पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं. पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को सरकारी स्कूलों की बदहाली के मुद्दे पर घेरने के लिए उन्होंने एक वीडियो रीपोस्ट किया, लेकिन बाद में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दावा किया कि यह वीडियो करीब 8 साल पुराना है. इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने हरभजन सिंह को जमकर ट्रोल किया और AAP नेताओं ने भी उन पर निशाना साधा.
हरभजन ने सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो किया रीपोस्ट
दरअसल, 19 अगस्त की शाम हरभजन सिंह ने प्रदीप भंडारी नाम के यूजर की ओर से पोस्ट किए गए एक वीडियो को रीपोस्ट किया. वीडियो में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के जल्ला गांव स्थित सरकारी हाईस्कूल की कथित बदहाल स्थिति दिखाई गई. वीडियो में छात्राओं के टॉयलेट की हालत पर सवाल उठाए गए थे.
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वीडियो में टॉयलेट के खुले हिस्से, पानी और फ्लश जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी दिखाई गई. साथ ही एक छात्रा को यह कहते हुए सुना गया कि पानी कम पियो, क्योंकि स्कूल में टॉयलेट जाने की स्थिति ठीक नहीं है.
हरभजन सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भाई साहब, इतना सच मत बोलो. नहीं तो पेड ट्रोलर्स इसे भी राजस्थान का वीडियो बता देंगे.”

पंजाब के शिक्षा मंत्री ने बताया 2018 का वीडियो
हरभजन के पोस्ट के बाद पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मोर्चा संभाला. उन्होंने दावा किया कि वीडियो 2018 का है और उस समय पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी.
बैंस ने कहा कि मौजूदा समय में जल्ला गांव के इस स्कूल में साफ लेडीज वॉशरूम और सैनिटरी पैड मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पंजाब को बदनाम करने के लिए पुराने वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं.
कांग्रेस सरकार के समय का है वीडियो
अगर शिक्षा मंत्री के दावे को आधार माना जाए तो वीडियो उस दौर का है, जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी. दिलचस्प बात यह है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अब बीजेपी में हैं. ऐसे में हरभजन सिंह के पुराने वीडियो को लेकर किए गए पोस्ट ने राजनीतिक बहस को और दिलचस्प बना दिया है.
राजस्थान के वीडियो को पंजाब का बता चुके हैं भज्जी
यह पहली बार नहीं है जब हरभजन सिंह सोशल मीडिया पर किसी वीडियो की लोकेशन को लेकर सवालों में आए हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने नशे में झूमते दो युवकों का एक वीडियो शेयर करते हुए उसे पंजाब का बताया था. बाद में पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह वीडियो पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान के श्रीगंगानगर का था.
पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को जिम्मेदारी के साथ शेयर करने और भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने की अपील की थी.
अब पुराने सरकारी स्कूल के वीडियो को लेकर हुए विवाद के बाद हरभजन सिंह एक बार फिर विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर हैं. क्रिकेट के मैदान पर गेंदबाजों की गुगली पढ़ने वाले भज्जी इस बार अपनी ही सोशल मीडिया ‘गुगली’ में फंसते नजर आ रहे हैं.













