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बंगाल में दीदी की मुश्किलें बढ़ी: पार्टी ऑफिस में 100 से ज्यादा आधार कार्ड मिलने से बवाल

17 मई 2026
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बंगाल में दीदी की मुश्किलें बढ़ी: पार्टी ऑफिस में 100 से ज्यादा आधार कार्ड मिलने से बवाल

सॉल्ट लेक स्थित टीएमसी ऑफिस में भारी संख्या में आधार कार्ड बरामदगी से सियासी बवाल, सवालों के घेरे में पूर्ववर्ती ममता सरकार, पुलिस जांच में जुटी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के बाद सियासी माहौल पूरी तरह बदल चुका है. राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी बीच कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाके से सामने आए आधार कार्ड मामले ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. टीएमसी कार्यालय और उसके आसपास से बड़ी संख्या में आधार कार्ड मिलने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.


जानकारी के मुताबिक, बिधाननगर के सॉल्ट लेक स्थित टीएमसी पार्टी कार्यालय में चुनाव से पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ताला लगा दिया था. आरोप लगाया गया था कि वहां संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं. हाल ही में जब कार्यालय का ताला खोला गया तो अंदर से बड़ी संख्या में आधार कार्ड बरामद हुए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी.


इतना ही नहीं, सॉल्ट लेक के BA-CA खेल मैदान के पास भी कई आधार कार्ड लावारिस हालत में पड़े मिले. सुबह सैर पर निकले स्थानीय लोगों ने सबसे पहले इन कार्ड्स को देखा और पुलिस को सूचना दी. शुरुआती जांच में सामने आया कि इन आधार कार्डों पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों के पते दर्ज हैं. इसके बाद मामला और गंभीर हो गया.


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के आधार कार्ड का इस तरह एक ही इलाके में मिलना सामान्य नहीं माना जा सकता. फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये कार्ड वहां कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था. पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है.


वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग दस्तावेजों से जुड़े काम के लिए पार्टी कार्यालय का पता इस्तेमाल करते थे. कुछ लोगों ने दावा किया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज वहीं जमा किए गए थे, जिसके कारण वे कार्यालय में मौजूद थे.


यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है. विपक्ष इस मुद्दे को मतदाता सूची और पहचान पत्रों से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है.

गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार राज्य में सरकार बनाई. बीजेपी ने 294 में से 207 सीटों पर जीत हासिल कर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के 15 साल के शासन का अंत कर दिया. इसके बाद से राज्य की राजनीति में लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं.

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