दो कदम पीछे हटे योगी तो अब चाणक्य की एंट्री होगी! लखीमपुर के बाद बिगड़े हालात अब सुधारेंगे शाह!

योगी को जल्द समझ आए सियासी हालात, अमित शाह के बिना नहीं बनेगी बात, यूपी से शाह की दूरी बनी थी चर्चा का विषय, यूपी को छोड़ अन्य चुनावी राज्यों में जा रहे थे शाह, पहले योगी ने अपने ही नाम-काम पर चुनाव लड़ने का किया था फैसला, लेकिन लखीमपुर कांड के बाद बैकफुट पर योगी सरकार, इससे पहले विधानपरिषद में रखा आलाकमान का मान, अब शाह ही बदलेंगे यूपी की सियासी हवाओं का रुख

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Politalks.News/UttarPradedh-Delhi. उत्तरप्रदेश में चार महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने काफी समय से यूपी की तरफ देखा भी नहीं है. भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह देश भर के राज्यों का दौरा कर रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश नहीं जा रहे हैं. इसी बीच अब भाजपा के सूत्रों का कहना है कि, ‘हालही में बीजेपी मुख्यालय में एक बैठक हुई है जिसमें अमित शाह के यूपी दौरे पर मुहर लग गई है’. लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वर्तमान सियासी हालातों को भांपते हुए दो कदम पीछे हटना पड़ा है. योगी के पीछे हटने के बाद ही अमित शाह ने उत्तरप्रदेश जाने की हां भरी है, अब ये दो कदम कौन से हैं इसकी चर्चा आगे करेंगे.

आपको बता दें, हाल के दिनों में अमित शाह कई बार अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर रहे. गुरुवार को शाह गोवा के दौरे पर थे, फिर शुक्रवार को अमित शाह पोर्टब्लेयर भी गए. बता दें, गोवा में भी उत्तर प्रदेश के साथ ही अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, जिसके चलते गोवा पहुंचे अमित शाह ने पार्टी की तैयारियों के बारे में भी नेताओं से बातचीत की. यही नहीं अमित शाह का अगले हफ्ते के आखिर में दो दिन के लिए एक और चुनावी राज्य उत्तराखंड जाने का कार्यक्रम है, यहां देवभूमि में भी अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. उसके बाद अमित शाह तीन दिन के लिए जम्मू कश्मीर जाने वाले हैं, जहां परिसीमन की काम चल रहा है और अगले साल चुनाव की संभावना है.

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तो इस तरह वर्तमान बीजेपी में नरेन्द्र मोदी के बाद नम्बर 2 के दिग्गज नेता अमित शाह उत्तर प्रदेश छोड़ कर बाकी सभी राज्यों का एक के बाद एक दौरा कर रहे हैं. अब सवाल यह कि अमित शाह उत्तर प्रदेश अभी तक क्यों नहीं गए? जबकि बीजेपी ने वहां चुनाव का बिगुल बजा दिया है. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र वाराणसी के आलावा और अलीगढ़ में भी एक बड़े कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं. आपको बता दें, अमित शाह आखिरी बार विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए यूपी गए थे, जहां उन्होंने एक कॉरिडोर का शिलान्यास भी किया था. इसी बीच बीते बुधवार को 11, अशोक रोड पर पार्टी के वार रूम में हुई एक अहम बैठक हुई जिसमें अमित शाह भी शामिल हुए, शाह के साथ ही संगठन महामंत्री बीएल संतोष, पार्टी महासचिव अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी इस बैठक में मौजूद थे. इसमें पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई. इस बैठक से जुड़े पार्टी के जानकार सूत्रों का कहना है कि, ‘अब जल्दी ही अमित शाह के उत्तर प्रदेश दौरे का कार्यक्रम बनेगा‘.
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इसमें कोई संदेह नहीं है कि अब अमित शाह उत्तर प्रदेश जाएंगे लेकिन इतनी देरी से उनका यूपी के चुनाव अभियान में उतरना कई तरह के सवाल खड़े करता है. आखिर भाजपा के मौजूदा केन्द्रीय नेताओं में उनसे बेहतर उत्तर प्रदेश को जानने वाला शायद ही कोई होगा. राजनाथ सिंह को छोड़ दें तो, अमित शाह पार्टी महासचिव के तौर पर 2014 में उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे, जिसमें भाजपा ने 72 और उसकी सहयोगी पार्टी ने एक यानी 80 में से 73 लोकसभा सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. यही नहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते 2017 के विधानसभा चुनाव की कमान भी अमित शाह ने ही संभाली थी, जिसमें भाजपा रिकार्ड 312 सीटों के साथ बहुमत में आई. इसके बावजूद इस बार अमित शाह का अभी तक उत्तरप्रदेश के चुनावी समर में नहीं उतरना बताता है कि कुछ न कुछ झोल तो कहीं न कहीं है.

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इसके जवाब में सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अकेले चुनाव लड़ने की तैयारियां कर रहे हैं और उन्होंने खुद से सारे एजेंडे तय किए हैं. यहां तक कि पार्टी आलाकमान की ओर से घोषणा किए बगैर ही योगी आदित्यनाथ ने यूपी में अपने को चेहरा बना कर अपने नाम-काम पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. यही कारण था कि पिछले दिनों खबर आई थी कि पार्टी का आला नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बहुत खुश नहीं है. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. सीएम योगी को यह अहसास हो चुका है कि बिना अमित शाह के उत्तरप्रदेश चुनाव में पार पाना नामुमकिन है. सूत्रों की मानें तो लखीमपुर कांड के बाद बैकफुट पर आई योगी सरकार और बदले चुनावी हालातों के बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने आप को दो कदम पीछे हटाया तब ही अमित शाह ने यूपी जाने का मन बनाया है. आप यहां यह भी तय मानिए की बीजेपी के असली चाणक्य अमित शाह की यूपी चुनाव में एंट्री के बाद हवाओं का रुख बदलने वाला है, जैसा कि हमने पहले बताया कि यूपी की एक-एक सियासी नस का अमित शाह को पता है.

हालांकि, सूत्र बताते हैं लखीमपुर कांड से पहले ही सीएम योगी को आभास हो गया था, यही कारण था कि हर वक़्त अपने मन की ही करने वाले योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधान परिषद के चुने गए नए सदस्य केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से चुने हैं और मंत्रिमंडल विस्तार में भी आलाकमान का पूरा मार्गदर्शन रहा है.

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