मोदी सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने का वाद महज जुमला: सांसद बेनीवाल

किसानों की कर्ज माफी से केंद्र का साफ इनकार, वित्त मंत्री सीतारमण ने दी जानकारी, राजस्थान के किसान 1.92 करोड़ रुपए के कर्जदार

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने किसान कर्ज माफी मामले में केंद्र सरकार की कथित उदासीनता पर गहरी निराशा और दु:ख व्यक्त किया है. सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सांसद बेनीवाल ने कहा कि देश के किसानों पर 31 लाख 34 हजार 808 करोड़ का कृषि कर्ज बकाया है, जबकि राजस्थान के किसान 1,92,293 करोड़ कृषि कर्ज के कर्जदार हैं. किसानों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है. इसके बावजूद किसानों की पूर्ण ऋण माफी हेतु कोई योजना केंद्र सरकार के विचाराधीन नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कर्ज के आंकड़े किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को झुमला साबित करते है.

सांसद बेनीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप जड़ते हुए कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को लाभान्वित करने की बात कहकर केंद्र की सरकार किसानों के असली मुद्दों को भटकाना चाहती है, जबकि देश के किसानों को सशक्त बनाने के लिए एक बार किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी आवश्यक है. उन्होंने किसान सम्मान निधि को एक लाख रुपए वार्षिक करने की भी मांग सरकार के समक्ष रखी है.

सदन में कर्ज माफी को वित्त मंत्री की स्पष्ट ‘ना’

लोकसभा में किसानों पर बढ़ते कर्ज व किसानों की कर्ज माफी के संदर्भ में जब नागौर सांसद ने प्रश्न पूछा, तो जवाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसानों की पूर्ण ऋण माफी हेतु कोई योजना केंद्र सरकार के विचाराधीन नहीं है. इस पर सांसद बेनीवाल ने कहा कि उनका (वित्तमंत्री) यह जवाब उन किसान भाइयों के लिए बेहद दु:खद है, जो खेती में लगातार घाटा झेलते हुए कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और परिवार चलाने के लिए संघर्षरत हैं.

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सांसद ने कहा कि वित्त मंत्री ने जवाब मे यह स्वीकार किया है कि देशभर में भी विगत तीन वित्तीय वर्षों (2022-23 से 2024-25) में कुल कृषि ऋण वितरण में 15% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ोतरी हुई है. इससे स्पष्ट है कि किसानों पर कर्ज और बढ़ता जा रहा है, लेकिन किसानों को राहत नहीं मिल रही. उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों से साफ है किसानों पर कितना भारी कर्जे का बोझ है. किसानों को जल्द राहत के लिए सरकार को ​ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.