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अपने ही बयान पर घिरे चिराग पासवान: अब सरकार छोड़ेंगे या फिर अपना केंद्रीय पद?

30 सितंबर 2026
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अपने ही बयान पर घिरे चिराग पासवान: अब सरकार छोड़ेंगे या फिर अपना केंद्रीय पद?

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की नाराजगी बन रही राजनीतिक बहस का मुद्दा, अपनी ही गठबंधन सरकार में रहते हुए अपराध और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाने के बाद निशाने पर आ गए हैं लोजपा प्रमुख

बिहार की राजनीति में इन दिनों कानून-व्यवस्था का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है. इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राज्य में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के कारण वह इन घटनाओं की जिम्मेदारी से खुद को अलग नहीं कर सकते और ऐसी स्थिति में सरकार के साथ होने पर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है.

चिराग के इस बयान के बाद बिहार में सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया. विपक्ष ने इसे एनडीए सरकार के भीतर असहमति के संकेत के तौर पर पेश किया. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चिराग के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई मंत्री मानता है कि सरकार में गंभीर समस्या है और वह उसे सुधारने में सक्षम नहीं है, तो उसे अपने पद पर बने रहने को लेकर निर्णय लेना चाहिए.

तेजस्वी का सवाल - सिर्फ बयान या जिम्मेदारी भी?

तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान से यह सवाल भी जोड़ा कि सरकार का हिस्सा रहते हुए उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए. उनका तर्क है कि केवल सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताने से कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बदलती. विपक्ष का कहना है कि सत्ता में शामिल नेताओं की जिम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए.

हालांकि, चिराग के बयान को केवल विपक्षी राजनीति के नजरिए से देखना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक चिराग ने इससे पहले भी जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं पर चिंता जताई थी और स्थानीय प्रशासन को अधिक सख्ती बरतने की जरूरत बताई थी.

एनडीए के भीतर भी सामने आया मतभेद

चिराग के बयान पर एनडीए के भीतर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यदि किसी को सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है तो उसे आगे की कार्रवाई करनी चाहिए. मांझी ने साथ ही बिहार में अपराध की घटनाओं पर कार्रवाई होने और सरकार के कामकाज का बचाव किया.

इस प्रतिक्रिया ने विवाद को केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की बहस तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गठबंधन के भीतर अलग-अलग नेताओं के रुख को भी सामने ला दिया है.

बाढ़, राहत और 'डबल इंजन' पर तेजस्वी के सवाल

कानून-व्यवस्था के साथ तेजस्वी यादव ने बाढ़ राहत और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को केंद्र से अपेक्षित मदद नहीं मिली और राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई. इन दावों पर सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन का पक्ष अलग हो सकता है, इसलिए इन्हें विपक्ष के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

इसी राजनीतिक हमले के दौरान तेजस्वी ने एनडीए के 'डबल इंजन' मॉडल पर भी 'ट्रबल इंजन' का तंज कसा. यह शब्दावली तेजस्वी पहले भी बिहार की एनडीए सरकार की आलोचना के दौरान इस्तेमाल कर चुके हैं.

क्या बड़ा फैसला लेने वाले हैं चिराग?

चिराग पासवान के सामने फिलहाल राजनीतिक रूप से दो अलग सवाल खड़े किए जा रहे हैं - क्या वे गठबंधन सरकार में रहते हुए अपनी असहमति को इसी तरह सार्वजनिक रूप से जाहिर करते रहेंगे या फिर कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेंगे? हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि उन्होंने बिहार सरकार या केंद्र में अपने मंत्री पद से हटने का निर्णय लिया है.

इस पूरे विवाद ने बिहार में कानून-व्यवस्था के सवाल को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. एक तरफ चिराग पासवान सरकार के सहयोगी होते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विपक्ष उनके बयान को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है. अब निगाह इस बात पर है कि चिराग अपने रुख को आगे किस तरह स्पष्ट करते हैं और एनडीए नेतृत्व इस सार्वजनिक मतभेद पर क्या प्रतिक्रिया देता है.

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