कारगिल विजय दिवस विशेष ‘हम अपने खून से लिखेंगे कहानी ऐ वतन मेरे’

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किसी शायद ने क्या खूब लिखा है …

हम अपने खून से लिखेंगे कहानी ऐ वतन मेरे,
करे कुर्बान हंस कर ये जवानी ऐ वतन मेरे.
दिली ख्वाइश नहीं कोई मगर ये इल्तजा बस है,
हमारे हौसले पा जाये मानी ऐ वतन मेरे.

देश के हर किसी नौजवान के दिल से आज कुछ ऐसी ही भावनाएं बहती दिखेंगी. आज कारगिल विजय दिवस है. कारगिल विजय को आज पूरे 20 साल हो गए हैं लेकिन वे पुरानी यादें आज भी सभी के​ दिलोंदिमाग में ताजा हैं. असल में आज का दिन पाक के साथ हुए कारगिल युद्ध का आखिरी दिन है और इसे विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व है. भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई, 1999 के बीच कश्मीर के कारगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है. कारगिल युद्ध करीब 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को उसका अंत हुआ. यह युद्ध ऊंचाई वाले इलाके पर हुआ था. भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और पाकिस्तानी सेना को सीमा में वापिस जाने को मजबूर किया. पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ सेना की ओर से की गई कार्रवाई में भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए तो 1363 से अधिक घायल हुए.

इस लड़ाई में पाकिस्तान के करीब तीन हजार सैनिक मारे गए थे. हालांकि पाक का दावा है कि उसके 357 सैनिक ही मारे गए. इस युद्ध में भारत ने जमीन से बोफोर्स तोपें और हवा में 32 हजार फीट की ऊंचाई से एयर पावर का उपयोग किया. मिग-27 और मिग-29 का बखूबी इस्तेमाल कर भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी सेना की धज्जियां बिखेर कर रखी दी. इसके बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाने के निर्देश दिए.

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