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फोन टैपिंग को लेकर दिनभर सदन में चला बीजेपी विधायकों का हंगामा तो बाहर खाचरियावास का पलटवार

16 मार्च 2021
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फोन टैपिंग को लेकर दिनभर सदन में चला बीजेपी विधायकों का हंगामा तो बाहर खाचरियावास का पलटवार

Politalks.News/RajasthanAssembly. फोन टैपिंग मामले को लेकर प्रदेश की सियासत में जबरदस्त उबाल आ गया है. गृहमंत्रालय द्वारा एक प्रश्न के जवाब में फोन टैपिंग को लेकर किए गए कबूलनामे के बाद इस मामले में मंगलवार को विधानसभा में भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया. जिसके कारण स्पीकर को विधानसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित भी करना पड़ा. वहीं सदन की कार्यवाही के दौरान भी बीजेपी का हंगामा जारी रहा. इसी बीच स्पीकर जोशी ने प्रस्ताव पारित करते हुए बीजेपी विधायक मदन दिलावर को सात दिन के लिए बर्खास्त कर दिया. यही नहीं दिलावर द्वारा फिर भी भर नहीं जाने पर स्पीकर ने मार्शल को दिलावर को बाहर निकलने के … Read more

Politalks.News/RajasthanAssembly. फोन टैपिंग मामले को लेकर प्रदेश की सियासत में जबरदस्त उबाल आ गया है. गृहमंत्रालय द्वारा एक प्रश्न के जवाब में फोन टैपिंग को लेकर किए गए कबूलनामे के बाद इस मामले में मंगलवार को विधानसभा में भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया. जिसके कारण स्पीकर को विधानसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित भी करना पड़ा. वहीं सदन की कार्यवाही के दौरान भी बीजेपी का हंगामा जारी रहा. इसी बीच स्पीकर जोशी ने प्रस्ताव पारित करते हुए बीजेपी विधायक मदन दिलावर को सात दिन के लिए बर्खास्त कर दिया. यही नहीं दिलावर द्वारा फिर भी भर नहीं जाने पर स्पीकर ने मार्शल को दिलावर को बाहर निकलने के निर्देश दिए, हालांकि बीजेपी के अन्य विधायक मदन दिलावर को घेर कर वैल में ही बैठ गए. इस पूरे मामले में बीजेपी के नेताओं ने मुख्यमंत्री गहलोत के इस्तीफे की मांग की है.

इस्तीफा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को देना चाहिए- खाचरियावास

दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस्तीफा मांगने पर परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सतीश पूनियां खुद पूरी तरह फेल हैं. उनकी पार्टी गुटों में बंटी है. इस्तीफा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को देना चाहिए, जिन्होंने कांग्रेस शासित प्रदेशों में सरकार तोड़ने की कोशिश की, लेकिन राजस्थान में दाल गलने वाली नहीं है. खाचरियावास ने उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ द्वारा लगाए गए आरोपों पर कहा कि भाजपा के पास सदन के अंदर और बाहर कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि जो बात उठाई जा रही है वह 8-9 महीने पुरानी उठाई जा रही है, नई बात बीजेपी के पास कुछ है नहीं है.

यह भी पढ़ें: फोन टैपिंग मामले में BJP नेताओं ने की CM गहलोत के इस्तीफे व मामले की जांच CBI से करवाने की मांग

अपने मंत्री के ऑडियो टेप से बौखलाई है बीजेपी
गहलोत सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राठौड़ के बयान पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि भाजपा के लोग इसलिए बौखलाए हुए हैं क्योंकि उनके एक केंद्रीय मंत्री का ऑडियो टेप सामने आया था. वे सरकार बनाने और गिराने की बात कर रहे थे. अगर आप इतने ही ईमानदार हैं तो केंद्रीय मंत्री को वॉयस सैंपल देना चाहिए था. खाचरियावास ने केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह का नाम लिए बिना कहा कि उनके पास तो सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऑप्शन है, तो आप दुनिया को बताइए कि टेप में आपकी आवाज नहीं है.

69ए और टेलीग्राफ एक्ट का दुरुपयोग कर रही है कांग्रेस: राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़
भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार राजस्थान के लोगों की जासूसी कर रही है. यह देश को मजबूत करने या आतंकवादियों को पकड़ने के लिए नहीं किया गया. कांग्रेस की सरकार ने इसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए किया था. यदि आप फोन टैपिंग करना चाहते हैं, जो संविधान के अनुसार किया जा सकता है, तो इसे राज्य के लाभ के लिए करें, आम लोगों पर नहीं. राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार बार-बार बोल रही है कि 69ए और टेलीग्राफ एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और राजस्थान में बैठी उन्हीं की कांग्रेस सरकार ने इसका दुरुपयोग किया. विधानसभा में सरकार से एक लिखित प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि फोन टैपिंग हुई है.

उधर दूसरी तरफ सदन में अनुदान की मांगों पर बहस के लिए तीसरी बार दोपहर 2:10 पर विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर जोशी ने फोन टैपिंग पर नए तथ्य दिए बिना सदन में चर्चा करवाने से इनकार कर दिया. चर्चा नहीं कराने से नाराज भाजपा विधायकों ने फिर से वेल में नारेबाजी शुरू कर दी. इस तरह हंगामे और नारेबाजी के बीच ही विधानसभा में उच्च शिक्षा और खेल की अनुदान मांगों पर बहस चलती रही.

महेश जोशी ने जो FIR करवाई थी क्या उसका आधार क्या फोन टैपिंग थी?

इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद शून्यकाल शुरू होते ही स्थगन प्रस्ताव खारिज होने से नाराज भाजपा विधायकों ने वेल में पहुंचकर नारेबाजी की. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और विधायक कालीचरण सराफ ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए फोन टैपिंग का मामला उठाना चाहा, लेकिन स्पीकर सीपी जोशी ने इसकी मंजूरी नहींं दी. इस पर नाराज भाजपा विधायकों ने सदन में वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी. शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सरकारी मुख्य सचेतक ने एक FIR करवाई थी उसका आधार फोन टैपिंग ही था, इससे यह तय हो गया कि सरकार की किसी एजेंसी ने फोन टैपिंग करवाई. कटारिया ने कहा सरकार को सदन में यह बताना चाहिए कि किस अधिकार से सरकार ने किन किन लोगों के फोन टैप करवाए. कटारिया ने कहा कि हम यही जानना चाहते हैं कि जिस रिफरेंस में मुकदमा दर्ज हुआ. उसमें अनुमति लेकर फोन टैप हुआ या नहीं? गृह विभाग की अनुमति लेकर अभियुक्तों के लिए फोन टैप करवाते हैं. हम जानना चाहते हैं कि मुख्य सचेतक महेश जोशी ने जो FIR करवाई थी क्या उसका आधार क्या फोन टैपिंग थी?

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चर्चा किए बिना कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने देंगे- भाजपा, स्पीकर ने कहा- नए तथ्य दीजिए
1:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ने कहा- फोन टैपिंग पर आपके पास स्थगन प्रस्ताव के अलावा कोई नए तथ्य हैं तो दीजिए. आज ही चर्चा करवाकर सदन में सरकार का जवाब दिलवा दिया जाएगा, लेकिन स्थगन प्रस्ताव खारिज करने के अध्यक्ष के फैसले का रिव्यू नहीं होगा. इस पर नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने कहा कि हमारी मजबूरी है कि हम इस पर आज चर्चा किए बिना कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने देंगे, सरकार का जवाब चाहे कल आ जाए.

आपको मेरे फैसले पर विश्वास नहीं तो मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं- जोशी
इसके बाद स्पीकर सीपी जोशी ने कहा- राजेंद्र राठौड़ का स्थगन है जिसमें लिखा है, ‘सांसदों, विधायकों और केंद्रीय मंत्रियों के बिना अधिकृत प्राधिकारियों के फोन टैप करवाए गए. आपने इसके सबूत नहीं दिए. आप सबूत दीजिए और नाम बताइए. आपके पास सबूत या रिकॉर्ड हैं तो दीजिए, इसके बिना सदन में चर्चा की अनुमति नहीं दे सकता.’ वहीं स्पीकर के स्थगन खारिज होने के बाद भाजपा विधायकों ने वेल में आकर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी. नाराज स्पीकर ने कहा, ‘मैंने सोच समझकर व्यवस्था दी है. मैं अध्यक्ष की व्यवस्था पर आपको सवाल उठाने की अनुमति नहीं दे सकता. आपको अध्यक्ष के फैसले पर विश्वास नहीं हैं तो आप मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं.’

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