भगवा टोपी पहनने वाले अगर प्रखर हिंदुत्ववादी तो फिर RSS की टोपी काली कैसे? संघ दे जवाब- सामना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की रैली पर सवाल उठाने पर अपने मुखपत्र सामना के जरिये शिवसेना ने किया पलटवार- महाराष्ट्र में चल रही है दाऊद के नाम पर राजनीति परंतु अगर कल दाऊद कहेगा मैं भी बीजेपी में आता हूं तो फिर वो तुरंत ही हो जाएगा शुद्ध, वह मंत्री की हैसियत से बीजेपी नेताओं के साथ सटकर बैठा तो नहीं होनी चाहिए हैरानी, महाराष्ट्र में कई ओछे लोगों को केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई है सुरक्षा, बीजेपी कर रही है राज ठाकरे का इस्तेमाल, जिसके बाद वे खुद में बालासाहेब ठाकरे के आने जैसा भाव लाकर घूम रहे हैं, लेकिन फटे हुए ट्यूब में ऐसी हवा भरने से हिंदुत्व की बयार कैसे बहाओगे?

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सामना के जरिये शिवसेना ने साधा विरोधियों पर निशाना
सामना के जरिये शिवसेना ने साधा विरोधियों पर निशाना
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PolitalksNews/Maharashtra/Saamana. शनिवार को महाराष्ट्र में हुई शिवसेना प्रमुख एवं सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की विशाल रैली इन दिनों प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है. सूबे की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी ने शिवसेना की इस रैली पर जमकर कटाक्ष किये तो वहीं शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी पर जमकर पलटवार किया है. यहीं प्रदेश में जारी लाउडस्पीकर विवाद, हनुमान चालीसा सहित हिंदुत्व और सरकारी एजेंसियों के दुरूपयोग को लेकर भी शिवसेना ने अपने मुखपत्र के जरिये पटलवार किया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा गया कि, ‘शिवसेना को कमजोर आंकने और नीचे खींचने का दुस्साहस भारी पड़ेगा.’ हिंदुत्व का जिक्र करते हुए सामना में लिखा गया कि, ‘भगवा टोपी पहननेवालों को आप प्रखर हिंदुत्ववादी मानते हैं. फिर आरएसएस की टोपी काली कैसे? इस सवाल का जवाब अब संघ को देना होगा.’

शिवसेना ने एक बार फिर अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए सियासी विरोधियों पर जोरदार हमला बोला है. ‘सामना’ के संपादकीय में बीजेपी पर जोरदार प्रहार किया गया है तो वहीं RSS की काली टोपी पर भी सवाल दागे गए हैं. शनिवार को हुई शिवसेना की भव्य रैली का जिक्र करते हुए सामना में लिखा गया कि, ‘मुंबई में शिवसेना की शानदार सभा हुई. शिवसेना की सभाओं में जुटनेवाली भीड़ का आंकलन आज तक कोई नहीं कर पाया है. बीकेसी के खुले मैदान में हुई सभा की शुरुआत बांद्रा में थी तो उसका दूसरा छोर कुर्ला के पार चला गया था. लिहाजा विरोधी पार्टी के भीड़ पंडितों की भी बोलती बंद हो गई है.’ संपादकीय में आगे लिखा गया है कि, ‘सभा में भीड़ सिर्फ उसी मैदान पर नहीं थी. सभास्थल पर लाखों लोग थे, उतने ही लोग बाहर फंसे पड़े थे और आस-पास की सड़कों पर भी भीड़ की तूफानी लहर मानो उफान मार रही थी.’

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शिवसेना ने विरोधी दलों पर कटाक्ष करते हुए अपने संपादकीय में लिखा कि, ‘शिवसेना पहले वाली नहीं रह गई है, ऐसा दुष्प्रचार करनेवालों की जुबान पर यह महासागर देखकर ताला लग गया है. शिवसेना मतलब सदैव उबलते गर्म खूनवाली पीढ़ी ही है. पीढ़ियां बदलती गईं फिर भी उबलनेवाला गर्म खून वही है. शिवसेना के राजनीतिक विरोधियों का आकलन कम पड़ रहा है इसलिए शिवसेना के संदर्भ में उनका अनुमान रोज ही गलत साबित हो रहा है. कल की महाप्रचंड सभा ने तो सभी विरोधियों की मिट्टी पलीद कर दी. सभा की भीड़ देखकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी उत्साहित होकर बोले और उनकी एक-एक फटकार से विरोधियों के एक-एक दांत मुंह में चले गए.’

मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए सामना ने अपने संपादकीय में लिखा कि, ‘राज ठाकरे की राजनीति भ्रमित होने जैसी हो गई है और बीजेपी उनका इस्तेमाल कर रही है. खुद में बालासाहेब ठाकरे के आने जैसा भाव लाकर वे घूम रहे हैं, इसके पीछे बीजेपी का खेल है. फटे हुए ट्यूब में ऐसी हवा भरने से हिंदुत्व की बयार कैसे बहाओगे? देश में महंगाई, बेरोजगारी की आग भड़क रही है. मोदी अनाज मुफ्त बांट रहे हैं परंतु गैस की कीमतें हजार के पार पहुंच गई हैं इसलिए खाना पकाएं कैसे ? उस महंगाई पर बात करें या भोंगे और ‘हनुमान चालीसा’ पर लड़ें? बीजेपी को कोई हिंदुत्व की ठेकेदारी नहीं मिली है. भाजपा का हिंदुत्व जहरीला, शातिर और विकृत होने का प्रहार ठाकरे करते हैं तब इसके आगे शिवसेना-बीजेपी का रिश्ता क्या होगा, इसका खुलासा हो जाता है.’

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बीजेपी पर निशाना साधते हुए सामना ने अपने संपादकीय में लिखा कि, ‘फडणवीस जैसे बीजेपी के नेता इस सभा की तुलना ‘कटाक्ष सभा’, ‘कटाक्ष बम’ इस तरह से कर रहे थे और एक बार के लिए इसे सत्य मान लें लेकिन ठाकरे के सिर्फ ‘कटाक्ष’ ही इतने भारी होंगे तो प्रत्यक्ष घाव, प्रहार और हमला कितना भयंकर होगा? जिस तरह से कटहल छीलते हैं, उसी तरह उद्धव ठाकरे ने विरोधियों को छील डाला.’ वहीं जम्मू कश्मीर में कश्मीरी हिन्दू पंडित राहुल भट्ट पर हुए हमले को लेकर संपादकीय में कहा कि, ‘कश्मीर में फिलहाल हिंदू पंडितों पर ही नहीं, बल्कि देशभक्त नागरिकों पर आतंकियों के अमानवीय हमले शुरू हो गए हैं. राहुल भट्ट नामक कश्मीरी पंडित युवक पर आतंकियों ने सरकारी कार्यालय में घुसकर हमला किया और कत्ल कर दिया. इसके बाद कश्मीर का हिंदू समाज सड़क पर उतर आया. पुलिस ने हिंदुओं पर आंसू गैस के गोले दागे. हिंदू समाज ने मोदी-शाह के खिलाफ नारेबाजी की. उद्धव ठाकरे ने इन हालातों को लेकर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे, ‘राहुल भट को जहां मारा, वहां अब ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ी जाए क्या?’

सामना में आगे लिखा गया कि, ‘महाराष्ट्र में कई ओछे लोगों को केंद्र द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है, यह मजेदार ही है. कंगना रनौत से नवनीत राणा तक सभी को केंद्र सरकार ने एकदम खास सुरक्षा उपलब्ध कराई है. परंतु कश्मीर में राहुल भट्ट जैसे लोगों को किसी तरह की सुरक्षा नहीं है और वे दिनदहाड़े मार दिए जा रहे हैं. उद्धव ठाकरे का यह मुद्दा बेजोड़ है. भगवा टोपी पहननेवालों को आप प्रखर हिंदुत्ववादी मानते हैं. फिर आरएसएस की टोपी काली कैसे? इस सवाल का जवाब अब संघ को देना होगा.’ वहीं महाराष्ट्र में जारी एक के बाद एक सरकारी एजेंसियों के दुरूपयोग को लेकर भी शिवसेना ने अपने मुखपत्र के जरिये निशाना साधा.

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संपादकीय में आगे लिखा गया कि, ‘केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके बीजेपी राजनीतिक विरोधियों को खत्म कर रही है. झूठे रास्तों से हमारे पीछे पड़नेवाले होंगे तो आपके प्रति भी दया-माया-क्षमा नहीं दिखाएंगे. महाराष्ट्र से भागने को मजबूर कर देंगे, ऐसी चेतावनी ठाकरे ने दी. फिलहाल दाऊद के नाम पर राजनीति चल रही है परंतु अगर कल दाऊद कहेगा मैं भी बीजेपी में आता हूं तो तुरंत ही शुद्ध हो जाएगा. वह मंत्री की हैसियत से बीजेपी नेताओं के साथ सटकर बैठा तो हैरानी नहीं होनी चाहिए.’

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