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‘टाइगर जिंदा है, लौट कर जरुर आउंगा’… अपने इस कथन को सच साबित करते हुए शिवराज सिंह एक बार फिर बने मुख्यमंत्री

24 मार्च 2020
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‘टाइगर जिंदा है, लौट कर जरुर आउंगा’… अपने इस कथन को सच साबित करते हुए शिवराज सिंह एक बार फिर बने मुख्यमंत्री

पॉलिटॉक्स न्यूज़/ मध्यप्रदेश. 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ते वक्त शिवराज ने कहा था कि, ‘टाइगर जिंदा है, लौट कर जरुर आउंगा’.. अपनी कही हुई बात को सच साबित करते हुए मध्यप्रदेश के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करते हुए प्रदेश की सत्ता की कमान अपने हाथ में ले ली है. 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह ने सोमवार को रात 9 बजे राजभवन में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह शिवराज सिंह के मध्यप्रदेश के 32वें मुख्यमंत्री बनने के साथ ही प्रदेश के … Read more

पॉलिटॉक्स न्यूज़/ मध्यप्रदेश. 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ते वक्त शिवराज ने कहा था कि, ‘टाइगर जिंदा है, लौट कर जरुर आउंगा’.. अपनी कही हुई बात को सच साबित करते हुए मध्यप्रदेश के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करते हुए प्रदेश की सत्ता की कमान अपने हाथ में ले ली है. 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह ने सोमवार को रात 9 बजे राजभवन में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह शिवराज सिंह के मध्यप्रदेश के 32वें मुख्यमंत्री बनने के साथ ही प्रदेश के इतिहास में ये पहली बार हुआ है, जब किसी ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. प्रदेश में शिवराज सिंह के अलावा अब तक अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

5 मार्च 1959 को सीहोर जिले के जैत गांव में एक किसान प्रेम सिंह चौहान के घर जन्में शिवराज सिंह चौहान में नेतृत्व के गुण बचपन में ही दिखने लगा था. जब वे अपने खेतों में मजदूरी करने वाले मजदूरों के लिए अपने पिता प्रेम सिंह से ही भिड़ गए. शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक करियर की शुरूआत संघ के मामूली कार्यकर्ता के तौर पर हुई थी, इमरजेंसी के दौर में जेल जाने से उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत हुई

1975 में छात्र राजनीति से शुरूआत करने वाले शिवराज सिंह चौहान को 1990 में पहली बार बीजेपी के टिकट पर सीहोर की बुधनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला और महज एक साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी लोकसभा सीट विदिशा से शिवराज सिंह को उत्तराधिकारी बनाया. शिवराज सिंह चौहान के अब तक के राजनीतिक करियर की बात की जाए तो, शिवराज सिंह 1977-78 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री बने. 1975-80 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मध्य प्रदेश के संयुक्त मंत्री, 1980-82 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश महासचिव, 1982-83 में परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य, 1984-85 में भारतीय जनता युवा मोर्चा मध्य प्रदेश के संयुक्त सचिव, 1985-88 तक महासचिव तथा 1988-91 तक मध्यप्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे.

शिवराज सिंह चौहान 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक जबकि 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार 10वीं लोकसभा में सांसद बने. इसके बाद 11वीं लोकसभा में 1996 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही पुन: सांसद चुने गये और सांसद के रूप में 1996-97 में नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति, मानव संसाधन विकास विभाग की परामर्शदात्री समिति तथा नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्य रहे. 1998 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार 12वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गये. इसके बाद शिवराज सिंह 1999 में विदिशा से चौथी बार 13वीं लोकसभा के लिये सांसद निर्वाचित हुए. इस दौरान शिवराज 1999-2000 में कृषि समिति के सदस्य तथा 1999-01 में सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य भी रहे.

उनकी जीत का सिलसिला यहीं नहीं थमा, शिवराज सिंह चौहान फिर से लगातार 5वीं बार विदिशा से 14वीं लोक सभा के सदस्य निर्वाचित हुये. वह 2004 में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा की आवास समिति के अध्यक्ष भी रहे. इसके बाद शिवराज सिंह को 2005 में भारतीय जनता पार्टी का मध्यप्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने पहली बार 29 नवम्बर, 2005 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. उन्हें बाबूलाल गौर के स्थान पर सीएम बनाया गया. उसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने 12 दिसम्बर, 2008 को दूसरी और इसी तारीख को यानी 12 दिसम्बर 2013 में तीसरी बार मध्यप्रदेश की सत्ता संभाली.

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2018 के विधानसभा चुनाव बीजेपी के बहुमत से कुछ एक सीटें दूर रहने के बाद मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ते वक्त शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि, ‘टाइगर जिंदा है, लौट कर जरुर आउंगा’.. अपनी कही हुई बात को सच साबित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर सोमवार को मुख्यमंत्री की शपथ ली. इसे शिवराज सिंह चौहान की राजनीतिक कुशलता ही मानी जाएगी कि, जब वे सीएम पद से हटे थे तो केंद्र में जा सकते थे. लेकिन सियासत के माहिर खिलाड़ी शिवराज प्रदेश की सियासी नब्ज को टटोलने में सफल रहे. वे शायद इस बात को समझ चुके थे कि प्रदेश की कमलनाथ सरकार कभी भी गिर सकती है. इसीलिए उन्होंने केंद्र में न जाकर कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदेश में आंदोलन का झंड़ा बुलंद करके रखा, जिसका नतीजा आज सबके सामने है.

कमलनाथ की सरकार के अल्पमत में आने और इस्तीफा देने के बाद शिवराज सिंह चौहान को फिर से मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. 43 साल के लम्बे राजनीतिक करियर में मध्यप्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं वर्तमान में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता और सबसे करीब माने जाने वाले नेताओं में से एक हैं. माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री के तौर पर शिवराज सिंह चौहान नाम सबसे आगे चल रहा है.

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बता दें, मध्‍यप्रदेश में मुख्‍यमंत्री के तौर पर सबसे अधिक अवधि तक मुख्‍यमंत्री का कार्यभार सम्‍भालने वालों में शिवराज सिंह सबसे आगे हैं. इससे पहले उन्होंने बतौर सीएम 13 साल 17 दिन बिताए हैं. उनके पीछे दिग्विजय सिंह हैं जिन्होंने लगातार दो बार के कार्यकाल में 10 साल बतौर मुख्यमंत्री बिताए हैं. शिवराज भारतीय जनता पार्टी के ऐसे चौथे नेता हैं जिन्हें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. इससे पहले जनता पार्टी के तीन नेता एमपी के सीएम रह चुके हैं. लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य भी शिवराज सिंह को पिछले कार्यकाल में मिल चुका है. शिवराज के अलावा कांग्रेस के अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार सीएम रह चुके हैं लेकिन वे अलग अलग समय पर मुख्यमंत्री रहे थे. एक खास रिकॉर्ड भी शिवराज सिंह के नाम पर है. बीजेपी की ओर से शिवराज सिंह चौहान पहले ऐसे सीएम रहे जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. उन्होंने 2008 से 2013 और 2013 से 2018 तक दो बार ये कारनामा दोहराया. अब शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है.

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