क्या ये है आखिरी लॉकडाउन या आगे और भी..? क्या है भविष्य का रोडमैप?

कांग्रेस प्रवक्ता ने मजदूरों की घर वापसी, भयंकर बेरोजगारी, ठप होते व्यवसायों व संकट से घिरी अर्थव्यवस्था से उबारने को लेकर सरकार से पूछी आगे की तैयारियां

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Randeep Singh Surjewala
Randeep Singh Surjewala

पॉलिटॉक्स न्यूज/दिल्ली. इस बार न पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया, न ही गृहमंत्री अमित शाह या कोई वरिष्ठ अधिकारी सामने आया, आया तो केवल एक अधिकारिक आदेश और वो है ‘लॉकडाउन 3.0’. गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर 17 मई तक लॉकडाउन के फेज 3 को लागू कर दिया. किसी ने देश को न बताया, न सुझाया, न रास्ता बताया, न समय सीमा बताई और न ही मुश्किल हालातों का हल. न देशवासियों के मन की बात सुनी, न अपनी कही और न ही देश के मन में उठ रहे लाखों सवालों का जवाब दिया, दिया तो बस एक आदेश ‘लॉकडाउन 3.0’.

क्या ये आखिरी लॉकडाउन है या आगे और भी..? भविष्य का रोडमैप क्या है? ऐसे ही कई सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से पूछे हैं कांग्रेस ने. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हुए मोदी सरकार से 130 करोड़ देशवासियों की तरह से 5 सवालों के जवाब मांगे हैं. साथ ही सोनिया गांधी व राहुल गांधी की ओर से सात सुझाव भी दिए हैं.

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रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पूछा है कि लॉकडाऊन 3.0 के दौरान मोदी सरकार के पास मजदूरों की घर वापसी, भयंकर बेरोजगारी, ठप्प होते व्यवसायों व संकट से घिरी अर्थव्यवस्था से उबरने का भविष्य का रोडमैप क्या है? साथ ही कहा कि 130 करोड़ देशवासी निम्न सवालों के जवाब जानना चाहते हैं..

1. लॉकडाउन 3.0 के पीछे क्या लक्ष्य हैं? क्या रणनीति व क्या रास्ता है?

2. क्या लॉकडाउन-3 आखिरी है और 17 मई को खत्म हो जाएगा? या फिर, लॉकडाउन-4 व लॉककाउन-5 भी आने वाला है? यह पूर्णतया खत्म कब होगा?

3. 17 मई तक कोरोना संक्रमण व आर्थिक संकट से उबरने का लक्ष्य क्या है? मोदी सरकार ने 17 मई तक संक्रमण, रोजी-रोटी की समस्या व आर्थिक संकट से निपटने के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किए हैं? उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 17 मई तक क्या सार्थक व निर्णायक कदम उठाए जाएंगे?

4. लॉकडाउन 3.0 से बाहर आकर देश को सुचारू रूप से पटरी पर लाने की दिशा व रास्ता क्या है? देश के भविष्य को लेकर मोदी जी की सोच व नीति क्या है? किसान की फसल कटाई, एमएसपी के भुगतान के साथ साथ खरीफ फसलों की बुआई व खाद-बीज-कीटनाशक दवाईयों की उपलब्धता का रोडमैप क्या है? 40 करोड़ से अधिक गांव-शहर के मजदूरों की रोजी रोटी व राशन की क्या व्यवस्था है? 11 करोड़ नौकरी देने वाले 4.25 करोड़ एमएसएमई इकाईयों को राहत कैसे देंगे? मध्यम वर्ग व नौकरीपेशा लोगों की बर्खास्त होती नौकरियों व काटी जा रही तनख्वाहों को रोकने का क्या रास्ता है? टूरिज्म व होटल इंडस्ट्री, कपड़ा उद्योग, कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, आॅटोमोबाइल व आईटी इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट व एविएशन इंडस्ट्री के नुकसान की भरपाई कर पुन: चालू करने की क्या रणनीति है?

5. 8 से 10 करोड़ मजदूरों की सुरक्षित व सुगम घर वापसी की टाईमलाइन व तरीका क्या है?

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सवालों के बाद सुरजेवाला ने कहा कि कोरोना से जंग मिलकर लड़ी जाएगी, न कि बीजेपी सरकार के एकछत्र रवैये से. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने बार बार ‘फाइनेंशनल एक्शन प्लान पार्ट-2’ की वकालत की है तथा अनेकों पत्र लिखे हैं. इसके तहत केंद्र सरकार को सात सुझाव सुझाये हैं जो निम्न प्रकार से हैं..

1. लाखों मजदूरों की 15 दिन में बिना किराया लिए घर वापसी करने की खातिर मोदी सरकार की ओर से सैनिटाइज की गई ट्रेन का इंतजाम किया जाए.

2. देश के गरीबों-मजदूरों-किसानों के जन-धन खातों, किसान योजना खातों, मनरेगा मजदूर खातों व बुजुर्ग-महिला-विकलांगों के खातों में सीधे 7500 रुपये डाले जाएं. साथ ही प्रति व्यक्ति 10 किलो अनाज, एक किलो दाल तथा आधा किलो चीनी दी जाए.

3. किसानों का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदें व 24 घंटे के अंदर भुगतान हो. गन्ना किसान हो या अन्य किसान, सबके हजारों करोड़ रुपये के बकाए का 7 दिनों में भुगतान हो. किसान का ब्याज माफ कर कर्ज वसूली एक साल के लिए स्थगित की जाए.
4. 11 करोड़ नौकरी देने वाली 4.25 करोड़ एमएसएमई इकाइयों को फौरन दो लाख करोड़ का तनख्वाह व ऋण गारंटी पैकेज दिया जाए.

5. मध्यमवर्गीय व नौकरीपेशा लोगों का वेतन व नौकरी की सुरक्षा का पैकेज सुनिश्चित हो तथा खत्म होती करोड़ों नौकरियों व मनमाने तरीके से काटी जा रही तनख्वाहों पर अंकुश लगे.

6. देश में कोरोना की टेस्टिंग/जांच का दायरा कई गुना बढ़ाया जाए. डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मियों को निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) मुहैया करवाएं व विशेष आर्थिक मदद दें. यही सुविधा पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों व जरूरी सेवाओं में लगे कर्मियों को भी मिले.

7. केंद्र सरकार अपनी फिजूलखर्ची पर फौरन अंकुश लगाए. प्रधानमंत्री मोदी अविलंब 20,000 करोड़ रुपये की सेंट्रल विस्टा परियोजना, 1,10,000 करोड़ रुपये की बुलेट ट्रेन परियोजना, 8,458 करोड़ की लागत से प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए जहाज की खरीद पर रोक लगाएं व भारत सरकार के फिजूल खर्चों पर 30 प्रतिशत की कटौती करें. उन्होंने कहा कि इस प्रकार से बचाए पैसे से राज्यों को कोरोना से जंग लड़ने के लिए एक लाख करोड़ का पैकेज दिया जाए व उद्योगों को क्षेत्र केंद्रित पैकेज दिया जाएं.

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