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विशेष रिपोर्ट

घायल हैं लेकिन हताश नहीं.. क्या फिर से खड़ी हो पाएंगी ममता बनर्जी?

05 जुलाई 2026
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घायल हैं लेकिन हताश नहीं.. क्या फिर से खड़ी हो पाएंगी ममता बनर्जी?

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव हारने एवं पार्टी के तीन गुटों में बंटने के बाद ममता के पास शेष हें केवल 17 सांसद और 22 विधायक, इसके बाद भी हारने को तैयार रही, बागियों को दे दी खुली चुनौती

ममता बनर्जी उर्फ 'दीदी', एक ऐसा नाम जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक ही झटके में बदलकर रख दिया. 18-20 साल की सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल पहने एक दुबली पतली लड़की, जिनके साहसिक तेवर तब सामने आए, जब उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान जयप्रकाश नारायण की कार के बोनट पर चढ़कर एक निडर और जुझारू (स्ट्रीट फाइटर) नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई. इसके बाद साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार यह मैदान में उतरीं और माकपा के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया.

 

ममता के राजनीतिक जीवन में एक अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने 1998 में कांग्रेस पर माकपा के सामने हथियार डालने का आरोप लगाते हुए अपनी नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस बना ली. एक लंबे संघर्ष के बाद जिस तरह उन्होंने बंगाल से वामपंथी सरकार को हटाया, इससे उनकी छवि भारत में एक मजबूत इरादों और कभी हार न मानने वाली महिला एवं पश्चिम बंगाल की पहली एवं इकलौती महिला मुख्यमंत्री भी बनी.

 

2011 से लेकर 2026 तक शासन की सत्ता की हैट्रिक जमाने वाली ममता बनर्जी की पार्टी इस वक्त सियासत के सबसे नाजुक मोड़ पर है. एक ओर,​ विधानसभा चुनाव हारने के बाद 80 में से 58 विधायक अलग होकर पार्टी के असली नाम एवं चुनाव चिन्ह पर दावा ठोक रहे हैं, वहीं 28 में से 20 सांसद अलग गुट में शामिल हो गए. इसके बावजूद दीदी ने हार नहीं मानी.

 

पूर्व सीएम ने अपने विरोधियों को सीधे तौर पर कहा कि अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा. साथ ही बागी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर हिम्मत है तो खुलकर BJP में शामिल हो जाओ. तुम्हें क्या लगता है कि मैं खत्म हो गई हूं? मैं जनता के बीच पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर जाऊंगी, मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता.

 

ममता ने कहा, 'जिन नेताओं ने उनके पार्टी सिंबल पर चुनाव जीता, वही अब कह रहे हैं कि 2023 के बाद पार्टी का अस्तित्व नहीं रहा. पार्टी ने ही उन्हें राजनीतिक पहचान दी, लेकिन अब वे उसी पार्टी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और खुले तौर पर बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं. अगर हिम्मत है तो खुलकर बीजेपी में शामिल हो जाइए.' उन्होंने ये भी कहा कि गद्दारी की भी एक सीमा होती है. बागी नेता अब खुलकर BJP के लिए काम कर रहे हैं.

 

उन्होंने अपने इरादे दर्शाते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक दल एक या दो लोगों पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि कार्यकर्ताओं एवं जनता के भरोसे से चलती है. उन्होंने आगे कहा कि कई ऐसे भी नेता रहे, जिन्हें गिरफ्तारी का डर था, तो उन्होंने उनके लिए घर, खाना और सुरक्षा का इंतजाम किया. आज कुछ लोगों ने केंद्रीय बलों की मदद से तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया. हालांकि इमारत पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों पर नहीं.

 

बता दें कि अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 लोकसभा एवं 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं. विधानसभा में ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं. इसके बाद भी वे हौसला हारने को तैयार नहीं है. अब देखना होगा कि नाम एवं चुनाव चिन्ह के वैधानिक संघर्ष के बाद दीदी किस तरह से अपनी पार्टी को फिर से खड़ा कर पाती हैं.

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