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विशेष रिपोर्ट

'वोट चोरी' से लेकर फॉर्म-6 विवाद: राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों झोंकी ताकत?

11 अक्टूबर 2026
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'वोट चोरी' से लेकर फॉर्म-6 विवाद: राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों झोंकी ताकत?
  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवालों ने बढ़ाया सियासी टकराव; कांग्रेस ने नवंबर तक देशव्यापी आंदोलन की बनाई रणनीति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है. कांग्रेस अब ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सड़क से संसद तक विरोध को आगे बढ़ाने की तैयारी में है. 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर निकाले गए विपक्षी मार्च और उसके बाद लगातार हुए प्रदर्शनों ने इस टकराव को और चर्चा में ला दिया है.

लेकिन सवाल यह है कि राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इतनी ताकत क्यों झोंकी है? इसकी वजह केवल एक विवाद नहीं, बल्कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), फॉर्म-6 में कथित बदलाव, चुनाव आयोग के कामकाज पर उठे सवाल और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस की चिंताएं हैं.

1. चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

राहुल गांधी के हमले की एक प्रमुख वजह द इंडियन एक्सप्रेस की वह पड़ताल है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर मतभेद सामने आने की बात कही गई. रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई बार आयोग के फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि चुनाव आयोग के भीतर ही फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर मतभेद हैं, तो उन पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टता क्यों नहीं दी जानी चाहिए?

राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को समर्थन दिया. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय बताया. हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए मतभेद अपने आप में चुनावी धांधली का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं.

2. फॉर्म-6 विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं राहुल गांधी और चुनाव आयोग?

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के अभियान को तेज करने वाला दूसरा प्रमुख मुद्दा फॉर्म-6 से जुड़ा विवाद है. फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है. विवाद उस अतिरिक्त जानकारी और घोषणा को लेकर उठा, जिसे SIR के दौरान आवेदन प्रक्रिया से जोड़ा गया था.

कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बदलावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई और संबंधित निर्णयों की वैधानिकता पर सवाल उठते हैं.

5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किए गए संबंधित संशोधनों को मंजूरी नहीं दी थी. इसके बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा तरीके से बदलाव किए और अपने पद का दुरुपयोग किया. उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की.

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में वैधानिक संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था थी. इसलिए इस विवाद में मूल सवाल यह है कि प्रक्रिया के तहत क्या बदलाव किए गए, उनका कानूनी आधार क्या था और उन्हें किस स्तर पर मंजूरी मिली. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को अभी आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता.

3. इस्तीफे की मांग के पीछे राहुल गांधी की रणनीति!

राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए यह विवाद चुनाव आयोग की जवाबदेही से आगे बढ़कर चुनावी व्यवस्था पर जनता के भरोसे का मुद्दा बन गया है. कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उसके बारे में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए.

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करके कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीतिक जवाबदेही तय करने का दबाव बना रही है. विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बावजूद उनकी चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है.

हालांकि, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता. चुनाव आयोग और भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है. ऐसे में आगे की बहस में दस्तावेज, आयोग का पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे.

4. नवंबर तक देशभर में आंदोलन, कांग्रेस का क्या है प्लान?

कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत विरोध को व्यापक बनाने की योजना तैयार की है. सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा है कि पार्टी नवंबर तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी में है. 
प्रस्तावित कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

10 से 20 अक्टूबर: ब्लॉक स्तर पर साइकिल और मोटरसाइकिल से जनसंपर्क अभियान.

25 अक्टूबर से 25 नवंबर: वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी के साथ ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ चौपाल.

1 नवंबर: दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली.

25 और 26 नवंबर: विभिन्न स्थानों से ‘चलो दिल्ली’ मार्च, जिसके 26 नवंबर को संविधान दिवस पर दिल्ली पहुंचने की योजना है.

इन कार्यक्रमों के माध्यम से कांग्रेस मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय मंच तक ले जाना चाहती है.

ज्ञानेश कुमार पर दबाव या चुनावी व्यवस्था पर बड़ी बहस?

राहुल गांधी द्वारा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन तेज करने के पीछे तीन प्रमुख कारण दिखाई देते हैं - चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट, फॉर्म-6 से जुड़ा विवाद और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस की चिंताएं.

कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा से जोड़ रही है. वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा आरोपों को खारिज कर रहे हैं. ऐसे में इस विवाद का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना जरूरी है.

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या सामने आता है, चुनाव आयोग उठाए गए सवालों का किस तरह जवाब देता है और नवंबर तक चलने वाला कांग्रेस का आंदोलन कितना व्यापक होता है. यही घटनाक्रम तय करेगा कि ‘वोट चोरी’ की बहस आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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