Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय जयपुर पर पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की मौजूदगी में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले को सरकार और प्रशासन द्वारा जानबूझकर दबाने का प्रयास किया गया है. भाजपा राज में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं ने प्रदेश और देश के छात्रों के सपनों पर कुठाराघात किया है, लेकिन सरकार इस पर पूरी तरह मूकदर्शक बनी हुई है.
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए उनकी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि देश में तीन साल से लगातार नीट का पेपर लीक हो रहा है, लेकिन शिक्षा मंत्री इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं. नेता प्रतिपक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि देश में पेपर लीक होने की संख्या अब शतक के आसपास पहुंच चुकी है, फिर भी सरकार की जवाबदेही पूरी तरह शून्य बनी हुई है. उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस विफलता के लिए तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और देश के करोड़ों पीड़ित बच्चों व उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए. इसके साथ ही जूली ने एनटीए (NTA) जैसी संस्था के गठन के औचित्य पर भी सवाल उठाए.
भाजपा नेताओं की संलिप्तता और मामले की जांच में हुई ढिलाई को लेकर टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार मुख्य आरोपी की एक दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं, इसके बावजूद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का यह कहना कि 'फोटो खिंच गई तो कोई बात नहीं और पेपर लीक हो गया तो कोई बड़ी बात नहीं है', बेहद गैर-जिम्मेदाराना है. जूली ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद भी पुलिस ने पूरे 9 दिनों तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने अंदेशा जताया कि थानाधिकारी के पास जब शिकायत आई होगी, तो उसने उच्च अधिकारियों से पूछा होगा और ऊपर बैठे रसूखदारों के इशारे पर ही रिपोर्ट दर्ज नहीं होने दी गई ताकि माफियाओं को बचाया जा सके.
टीकाराम जूली ने आगे आरोप लगाया कि इस पूरे गिरोह में कई बड़े चेहरे और 'मगरमच्छ' शामिल हैं, जिन्हें बचाने के लिए जानबूझकर राजस्थान में मुकदमा दर्ज करने से बचा गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान का पेपर लीक विरोधी कानून केंद्र के कानून से दस गुना अधिक मजबूत है, जिसमें अपराधियों के लिए आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है. इसी कड़े कानून के डर से भाजपा सरकार ने यहाँ एफआईआर दर्ज नहीं होने दी. उन्होंने मांग की कि स्वयं को छोटी मछली बताने वाले पकड़े गए आरोपियों के खुलासे के आधार पर उन बड़े मगरमच्छों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए जो पर्दे के पीछे रहकर युवाओं का भविष्य बेच रहे हैं.
वही भाजपा की नीतियों पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा सरकार पेपर लीक के मामलों को 'नकल' या 'गेस पेपर' बताकर हमेशा ठंडे बस्ते में डाल देती है. उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले अलवर में भी भाजपा नेता के कॉलेज से पेपर लीक हुआ था, लेकिन सरकार ने उसे लीक न मानकर केवल नकल की एफआईआर दर्ज की और मामले को दबा दिया. अब नीट मामले में भी एसओजी इसे केवल एक 'गेस पेपर' बता रही है, जिस पर कटाक्ष करते हुए जूली ने पूछा कि ऐसा कौन सा भविष्यवक्ता आ गया जो हूबहू पूरा का पूरा पेपर ही गेस कर रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना बंद करे, क्योंकि कांग्रेस पार्टी देश और प्रदेश के छात्रों के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक आर-पार की लड़ाई लड़ेगी.












