका मुकाबला कर रही थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को भरपूर समर्थन मिला था. भाजपा गठबंधन ने 40 में से 31 सीटें जीती थीं और मोदी लहर भी अपने उफान पर थी. माना जा रहा था कि मुकाबला जोरदार होगा, लेकिन परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे. अकेले राजद को जितनी सीटें मिली थीं उतनी सीटें तो भाजपा अपने सहयोगियों को मिलाकर भी नहीं हासिल कर पाई. राजद एक बार फिर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. राजद को 80, जदयू को 71, कांग्रेस को 27 तो मोदी लहर के बावजूद बीजेपी को 53 सीटें मिली. नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम. हालांकि, लालू और नीतीश का गठबंधन ज्यादा दिन नहीं रह सका. जुलाई, 2017 में नीतीश ने इस्तीफा दे दिया और बाद में भाजपा के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री बन गए.

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इन 20 सालों में हुए बिहार के विधानसभा चुनावों को देखें तो एक चीज साफ होती है कि बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है, तब-तब मौजूदा सरकार को ही फायदा हुआ है और उसी सरकार की वापसी हुई है. 1995 के चुनाव में 61.8 फीसदी तो 2000 में 62.6 फीसदी वोट पड़े. दोनों समय राजद गठबंधन की सरकार बनी. जैसे ही वोटिंग परसेंट नीचे गया, सरकार पलट गई और नीतीश कुमार सरकार सत्ता में आ गई. 2005 से 2015 तक हर वोटिंग परसेंट बढ़ा और सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर गई. हालांकि इस बार के चुनाव में कोरोना संक्रमण के चलते वोटिंग घटने की आशंका है. अगर ऐसा होता है तो किंवदंती ही सही लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार को इस बात का डर सबसे अधिक लग रहा है.