महाराष्ट्र: ‘बीजेपी खरीद रही 50 करोड़ में MLA’- कांग्रेस, राष्ट्रपति शासन के अलावा भी हैं विकल्प

कांग्रेस अपने विधायकों को भेजेगी जयपुर, शिवसेना ने किया होटल में नजरबंद, यूपी में 1998 में विधानसभा में हुई वोटिंग की तर्ज पर महाराष्ट्र में बन सकता मुख्यमंत्री

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President rule in Maharashtra
President rule in Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र के राजनीतिक रण अब लड़ाई और चढाई आक्रामक हो गई है. किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण किसी ने भी सरकार बनाने का दावा अभी तक पेश नहीं किया है. बीजेपी जो कि 105 विधायकों के साथ प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी है को बहुमत के जादुई आकंड़े 146 को पाने के लिए 41 विधायकों की आवश्यकता है. ऐसे में बीजेपी पर विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप लगने शुरू हो गए हैं. वहीं राज्य में अब धूमिल होती जा रही सरकार बनाने की संभावनाओं के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ओर सबकी निगाहें गढ़ गई हैं. कल तक अगर कोई भी पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करती है तो क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं, अब देश में हर तरफ इस पर चर्चाओं का दौर जारी है. (President rule in Maharashtra)

बीजेपी द्वारा विधायकों की खरीद फरोख्त की आशंका के चलते सभी पार्टियां अब अपने-अपने विधायकों को सम्भालने में जुट गई हैं. शिवसेना ने अपने विधायकों को मुंबई के रंगशारदा होटल में नजरबंद कर दिया है. वहीं कांग्रेस ने भी बीजेपी पर अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाकर उन्हें राजस्थान की राजधानी जयपुर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह कांग्रेस के साथ-साथ शिवसेना के विधायकों को भी खरीद रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने एक-एक विधायक को 50-50 करोड़ रुपए देने का लालच दिया है.

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वहीं, प्रदेश में धूमिल होती जा रही सरकार बनने की सभी संभावनाओं के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. अब तक लगभग सभी मुख्य पार्टियों ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर ली है, लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है. ऐसे में संविधान के जानकारों की मानें तो कल तक अगर किसी भी पार्टी ने सरकार नहीं बनाई तो राज्यपाल के पास तीन विकल्प होंगे. (President rule in Maharashtra)

पहला– राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अगला मुख्यमंत्री चुने जाने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखें और नीतिगत फैसले छोड़कर बाकी प्रशासनिक फैसले लेने के लिए कहें.

दूसरा- राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाएं. सदन में नेता सदन चुनने का निर्देश दें. ऐसा साल 1998 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. तब कल्याण सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल के बीच वोटिंग के जरिए सदन का नेता और मुख्यमंत्री का चुनाव हुआ था और उसमें कल्याण सिंह विजयी रहे थे.

तीसरा- राज्यपाल किसी भी दल के सरकार बनाने में असमर्थ रहने पर केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजें और उसके बाद विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करें. फिलहाल सरकार बनाने के लिए 9 नवंबर दोपहर 12:00 बजे तक का वक्त है. अगर तब तक किसी ने भी सरकार बनाने का दावा नहीं किया तो राज्यपाल इन तीन विकल्प में से एक विकल्प को चुन सकते हैं. (President rule in Maharashtra)

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वर्तमान में जिस तरह के राजनीतिक हालात महाराष्ट्र में बने हुए हैं, वहां डायलॉग खुलने की संभावनाएं कम होती जा रही हैं. शिवसेना अपने रुख पर और बीजेपी अपने रुख पर कायम है. शिवसेना ने अपने विधायकों को मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में रखा हुआ है ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट की आशंकाओं को नकारा जा सके.

वहीं, कांग्रेस भी अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाकर उन्हें राजस्थान की राजधानी जयपुर ले जाने की तैयारी कर रही है. इस बीच बीजेपी और शिवसेना के बीच बैक डोर बातचीत चल रही है, लेकिन उसका कोई भी हल निकलता नजर नहीं आ रहा है.

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